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आलोक पुराणिक की अगड़म बगड़म

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26 Apr 2010
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साधनाजी,उपासनाजी, उर्फ…

बाबाओँ का हल्ला है। बल्कि दिल्ली के बाबा भीमानंद का विकट कालगर्ली रैकेट देखकर यह नहीं समझ आ रहा है कि अब बाबाजी का कौन सा मुहल्ला है। सारे मुहल्ले ही उनके नजर आ रहे हैं। जिसे बाबा समझो वह काल गर्ल का एजेंट निकलता है। जिसे काल गर्ल का एजेंट समझो, वह
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बगैर उनके ज्यों नाली बगैर कूड़ा

दिल्ली को अगर आटो वालों से अलग कर के देखें, तो दिल्ली बहुत ही चिरकुट टाइप का शहर है। यह शहर कितना चंट और बदमाश है, यह पता दिल्ली में आते ही कैसे लगता है, आटो वालों से डील करके। एक मेहमान ने आटो वाले के हाथों कटने के बाद कमेंट किया था, इस शहर के आटो वाले ज
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संडे यूं ही-तब बजट किसलिए होता है

तब बजट किस लिए होता है आलोक पुराणिक कुछ दिनों पहले शरद पवारजी, केंद्रीय कृषि मंत्री जो कहते थे, उसका आशय यह होता था कि महंगाई में हमारा हाथ नहीं है। अंतरराष्ट्रीय कारक जिम्मेदार हैं। पेट्रोलियम मिनिस्टर बताते थे कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल
Mar 07 2010 10:48 AM
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अंधेरे का समाजवाद

अंधेरा है, दूर तक अंधेरा है। ना जी, ये कोई कविता नहीं हो रही है। विशुद्ध यथार्थवाद है। बिजली गायब रहे, तो कवि जागृत नहीं होता। कविता लिखने की न्यूनतम जरुरतों में से एक बिजली की उपस्थिति है। यह तो व्यंग्यकार ही सख्त जान प्राणी है, जो बिजली जाने पर भी
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किससे बात करें

एक काम जो बरसों से होता रहा है, पर इधर कुछ ठप सा पड़ा हुआ है, वह है भारत पाकिस्तान की शांति वार्ता। जितनी भी हुई, उसमें शांति कम थी, वार्ता अधिक थी। पर अब वह भी नहीं है। सवाल यह उठता है कि पाकिस्तान में वार्ता किससे की जाये । 1- क्या राष्ट्रपति जरदार
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ट्रेड में सब फेयर

यह निबंध उस छात्र की कापी से लिया गया है, जिसे निबंध प्रतियोगिता में पहला स्थान मिला है। निबंध का विषय था ट्रेड फेयर- ट्रेड फेयर देखकर हमें पता लगता कि ट्रेड चाहे जैसा हो, करने वाले उसे फेयर ही मानते है। ट्रेड फेयर में पाकिस्तानी स्टाल वाले दिल्ली का
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मास्टर आफ जुगाड़ मैनेजमेंट

पिछले पूरे हफ्ते खबरें आती रहीं कि आईआईएम के एमबीए के लिए आयोजित प्रवेश परीक्षा कैट पर कंप्यूटर का माऊस भारी पड़ गया। जिन्हे आगे जाकर मैनेजर बनना है, उनके लिए कैट परीक्षा ठीक से मैनेज नहीं हो पायी। इस खाकसार का मानना है, जो कंप्यूटर कैट के टाइम ठीक स
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पैसेंजरों को सताने के कुछ उपाय

एयर इंडिया के पायलेट हड़ताल पर गये। पहले बैंक वाले सतत स्ट्राइक पर रहते थे, अब उनकी जगह पायलेटों ने ले ली है। हड़तालरत एक पायलेट ने मुझसे पूछा कि पैसेंजरों को सता कर अपनी मांगे जल्दी मनवायी जा सकती हैं। सो प्लीज पैसेंजरों को सताने के उपाय बताओ, कुछ ऐ
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नयी दिल्ली रेलवे स्टेशन वाया करनाल

