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धान के देश में!

http://dhankedeshme.blogspot.com/
ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
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18 Jun 2010
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गूगल सर्च इंजिन के विशिष्ट प्रयोग

गूगल सर्च इंजिन का प्रयोग तो अवश्य ही आप सभी करते होंगे किन्तु आप में से बहुत से लोगों को शायद ही यह जानकारी होगी कि गूगल सर्च इंजिन में बहुत सारी विशिष्टताएँ भी हैं। तो आइये जानें उन विशिष्टताओं के बारे में!गूगल सर्च इंजिन को केलकुलेटर के तौर पर प्रयोग
 
जी.के. अवधिया
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कल हमारे नापसन्दीलाल छुट्टी पर थे

जब कोई वस्तु अनायास ही उपलब्ध हो, और वह भी मुफ्त में, तो उस वस्तु का उपयोग करने की इच्छा जागृत हो ही जाया करती है। ब्लोगवाणी ने भी हम सभी को नापसन्द वाला बटन उपलब्ध करवाया हुआ है; और वह भी बिल्कुल मुफ्त में। यह तो आप जानते ही हैं कि "माल-ए-मुफ्त
 
जी.के. अवधिया
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ब्लोगर महान नहीं होता, महान होता है पोस्ट

सीनियर ब्लोगर, जूनियर ब्लोगर, बड़े ब्लोगर, छोटे ब्लोगर, महान ब्लोगर ....आखिर क्या है यह? ब्लोगर महान होता है या उसका पोस्ट उसे महान बनाता है?हमारा तो मानना है कि सिर्फ रचना ही छोटी, बड़ी या महान होती है जो कि रचयिता को भी छोटा, बड़ा या महान बना देती है।
 
जी.के. अवधिया
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पैचान कौन?

नीचे के तीनों चित्र जिन महाशय के हैं उन्हें आप अच्छी तरह से जानते हैं! अब देखना यह है कि आप उन्हें पहचान पाते हैं या नहीं? तो बताइये कि ये चित्र किन महाशय के हैं?Yatra Online Pvt Ltd - AirTickets and Hotels
 
जी.के. अवधिया
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कुछ व्यक्तित्व विकास उक्तियाँ

अपनी तुलना इस संसार के किसी अन्य व्यक्ति से कभी भी न करें। यदि आप ऐसा करते हैं तो स्वयं का अपमान करते हैं।एलेन स्ट्राइकयदि हम उस व्यक्ति से प्रेम नहीं कर सकते जिसे कि हम देख रहे हैं तो हम भगवान से कैसे प्रेम कर सकेंगे जिन्हें कि हम देख नहीं सकते?मदर
 
जी.के. अवधिया
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अंग्रेजी शासन के समय की एक झलक

हिन्दुत्व एवं ब्राह्मणत्व में अखण्ड विश्वास रखने वाला एमएससी पास चोटीधारी बंगाली युवक अपूर्व को एक कंपनी में अफसर पद पर नौकरी मिलती है और वह अपने ब्राह्मण रसोइये तिवारी के साथ, अपने ब्राह्मणत्व की अत्यन्त सावधानी स रक्षा करता हुआ रंगून पहुँच जाता है जहाँ
 
जी.के. अवधिया
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भगवान राम भला करे उसका जो "वाल्मीकि रामायण" पर भी नापसन्द का चटका लगाता है

सभी की अपनी अपनी पसन्दगी और नापसन्दगी होती है। हम जानते हैं कि पसन्द और नापसन्द व्यक्ति का अपना निजी मामला होता है इसीलिये हमारे ब्लोग "धान के देश में" में किसी पोस्ट के प्रकाशित होते ही नापसन्द का चटका लग जाने पर हमें कभी भी आश्चर्य नहीं होता। किन्तु
 
जी.के. अवधिया
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संगीतप्रेमी श्वान बनाम हिज मास्टर्स व्हायस... संगीत... मेलॉडी... हारमोनी...

क्या आपको हिज मास्टर्स व्हायस के रेकॉर्ड्स याद हैं जिसमें संगीत का आनन्द लेते हुए श्वान महाशय का चित्र हुआ करता था? अवश्य ही याद होगा क्योंकि आप इन एसपी और एलपी रेकार्ड्स को अपने रेकॉर्ड प्लेयर पर सुना करते थेऔर आनन्द-विभोर हो जाया करते थे। पर हमारे बचपन
 
जी.के. अवधिया
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मतलब निकल गया है तो पहचानते नहीं

