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गीतों की महफिल

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26 Apr 2010
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यह लीजिये खजाने की चाबियों का गुच्छा!

आज की पोस्ट में कोई गाना नहीं सुनायेंगे पर आपको गाने के खजाने की चाबी नहीं बल्कि चाबियों का गुच्छा ही थमा देंगे। लूट लें जितना लूटने की हिम्मत आपमें है।अन्तर्जाल पर गाने सुनाने वाले बहुत से जालस्थल हैं, पर वे सिर्फ फिल्मवाइज गाने ही सुनाते हैं या फिर
 
सागर नाहर
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मियां की मल्हार और एक अजीब कहानी : बादल उमड़ बढ़ आये

कुछ दिनों पहले मास्साब पंकज सुबीर जी के चिट्ठे पर, महान गायक पं कुमार गन्धर्व के सुपुत्र पं मुकुल शिवपुत्र के बारे में पढ़ा था कि कुमार गंधर्व के सुपुत्र मुकुल शिवपुत्र शराब के लिए भोपाल की सड़कों पर दो- दो रुपयों के लिए भीख मांग रहे हैं। यह समाचार पढ़ कर
 
सागर नाहर
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पंडित नरेन्द्र शर्मा, अली अकबर खां और लताजी का एक अनोखा गीत

-गीतकार आदरणीय पंडित नरेन्द्र शर्माजी को उनकी पुण्यतिथी (11 फरवरी) पर सादर समर्पित-आप कल्पना कीजिये अगर हिन्दी के सुप्रसिद्ध गीतकार पंडित नरेन्द्र शर्माजी (Pt. Narendra Sharma), जिनके अधिकांश गीत शुद्ध हिन्दी में लिखे गये हैं; अगर उर्दू में गीत लिखें तो!
 
सागर नाहर
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Feb 14 2010 09:02 AM
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101वीं पोस्ट और रूना लैला की मधुर आवाज... बोले रे पपीहरा

ना; यह गुड्डी फिल्म वाला बोले रे पपीहरा नहीं है! यकीनन आपने यह गीत नहीं सुना होगा।पिछली पोस्ट में गड़बड़ हुई थी ना, सुमन कल्याणपुर जी के गीत को रूना लैला का बता दिया और मैटर सुमनजी की गज़ल का लिख दिया था। बहुत बड़ा घोटाला हो गया था उस दिन।उसे सुधारने का आज
 
सागर नाहर
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क्षमा याचना

कल जल्दबाजी में बहुत बड़ी गड़बड़ हो गई। रूना लैला के गीत पर पोस्ट लिखना चाह रहा था, मैटर लिख दिया और कॉफे में कुछ ग्राहक आ गये तो उन्हें निबटाने के बाद जब वापस काम शुरु किया तो यह याद ही नहीं रहा कि गीत कौनसा पोस्ट करना है। गाना सुना... वह मिर्जा गालिब
 
सागर नाहर
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दिले नादां तुझे हुआ क्या है: सुमन कल्याणपुर की आवाज में सुन्दर गज़ल

आपने मिर्ज़ा गालिबمرزا اسد اللہ خان की सुप्रसिद्ध गज़ल दिले नादां तुझे हुआ क्या है ... कई गायकों की आवाज में सुनी होगी। लगबग सभी गायकों ने इस सुन्दर गज़ल को अपने अपने तरीके से गाया। कुछ बहुत प्रसिद्ध हुई और कुछ गुमनामी के अंधेरे में खो गई। इस सुन्दर
 
सागर नाहर
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दुखियारे नैना ढंढे पिया को: मदनमोहन जी द्वारा संगीतबद्ध सुन्दर गीत

महान संगीतकार मदनमोहन जी के बारे में अल्पना वर्मा जी ने अपने लेख में विस्तृत जानकारी दी, उनके गाये गीत भी सुनवाये। आज मैं आपको उनके बारे में ज्यादा ना बताते हुए सीधे उनका संगीतबद्ध एक सुन्दर गीत सुनवाता हूं। यह गीत राग गौड़ सारंग में ढला हुआ है पर इसम
 
सागर नाहर
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सुन्दरता के सभी शिकारी: तलत महमूद