तमाम दिल्लीवासियों के लिए जारी खास ट्रेफिक एडवाइजरी इस प्रकार है- 1- तमाम रैलियों औऱ रैलों के चलते लक्ष्मीनगर से नयी दिल्ली रेलवे स्टेशन जाने वाले वाया करनाल जाने के लिए तैयार रहें। आईटीओ पर ट्रेफिक को डाइवर्ट किया जायेगा। डाइवर्ट होते होते बंद करनाल
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दिल्ली से निकलकर अपहरण

दिल्ली से निकलने वाली एक गाड़ी को मेरठ के पास रोक लिया गया। दिल्ली से निकलने वाली अमृतसर स्वर्णजयंती गाड़ी को पंजाब में किसानों ने रोक लिया। भुवनेश्वर से चली राजधानी एक्सप्रेस का नक्सलियों ने अपहरण कर लिया। रेल यात्रा का मामला भी रिस्क में कुछ कुछ हव
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खौफ की सुरंग

मेट्रो ट्रेन फिर ठप हो गयी। राजीव चौक के पास फंस गयी। सुरंग में फंसकर यात्री परेशान हो गये। 1- इस खाकसार का सुझाव है कि मेट्रो वालो को ट्रेन यात्रा के साथ एडवेंचर गेम्स के पैसे भी चार्ज कर लेने चाहिए। द्वारिका से राजीव चौक के सफर के एडवेंचर गेम का ना
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संडे यूं ही-विकास का नैनो माडल

वैधानिक चेतावनी-यह व्यंग्य नहीं है खबरें बदल रही हैं। रोजगार बड़े शहरों के मुकाबले छोटे शहरों में तेजी से बढ़ रहा है। तमाम कंपनियां माल बेचने के लिए छोटे कस्बों को ज्यादा बेहतर पा रही हैं। मोबाइल सेवा देने वाली कंपनियों का कहना है कि अब विस्तार की गु
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चोर आये और दूध पी गये

दूध के भाव बढ़ गये है, डेरी भले ही मदर के नाम की है, पर वहां के भाव सुनकर ग्रांडफादर याद आ रहे हैं। दूध के भाव बढ़ कर जहां पहुंच रहे हैं, वहां पर उनके पहुंचने से आने वाले दिनों में चोरी की खबरें बदल जायेंगी। आने वाले दिनों में चोरी, डाके की [...]
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फाइल में बम

संथानमजी कह रहे हैं कि हमारे परमाणु बम में दम नहीं है। सरकार कह रही है कि संथानमजी की बात में दम नहीं है। कुछ एक्सपर्ट कह रहे हैं कि संथानमजी भी सही हैं और सरकार भी। पब्लिक समझ नहीं पा रही है कि किसकी बात को दमदार माना जाये। [...]
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कुछ गिफ्टात्मक आईडिये

हाल में दीवाली पर इस खाकसार ने जो गिफ्ट झेले हैं, उन पर कुछ गिफ्टात्मक आइडिये इस प्रकार हैं- 1- गिफ्ट में जो कप, जार, ग्लास मिले हैं, उन्हे लेकर एक हंड्रेड परसेंट गिफ्ट शाप खोल दीजिये। इन्हे मुफ्त में भी लेने को कोई तैयार न होगा। एक बात समझ नहीं आती
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दिल्ली में शादी

शादी यूं मुश्किल काम है, इस बात को वह ज्यादा समझते हैं, जिनकी हो जाती है। जिनकी नहीं हो पाती है, शादी उन्हे भी मुश्किल लगती है। पर उनकी मुश्किलें अलग तरह की और काल्पनिक होती हैं। रीयल प्राबलम शादी के बाद शुरु होती है। पर कई बार रीयल प्राबलम शादी से प
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संडे यूं ही-सोने में दम बाकी है

