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मीडिया व्यूह

http://neeshooalld.blogspot.com/
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17 Jun 2010
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इ भोलोगिंग का होई ...........अपनी तो जैसे तैसे ...थोड़ी ऐसे या वैसे आपका क्या होगा ? neeshoo tiwari

अपनी तो जैसे तैसे ...थोड़ी ऐसे या वैसे आपका क्या होगा ? क्या होगा ये तो सब को पता है......बोलो बोलो .......बोलो न ...प्प्लीज़ ......हाँ पता है.......पर आदत से तो मजबूर हैं न .........अब जब तक पोस्ट सबसे ऊपर न देखिगे तब तक यस्यम्यास फ़ोन करके दुकान चलनी
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मेरठ आये दिल्ली के ब्लोगर .........जूनियर ब्लोगर एसोसियेशन में संचालक की दावेदारी अविनाश जी की ...( neeshoo tiwari )..१५ जून इलाहाबाद आइयेगा जरूर

सप्ताहभर से अधिक समय तक चला विवाद (वैचारिक मतभेद ) का पताछेप आखिरकार मेरठ ब्लोगर मिलन से हुआ .....मेरठ पहुंचे अविनाश जी , पवन चन्दन जी , सुमित तोमर जी , उपदेश सक्सेना व भाई मिथिलेश दुबे जी के साथ बैठ चाय की चुस्कियों के बीच ब्लोगिंग के वर्तमान परिदृश्य
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मेरा वैचारिक मतभेद जरूर था ( जो अब दूर हो चूका हैं...मुझे दुख है इस विवाद से ) पर मनभेद कभी भी नहीं रहा ..और न है ...और न ही रहेगा कभी .neeshoo tiwari

कभी कभी कुछ ऐसा हो जाता है.....जिसकी हम उम्मीद भी नहीं कर सकते हैं .......पर हमें बाद में पछतावा जरूर होता है.......पिछले कुछ दिनों में जो कुछ हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण है..........( दिल्ली ब्लोगर सम्मलेन को लेकर )....वैसे भी क्या हम अपने से बड़ों के बिना आगे
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मठाधीशों का तो अपराध छम्य लेकिन जूनियर ब्लोगर ही बलि की वेदी पर क्यूँ ??????शायद हो कोई जवाब ..........गलती जिसकी हो वो सामूहिक रूप से माफी मांगे ...n

है मुझे मंजूर लेना खून का इल्जाम सर पर है मुझे स्वविकार कहलाना दीवाना (कौन है जो होश में रहता हमेशा )पर कहे कोई ही मैंने छला उसको कल्पना में भी किसी कीहै असंभव हो कभी अपराध मेरा ..( लेविस कैरोल )मठाधीशों का तो अपराध छम्य और जूनियर ब्लोगर का अपराध तो
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जूनियर ब्लोगर एसोसिएसन के हमले से तोपची ब्लोगर भूमिगत ((कहाँ गए गुटबाज ) ........पहली बैठक १५ जून इलाहाबाद (अब होगी कारवाई )..neeshoo tiwari)

जूनियर ब्लोगर एसोसिएसन का हमला जूनियर ब्लोगर एसोसिएसन के हमले से तोपची ब्लोगर भूमिगत हो गए हैं ..........वजह तो साफ है.........सामूहिक विरोध ......दिल्ली के हर नुक्कड़ पर जाम लग गया ......जिन्दगी ठहर सी गयी क्यूँ भाई .........अब देखो न जवाब का विगुल कैसे
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ब्लोगर(कोर्ट ) की नोटिस के इन्तजार में सो नहीं पाता ...(पाबला, अविनाश,खुशदीप,अजय झा..सावधान )..अब अगला नंबर आपका ? ( आग में घी डालनेवालों लपट आगई)

विवाद ....................ब्लॉग जगत में ये पहली बार नहीं हुआ है.......पर युवा ब्लोगर ने जिस तरह से अपनी बात रखी .........उससे दिल्लीवाले दलद्लिये बेनामी के साथ ही कमेन्ट कर सकते हैं ..........मूंह तो शायद ही किसी ने देखा हो ( विवाद के बाद
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अविनाश जी दें अब जवाब .(सम्मानित ब्लोगर हो क्या ?)...........आपके नुक्कड़ पर मैंने तो नहीं लगाया जाम ? (चापलूसी नहीं विरोध करता हूँ )

