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14 Jun 2010
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किताबों की दुनिया - 31

दोपहर का समय था जब डोर बेल बजी. भयंकर गर्मी में कौन चला आया सोचते जब दरवाज़ा खोला तो सामने कोरियर वाले को खड़ा पाया. जब वो बोला के साब आपके लिए कोरियर सीहोर से आया है यहाँ साइन करिए तब उसके हाथ में मैंने एक मोटा सा बण्डल देखा. ख़ुशी के मारे चीख सी निकल
 
नीरज गोस्वामी
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मुश्किलों का गणित ये कैसा है

हाल बेताब हों रुलाने कोतू मचल कहकहे लगाने को मुश्किलों का गणित ये कैसा हैबढ़ गयीं जब चला घटाने को दौड़ हम हारते नहीं लेकिनथम गये थे तुझे उठाने को सांस लेना मुहाल कर देगा सर चढ़ाया अगर ज़माने को बिजलियों का है खौफ़ गर तारी भूल जा आशियाँ बनाने को हमसे दम
 
नीरज गोस्वामी
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किताबों की दुनिया - 30

जावेद अख्तर साहब ने फिल्म सरहद के लिए एक गीत लिखा था "पंछी नदियाँ पवन के झोंके कोई सरहद न इन्हें रोके..." पंछी नदियाँ पवन के झोंकों के अलावा और भी बहुत कुछ है जिन्हें सरहदें नहीं रोक पातीं. कुछ इंसान और उनका हुनर उन्हें सरहद की सीमाओं के पार ले जाता है.
 
नीरज गोस्वामी
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मैंने तेरा नाम लिखा है

दोस्तों आज मैं आपको अपने आदरणीय गुरुदेव श्री प्राण शर्मा साहब की वो कविता पढवाता हूँ जो मुझे बेहद पसंद है और जिसने बहुत प्रशंशा अर्जित की है.उम्मीद करता हूँ के आप सब भी इसे पढ़ कर मेरी तरह ही आनंदित होंगे. कुछ माह पूर्व ये कविता आदरणीय महावीर जी के ब्लॉग
 
नीरज गोस्वामी
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किताबों की दुनिया - 29

हम से पूछो कि ग़ज़ल क्या है ग़ज़ल का फ़न क्याचन्द लफ़्ज़ों में कोई आग छुपा दी जाएइस बार किताबों की दुनिया में किताब का जिक्र करने इसे पहले एक गीत सुनते हैं:--मुझे उम्मीद है आपको ये गीत बहुत पसंद आया होगा क्यूँ की इस गीत में संगीत के साथ साथ लाजवाब शायरी
 
नीरज गोस्वामी
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मैं लाकर गुल बिछाता हूं

तुझे दिल याद करता है तो नग्‍़मे गुनगुनाता हूँजुदाई के पलों की मुश्किलों को यूं घटाता हूंजिसे सब ढूंढ़ते फिरते हैं मंदिर और मस्जिद मेंहवाओं में उसे हरदम मैं अपने साथ पाता हूंफसादों से न सुलझे हैं, न सुलझेगें कभी मसलेहटा तू राह के कांटे, मैं लाकर गुल
 
नीरज गोस्वामी
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किताबों की दुनिया - 28

" गागर में सागर " आपने ये जुमला अक्सर सुना होगा लेकिन मैं नहीं जानता के आप में से कितने ऐसे हैं जिन्होंने इसे महसूस किया है. गागर में सागर वाले करिश्मे बहुत कम हुआ करते हैं लेकिन ये करिश्मा ,कम से कम मेरे लिए तो, किया है वाग्देवी प्रकाशन वालों ने.
 
नीरज गोस्वामी
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हर मौसम घूमने का मौसम है

(ये पोस्ट मेरे हम नाम भाई नीरज जाट जी की घुमक्कड़ी को समर्पित है)कहीं पढ़ा था "घूमने का कोई मौसम नहीं होता, जब दिल करे तब घूमिये"...याने हर मौसम घूमने का मौसम है क्यूँ की हर मौसम का अपना आनंद है. मन में घूमने की ललक हो तो जेठ की धूप भी चांदनी सी लगती है.
 
