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हँसते रहो

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28 May 2010
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पं.डी.के.शर्मा "वत्स" उर्फ ‘बनवारी लाल’ -तुमको मिर्ची लगी तो मैं क्या करूँ?

  आदरणीय पंडित जी,प्रणाम अभी कुछ घंटे पहले ही फोन पर आपसे सोहाद्रपूर्ण तरीके से बतियाने के बाद आपकी ये ताज़ी पोस्ट   बुद्धिमानों का सम्मेलन और बनवारी लाल जी की मन की पीडा   अनायास ही पढ़ने को मिली …जान कर अच्छा लगा कि आप तो पूरे
 
राजीव तनेजा
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"हट ज्या…सुसरी…पाच्छे ने"

हट ज्या…सुसरी…पाच्छे  ने” ***राजीव तनेजा***                       “बधाई हो”…. “किस बात की?”…
 
राजीव् तनेजा
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"टीं…टीं…बीप…बीप"

टीं…टीं…बीप…बीप” ***राजीव तनेजा*** “एक लम्बे..तन्दुरस्त और गोरे-चिट्टे जवाँ मर्द (दिल्ली निवासी) पैंतालिस वर्षीय व्यवसायी को  आवश्यकता है एक खुले विचारों वाली सुन्दर…सुघड़ एवं सुशील कन्या की…जो उसके संग म
 
राजीव् तनेजा
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"खबरों में से खबर सुनो"

राजीव तनेजा***        “खुश खबरी…खुश खबरी…खुश खबरी”… पूरे पानीपत शहर के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी नामी और बिगड़ैल रईसजादे ने अपने अनुभवों को..अपनी भावनाओं को…अपनी कामयाबी के
 
राजीव् तनेजा
Dec 29 2009 11:46 AM
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साहित्य शिल्पी का प्रथम वार्षिकोत्सव एवं नुक्कड़ की भागीदारी

साहित्य शिल्पी ने अंतर्जाल पर एक वर्ष पूरा कर लिया है।इस संदर्भ में साहित्य शिल्पी अपने प्रथम वार्षिकोत्सव में आमंत्रित करते हुए हर्षित है।इसमें नुक्कड़ भी सक्रिय रूप से भाग ले रहा है पूरा समाचार जानने के लिए बारी-बारी से चित्रों पर चटखा लगाएँ
 
राजीव् तनेजा
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“निकाल इसी बात पै सौ का नोट”

राजीव तनेजा*** “रुक…अबे रुक"…. "ज्जी…मैँ?"…. "ओर तेरा फूफ्फा?".… "जी…बोलिए"… "बेट्टे!….बोलूँगा तो मैँ जरूर और सुणेगा बी तू जरूर"अपनी मूँछों को ताव दे बैरियर पे खड़ा सिपाही ब
 
राजीव् तनेजा
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"बम चिकी बम…बम….बम"

राजीव तनेजा*** "बोल बम चिकी बम चिकी बम…बम….बम" "बम….बम…बम"…. "बम….बम…बम"(सम्वेत स्वर)… "परम पूज्य स्वामी श्री श्री 108 सुकर्मानन्द महराज की जय"…. "जय"…
 
राजीव् तनेजा
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कसम कनखजूरे के तिरछे कान की

राजीव तनेजा*** “सुनो”… “ये ‘ट्यूब’ कितने की आती है?”…. “बूत्था(चेहरा) चमकाना है कि दाँत मंजवाने हैँ?”… “क्यों?…मेरे चौखटे को क्या हुआ है?”… “अच्छा-भला तो
 
राजीव् तनेजा
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एक और कहानी चोर

चोर लीजिए आप सबकी इनायत है एक और कहानी चोर।इन जनाब ने  मेरी कहानी ‘व्यथा-बिचौलियों की’ को चोरी किया है।खास बात ये कि ये चोर कोई छोटे-मोटे चोर नहीं बल्कि राजेश  नाम के एक बड़े चॉर्टेड एकाउंटैंट हैँ।इन्हें बड़ा इसलिए भी कहना पड़ रहा
 
राजीव् तनेजा
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मेरी आठवीं कहानी नवभारत टाईम्स पर

पहली कहानी- बताएँ तुझे कैसे होता है बच्चा दूसरी कहानी- बस बन गया डाक्टर तीसरी कहानी- नामर्द हूँ,पर मर्द से बेहतर हूँ चौथी कहानी- बाबा की माया पाँचवी कहानी- व्यथा-झोलाछाप डॉक्टर की छटी कहानी-काश एक बार फिर मिल जाए सैंटा सातवीं कहानी-थमा दो गर मुझे सत्
 
राजीव् तनेजा
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मेरा खुला पत्र योगेश समदर्शी के नाम

समदर्शी जी नमस्कार…. ये खुला पत्र मैँ आपको इसलिए नहीं लिख रहा हूँ कि मेरे पास लिफाफा खरीदने के लिए खुले पैसे नहीं हैँ। एक्चुअली क्या है कि मेरे पास लिफाफे को बन्द करने लायक ज़रूरी गोंद नहीं थी तो मैँने सोचा कि…….अब आप कहेंगे कि गोंद
 
राजीव् तनेजा
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आसमान से गिरा

राजीव तनेजा*** ‘हाँ आ जाओ बाहर… कोई डर नहीं है अब…चले गए हैं सब के सब।’ मैं कंपकंपाता हुआ आहिस्ता से जीने के नीचे बनी पुरानी कोठरी से बाहर निकला। एक तो कम जगह ऊपर से सीलन और बदबू भरा माहौल, रही-सही कसर इन कमबख़्तमारे चूहों ने
 
राजीव् तनेजा