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परिकल्पना

http://www.parikalpnaa.com/
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12 Jun 2010
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जीवन सबका पानी है

बचपन में ....पहली बार हमने जिस कविता को याद किया वह थी- "मछली जल की रानी है, जीवन उसका पानी है...!" यदि अपने जीवन को टटोला जाए तो इस कविता को ऐसे पढ़ा जा सकता है- " मेरा बेटा राजा, मेरी बेटी रानी है, जीवन सबका पानी है । "जल-शब्द ही जीवन में रोमांच कर
 
रवीन्द्र प्रभात
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समय विदा लेने को आतुर है एक नई सुबह के निनाद के लिए ....

समय विदा लेने को आतुर है एक नई सुबह के निनाद के लिए .... फिर होगा एक मंच, मिलेंगे हम , होगा एक उत्सव हमारी कृतियों का ,जुड़ेंगे नए कदम हमारे साथ और कहेंगे ... मकसदों की आग तेज हो मनोबल की हवाएं हो तो वह आग बुझती नहीं है मंजिल पाकर ही दम लेती है आंधियां
 
रवीन्द्र प्रभात
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हिंदी हैं हम ... उत्सव ने यह राष्ट्रीय परिधान दिया

हिंदी हैं हम ... उत्सव ने यह राष्ट्रीय परिधान दिया , और इस परिधान में सजी नारी के बोल-(नीलम प्रभा ) अदभुत , अविस्मरनीय , अलौकिक , .. उत्सव के समापन की घोषणा किस तरह हो, यहाँ अदा जी का अनुरोध भी हमें रोक रहा है... यहाँ किलिक करें
 
रवीन्द्र प्रभात
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बाजे अलख बधाई अवध में बाजे अलख बधाई

बिहार का ज़िक्र तो हर जगह होता है, तो यहाँ भी आया है बिहार ......... बिहार की थाप लिए खडी हैं मधुबाला जी अपने समूह के साथ , रोक नहीं पायेंगे आप खुद को , गा उठेंगे उनके साथ....( बाजे अवध ....)
 
रवीन्द्र प्रभात
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तज़ाकिस्तान से नोज़िया करोमतुल्लो की आवाज़ में सुनें तुने चुराई मोरी निंदिया

मैं हैरान हूँ, इस परिकल्पना का जादू हर जगह है, आई हैं तज़ाकिस्तान से देखिये नोज़िया करोमतुल्लो .... तो इनकी आवाज़ का जादू परिकल्पना ब्लॉग उत्सव -के नाम .............देश, विदेश .... मेरा शहर, तेरा शहर सब रंग गए हैं उत्सवी रंग में . सबके होठों पर गीत मचल
 
रवीन्द्र प्रभात
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चलिए कुछ मीठा हो जाये ....

क्या समा बाँधा है विशिष्ट सलाहकार एडवोकेट मुहम्मद शुएब जी, प्रायोजक सलाहकार एडवोकेट रणधीर सिंह 'सुमन' , साहित्यिक सलाहकार अविनाश वाचस्पति , सांस्कृतिक सलाहकार जाकिर अली 'रजनीश', कार्यक्रम समन्वयन सलाहकार सर्वत एम.जमाल, रश्मि प्रभा, ललित शर्मा, एवं सलीम
 
रवीन्द्र प्रभात
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आओ हुजुर तुमको सितारों में ले चलूँ

आज से हम ब्लोगोत्सव की सुनहरी यादों को आपके समक्ष रखने का विनम्र प्रयास कर रहे हैं , ताकि उन महत्वपूर्ण क्षणों को आप करीब से महसूस कर सकें जिससे आप वंचित रह गए थे . पहले हम शुरुआत ब्लोगोत्सव के समापन समारोह से कर रहे हैं , क्योंकि ऑडियो एरर आ जाने के
 
रवीन्द्र प्रभात
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मेरे लिए मेरा अनोखा बंधन ही पुनर्जन्म है ... प्रीती मेहता

श्रीमती प्रीती मेहता, (http://ant-rang.blogspot.com/) ने बड़े ही जीवंत अंदाज में कहा, "वेसे तो पुनर्जनम एक् आस्था और विश्वास का विषय है … वेदों और पुराणों में कहा गया है - शरीर नश्वर है , आत्मा तो अमर है .. यानि कह सकते है कि शरीर मरता है, आत्मा नहीं …
 
