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shuruwat : जिंदगी सिखाती है कुछ

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10 Jun 2010
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रूठने से बढती है सुंदरता

कोई भी क्रीम लगाने से आदमी गोरा नहीं होता सुंदर बनना है तो औरतों को रुठना आना चाहिए क्‍योंकि अपन के धर्मेंद्रजी कह कर गए हैं कोई हसीना जब रूठ जाती है तो और भी हसीन हो जाती है। इसलिए अब क्रीम की कंपनियां अपनी मार्केटिंग में इस फार्मूले का इस्‍तेमाल कर
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वाह रे आपदा प्रबंधन

अपना देश सचमुच भगवान भरोसे है और अपनका शहर तो सौ फीसदी भगवानजी की शरण में। अब ये भगवानजी कौनसे वाले हैं अपन को आइडिया नहीं है पर यहां कोई लॉ एंड ऑर्डर है न कोई आपदा प्रबंधन का सिस्टम, जिसकी जो मर्जी करे। जो होना है वह अपने आप ही होगा। और मामले ऐसे की
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सब कुछ होगा, बस न बचेगा तो कोई भारतीय

हिंदी बडी है या राज ठाकरे महाराष्‍ट में राज ठाकरे लोकप्रियता बटोरने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। अभी चुनाव हुए चार दिन हुए कि उन्‍होंने मराठी को लेकर फिर राजनीति शुरू कर दी। उनकी पार्टी एमएनएस के विधायकों ने सदन में ही दादागिरी शुरू कर दी। वहां
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एक स्वाभिमानी की कहानी

ऑफिस के लिए निकला ही था कि किसी ने हाथ देकर लिट मांग ली। मेरे बैठाते ही भाई ने अपनी कहानी सुनाना शुरू कर दिया। कहने लगा कोटा से आ रहा हूं दौसा जाना है, जहां तक जाओ छोड़ देना। मैंने कहा, कोटा से पैदल। बोला कि मजदूरी को लेकर ठेकेदार से लड़ाई हो गई, इसलि
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टाइमपास है व्‍हाट़स योर राशि

कल कई महीनों बाद फर्स्‍ट डे फर्स्‍ट शो देखी व्‍हाटस योर राशिफिल्‍म की कहानी कुछ यूं है कि एक गुजराती एनआरआई लडका एमबीए करने के बाद शादी करने भारत आता है।भाई पर कर्ज है, घर की माली हालत खराब है ठीक सरकारों की तरह। शादी करने पर नाना की संपत्ति में से हीरो
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ब्‍लॉग न लिखने पर मेरी सफाई

ब्‍लॉग पर लिखे आजकल कई दिन बीत जाते हैं। शादी के बाद से (1 जुलाई) ब्‍लॉग पर सक्रियता कम हो गई। इस बीच दिलीप नागपाल ने ब्‍लॉग बडी या बीवी लिखकर मुझे मजबूर कर दिया कि मैं कोई प्रतिक्रिया दूं।कारण कई हैं।पहला तो ये कि मकान चेंज करने के बाद से इनदिनों घर पर
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आज मैंने किराए पर दो रुपए ज्यादा दिए

आज ही घर से लौटा हूं। घर(राजगढ़) से सीधे जयपुर की बस में बैठा, बांदीकुई पहुंचने तक बस खचाखच हो गई। बाद में मुझे पता चला कि बस दौसा में भी अंदर होकर जाएगी। इसलिए सिंकदरा से मैंने बस चेंज करने की सोची। सिंकदरा में यूपी रोडवेज की बस में सवार हो गया। राजस्थान
Aug 31 2009 02:05 AM
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राजस्थान में हर आदमी आरक्षित !

राजस्थान में अब हर आदमी आरक्षित वर्ग में आ गया है। एक साल से लटका पड़ा आरक्षण विधेयक राज्यपाल ने पास कर दिया। राज्य में अब राज्य में आरक्षण का दायरा 49 प्रतिशत से बढ़कर 68 प्रतिशत हो जाएगा। 14 प्रतिशत आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग, ईसीबी (राजपूत, ब्राह्मण,
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शादी के बाद ........