में बनी और दिलीप कुमार- नरगिस अभिनीत फिल्म जोगन (Jogan) दिलीप- नरगिस के अभिनय के अलावा मधुर गीतों के कारण भी बहुत ही लोकप्रिय हुई। इस फिल्म में संगीतकार बुलो सी रानी ने मीरा बाई के भजनों को बहुत ही सुन्दर धुनों में ढ़ाला था। सुन्दर धुन के साथ अगर गीता
 
सागर नाहर
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उगवला चंद्र पुनवेचा: मराठी नाट्य संगीत का एक दुर्लभ गीत

बहुत दिनों के बाद ही सही पर जो कुछ आप सुनेंगे, आनंदित हुए बिना नहीं रह पायेंगे। यह एक मराठी नाट्य संगीत का गीत है। इसे गाया है बकुल पण्डित ने। और १९४६ में प्रदर्शित हुए नाटक पाणिग्रहम में गाया जाता था। आप भाषा भले ही ना समझ पायें लेकिन आपको इस गीत को
 
सागर नाहर
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दिये क्यूं जलाये चला जा रहा है- मन्नादा का एक और मधुर गीत

हमारे प्रिय मन्नादा की प्रसिद्धी में एक और यशकलगी दादा साहब फाल्के पुरस्कार के रूप में जुड़ गई, लेकिन मुझ आलसी को एक पोस्ट मन्नादा को बधाई देते हुई एक पोस्ट लिखने का समय भी नहीं मिल पाया। मन्नादा के लगभग सभी गाने आपने सुने होंगे, लेकिन फिर भी कुछ ऐसे
 
सागर नाहर
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परदेसी क्यूं याद आता है.. एक दुर्लभ गीत सितारा बाई की आवाज में

मैने कई बार पहले भी जिक्र किया था कि मेरे पास दो ऑडियो कैसेट्स है जिनका नाम है The Vintage Era, इस संग्रह के कुछ गीत मैं आपको पहले सुना चुका हूं। आज बैठे बैठे एक और गीत याद आया " नगरी कब तक यूं ही बरबाद रहेगी... यह 1944 में बनी फिल्म मन की जीत का है
 
सागर नाहर
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स्मरशील गोकुल सारे: कुमारी फैयाज की आवाज में एक सुन्दर मराठी गीत

कुछ दिनों पहले मैं रेडियोवाणी की पुरानी पोस्ट्स देख रहा था। एक पोस्ट पर नज़र पड़ी जो हिन्दी फिल्मों की सबसे बढ़िया फिल्म दो आँखें बारह हाथ पर आधारित थी। उस पोस्ट में चालीसगांव वाले विकास शुक्लाजी ने एक बड़ी लेकिन बहुत ही जानकारीपूर्ण टिप्पणी दी थी। उस टि
 
सागर नाहर
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खाली पीली काहे को अक्खा दिन बैठ के बोम मारता है : स्व. किशोरदा का एक शरारती गीत

किशोर कुमार भी क्या कलाकार थे, कुछ भी अगड़म बगड़म गा दें, मजेदार गीत बन जाता था! देखिये इस गीत में कैसे किशोरदा, देवानद को चिढ़ाते हुए कह रहे हैं "खाली पीली काहे को अक्खा दिन बैठ के बोम मारता है"
 
सागर नाहर
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प्रिय अमुचा एक महाराष्ट्र देश हा : महाराष्‍ट्र का राज्य गीत

भारत के राष्‍ट्रगान एवं राष्‍ट्र गीत की तरह के भारत के कई राज्यों ने कुछ गीतों को राज्य गीत का सा दर्जा दे रखा है। फिलहाल आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र इन दो राज्यों के राज्य गीत मेरे ध्यान में है और संयोग से मेरे संग्रह में भी है। आज आपको इसकी पहली कड़ी में
 
सागर नाहर
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Sep 01 2009 09:58 AM
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द फर्स्ट इंडियल आईडल: मास्टर मदन

द फर्स्ट इंडियल आईडल: मास्टर मदन ( The first Indian Idol: Mr. Madan)इस शीर्षक से परसों ( दिनांक 23.08.2009 को) हिन्दुस्तान टाइम्स में एक लेख छपा है। स्व. मास्टर मदन (singer Master Madan) पर इस लेख के लिये हि.टा के वरिष्‍ठ लेखक श्री प्रवीण कुमार दोंती
 
सागर नाहर
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Aug 31 2009 01:04 PM
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बचपन की शरारतों की याद दिलाता एक अफ़लातून गीत… (Kitab, Gulzar, Masterji)