रवीन्द्र प्रभात
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हाँ कुछ है जिसे हम पुनर्जन्म कह सकते है...क्या आप मानते है??" : नीता

श्रीमती नीता (http://neeta-myown.blogspot.com/) ने कहा, "अचानक कोई सामने से आकर हँस देता है..ना जान ना पहचान ...अचानक कभी कोई मदद कर देता है...जब हम कोई टिकिट की बड़ी सी लम्बी कतार में खड़े हों और अचानक कोई आ कर कहे हमें, कि मैंने ये कूपन लिया है ज्यादा
 
रवीन्द्र प्रभात
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मैं पुनर्जन्म नही मानता : कर्नल अजय कुमार

कर्नल अजय कुमार का कहना है, "मैं पुनर्जन्म नही मानता , जितनी कहानियाँ निकलती हैं वह सब झूठी हैं और अपनी सोच के आधार पर लिखी जाती हैं।"उनकी पत्नी श्रीमती उषा कुमार के विचार भी कुछ इसी तरह के हैं। उनका कहना है, "इस विषय पर मैंने कभी सोचा ही नही।क्या
 
रवीन्द्र प्रभात
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मेरे विचार से पुनर्जन्म होता है : वंदना श्रीवास्तव

श्रीमती वंदना श्रीवास्तव ( प्राचार्या ) के दृष्टिकोण से, "पुनर्जन्म- ऐसा माना जाता है की मृत्यु के पश्चात् मनुष्य के शरीर का कोई हिस्सा बचा रहा जाता है ताकि वह किसी और रूप /शरीर में जन्म ले सके,इसके वैज्ञानिक तौर पर अब तक कोई प्रमाण नहीं मिले हैं किन्तु
 
रवीन्द्र प्रभात
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कई उदहारण भी हैं....जिससे यह प्रमाणित होता हैं कि पुनर्जन्म है : नवीन कुमार

श्री नवीन कुमार ( retd. SBI officer ) के कथनानुसार, " Hindu mythology और मेरे विचार से आत्मा नही मरती... पुनर्जन्म ज़रूरी नही कि मनुष्य योनि में ही हो, पर जब पुनर्जन्म है तो मनुष्य और अन्य जीव-जंतुओं में हैं और कई उदहारण भी हैं....जिससे यह प्रमाणित होता
 
रवीन्द्र प्रभात
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ब्लोगोत्सव की आखिरी परिचर्चा : क्या आत्मा अमर है ?

नमस्कार!मैं रश्मि प्रभा एक नयी परिचर्चा के साथ आज पुन: उपस्थित हूँ परिकल्पना पर आज उत्सव की यह आखिरी परिचर्चा है और कल गीतों से भरी आखिरी शाम फिर न जाने कब हमें एक साथ एक मंच पर इकत्रित होने का सुयोग प्राप्त होगा...... खैर, विगत डेढ़ महीनों में हम सभी ने
 
रवीन्द्र प्रभात
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कोई जरूरी नहीं कि हर जबाब बोल कर दिया जाए

....कल मैंने प्रथम अन्तराष्ट्रीय हिंदी ब्लॉग उत्सव की प्रस्तावना की....ऐसे-ऐसे टिप्पणीकारों की टिप्पणियाँ आने लगी जो ब्लोगोत्सव में शामिल ही नहीं हैं ...उसी क्रम में मैंने स्पष्ट किया कि यह प्रस्ताव केवल ब्लोगोत्सव-२०१० में शामिल प्रतिभागियों और
 
रवीन्द्र प्रभात
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कौन बनेगा वर्ष का श्रेष्ठ ब्लोगर ?

आज पहली बार मेरे किसी सार्वजनिक बक्तब्य पर ब्लोगवाणी के नापसंद में सर्वाधिक चटका लगाया गया है ...कहा जाता है कि जिस लक्ष्य को प्राप्त करने में आपकी शक्ति का कण-कण दूसरों के लिए बेचैनी पैदा कर दे , तो समझ लीजिये आप लक्ष्य प्राप्ति की ओर बढ़ रहे हैं
 
रवीन्द्र प्रभात
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समान्तर मीडिया की दृष्टि से कितनी सार्थक है हिन्दी ब्लोगिंग .......