शादी से लौटकर आया, इनबॉक्स देखा तो कई शुभचिंतकों की शुभकामनाएं और प्रतिक्रियाएं मिली। कई ने ब्लॉग लिखने को कहा। पर अभी मूड नहीं बन पा रहा। शायद अभी खुमारी ही नहीं उतर रही। शादी से लौटकर पांच मिनट पहले ही किसी दोस्त खत्म हुई चैट हूबहू पेस्ट कर रहा हूं
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आखिर बेच डाली छह सौ किलो रद्दी

कई शौक भारी पड़ जाते है। ऐसा ही है मेरा और अखबार का रिश्ता। खाना मिले न मिले अखबार जरूर हो। मेरे इस प्रेम के चक्कर में मेरे बिस्तर के चारों और हमेशा अखबारों का ढेर होता है। मेरे सारे परिचित और दोस्त इससे वाकिफ है। हाल तक मैं जिस मकान में रहता था वहां
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हर गलती सजा मांगती है

राजनीति पर लिखने के लिए देश में बहुत सारे दिग्गज पत्रकार हैं। मैं हमेशा खुद को उनसे ज्यादा काबिल नहीं मानता, इसलिए मैं हमेशा राजनीति पर लिखने से खुद को रोकता हूं। सोचता हूं कि अपने ब्लॉग को निजी जिंदगी के आसपास ही रखूं। पर कल मतगणना है हमें अपने 545
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जयपुर में विस्‍फोट के एक बरस बाद

जयपुर में बम धमाके हुए आज ठीक एक साल हो गए। एक साल पहले हुए इन धमाकों में 69 बेगुनाह लोग मारे गए। 250 से ज्‍यादा लोग घायल हो गए। और कई लोग अपनों की याद में आज भी जिंदा लाश हैं। कहते हैं कि कुल 11 आतंकियों ने इस वारदात को अंजाम दिया इनमें से चार गिरफत
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जयपुर की सडक पर ये स्‍टंट

चुनाव का समय है। सारी निजी बसें पकडकर चुनाव डयूटी में लगा दी हैं। शहर की सडकों पर दो दिन से गिनती की सरकारी बसें चल रही हैं। और शायद इसीलिए बस रुकते ही चढने की मारामारी हो रही है। पर शायद ये लोग या तो कुछ ज्‍यादा ही हिम्‍मत वाले हैं या इन्‍हें अपनी ब
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काश! ऑनलाइन मिलता खाना

ये साला ऑनलाइन रहने का चस्‍का भी अजीब है। बाहर निकलना हो और पारा 42 डिग्री पार हो तो घर से निकलने का मन ही नहीं करता। कम से कम जब नेट अच्‍छी स्‍पीड में चल रहा हो। यूं रोज रात देर से खाने की आदत है। पर कल एक दोस्‍त की सगाई थी, इसलिए शाम का खाना जल्‍दी
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असमंजस, क्‍या हम सही हैं?

आफिस के बाद आजकल रोज चाय पीने का चस्‍का लग गया है। हम लोगों की एक मंडली भी तैयार हो गई है, जो अमूमन रोज चाय पीने जाती हैं। दो बजे के बाद सुबह लगभग चार बजे तक यहां बैठना हमारी आदत में शुमार हो गया है। रोज वहां चाय के बहाने अड्डा जमाने से हम लोगों की च
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सर्किल नहीं मौत का कुआं है

जयपुर शहर सडक हादसों से कितना भयभीत है। इसका उदाहरण यह फोटो देखकर आसानी से लगाया जा सकता है। जयपुर का एक बडा चौराहा है, गुर्जर की थडी। रोज रोज सडक दुर्घटनाओं के बाद यह इतना कुख्‍यात हो गया है कि एक सडक हादसे में एक दंपती की मौत के बाद लोगों ने दो दिन
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इतने डे कम थे, जो मेट्रीमोनी डे भी आ गया!

कल देर रात भारत मेट्रीमोनी डॉट कॉम का एक ईमेल मिला। इसमें 14 अप्रेल को मेट्रीमोनी डे के रूप में मानने की जानकारी मिली, कंपनी के सीईओ की ओर से एक ग्रीटिंग कार्ड मिला। पहली बार सुना इस डे के बारे में। उत्‍सुकता थी तो गूगल पर खोजा, पता चला भारत मेट्रीमो
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बाप रे ! एक और मंदिर

धर्म एक अफीम है, शायद यह बात किसी ने धर्म परायण लोगों को देखकर कही गई थी। पर अब धर्म बडी से बडी दुकान चलाने में काम आ रही है। चाहे वो पीएम इन वेटिंग लालकृष्‍ण आडवाणीजी की हो, या मेरी वाली चाय की थडी की। धर्म ही ऐसा मसला है जिसकी आड में इस देश में कुछ
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सिर्फ तस्‍वीरें और कैप्‍शन

मथुरा रेलवे स्‍टेशन पर लालूजी को ढूंढ रही थी उनकी गाय जयपुर में प्रेस क्‍लब वालों की चली तो शायद दोपहर का डिनर भी मिला करेगा हवामहल की दीवारें शायद इनके प्रेम के इजहार के लिए ही ये जगह खाली छोडी गई थी आवश्‍यकता अविष्‍कार की जननी है ये फैक्‍स मशीन और
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एक दम पकाऊ तस्‍वीर, गले नहीं उतरती कहानी

थिएटर मालिकों और डिस्‍टीब्‍यूटर्स में विवाद के चलते यूं ही नई फिल्‍में कम रिलीज हो रही हैं। “8 बाई 10 तस्‍वीर” रिलीज हुई तो ऐसी कि यूं समझिए अगर आप देखने पहुंच गए‍ तो लगेगा कि पैसे बेकार गए। यूं तो फिल्‍म नागेश कुकनूर की है, अपन तो इसका सब्‍जेक्‍ट और
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मुझे नहीं बनना टीवी पत्रकार!