-- सुरेश चिपलूनकरहिन्दी फ़िल्मों में बाल मानसिकता और बच्चों की समस्याओं से सम्बन्धित फ़िल्में कम ही बनी हैं। बूट पॉलिश से लेकर मासूम और मिस्टर इंडिया से होते हुए फ़िलहाल बच्चों की फ़िल्म के नाम पर कूड़ा ही परोसा जा रहा है जो बच्चों के मन की बात समझने की बजाय
Aug 12 2009 12:38 PM
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सप्‍त सुरन तीन ग्राम गाओ

भले ही खाँ साहब ने शुद्ध बिलावल सही नहीं गाया हो, भले ही पखावजी का बांया अंगूठा नकली हो,भले ही तबले पर थाप हल्की पड़ी हो.... पर ज़ुईन खां साहब ने जितना भी गाया; बेदाला ही गया .. हमें तो उतना ही मधुर लगा जितना तानसेन ने गाया।सप्‍त सुरन तीन ग्राम....सप्‍त
 
सागर नाहर
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Aug 11 2009 11:47 AM
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न जी भर के देखा ना कुछ बात की: एक गीत पहेली

दूरदर्शन के दीवानों के लिये आज एक गीत पहेली! चंदन दास की इस सुन्दर गज़ल को पहचानिये...न.. न.. न.. इस पहेली में कोई पुरुस्कार नहीं मिलेगा सो अनुरोध है कि गूगल बाबा की शरण लिये बिना इस पहेली को हल करने की कोशिश कीजिये कि यह गज़ल आपने कहां सुनी है?दूसरा और
 
सागर नाहर
Aug 08 2009 09:45 AM
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अलविदा लीला नायडू...

अपनी पहली ही फिल्म में अपने सौंदर्य और अभिनय का लोहा मनवा देने वाली सुप्रसिद्ध अभिनेत्री लीला नायडू नहीं रही... उनको हार्दिक श्रद्धान्जली। फिल्म समीक्षा: अनुराधा 1960 इस फिल्म के गीत अफलातून जी ने आगाज़ पर चढ़ाये हैं सो यहां गाने ना लगाकर उस पोस्ट का ही
 
सागर नाहर
Jul 29 2009 05:57 PM
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रूठ के तुम तो चल दिये: राग हेमन्त में एक खूबसूरत गीत

आईये आज आपको एक बहुत ही खूबसूरत गीत सुनवाते हैं, इस गीत को अनिलदा ने राग हेमन्त में ढ़ाला है, ताल है दादरा। लताजी जब इस गीत के पहले और दूसरे पैरा की पहली पंक्‍तिया गाती है तब वे लाईनें मन को छू सी जाती है। आप ध्यान दीजिये इन दो लाईनों पर... हाल ना पूछ
 
सागर नाहर
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अब कहाँ सुनने को मिलता है ऐसा भरा-पूरा मालकौंस ?-२

पिछले दिनों संजय पटेल जी ने संगीत मार्तण्ड ओमकारनाथ ठाकुर जी के स्वर में राग मालकौंस में रची बंदिश पग घुंघरू बांध मीरा नाची रे.. सुनवाई और शीर्षक में एक हल्की सी शिकायत कर दी कि अब कहाँ सुनने को मिलता है ऐसा भरा-पूरा मालकौंस ? " उनकी शिकायत जायज भी त
 
सागर नाहर
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कैसे भाये सखी रुत सावन की: मल्हार राग, लताजी और सी रामचन्द्र जोड़ी की एक सुन्दर जुगलबन्दी

सावन की ऋतु, बरखा की बूंदे और मल्हार राग...अगर यह तीनों एक साथ मिल जायें तो किसको नहीं सुहायेगा! पर हमारी नायिका को भी सावन की रुत नहीं भा रही, अपनी सखी से शिकायत कर रही है कि कैसे भाये सखी रुत सावन की.......! क्यों कि उसके पिया उसके पास नहीं है, मिल
 
सागर नाहर
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तुम जाओ जाओ भगवान बने इन्सान बनो तो जानें; एक दुर्लभ गीत

वर्षों पहले जब मुझे पुराने गाने सुनने का शौक लगा था तब बहुत से ऑडियो कैसेट्स खरीदे। एक दिन एक बढ़िया सैट हाथ लगा नाम था The Sentimental Era- 1936-46 इस सैट में कई बढ़िया गीत थे जिसमें से रहमत बानो का गाया हुआ एक गीत मैं तो दिल्ली से दुल्हन लाया रे ओ बा
 