वैधानिक चेतावनी-यह व्यंग्य नहीं है पिछली दीवाली से इस दीवाली के बीच सोने के भावों में करीब 37 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। पिछली दीवाली पर सोना 11,800 रुपये प्रति दस ग्राम था, यह अब करीब 16,200 रुपये प्रति ग्राम हो गया है। यानी एक साल में सैंतीस प्रतिशत
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सेंट रावण स्कूल

क्या वक्त था,अच्छे स्कूलों, गुरुकुलों के आचार्य खुद आगे होकर बच्चों को मांग कर लाते थे, एडमीशन के लिए। राजा दशरथ से विश्वामित्रजी राम और लक्ष्मण को मांग कर ले गये थे। भले दिन थे वो, अब के से नहीं। अब राजा दशरथ बालकों को लेकर किसी कायदे के स्कूल में ज
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आर्मी में डीडीए

खबरें हैं कि आर्मी के कई मामले ढीले चल रहे हैं। जितनी तोपें खरीदी जानी चाहिए थीं,उतनी तोपें नहीं खरीदी गयीं। लड़ाकू जहाज भी लक्ष्य से कम खऱीदे गये। भारतीय आर्मी में नगर निगम का सा माहौल बन रहा है। कुछेक मामलों में आर्मी में डीडीएगिरी होने का शुबहा भी
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होम वर्क की वर्कशाप

दिल्ली के स्कूलों का एक अघोषित उद्देश्य यह भी है कि पेरेंट्स को भी प्रोग्रेस, ज्ञान और विद्या के पथ पर अग्रसर करते रहे हैं। संस्कृत के एक श्लोक का आशय है कि विद्यार्थिनो को कुत सुख यानी विद्यार्थियों को सुख कहां। सो दिल्ली के स्कूल पेरेंट्स के सुख हर
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शायर, सिंह और समोसे

कहावतें चलती रहती हैं, हालात बदल जाते हैं। कहावत चल रही है, लीक छोड़कर तीन चलें, शायर, सिंह,सपूत। सिंह तो अब बचे नहीं, तमाम अभयारण्यों से खबरें आ रही हैं कि सिंह अब देखने को भी नहीं बचे हैं। लीक क्या छोड़ेंगे, सिंह तो दुनिया ही छोड़ गये। शायरों पर बह
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संडे यूं ही-नकली का मजबूत अर्थशास्त्र

वैधानिक चेतावनी-यह व्यंग्य नहीं है अर्थशास्त्र का पुराना नियम है कि बुरे सिक्के अच्छे सिक्कों को चलन से बाहर कर देते हैं। बुरा ज्यादा चमकदार होता है, बुरा ज्यादा असरदार दिखता है और बुरा बहुत सस्ता होता है, अच्छे और असली के मुकाबले। यह नियम सिर्फ मुद्
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दिखाने की बाडी और…

जिम देखो, कैसा भला सा नाम है, पर किसी जिम में घुस कर देखो, तो कैसी भयंकर भयंकर बाडियां दिखायी देती हैं, फोटुओं में। कई बालक उन फोटुओँ को देखते हुए कुछ कुछ करते दिखायी देते हैं, बाद में कुछ पाऊडर टाइप खाकर मसल फुलाते हैं, जो वैसे फूलती दिखती नहीं हैं,
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बुल बनाम आईसक्रीम

मुंबई शेयर बाजार का सूचकांक सेनसेक्स नेताओं के ईमान से भी गया गुजरा हो लिया है, कितना गिरेगा, कुछ पता नहीं चल पा रहा है। जानकार बताते हैं कि सेनसेक्स की हालत यह तबसे हो गयी है, जब से मुंबई शेयर बाजार के बाहर एक सांड़ की मूर्ति की स्थापना की गयी है। स
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हैं भी और नहीं भी