आठ साल की एक लड़की के एक मर्डर के बाद घटनास्थल से लौटे एक साथी रिपोर्टर ने यह टिप्पणी की तो मैं चौंक गया। मैंने पूछा क्या हुआ यार। अखबार में काम करते हैं तो हत्या, बलात्कार जैसी चीजों से रोज रोज वास्ता पड़ता है। और एक क्राइम रिपोर्टर यह कहे कि मुझे न
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आज तो सही में गार्ड ने भगा दिया!

अखबार की नौकरी है। दिनभर सोना और देर रात तक आफिस में रुकना अपनी आदत में शुमार है। शायद इसी बात को ध्‍यान में रखकर अपने मित्र सुधाकर ने मेरे जन्‍मदिन पर आफिस के नोटिस बोर्ड पर ऐसा ही एक कार्टून लगाया जिसमें मैं ढाई बजे तक आफिस में हूं और गार्ड मुझे जा
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बीमा एजेंटों के काम का सबूत हैं अखबार

अखबार में नौकरी करते करते सात साल से ज्‍यादा हो गए। इसलिए रोज समाचार पत्रों पर विश्‍वसनीयता के लिए नए नए उदाहरणों से वाकिफ होते रहते हैं। पर अभी जो मैंने देखा उस पर शायद बीमा कंपनियों की पूरी की पूरी इमारत टिकी है। बीमा कंपनियों की नींव है एजेंट और उ
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सरे आम फांसी की सजा सुनाने वाला जज विदा

भाजपा के पूर्व सांसद और राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुय न्यायाधीश रहे गुमानमल लोढा (83) का रविवार रात अहमदाबाद में निधन हो गया। 15 मार्च 1926 को नागौर जिले के डीडवाना में जन्मे लोढ़ा राजस्थान उच्च न्यायालय में न्यायाधीश रहते गुमानमल लोढ़ा का क्9त
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बाप रे! सत्‍तर हजार की जगह, सात लाख रुपए

इस बार घर गया तो यूं ही पापा से बातचीत चल रही थी। पापा इलेक्‍टीसिटी डिपार्टमेंट में हैड कैशियर हैं। इसलिए उनका बैंक में रेग्‍यूलर आना जाना लगा रहता है। तो सुनिए पापा का सुनाया हुआ एक किस्‍सा ये किस्‍सा सुनकर लगेगा कि जब तक देश में इतनी अनपढ और नासमझ
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आमिर खान का नया गेटअप

अपन के आमिर खान हर काम दिल से करते हैं। इस बार टाटा स्काई के विज्ञापन के लिए वे बिल्कुल नए लुक में नजर आएंगे। आमिर साठ साल के एक सरदार की भूमिका में है। इस शॉट को फिल्माने के बाद आमिर खुद कहते हैं कि उम्र के साथ अभिनय करना आसान नहीं होता लेकिन बतौर अ
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क्‍या किसी ने देखे हैं भूत

आफिस से काम खत्‍म होने के बाद अक्‍सर हम चाय पीने चले जाते हैं। कल रात भी हम निकल पडे चाय पीने। जब तक चाय बनती हमारे एक मित्र सुधाकरजी ने भूतों के अस्तित्‍व का सवाल छेड दिया। हुआ यूं कि कल ही उनके एक सालेजी ने उन्‍हें अपना साथ कई साल पहले घटा एक वाकया
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चल बसा एक गुमनाम सांसद !

जयपुर से भाजपा सांसद गिरधारीलाल भार्गव का रविवार को निधन हो गया। अपन सुबह नींद में थे कि सुबह छोटे भाई ने उनके पड़ोस में रहने वाले किसी परिचित के हवाले से यह दु:खद खबर दी। यूं तो सबको जाना होता है, उम्र भी थी उनकी 72 पर, शायद जल्दी चले गए। उनकी रग-रग
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एक अच्‍छी हॉरर फिल्‍म है 13 बी

एक दोस्त का ट्रान्सफर हो गया तो उसकी विदाई पार्टी मनाने के लिए कल रात 9 से 12 के शो में एक हॉरर फिल्‍म देखने चले गए। फिल्‍म का नाम बहुत अजीब था, 13 बी। यूं तो मुझे हॉरर फिल्‍में खास पसंद नहीं है। पर यह फिल्‍म कुछ अलग तरह की है, बेझिझक देखी जा सकती है
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यार, किसी कॉलगर्ल का नंबर दे !