आपका  पुन:  स्वागत हैपरिकल्पना परअभी ब्रेक से पहले हम लखनऊ ब्लोगर एसोसिएसनकी तरफ से प्रस्तावित सम्मलेन की बात कर रहे थेआईये आगे बढ़ते हैंऔर शेष बातों पर प्रकाश डालते
 
रवीन्द्र प्रभात
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यह प्रस्ताव केवल ब्लोगोत्सव-२०१० से जुड़े रचनाकारों एवं शुभचिंतकों हेतु है

 अभी-अभी मैंने देखा कि पिछले पोस्ट में जब मैंने प्रथम अन्तराष्ट्रीय हिंदी बलोंग  उत्सव का सुझाव तथा प्रस्ताव रखा तो किसी ने ब्लोगवाणी पर सबसे पहले नापसंद का चटका लगा दिया , इस पर अचानक मुझे मृदुला गर्ग की एक कविता की कुछ पंक्तियाँ याद आ
 
रवीन्द्र प्रभात
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तीन दिवसीय प्रथम अन्तराष्ट्रीय हिंदी ब्लॉग उत्सव लखनऊ में ....

नमस्कार मैं रवीन्द्र प्रभात आज उपस्थित हूँ ब्लोगोत्सव के उन्नीसवें दिन परिकल्पना पर....... सबसे पहले आप सभी का आभार ब्लोगोत्सव-२०१० को हिंदी ब्लॉग जगत में एक नया मुकाम देने के लिए आप सभी ने और हमारी ब्लोगोत्सव की टीम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया, कि
 
रवीन्द्र प्रभात
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एक सीमा तक करें शैतानियाँ, ना किसी का दिल दुखाना चाहिए।

धीरे-धीरे यह कार्यक्रम संपन्नता की ओर अग्रसर है श्री राम नरेश त्रिपाठी की बाल कविता के बाद सुप्रसिद्ध गीत-गज़लकार श्री रोहिताश्व अस्थाना की एक बाल कविता फूल बनकर मुस्कराना चाहिए की कुछ पंक्तियाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ-
 
रवीन्द्र प्रभात
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अंग्रेज तो हिन्दुस्तान को आज़ाद छोड़ कर चले गए, लेकिन अपने पीछे हिंदी भाषा को अंग्रेजी का गुलाम बना कर गए!

पुन:  स्वागत है आपका -परिकल्पना पर !ब्रेक पर जाने से पहले आप मुखातिव थे भारतीय नागरिक, अमित केशरी, प्रताप सहगल और सरस्वती जी से ......आईये अब हम-अमित केशरी  के राष्ट्रभाषा से संवंधित आलेख पर दृष्टि डालते हैं
 
रवीन्द्र प्रभात
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हल्ला हुआ गली दर गल्ली। तिल्ली सिंह ने जीती दिल्ली।।

पुन: स्वागत है आपका परिकल्पना पर मैं यद्यपि बाल कविताएँ और कहानियां लिखता हूँ ऐसे में मेरे आज के उद्बोधन में बाल कविताएँ न हो तो शायद बेमानी होगी इसलिए आज उत्सव के इस चरण में मैं आपको राम नरेश त्रिपाठी की एक बाल कविता सुना रहा हूँ-
 
रवीन्द्र प्रभात
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मैं तुम्हारा हूँ !

आपका पुन: स्वागत है परिकल्पना पर परिकल्पना की इस अनोखी परिकल्पना को आयामित करने में जिस व्यक्तित्व की बड़ी भूमिका रही है वे हैं आदरणीया श्रीमती सरस्वती प्रसाद कविवर पन्त की मानस पुत्री जिनके ब्लोगोत्सव पर आगमन मात्र से गरिमामय हो गयी परिकल्पना.....आईये
 
रवीन्द्र प्रभात
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उनके बच्चे कैसे पँख निकलते ही आकाश मे उड़ान लेते हैं.........

स्वागत   है पुन: आप सभी का परिकल्पना पर आईये -शमा जी के इस मार्मिक संस्मरण को आगे बढाते हैं -================================================================.................मैं बेटे के कमरे मे गयी। मन अनायास भूत कालमे दौड़ गया। मेरे
 
रवीन्द्र प्रभात
May 26 2010 01:17 PM
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आओ, मेरे लाडलों, लौट आओ !!!

स्वागत है आप सभी का पुन: परिकल्पना पर !रवीन्द्र जी की परिकल्पना का यह सामूहिक उत्सव इतना प्रभावशाली है, हर स्वर इतना गरिमामय है कि -मेरे साथ-साथ आप भी नई कल्पना की उन्मुक्त उड़ान के लिए कलम के साथ तत्पर हो जाते होंगे और सपनों को अर्थ देने के लिए वेचैन
 
रवीन्द्र प्रभात
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ब्लोगोत्सव-२०१० की आखिरी शाम हिंदी ब्लॉग जगत के लिए एक यादगार शाम होने जा रही है !