युवक ने पहली बार अपनी गर्ल-फ्रेंड को अपने कमरे में इन्व्हाइट किया। लड़की इन्व्हीटेशन कबूल करके उसके साथ चल पड़ी। लड़के का कमरा ऊपर की मंजिल पर था जिसके लिये लकड़ी की सीढ़ियाँ बनी थीं। चौथी सीढ़ी के बाद पाँचवी सीढ़ी पर पैर रखते समय लड़के लड़की को बड़े प्यार से
 
जी.के. अवधिया
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तिकड़म से ही मिलती हैं टिप्पणियाँ

टिप्पणियाँ पाना भला किसे अच्छा नहीं लगता? ऊपर-ऊपर से भले ही हम कहें कि हम टिप्पणियों की परवाह नहीं करते पर जब हम अपने भीतर झाँकते हैं तो लगता है कि हमें भी टिप्पणियाँ पाने में खुशी होती है। हिन्दी ब्लोगिंग में टिप्पणियों के महत्व को इतना बढ़ा-चढ़ा दिया गया
 
जी.के. अवधिया
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वैदिक कर्मकाण्ड के सोलह संस्कार

बस सुना था कि वैदिक कर्मकाण्ड में मनुष्य के जन्म से लेकर मृत्यु तक सोलह संस्कार के प्रावधान हैं किन्तु उनमें से मात्र तीन चार के नाम ही जानता था। उत्सुकतावश नेट को खंगाला तो जो कुछ भी जानकारी मिली उसे इस पोस्ट में प्रस्तुत कर रहा हूँ। आशा करता हूँ कि
 
जी.के. अवधिया
Jun 06 2010 10:49 AM
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कहीं धोखा तो नहीं खा रहे हैं आप?

इस चित्र को देखकर क्या लग रहा है आपको? देखिये, सच सच बताइयेगा। आप यही सोच रहे हैं ना कि ....!!!!!!पर आप जो सोच रहे हैं वह कहीं गलत तो नहीं है? कहीं धोखा तो नहीं खा रहे हैं आप????????????????  Yatra Online Pvt Ltd - AirTickets and Hotels
 
जी.के. अवधिया
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आइना वही रहता है चेहरे बदल जाते हैं

"क्या करना है साहब लड़के को ज्यादा पढ़ा लिखाकर? आखिर करना तो उसे किसानी ही है। चिट्ठी-पत्री बाँचने लायक पढ़ ले यही बहुत है।" यह बात हमसे गाँव के एक गरीब किसान ने कही थी जब हमने उसे अपने बच्चे को खूब पढ़ाने-लिखाने की सलाह दी थी।दूसरी ओर शहर में एक गरीब भृत्य
 
जी.के. अवधिया
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खुशखबरी... खुशखबरी... खुशखबरी... ब्लोगिंग से कमाई शुरू

आप तो जानते ही हैं कि आजकल विज्ञापन का जमाना है और आप विज्ञापन के महत्व को भी अच्छी तरह से समझते हैं। ये विज्ञापन चीज ही ऐसी है कि किसी उत्पाद को बाजार में आने के पहले ही सुपरहिट बना देती है। अच्छे से अच्छा उत्पाद विज्ञापन के अभाव में पिट जाता है और
 
जी.के. अवधिया
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जरा जोड़ कर बताइये तो... नहीं जोड़ पाये ना?

जरा जोड़ कर बताइये तो -IIIVIIIXI+ L XI V‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‌‌‌‌----------नहीं जोड़ पाये ना? अच्छा अब जोड़िये -0307090166अब तो आपने तत्काल जोड़कर बता दिया कि इनका का जोड़ 86 है। पर इन्हीं संख्याओं को पहले वाले रूप में जोड़ने के लिये कहा गया तो नहीं बता पाये थे कि जोड़ L
 
जी.के. अवधिया
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अब रोज-रोज तो कुछ सूझता नहीं इसलिये आज अगड़म-बगड़म लिख रहा हूँ ... जो पढ़ें उसका भी भला, जो ना पढ़ें उसका भी भला

अजब रोग है ये ब्लोगिंग भी। रोज ही एक पोस्ट लिखने का नशा लगा दिया है इसने हमें। पर आदमी अगर रोज-रोज लिखे भी तो क्या लिखे? कभी-कभी कुछ सूझता ही नहीं तो अगड़म-बगड़म कुछ भी लिख कर पोस्ट प्रकाशित कर देता है। तो आज हम भी ऐसे ही कुछ अगड़म-बगड़म लिख रहे हैं, जिसे
 
जी.के. अवधिया
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ब्लोगिंग से कमाई तो होने से रही ... काश ज्ञानेश्वरी एक्प्रेस में ही रहे होते ...