नीरज गोस्वामी
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यूँ बस्तों का बोझ बढ़ाना, ठीक नहीं

सब को अपना हाल सुनाना, ठीक नहीं औरों के यूँ दर्द जगाना, ठीक नहींहम आँखों की भाषा भी पढ़ लेते हैं हमको बच्चों सा फुसलाना, ठीक नहींये चिंगारी दावानल बन सकती हैगर्म हवा में इसे उडाना, ठीक नहीं बातों से जो मसले हल हो सकते हैंउनके कारण बम बरसाना, ठीक
 
नीरज गोस्वामी
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किताबों की दुनिया :27 / 2

अपनी पिछली पोस्ट में मैंने आपसे वादा किया था के मैं आपको अल्वी साहब की शीन काफ निजाम और नन्द किशोर जी द्वारा सम्पादित पुस्तक " उजाड़ दरख्तों पे आशियाने" में प्रकाशित लगभग चालीस नज्मों में से कुछ बानगी के तौर पर पढ्वाऊंगा...आप शायद भूल गए हों लेकिन मुझे
 
नीरज गोस्वामी
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किताबों की दुनिया: 27

अगर तुझको फुर्सत नहीं तो ना आ मगर एक अच्छा नबी भेज देक़यामत के दिन खो ना जाएँ कहीं ये अच्छी घडी है, अभी भेज दे. जिस शायर ने जब ये शेर कहा उसके सत्रह साल बाद अचानक इस शेर को अल्लाह के खिलाफ लिखा माना गया और उस शायर के खिलाफ फ़तवा जारी करते हुए उसे काफ़िर
 
नीरज गोस्वामी
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लीक पर चलना, कहाँ दुश्वार है

खौफ का जो कर रहा व्यापार है आदमी वो मानिये बीमार है चार दिन की ज़िन्दगी में क्यूँ बता तल्खियाँ हैं, दुश्मनी, तकरार है जिस्म से चल कर रुके, जो जिस्म पर उस सफ़र का नाम ही, अब प्यार है दुश्मनों से बच गए, तो क्या हुआ दोस्तों के हाथ में तलवार है लुत्फ़ है जब
 
नीरज गोस्वामी
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किताबों की दुनिया -26

मैं कुमार विनोद जी को व्यक्तिगत तौर पर नहीं जानता,लेकिन मेरा सौभाग्य देखिये नौ फरवरी को कुरुक्षेत्र से उनका अचानक मेल आया, जिसमें लिखा था कि उन्होंने मेरा ब्लॉग देखा है और उन्हें उस पर पोस्ट की गयी ग़ज़लें और पुस्तक समीक्षाएं बहुत पसंद आयीं हैं .साथ ही
 
नीरज गोस्वामी
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लगा के ठुमके तेरी गली में

"फागुन" याने हंसी ख़ुशी और उल्ल्हास का महीना...फाग धमाल का महीना...आज फागुन एक बरस के लिए हमसे विदा ले रहा है और ऐसे महीने की विदाई हमें हँसते हुए करनी चाहिए . ये ही सोच कर मैंने अपनी हज़ल, जो गुरुदेव पंकज सुबीर जी के ब्लॉग पर हुए तरही मुशायरे में शिरकत
 
नीरज गोस्वामी
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किताबों की दुनिया - 25

मित्रो आज जिस किताब का जिक्र करने का मन है उसे चुनने के पीछे दो कारण हैं. पहला तो ये के अब तक की पुस्तक चर्चा में हमने सिर्फ और सिर्फ शायरों की किताबों की ही बात की है किसी शायरा की किताब की चर्चा नहीं की और आज महिला दिवस के शुभ अवसर पर किसी शायरा की
 
नीरज गोस्वामी
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खुशियों की हों पिचकारियॉं

सभी पाठकों को होली की ढेरों शुभ कामनाएं आपको शायद याद हो सन 1973 में अमिताभ, राजेश खन्ना और रेखा की एक मशहूर फिल्म आई थी "नमक हराम". फिल्म तो इतनी नहीं चली जितना उसका ये गीत "दिए जलते हैं फूल खिलते हैं बड़ी मुश्किल से मगर दुनिया में दोस्त मिलते हैं..."
 