एक पुराना दोस्‍त घर आया। पहले एक कोचिंग सेंटर खोल रखा था, कुछ नया करने की सूझी तो इंश्‍योरेंस कंपनी ज्‍वाइन कर ली। मेरा फेवर चाहता था तो कुछ रेंफरेंस मांगने लगा। मैंने कहा यार ये इंश्‍योरेंस एजेंट इतने हो गए हैं कि आजकल हर घर में कोई न कोई मिल ही जात
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जरा सा बदलाव

नाचना मेरे बस की बात नहीं है। पर आजकल मैं अपनी कमियां दूर करने में लग रहा हूं। दोस्‍तों की शादियों में उनके घरवालों की यही शिकायत रहती थी कि तुम लोग काम बहुत करते हो, समझदार हो पर डांस वैगरह नहीं करते। थोडा एंजाय भी किया करो, इस बार एक दोस्‍त की शादी
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स्‍लमडॉग से आगे की कहानी है दिल्‍ली-6

दिल्‍ली 6 वहां से शुरू होती है, जहां स्‍लमडॉग मिलेनियर खत्‍म होती है। स्‍लमडॉग में भारत की गंदगी और गरीबी दिखाई है वहीं दिल्‍ली 6 में भारतीयों का प्‍यार दिखाया गया है। फिल्‍म की कहानी कुछ इस तरह है कि रोशन यानी अभिषेक बच्‍चन अपनी दादी यानी वहीदा रहमा
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चवन्नी चैप के ब्लॉग पर मैं

वरिष्ठ पत्रकार अजय ब्रहामत्ज ने इस बार अपने ब्लॉग चवन्नी चैप में हिंदी टाकिज सीरिज लिखने के लिए मुझे मौका दिया है। यह पूरा की पूरा मैटर मैं यहां भी लगा रहा हूं। पूरी सीरिज उनके ब्लॉग पर उपलब्ध है। अजयजी ने मुझे मौका दिया मैं इसके लिए उनका आभारी हूं।-
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आइये दो करोड रुपए जीतें

स्‍लमडॉग मिलेनियर’ फिल्‍म देखकर मैंने उस फिल्‍म में पूछे गए सारे सवाल इकटठे करने की कोशिश की है। अब आप भी खेलकर देखिए कि अगर स्‍लम के जमाल की जगह हू वान्‍ट़स टु मिलेनियर में अनिल कपूर के सामने आप बैठे होते तो कितने रुपए जीत सकते थे। एक हजार रुपए के ल
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आओ स्‍लमडॉग मिलेनियर देखें

जयपुर में साहित्‍य सम्‍मेलन शुरू होने वाला था। पहले दिन स्‍लमडॉग मिलेनियर वाली किताब “क्‍यू एंड ए” के विश्‍वास स्‍वरूप को आना था। मैं किताब नहीं पढ पाया इसलिए मैंने सोचा कि स्‍लम डॉम मिलेनियर देखकर ही उसकी कहानी का अंदाजा लगा लिया जाए ताकि उनको सुनने
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बिल्‍ली रास्‍ता क्‍यूं काटती है

पता नहीं ये ये बिल्‍ली रास्‍ता क्‍यूं काटती है। कल रात की बात है, आफिस से करीब ढाई बजे घर लौट रहा था। आफिस के ही एक साथी दूसरी बाइक पर थे, घर के पास वाली गली पर एक दूसरे को विदा ही कर रहे थे कि एक बिल्‍ली पर मेरी नजर पडी, वो मेरा रास्‍ता काट रही थी।
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कितना उचित है मुठभेड़ का लाइव

मुंबईमें 11 स्थानों पर आतंकियों ने हमला बोल दिया। हमने कई मुंबई एटीएस के चीफ हेमंत करकरे और उन जैसे 16 जाबाजों समेत 125 लोगों को खो दिया। 300 से ज्यादा लोग अस्पताल में हैं। हमारे टीवी चैनल पिछले 32 घंटों से लाइव कवरेज कर रहें हैं। पर इस लाइव कवरेज के
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तो आखिर खिसक गया कॉमनमैन का दिमाग

ए वैडनेस डे´ फिल्म में नसरुद्दीन शाह का यह डायलॉग तगड़ा हिट करता है कि जिस दिन कॉमनमैन का दिमागा खिसक गया तो आतंकवाद खत्म हो जाएगा। हाल के दिनों में आतंकवाद पर बनी यह सबसे नई फिल्म है। लेखक-निर्देशक नीरज पांडेय की इस फिल्म में नसरुद्दीन शाह और अनुपम