एक आदमी वो होता है कि काल का ग्रास बन जाने जैसे हादसे का शिकार होकर भी रुपया कमा लेता है और एक हम हैं कि ब्लोगिंग कर के कुछ भी नहीं कमा सकते। दो-दो लाख रुपये मिल गये ज्ञानेश्वरी एक्प्रेस में मरने वालों के परिवार को किन्तु यदि ब्लोगिंग करते हुए यदि हम
 
जी.के. अवधिया
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अपने ब्लोग का प्रचार अवश्य कीजिये किन्तु इस तरह से नहीं ...

आप एक पोस्ट लिखते हैं और उसमें एक टिप्पणी भी आ जाती है कुछ इस तरह सेः"मेरे फलाँ ब्लोग में आकर कृपया अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करें।"याने कि आपने अपने पोस्ट में क्या लिखा है, क्यों लिखा है, सही लिखा है या गलत लिखा है इन बातों से टिप्पणी करने वाले को कुछ भी
 
जी.के. अवधिया
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थोड़ा अध्ययन, थोड़ा अनुभव और थोड़ी कल्पनाशीलता ... और क्या चाहिये पोस्ट लिखने के लिये?

बड़े जोश और उत्साह के साथ लोग आ रहे हैं ब्लोगिंग के क्षेत्र में। जब कोई अपना ब्लोग बना लेता है उसे कुछ कुछ अन्तराल में अपडेट भी करना होता है जिसके लिये सामग्री (content) की जरूरत होती है याने कि पोस्ट लिखनी पड़ती है।अंग्रेजी ब्लोगिंग में तो ये पोस्ट लिखना
 
जी.के. अवधिया
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कुछ छुपा-छुपा सा कुछ झलक रहा सा ...

सौन्दर्य एक ऐसी अनुभूति है जिसका अनुभव प्रत्येक व्यक्ति करता है। जहाँ हम प्राकृतिक सौन्दर्य से अभिभूत होते हैं वहीं नारी का सौन्दर्य हमें सदा ही आकर्षित करता है। ईश्वर ने नारी को सौन्दर्य की प्रतिमूर्ति ही बनाकर भेजा है। प्रेम, ममता, वात्सल्य और सौन्दर्य
 
जी.के. अवधिया
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धान के देश में!

कुछ छुपा-छुपा सा कुछ झलक रहा सा ...सौन्दर्य एक ऐसी अनुभूति है जिसका अनुभव प्रत्येक व्यक्ति करता है। जहाँ हम प्राकृतिक सौन्दर्य से अभिभूत होते हैं वहीं नारी का सौन्दर्य हमें सदा ही आकर्षित करता है। ईश्वर ने नारी को सौन्दर्य की प्रतिमूर्ति ही बनाकर भेजा
 
जी.के. अवधिया
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May 28 2010 10:38 AM
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'ररुहा सपनाय दार-भात' याने कि दरिद्र को सपने में भी दाल-भात नजर आता है

दरिद्र व्यक्ति भरपेट भोजन करने की व्यवस्था नहीं कर पाता। या तो आधा पेट खाता है या फिर भूखा ही रह जाता है। नींद में भी उसके अचेतन में भूख ही बसी रहती है इसलिये उसको सपने में दाल-भात अर्थात् भोजन ही नजर आता है। इसीलिये छत्तीसगढ़ी में, जो कि मुहावरों के
 
जी.के. अवधिया
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एक कप चाय और ब्लोगवाणी के तलब ने भट्ठा बैठा दिया दिमाग का

आपने भी अनुभव किया होगा कि जब कभी भी परेशानी आती है केवल एक ही परेशानी नहीं आती बल्कि एक के बाद एक परेशानियाँ आती ही चली जाती हैं। कहावत भी है कि "विपत्ति कभी अकेली नहीं आती"। आज सुबह ही सुबह एक कप चाय और ब्लोगवाणी के तलब ने हमें ऐसा परेशान किया कि हमारी
 
जी.के. अवधिया
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उसने तेरहवीं के भोज में शराब की व्यवस्था की

मैं कोई काल्पनिक नहीं बल्कि सच्ची बात बता रहा हूँ आपको। बात कुछ ही महीने पुरानी है। हम और हमारे दो और मित्र याने कि तीन "डेली ड्रिंक्स" वाले रोज ही रात को इकट्ठे हो जाते हैं। मैंने "डेली ड्रिंक्स" कह कर अपनी टोली को कुछ सम्माननीय बनाने की कोशिश की है
 
जी.के. अवधिया
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हिन्दी ब्लोगरों के दो, और केवल दो, प्रकार होते हैं - एक महान ब्लोगर दूसरा छुद्र ब्लोगर