नीरज गोस्वामी
Mar 01 2010 09:05 AM
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भलाई किये जा इबादत समझ कर

गुरुदेव पंकज सुबीर जी के ब्लॉग पर तरही मुशायरा हुआ था जो बहुत चर्चित और लोकप्रिय रहा. उसी तरही में मैंने भी अपनी एक ग़ज़ल भेजी थी जिसे वहां पाठकों ने पढ़ कर अपना प्यार दिया. उसी ग़ज़ल को आज अपने ब्लॉग पाठकों के लिए फिर से पोस्ट कर रहा हूँ.सितम जब ज़माने
 
नीरज गोस्वामी
Feb 22 2010 09:05 AM
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किताबों की दुनिया - 24

जैसे उजड़े हुए मंदिर में हवा का झोंका ऐसे आ जाएँ कभी लौट के आने वाले मुझसे क्या पूछते हो मैंने उन्हें कब देखा पेड़ की आड़ में थे तीर चलाने वालेढूंढ कर लाओ कोई हो तो सुलाने वाला सैंकड़ों लोग हैं दुनिया में जगाने वाले दुनिया वालों ने फकत उसको हवा दी थी
 
नीरज गोस्वामी
Feb 15 2010 09:05 AM
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गुलाबों से मुहब्बत है जिसे

मजे की बात है जिनका, हमेशा ध्यान रखते हैंवोही अपने निशाने पर, हमारी जान रखते हैंमुहब्बत, फूल, खुशियाँ,पोटली भर के दुआओं की सदा हम साथ में अपने, यही सामान रखते हैंयही सच्ची वजह है, मेरे तन मन के महकने कीजलाये दिल में तेरी याद का, लोबान रखते हैंपथिक पाते
 
नीरज गोस्वामी
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किताबों की दुनिया - 23

कोई सत्तर के दशक के आरम्भ की बात होगी. मैं तब कालेज में पढता था. जयपुर की बड़ी चौपड़ पर स्थित मानक चौंक स्कूल के भव्य प्रागण में मुशायरा चल रहा था जिसे कुंवर महेंद्र सिंह बेदी संचालित कर रहे थे. उस समय स्टेज पर बशीर बद्र, शमीम जयपुरी, शमशी मीनाई, शकील
 
नीरज गोस्वामी
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फूल पर तितलियां

दर्द दिल में मगर लब पे मुस्कान हैआशिकों की यही आन है बान हैलाख कोशिश करो आके जाती नहींयाद इक बिन बुलाई सी महमान हैखिलखिलाता है जो आज के दौर मेंइक अजूबे से क्या कम वो इंसान हैज़र ज़मीं सल्तनत से ही होता नहींजो दे भूखे को रोटी, वो सुलतान हैमीर, तुलसी,
 
नीरज गोस्वामी
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किताबों की दुनिया - 22

दोस्तों पिछली बार किताबों की दुनिया में आपकी मुलाकात नासिर काज़मी साहब की किताब से करवाई थी, उस किताब की खुमारी उतारने नहीं बल्कि बढाने के लिए मैं आपके सामने ला रहा हूँ एक ऐसी किताब जिसके अशआर पढ़ कर आपका नशा दुगना हो जायेगा...क्यूंकि "नशा बढ़ता है
 
नीरज गोस्वामी
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आप गिनाते क्यूँ हो

तुम नहीं साथ तो फिर याद भी आते क्यूँ हो इस कमी का मुझे एहसास दिलाते क्यूँ हो डर जमाने का नहीं आपके दिल में तो फिर रेत पर लिख के मेरा नाम मिटाते क्यूँ हो दिल में चाहत है तो काँटों पे चला आयेगा अपनी पलकों को गलीचे सा बिछाते क्यूँ हो आपके हम पे हैं उपकार
 
नीरज गोस्वामी
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किताबों की दुनिया - 21

नये साल में सोचा किसी ऐसी किताब की चर्चा की जाये जिस की ग़ज़लें किताब के पन्नो से निकल कर लोगों के दिलों में बस गयीं हैं. बहुत कम शायर हुए हैं जिनकी ग़ज़लों को किसी ने गाया है. ग़ालिब, साहिर. मजरूह, जावेद अख्तर और गुलज़ार जैसे शायर बहुत कम हुए हैं...इनके
 