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फ़ूल ही फ़ूल खिल उठे मेरे पैमाने में: मेहदी हसन की आवाज और राग गौड़ मल्हार

दोस्तों सावन का महीना चालू हो गया है, भले ही जम के पानी ना बरस रहा हो लेकिन हल्की फुहारें ही सही; तन मन को शीतलता तो दे रही है, ऐसे में अगर राग मल्हार सुना जाये और वो भी शहंशाह ए गज़ल मेहदी हसन साहब के स्वर में तो कितना आनन्द आयेगा? हसन साहब बीमार हैं
 
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बीता हुआ एक सावन: लता जी का एक नायाब अनरिलिज्ड गाना

इस सुन्दर गाने को जमालसेन जी ने संगीतबद्ध किया था फिल्म पहले कदम के लिये परन्तु किसी कारण से यह गाना रिलीज नहीं हो पाया। इसे लताजी ने गाया गाया है। इस गाने के शब्दों की खूबसूरती पर खास ध्यान दीजिये। शब्दों को किस खूबसूरती से पिरोया गया है जैसे- आँखों
 
सागर नाहर
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ओ जिन्दगी के मालिक तेरा ही आसरा है: लताजी- नाजनीन 1951

लताजी के पता नहीं और कितने गीत हैं जो हमने सुने ही नहीं, जैसे जैसे खोजता हूं एक से एक लाजवाब नगीने मिलते जाते हैं। आज ऐसा ही एक और कम सुना-सुनाया जाने वाला गीत मिला है जो आपके लिये प्रस्तुत है। यह गीत फिल्म नाजनीन 1951 का है। गीतकार शकील संगीतकार गुल
 
सागर नाहर
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मज़हबी एकता का एक सुन्दर गीत !!!

देश में चुनाव सम्पन्न हो गये हैं और इस चुनाव में बहुत से लोगों ने हिन्दुस्तानियों को एक दूसरे से लडाने के प्रयास किये। इस गीत में ऐसे फ़िरकापरस्तों के लिये करारा जवाब भी है और अपने देश की संस्कृति की साझा झलकी भी, फ़िल्म: धर्मपुत्र (1961) संगीत: नारायण
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ज़मीन की खाक़ होकर आसमान से दिल लगा बैठे

कुछ भी नहीं कह सकेंगे इन सुंदर गीतों के बारे में; बस आप तो इन दो गीतों को सुन लीजिये, और इन गीतों को रचने वाले कलकारों को दाद दें. कि क्या खूबसूरत गीत उन्होने बनाये। दोनों ही फिल्म चोर बाजार Chor Bazar(1940 ) से चोरी किये हैं| गीतकार हैं शकील बूंदायू
 
सागर नाहर
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रफी साहब संगीतकार भी थे?

बड़ा अजीब सा प्रश्न है ना? लेकिन क्या आपको ऐसा नहीं लगता कि इतने गुणी गायक और संगीत के इतने बड़े ज्ञाता मुहम्मद रफी साहब ने किसी फिल्म में संगीत क्यों नहीं दिया। ये प्रश्न मेरे मन में बरसों से था और आखिरकार गुजरात समाचार के वरिष्ठ हास्य लेखक अशोक दवे क
 
सागर नाहर
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जग कहता मैं हूं अंधी-मैं कहती अंधा जग सारा: मन्नाडे द्वारा संगीतबद्ध एक और गीत

आपको याद होगा मैने पिछले साल आपको मन्नाडे द्वारा संगीतबद्ध एक मधुर गीत "भूल सके ना हम तुझे" सुनवाया था। उस गीत से पता चलता है कि मन्नाडे कितने गुणी, कितने विद्वान कलाकार हैं। गायक होने के साथ वे कितने बढ़िया संगीतकार मन्नादा हैं हमें पता ना था। ओर्कुट
 
सागर नाहर
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फागुन के दिन चार रे: आशाताई की आवाज और राग होरी सिन्धूरा

आशाताई ने अपनी गायिकी में जो जो प्रयोग किये उनमें से कई हमने देखे- सुने हैं। संजय भाई पटेल जी ने हमें आशाजी की आवाज में मियां की मल्हार में एक तराना सुनाया था जिसे आज भी मैं कई बार सुनता रहता हूँ। आज मैं आशाजी के एक नये प्रयोग के बारे में बता रहा हूँ
 