वह है भी और नहीं भी। दिखता है और नहीं भी, मानो तो है, नहीं मानो तो है भी। क्या ये बातें ब्रह्म के बारे में हो रही हैं। नहीं जी, म्युनिसिपल कारपोरेशन आफ दिल्ली उर्फ एमसीडी के 45000 कर्मचारियों की बात हो रही है। जो हैं भी, नहीं भी। रजिस्टर [...]
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ब्लागर योगेश वर्माजी को पितृशोक

चर्चित ब्लागर, शानदार गीत-गजल लिखने वाले ब्लागर -(ब्लाग swapnyogesh.blogspot.com )योगेश वर्माजी के पिताश्री कल रात 13 जुलाई, 2009 को नहीं रहे। योगेशजी कई दिनों से पिताश्री की सेवा-सूश्रुषा में संलग्न थे। परम पिता परमात्मा से प्रार्थना है कि श्री योगे
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घंटाभंगुर बिजली

बिजली दर्शन से जुड़े कतिपय महत्वपूर्ण पहलू इस प्रकार हैं- जीवन क्षणभंगुरम् च बिजली घंटा भंगुरम् ज्ञानी पुरुषस्य यह लक्षणम्,ना बिजली आने की खुशी, ना बिजली जाने का गम भावार्थ-जीवन क्षणभंगुर है और बिजली घंटाभंगुर है। अभी आयी है, अभी चली जायेगी। कहां से
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ज्ञानी तरह तरह के

ज्ञान सिर्फ वहीं नहीं है, जहां वह दिखता है। इधर रिसर्च की तो पता चला कि ज्ञानी वह नहीं है, जिसे ज्ञानी माना जाता है। 1- टेलीकाम के ज्ञानी टेलीकाम इंजीनियर नहीं हैं। एक हीरो बताता है कि वह वाला मोबाइल नेटवर्क सबसे सालिड है। यूं यह हीरो शायद ग्रेजुएट भ
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आम बजट 2009-10-बातें ज्यादा,उपाय कम

वैधानिक चेतावनी-यह व्यंग्य नहीं ह आम तौर पर बजट भाषण आम तौर पर दूसरे भाषणों से अलग माना जाता है, इसमें ठोस आंकड़ों की बात होती है। ठोस अनुमानों की बात होती है। पर 2009-10 के आम बजट के भाषण को देखें, तो पता लगता है कि इसमें बजट कम है, भाषण ज्यादा है।
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अमर सिंहजी के शेर पर

बजट कर प्रस्तावों पर डिस्कशन के कुछ अंश, जिन्हे अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया था। मेरा सुझाव है कि हमें सीरियलों में चल रहे अफेयरों पर कर लगा देना चाहिए। सीरियल में अगर अफेयर नहीं होंगे, तो उन्हे कौन देखेगा। बगैर अफेयर की लाइफ तो सब झेल रहे हैं। मेरी
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ऐसे हुनर, कैसे हुनर

उस्ताद वित्तमंत्री का काम मजे का है, तरह तरह के घाटे बताते हैं। फोटू खिंचाते हैं। फिर कार में बैठकर चले जाते हैं। इंटरव्यू देते हैं। घाटे पर भी इंटरव्यू देते हैं। क्या बात है। बेटा वित्तमंत्री की नौकरी घणी मुश्किल है। इत्ती कि इस नौकरी के बाद छोटी मो
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सरकार की तरह नहीं

गुरुजी हमारी जेब में पाँच रुपये हों, तो हम सात रुपये के समोसे नहीं ले सकते, पर सरकार घाटा उठाकर खर्च कैसे कर लेती है। बेटा सरकार को सात क्या सात अरब के समोसे खरीदना भी शोभा देता है। गैरजिम्मेदारी, आय से ज्यादा खर्च और लफ्फाजी सरकार को ही शोभा देती है
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हाय, नो टेंशन