नीरज गोस्वामी
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जिसकी शाखें परिंदों के गाने सुनें

सुधि पाठको प्रस्तुत है इस वर्ष की अंतिम ग़ज़ल " नव वर्ष की ढेरों शुभकामनाओं सहित" उलझनें उलझनें उलझनें उलझनें कुछ वो चुनती हमें,कुछ को हम खुद चुनें जो नचाती हमें थीं भुला सारे ग़म याद करते ही तुझको बजी वो धुनें पूछिये मत ख़ुशी आप उस पेड़ की जिसकी शाख
 
नीरज गोस्वामी
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किताबों की दुनिया - 20

शायरी करना तो अभी का शौक है लेकिन शायरी पढना बहुत पुराना.बरसों से अच्छे शायरों को पढता रहा हूँ और ये काम अभी भी बदस्तूर जारी है. इसी शौक की वजह से मैं आपका तारुफ्फ़ नयी नयी किताबों से करवाने का प्रयास करता हूँ. किताबों के आलावा नेट पर भी जहाँ कहीं सम
 
नीरज गोस्वामी
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नाचिये, थाप जब उठे दिल से

चाह तुझ को नहीं है पाने की खासियत ये तेरे दिवाने की गैर का साथ गैर के किस्से ये तो हद हो गई सताने की साथ फूलों के वो रहा जिसने ठान ली खार से निभाने की टूट बिखरेगा दिल का हर रिश्‍ता छोडि़ये जिद ये आजमाने की सारी खुशियों को लील जाती है होड़ सबसे अधिक क
 
नीरज गोस्वामी
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मैं तस्वीर उतारता हूँ...

फोटोग्राफी मेरा शौक है लेकिन इस विधा में मैं पारंगत नहीं हूँ. मेरे ख्याल से फोटोग्राफी में जो सबसे अहम् बात है वो है आपकी आँख. आप किस वक्त क्या, कैसे देखते हैं, ये बहुत महत्वपूर्ण है . उसके बाद कैमरे की गुणवत्ता और आपके हुनर का नंबर आता है. दरअसल ये
 
नीरज गोस्वामी
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बिस्तर ज़मीं को,बांह को तकिया बना लिया

यूं हसरतों का दायरा हद से बढ़ा लिया खुशियों को जिन्‍दगी से ही अपनी घटा लिया खुद पर भरोसा था तभी, उसने ये देखिये दीपक हवा के ठीक मुका‍बिल जला लिया हम से फकीरों को कहीं जब नींद आ गयी बिस्तर ज़मीं को,बांह को तकिया बना लिया शिद्दत से है तलाश मुझे ऐसे शख्
 
नीरज गोस्वामी
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किताबों की दुनिया - 19

ऐ खुदा रेत के सेहरा को समन्दर कर दे या छलकती हुई आँखों को भी पत्थर कर दे तुझको देखा नहीं मेहसूस किया है मैंने आ किसी दिन मेरे एहसास को पैकर* कर दे पैकर* = आकृति और कुछ भी मुझे दरकार नहीं है लेकिन मेरी चादर मेरे पैरों के बराबर कर दे बरसों से जब भी जगज
 
नीरज गोस्वामी
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छोटी सी मुस्कान भिडू

मुंबई के लोग जितने दिलचस्प हैं उतनी ही दिलचस्प है उनकी भाषा. ये भाषा जो न मराठी है और ना ही हिंदी ये अजीब सी भाषा है, जिसका भारतीय संविधान में दी गयी भाषा सूची में कोई जिक्र नहीं है लेकिन इसे बोलने सुनने में जो आनंद मिलता है उसे बयां नहीं किया जा सकत
 
नीरज गोस्वामी
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रंगोली सजाओ...रे

स्टेलनेस मेरा ही यू.एस.पी. हो, ऐसा नहीं है। आप कई ब्लॉगों पर चक्कर मार आईये। बहुत जगह आपको स्टेलनेस (स्टेनलेस से कन्फ्यूज न करें) स्टील मिलेगा| लोग गिने चुने लेक्सिकॉन/चित्र/विचार को ठेल^ठेल (ठेल घात ठेल) कर आउटस्टेण्डिंग लिखे जा रहे हैं। असल में हम
 