हिन्दी ब्लोगिंग में हम लगभग तीन साल से हैं और इस दौरान हमने जो कुछ भी देखा, पढ़ा और अनुभव किया उससे सिर्फ यही निष्कर्ष निकलता है कि हिन्दी ब्लोगरों के दो, और केवल दो, प्रकार होते हैं - एक महान ब्लोगर दूसरा छुद्र ब्लोगर।महान ब्लोगर वे होते हैं जो हिन्दी
 
जी.के. अवधिया
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सावधान! कहीं धोखे मे आकर अपना यूजरनेम और पासवर्ड किसी को ना दे दीजियेगा

अभी ज्योंहीं मैने अपना जीमेल खोला तो एक मेल पर नजर पड़ी जो इस प्रकार से हैःYour Gmail Address    Due to congestion in our database system, We have come to realize that your account information on our database system are out of date, as a
 
जी.के. अवधिया
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बैंड बाजा से दिल्ली ब्लोगर्स मिलन से क्या सम्बन्ध? ... आखिर कितनी टिप्पणियाँ मिटायें हम?

कल के हमारे पोस्ट का विषय था बैंड बाजा। लोगों ने उसे पढ़ा भी और और उस पर अपनी राय भी व्यक्त किया। बहुत अच्छा लगा हमें, आखिर हम भी जाने माने नहीं तो कम से कम एक तुच्छ ब्लोगर ही हैं जो अपने पोस्ट में टिप्पणियाँ पा कर फूला नहीं समाता। किन्तु उनमें दो
 
जी.के. अवधिया
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क्या आपको याद है कि पिछली बार कब सुना था आपने बैंड बाजा?

कल हम रास्ते में थे कि एकाएक ठिठक कर रुक जाना पड़ा हमें। सामने से एक बारात आ रही थी जिसके आगे आगे लकदक ड्रेस पहने बैंड बाजा वाले सुरीली धुन बजाते हुए चल रहे थे। क्लॉर्नेट से निकलती हुई फिल्म 'मुगल-ए-आज़म' के मेलॉडियस और कर्णप्रिय गाने "मोहे पनघट पे
 
जी.के. अवधिया
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आपसे एक सवाल, यदि आपकी शादी हो चुकी है

शादी-विवाह का सीज़न चल रहा है आजकल। अक्षय तृतीया के रोज से ही खूब जोर शुरू हो गया है शादियों का। कहीं बारात ले जाने की तैयारी चल रही है तो कहीं बारात स्वागत् की। इन सबको देखकर याद आया कि चौंतीस साल पहले हम भी इस प्रक्रिया से गुजरे थे और विवाह के समय
 
जी.के. अवधिया
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भाड़ में जाये अलेक्सा रैंक, गूगल पेज रैंक और गूगल खोज परिणाम ... हिन्दी ब्लोगिंग को इनकी जरूरत ही क्या है?

"नमस्कार लिख्खाड़ानन्द जी!""नमस्काऽर! आइये आइये टिप्पण्यानन्द जी!""लिख्खाड़ानन्द जी! अभी हाल ही में हमने एक पोस्ट पढ़ी 'हिन्दी ब्लोगर्स - गूगल खोज परिणाम के अनुसार'। हमने सोचा कि लगे हाथों आपके भी गूगल खोज परिणाम देख लें। सच कहें तो आपके इतने कम गूगल खोज
 
जी.के. अवधिया
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ब्लोगरों का पाश्‍चुराइजेशन - याने कि उनके लेखन स्तर को लंबे समय तक बरकरार रखना

"अवधिया जी, लगता है कि अब ब्लोगर्स का भी पाश्‍चुराइजेशन करना पड़ेगा।" हमसे ललित शर्मा जी ने कहा जो कल एक विवाह समारोह में सम्मिलित होने के लिये रायपुर आये थे।हमने पूछा, "क्यों भाई?""आपने अनुभव किया होगा कि ब्लोगर्स के आज का लेखन स्तर उनके पहले के लेखन
 
जी.के. अवधिया
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हिन्दी ब्लोगर्स - गूगल खोज परिणाम के अनुसार

कुछ अत्यन्त लोकप्रिय ब्लोगर्ससमीर लालखोज परिणाम लगभग 92,700 अनूप शुक्लखोज परिणाम लगभग 75,600ज्ञानदत्त पाण्डेयखोज परिणाम लगभग 76,300P.C. Rampuria (ताऊ)खोज परिणाम लगभग 3,620कुछ नियमित लेखन करने वाले ब्लोगर्सraviratlami (रवि रतलामी)खोज परिणाम लगभग 161,000
 
जी.के. अवधिया
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हम डोकरे हैं तो क्या हुआ पर छोकरे हैं

क्या आपको लगता है कि हम डोकरे (बुड्ढे) हो गये हैं? हमें तो यही लगता है कि अब तक हम छोकरे ही हैं। इसीलिये तो सींग कटा कर बछड़ों में शामिल रहा करते हैं। अब छोकरे ना बनें तो क्या करें? वो दिन तो अब रहे नहीं कि सारा-सारा दिन और सारी-सारी रात अपनी घरवाली के
 
जी.के. अवधिया
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पोस्ट का शीर्षक धाँसू ना हो तो उसे पढ़ेगा कौन?