नमस्कार !मैं जाकिर अली रजनीश आज  उपस्थित हूँ ब्लोगोत्सव -२०१० के अठारहवें दिन के कार्यक्रम के संचालन-संयोजन-समन्वयन हेतु परिकल्पना पर !आजकल हर कोई जो ब्लोगोत्सव से जुडा है व्यस्त है इस उत्सव की आखिरी यादगार  शाम की तैयारी
 
रवीन्द्र प्रभात
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यह मॉल है या कि अजायबघर है.. ?

पुन: आपका स्वागत है परिकल्पना पर अभी पिछले चरण में रश्मि रविजा जी ने बड़े ही सार्थक और नपे-तुले शब्दों में मॉल संस्कृति के बिभिन्न पहलूओं पर डाला .......परिचर्चा के बाद आईये निखिल आनंद गिरि की एक कविता पर नज़र डालते है जो मॉल संस्कृति पर केन्द्रित है
 
रवीन्द्र प्रभात
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हमारे देश की अधिकाँश जनता की बुनियादी जरूरतें नहीं पूरी हो पातीं

अधिकार प्यार का ..ओ रूपसी,आज तुमने अपनी पर्ण-कुटी के द्वार नहीं खोले,बस भीतर ही खिलखिलाती रही,चिडियों का समूह दानों की प्रतीक्षा में है,जरा खोलो तो द्वार,मैं भी देखूं तुम्हारा आरक्त चेहरा,बिखरे सघन बाल,फ़ैल गए टीकेवाला चेहरा,जानूँ तो सही-किसे ये अधिकार
 
रवीन्द्र प्रभात
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बजट का क्या? देख लेंगे बाद में और फिर क्रेडिट कार्ड किस मर्ज़ की दवा है ?

स्वागत है आपका पुन: परिकल्पना पर चिराग जैन की कविता प्रस्तुति से पूर्व मैं आपको भिन्न-भिन्न चिट्ठाकारों की राय से अवगत करा रही थी विषय था आज की मॉल संस्कृति  सकारत्मक या  नकारात्मक ?==================================================इस बारे
 
रवीन्द्र प्रभात
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उदारीकरण की प्रक्रिया ने हमारे देश में एक नव धनाढ्य मध्यमवर्ग को जन्म दिया है

स्वागत है पुन: आपकापरिकल्पना पर पिछली कड़ी में  मैंने शिखा वार्ष्णेय जी से जानने की कोशिश की कि उनकी नज़रों में मॉल संस्कृति का असर हमारे समाज में सकारात्मक है या नकारात्मक ?आईये मैं इसी परिचर्चा को आगे बढाती हूँ और चलती हूँ वाणी शर्मा जी के पास यह
 
रवीन्द्र प्रभात
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सबल और निर्बल के बीच की खाई को और चौड़ा करने की साजिश आज की मॉल संस्कृति

स्वागत है आपका पुन: परिकल्पना पर एक सुन्दर और खुशहाल सह अस्तित्व को मूर्तरूप देने की दिशा में प्रतिबद्ध परिकल्पना ब्लॉग की महत्वपूर्ण सामूहिक पहल यानी ब्लोगोत्सव-२०१० की परिकल्पना
 
रवीन्द्र प्रभात
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यार ये कैसी है इज्जत कांच की ?

स्वागत है आप सभी का पुन: परिकल्पना पर !विराम से पूर्व मैं  बात कर रही थी  मॉल संस्कृति के बारे में !... हालांकि, सच्चाई यही है कि मौजूदा समय में किराने की दुकानों और शॉपिंग मॉल दोनों में ही अच्छी-खासी खरीदारी हो रही है।
 
रवीन्द्र प्रभात
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ब्लोगोत्सव-२०१० : ..मॉल , यानी.....शोखियों में घोला जाये,फूलों का शबाब

मॉल , यानी.....शोखियों में घोला जाये,फूलों का शबाब,उसमें फिर मिलाई जाये-थोड़ी सी शराब..........दुनिया कहाँ- से- कहाँ आ गई!मॉल जाने का नशा -सा हो चला है,लेबल लगे कपड़े,( एक ही प्रिंट के),डब्बा बंद खाना,कटी सब्जियां ,आधी सिंकी रोटी...किसी भी दिन
 