नीरज गोस्वामी
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दीप जलते रहें झिलमिलाते रहें

दीपावली के पावन पर्व पर इस बार गुरुदेव पंकज सुबीर जी ने धमाकेदार तरही मुशायरे का आयोजन किया. जिसमें देश विदेश के जाने माने माँ सरस्वती के उपासकों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया. इस मुशायरे में शिरकत करना ही अपने आपमें कम सम्मान की बात नहीं थी. आप सुधि पाठ
 
नीरज गोस्वामी
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किताबों की दुनिया - 18

आज जिस किताब का जिक्र कर रहा हूँ दोस्तों वो मेरे पास बहुत अरसे से है. ना जाने कितनी बार इसे पढ़ा है इस से सीखा है. मुझे इस किताब के बारे में लिखने में शुरू से ही एक झिझक रही है. मुझे यकीन है की मैं इस किताब के बारे में जो भी कहूँगा वो अधूरा ही रह जाय
 
नीरज गोस्वामी
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फूलों वाले पौधे बो

क्यों ,कैसे ये मत सोचो होता है जो होने दो प्यार मिलेगा बदले में पहले प्यार किसी को दो चैन चलो पाया कुछ तो जब भी पूजा पत्थर को किसको देता है सब कुछ नीली छतरी वाला वो जो देखा, सच बोल दिया तुम क्या नन्हे मुन्ने हो काँटों वाली राहों में फूलों वाले पौधे ब
 
नीरज गोस्वामी
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दिये जला देना मेरे मन

दिवाली से पूर्व इस पोस्ट पर सबको अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए मैं अपनी एक मनपसंद कविता जिसे श्री राज जैन जी ने लिखा है को आप सब तक पहुँचाना चाहता हूँ. उम्मीद है सुधि पाठक इसे पसंद करेंगे. दिये जला देना मेरे मन एक तमन्ना की तुलसी पर इक रस्मों की रंगोली
 
नीरज गोस्वामी
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किताबों की दुनिया - 17

मन में उतर रहे हैं किसी संत के चरण ग़ज़लें उतर रहीं हैं भजन के लिबास में आप लोग अकसर मुझे कहते हैं की मैं शायरी की किताबों के बारे में लिख कर बहुत बड़ा काम कर रहा हूँ और मैं हर बार आपकी इस बात का खंडन करता हूँ. बहुत बड़ा काम तो उनका है जो इस दौर में
 
नीरज गोस्वामी
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बचपन की वो शैतानियां

मेरी ये पोस्ट समर्पित है हम सब के लाडले जाबांज मेजर गौतम राजरिश और उनके साथियों की हिम्मत, बहादुरी और देश प्रेम के जज्बे को. काश हर माँ का बेटा उनके जैसा हो . जिंदगी की राह में हो जायेंगी आसानियां मुस्‍कुराएं याद कर बचपन की वो शैतानियां होशियारी भी ज
 
नीरज गोस्वामी
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बादलों से दोस्ती अच्छी नहीं

गुनगुनाती हुई गिरती हैं फलक से बूँदेंकोई बदली तेरी पाजेब से टकराई हैबारिश अब सायोनारा कहने के मूड में आ चुकी है. अब देखिये ना कहीं तो वो सिर्फ दूर से हाथ हिला जा रही है और कहीं ससुराल जाती बेटियों सी फूट फूट कर आँखों से पानी बरसाती हुई. जाती बरसात ने
 
नीरज गोस्वामी
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किताबों की दुनिया - 16

"दहलीज़ पे रख दी हैं किसी शख्स ने आँखेंरोशन कभी इतना तो दिया हो नहीं सकता" भटकना मेरी आदत नहीं है, ये जानते हुए भी की इंसान को अभी तक जो भी खजाने मिले हैं वो उसके भटकने के कारण ही मिले हैं. दुनिया की सारी विलक्षण खोजें इंसान के भटकने का ही परिणाम हैं.
 
नीरज गोस्वामी