अपने पोस्ट को पढ़वा लेना हँसी खेल नहीं है। बहुत मेहनत करनी पड़ती है इसके लिये। यह बात मैं नामी-गिरामी ब्लोगरों के लिये नहीं, बल्कि अपने जैसे साधारण ब्लोगरों के लिये कह रहा हूँ। नामी-गिरामी ब्लोगरों के तो पोस्ट आने से पहले ही पाठक आ धमकते हैं पर हम जैसे
 
जी.के. अवधिया
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क्या अंग्रेजी और अन्य भाषाओं के ब्लोगर्स में भी कभी बड़े छोटे ब्लोगर्स का विवाद हुआ है?

हम गूगल कर-कर के थक गये यह जानने के लिये कि क्या अंग्रेजी और अन्य भाषाओं के ब्लोगर्स में भी कभी बड़े छोटे ब्लोगर्स का विवाद हुआ है? अनेक प्रकार से सर्च किया  कभी सर्च बॉक्स में history of blogging लिखकर, कभी who is big blogger लिखकर, तो कभी और भी इसी
 
जी.के. अवधिया
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कौन है बड़ा ब्लोगर?

ब्लोगरी न हुई लड़ाई का मैदान हो गया। घमासान मचा हुआ है किसी को बड़ा ब्लोगर और किसी को छोटा ब्लोगर सिद्ध करने के लिये।ब्लोगर तो ब्लोगर होता है, न वह छोटा होता है और न ही बड़ा। ब्लोगर का काम है अपने ब्लोग के माध्यम से अपनी भाषा के साथ ही साथ लोगों का और स्वयं
 
जी.के. अवधिया
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आज जरूरत है तो श्रेष्ठता, महत्ता आदि को भूल कर निस्वार्थ भाव से ब्लोगिंग करने की

हिन्दी ब्लोगिंग से कमाई कुछ भी नहीं होती, कमाई होना तो दूर अपने जेब के पैसे भी घुस जाते हैं। आखिर इंटरनेट कनेक्शन मुफ्त में थोड़े ही प्राप्त होता है। हिन्दी का ब्लोगर अपना बहुमूल्य समय और गाढ़ी कमाई खर्च करके ब्लोगिंग कर रहा है। आखिर क्यों? क्या उद्देश्य
 
जी.के. अवधिया
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विनाश से सृजन की ओर

(स्व. श्री हरिप्रसाद अवधिया रचित कविता)विनाश से सृजन की ओर-मुख मोड़ और चल,धूर्त-पथ त्याग कर,मानव मन बन निश्छल।विनाशिनी संहारिणी शक्ति-तेरी ही कृति का प्रतिफल,मोड़ दे अपनी दिशा,उत्फुल्ल कर शतदल कमल,कृत्रिम से प्रकृति उत्तमशान्त सुन्दर धवल,तो फिर ओ अशान्त
 
जी.के. अवधिया
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आपस की लड़ाई का निश्चित परिणाम विनाश ही होता है

इतिहास गवाह है कि जब भी भाई भाई आपस में लड़ते हैं तो उसका निश्चित परिणाम विनाश ही होता है। हजार से भी अधिक सालों की हमारी गुलामी सिर्फ हमारे देश के नरेशों का आपस में लड़ने का ही परिणाम था। कौरव-पाण्डव आपस में लड़े तो अठारह अक्षौहिणी सेना लड़-कट कर मर गई।
 
जी.के. अवधिया
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प्रसन्नता की बात है कि हम ब्लोगर्स को माया नहीं व्यापती!

माया याने कि धन याने कि रुपया!हर किसी को व्यापती है यह, हर कोई दीवाना है इसका और हर कोई भाग रहा है इसके पीछे। सभी को सिर्फ यही चिन्ता खाते रहती है कि चार पैसे कैसे बना लिये जायें? कोई कुछ कार्य करता है तो उस कार्य के बदले में सिर्फ धन की ही अभिलाषा रखता
 
जी.के. अवधिया
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