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दीनन दुख: हरन देव: सूरदास का एक भजन दो दिव्य स्वरों में

रहस्यवादी कवि सूरदास का साहित्य जगत में बहुत ऊंचा स्थान है। बचपन से हम सूरदास के बारे में पढ़ते आये हैं सो उनके बारे में हम सब जानते ही हैं, सो सीधे सीधे उनके एक भजन दीनन दुख: हरन देव सुनते हैं। यह सुंदर भजन जगजीत सिंह और पी. उन्नी कृष्णन ने गाया है।
 
सागर नाहर
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एक संगीत पहेली

आज  कोई गीत नहीं! आज महफिल के श्रोताओं के लिये एक पहेली। पंडित वेंकटेश कुमार का गाया हुआ राग हमीर का यह वीडियो देख  कर बताईये राग   हमीर पर कौनसा प्रसिद्ध हिन्दी (फिल्मी) गीत ढला हुआ है?   नहीं पहचान पाये! चलिये पं नचिकेता कु
 
सागर नाहर
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रफी साहब का एक और अंग्रेजी गीत सुनिये

आप रफी साहब का गाया अंग्रेजी गीत तो कबाड़खाना और अल्पना जी के ब्लॉग व्योम के पार पर सुन चुके हैं पर क्या आपने यह गीत सुना है? जी हां रफी साहब ने Although We Hail from Different Land के अलावा यह अंग्रेजी गीत भी गाया हुआ है। the she i love is the beauty
 
सागर नाहर
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तारीफ उस खु़दा की जिसने ज़हाँ बनाया: जगजीत सिंह

जगजीत- चित्रा की जोड़ी ने भी क्या खूब गज़लें गाई है, ज्यादातर तो आपने सुनी होगी पर कुछ ऐसी भी है जो आजकल कहीं सुनाई नहीं देती। अब अति वाचालता भी ठीक नहीं हम तो बस चुप ही रहेंगे आप ही फैसला कीजिये... तारीफ़ उस ख़ुदा की जिसने जहां बनाया, कैसी ज़मीं बनाई क्य
 
सागर नाहर
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नक़्श फ़रियादी है शोखी-ए-तहरीर का

सालों पहले मेरे फैमिली कैसेट विक्रेता ( हाँ, वैसे ही जैसे फैमेली डॉक्टर होते हैं) ने मुझे जबरन एक चार कैसेट का सैट थमा दिया, और बोला यार ये सैट बरसों से बिक नहीं रहा। मैं उस सैट को देख कर उछल ही पड़ता पर उसके सामने मैने अपनी खुशी जाहिर नहीं होने दी क्
 
सागर नाहर
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यही बहार है, , दुनिया को भूल जाने की, खुशी मनाने की- लताजी का एक और मधुर गीत

लताजी की आवाज की एक खास बात पर आपने ध्यान दिया होगा, जब वे कोई वियोग, दुखी: या दर्द भरा गीत गाती है तो उनके स्वर में बहुत दर्द सुनाई देता है मानो लता जी उस गीत के भावों को अपने मन में चित्रित कर गाती है। ठीक इसी तरह लता जी के गाये शोख, मस्ती भरे गीतो
 
सागर नाहर
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मिट्टी की सौंधी खुशबू वाले मेरे पसन्दीदा गीत… (भाग-2)

सबसे पहले क्षमा चाहूँगा कि दो महीने के अम्बे अन्तराल के बाद दूसरा गीत पेश कर रहा हूँ, असल में व्यस्तता कुछ ऐसी रही कि गीतों पर लिख नहीं पाया… मिट्टी की सौंधी खुशबू वाले मेरे पसन्दीदा गीतों की श्रृंखला में यह गीत पाठकों की सेवा में पेश करना चाहता हूँ…
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महफ़िल के चाहने वालों के लिये एक छोटी सी क्विज, :-)

हिन्दी फ़िल्म संगीत में बहुत से गीत ऐसे हैं जिनकी शुरूआत गायक मद्धम सुर में गुनगुनाते (Humming) हुये करते/करती है । इस पोस्ट का उद्देश्य है कि ऐसे गीतों को याद किया जाये । उदाहरण के लिये: रफ़ी साहब का मस्ताने अंदाज में "दीवाना हुआ बादल" की शुरूआत में ग