अभी गरमी में जाती बिजली को रो रहे थे कि अब बरसात में उफनती नालियों पर रोने का सीजन आ लिया है। सर्दियों में कोहरे की दुर्घटनाओं पर रोते थे। आवहु सब मिल बैठें रोवहु भाई, सतत रोवहु भाई। बिजी रहता हूं एक मसले पर रोने में, तो दूसरे कई टेंशन याद नहीं रहते।
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साफ्ट साफ्टवेयर बनाम हार्ड पहलवान

एयर इंडिया से खबरें हैं कि सेलरी देने की रकम का भी टोटा है। हवाई जहाज हवाखोरी करते हैं, पर पायलेट तो हवा खाकर जिंदा नहीं रह सकते। बड़े बड़े हवाबाज जमीन पर उतर रहे हैं। इधर तो डर सा लगने लगा है हवाई जहाज में उड़ने में। क्या पता पायलेट ऊपर ले जाकर [...
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सुपरमैन का लैटर टू दादा

किस्सा यूं है कि अमेरिका का सुपरमैन वहां की मंदी से परेशान होकर इंडिया आ लिया था। अब बजट से ठीक पहले सुपरमैन से दादा प्रणब मुखर्जी को यह खत लिखा है- दादा घणी आफत आ ली है, अमेरिका से यहां आया था कि रोजगार मिल जायेगा। पर यहां की हालत देखकर तो डर [...]
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संडे यूं ही-सिर्फ इत्ता ही

वैधानिक चेतावनी-यह व्यंग्य नहीं है चालीस से ज्यादा साल निकाल दिये इस जिंदगी के। कितने क्षण ऐसे हैं, जब ऐसा लगा हो कि यह क्षण ऐसा है, जब लगा हो कि अब मामला खल्लास भी हो ले, तो प्राबलम नहीं। बहुत कम-बहुत पहले जब पत्नी मास्टर आफ लाइब्रेरी साइंस का कोर्स
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डाल्फिन बनाम नाली

दुनिया आंदोलनों के मामले में इत्ती आगे निकल ली है, और हम वही पुराने आंदोलनों पर अटके हुए हैं। इधर बिजली पानी, सड़क के लिए जूझ रहे हैं, कतिपय विदेशी फंडेड आंदोलन डाल्फिन बचाओ आंदोलन, मंगल ग्रह के जीवन संरक्षण के लिए कार्यरत हैं। सच्ची, हमारी शिकायतें
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हसीना उर्फ आटो

इधर आटो रिक्शाओँ के अध्ययन में जुटा, तो कई ज्ञान की बातें मालूम पड़ीं। एक आटो के पीछे लिखा था-फिर मिलेंगे। ऐसा अकसर होता है आटो वाले से पूछें कि अलां कालोनी चलोगे, तो वह बताता है कि नहीं, वह तो फलां कालोनी जा रहा है, और चला जाता है, संदेश देकर फिर [.
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ज्ञान वाया सीएनजी

भारतीय ज्ञान से प्रभावित होकर वह विदेशी इंडिया आया था, बोला मैं धैर्य, संयम, त्याग, कंसट्रेशन, जिजिविषा, लगातार संघर्ष क्षमता, सहनशीलता, प्रेम, ध्यान, समस्याओं को नये तरह से निपटाने की कला, प्रात जल्दी उठने की आदत सीखना चाहता हूं, प्लीज बताइए,कहां जा
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प्रेम में ट्रांसफार्मर

जिस इलाके में रहता हूं, वहां का ट्रांसफार्मर फुंक गया है, बिजली अठ्ठाईस घंटे से नहीं आ रही है। चेतना में सिर्फ ट्रांसफार्मर घुस गया है। इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गनाइजेशन वाला एक बंदा बता रहा है कि चंद्रयान तीन की तैयारी चल रही है। मैं पूछ रहा हूं कि भई