रवीन्द्र प्रभात
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ब्लोगोत्सव-२०१० के सत्रहवें दिन का कार्यक्रम

आदरणीय मित्रों,स्थानीय स्तर पर उत्पन्न अपरिहार्य व्यवधान के फलस्वरूप ब्लोगोत्सव-२०१० के सत्रहवें दिन का कार्यक्रम अचानक स्थगित करना पडा, जिससे आपको असुविधा हुई ! यह हमारे लिए अत्यंत खेद का विषय है ....!आपको यह जानकर वेहद ख़ुशी होगी कि समस्त व्यवधान दूर
 
रवीन्द्र प्रभात
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ब्लोगोत्सव-२०१० के अंतर्गत कार्यक्रम में अवरोध हेतु हमें खेद है

प्रिय मित्रों,ब्लोगोत्सव-२०१० के अंतर्गत दिनांक २१.०५.२०१० को होने वाले कार्यक्रम अचानक नेटवर्क में हुई गडबडियों के कारण स्थगित करना पड़ रहा है , तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार सरबर में अचानक समस्या उत्पन्न होने के कारण अवरोध की यह
 
रवीन्द्र प्रभात
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रश्मि प्रभा जी बता रही हैं कि ध्यान क्या है ?

आपका पुन: स्वागत है परिकल्पना पर मैं ललित शर्मा !आज जो बातें मैं इस मंच से बताने जा रहा हूँ उसे सुनकर चौंक जायेंगे आप !जी हाँ मैं बात कर रहा हूँ अल्पना देशपांडे जी का जिनकी कलाकृतियों की प्रस्तुति  विगत दिनों ब्लोगोत्सव प़र आप सभी ने देखी
 
रवीन्द्र प्रभात
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एक अरसे के बाद मैने कोई प्ले देखा..इस आभासी दुनिया से बाहर निकल कर :ललित शर्मा

पिछली  बातों  से आगे बढ़ते हैं-  तरह तरह की जुगत लगाई जाती है, उसे उसकी कहानी सुनाई जाती है, जेलर साहब समेत पूरा स्टाफ़ पुलिस द्वारा गढी गई कहानी का नाटक करके भी दिखाता है, जिसके आधार पर उसकी सजा मुकर्रर की गई थी। अंत
 
रवीन्द्र प्रभात
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आरोप है कि उसने अपनी पत्नी का गला दबा कर हत्या की है।

स्वागत है आप सभी का पुन: परिकल्पना पर मैं ललित शर्मा !डा. डी. डी. सोनी जी से मिलवाने के बाद  एक नाटक की प्रस्तुति को  वयां करने  जा रहा हूँ नाटक का शीर्षक है - फ़ांसी के बाद? ब्लॉग उत्सव में अब तक आपने हर विधाओं की
 
रवीन्द्र प्रभात
टैग: नाटक
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कलाकार को स्वतंत्रता नही होती कि किसी के आराध्य देव की पेंटिंग्स में न्युड बनाया जाए :डॉ.डी.डी.सोनी

स्वागत है पुन:आपका परिकल्पना पर.... हमारे साथ  लगातार बने हुए हैं देश के प्रख्यात चित्रकार डॉ.डी.डी.सोनी....आईये - उसी कड़ी को आगे बढाते हुए चलते हैं और उनसे कुछ प्रश्नों के जवाब लेते है।अभी भारत में चित्र कला को लेकर विवाद काफ़ी
 
रवीन्द्र प्रभात
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अगर आपको आगे बढ़ना है तो डिमांड पर काम करना भी आना चाहिए.

स्वागत है आपका पुन: परिकल्पना पर आईये सोनी जी के साथ बातचीत का यह क्रम आगे बढाते हैं -   शायद इसे ही कहते हैं "हपट परे तो हर-हर गंगे", हा हा हा.......वर्तमान समय में हम देख रहे हैं कि चित्रकारी पर संकट मंडरा रहा है. हाई रेजुलेशन कैमरे
 
रवीन्द्र प्रभात
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चित्रकार को भी कई मुकाम से गुजरना पड़ता है : डा. डी. डी. सोनी

आपका  स्वागत  है पुन: परिकल्पना पर ...ब्रेक से पहले हम मुखातिब थे डी. डी. सोनी जी से ...आईये बातचीत के इस सिलसिले को आगे बढाते है .....  आपने इस क्षेत्र मे बहुत काम
 
रवीन्द्र प्रभात