रोज ही ऑफिस आने पर ब्लॉग एक नज़र जरुर देख लेता हूँ ......समय कम होता है इसलिए भी ऐसा करना मज़बूरी है...........गुजरे साल में कई ब्लॉग पर कभी कभार लिख देता था ........पर इन कुछ महीनो में ऐसा करने में असमर्थ रहा ........अभी कुछ दिनों से अपने ब्लॉग पर
May 30 2010 10:17 PM
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आँधियों से कह दो औकात में रहा करे .............(धमकी नही करवाई करें )...............मैं करता हूँ ब्लोगिंग में संगठन का विरोध

"साख से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हमआँधियों से कह दो औकात में रहा करे "..ये इस लाइन को सुनकर , पढ़ कर मेरा हौसला बढ़ता है....वैसे भी खुद का आत्मविश्वास होना जरुरी है....मुझे को ब्लोगर कुछ भी कहे पर पर मैं जो भी लिख रहा हूँ ....उस पर कायम हूँ
May 29 2010 11:01 PM
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आओ सम्मान करें हम .......बकवास करें हम.......सुनियोजित विवाद करें हम (ब्लोगर सम्मान )

आप हमेशा वही करते है जो आप को सही लगता है और कभी कभी किसी दुसरे के भी मन से कुछ करते है अगर वो राय या विचार आपको पसंद आये तब ? यह तो भाई आपकी अपनी निजता है ? इसमें किसी को क्या एतराज ? लेकिन नहीं एतराज होता है ....एतराज चार कठमुल्ले पकड कर कराया जाता है
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.ब्रम्हांड सम्मलेन में होगा ब्लोगर मठाधीश का चुनाव आप भी आना .....( एकजुटता में शक्ति )......आजमाओ तो जानो ब्लोगर बंधुओं

ब्लॉग पर चाहे बेनामी का कमेन्ट हो या फिर किसी नामी गिरामी का मैं किसी पर भी पर भी पाबन्दी लगाने के खिलाफ हूँ ...क्योंकि अगर मुझे कोई गलत बात कहता है तो मैं उससे स्वाविकार करने में जरा भी गुरेज नहीं करता हूँ ...क्योंकि गाली या बुराभला वही कहता है जिसके
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सम्मेलन या गुटबाजी बनाम बेनामी का खुलासा ?? (कुछ तो हुआ ...).......................एक विचार

अभी कुछ दिन हुए इंटर नेशनल ब्लोगर सम्मलेन को हुए ...........एक अच्छी पहल है इस तरह का आयोजन ........लेकिन इससे पहले का दिल्ली के लक्ष्मी नगर में ब्लोगर सम्मलेन हुआ था ....जिसको मैंने " खाने खिलाने " से ज्यादा कुछ भी नहीं समझा था ...ब्लोगर भाइयों को यह
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ब्लोगिंग के लिए गूगल पर होना चाहिये केस ? ( क्योंकि आप का भी मान सम्मान है ?) एक विचार

आज मेरी एक पुराने ब्लोगर से बात हो रही थी...जो की इलाहाबाद से जुड़े है .........ब्लोगिंग के बदलाव पर भी काफी देर बात हुई ..वो भी मेरी ही तरह कुछ दिनों से गायब थे .....इसका उनको जरा भी दुःख नहीं है ........हाँ अफशोस जरुर है ....वह इसलिए क्योंकि आज के बदलाव
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रचना जी की ही ऐसी उलाहना क्यों ?

पिछले कुछ महीनो से लेखन में रूचि जाती रही ....कारण बिलकुल साफ है की मेले में कुछ भीड़ ज्यादा ही है .....ब्लागर बंधुओं से फ़ोन से ही जानकारी मिल ही जाती है..की क्या कुछ नया हो रहा है ...हाँ जब कभी समय मिला तो नज़र दौड़ा ली जाती है.......जो कुछ पसंद आया उसको
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फहरा दो पताका विश्व पटल पर..........( ये हवा कुछ बहकी बहकी है )....एक विचार

ब्लोगिंग के दौरान बहुत अच्छे लोगों से जुडाव हुआ .....एक दूसरे की विचारधारा को जानने समझने में आधुनिक तकनीकी ने सहयोग दिया ...केवल दिल्ली ही नहीं वरन विदेशों में रहने वालो लोगों से नजदीकियां बनी .....आमतौर पर बाहर बसे भारतियों छवि मेरे जेहन में खास अच्छी
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पियो सिगरेट ...(कविता )..

पुराणों ने कहा था .सामाजिक कल्याण के लिए ..असुरो के विनाश के लिए..महिर्षि दधीचि अपने प्राण तज दिये ..कलयुगी दधीचि उनसे ..दो हाथ आगे निकल गए ..समाज के विनाश के लिए ..आसुरी भावो के विकास के लिए ..संजीवनी छोड़ सिगरेट पी रहे ..सवास्थ्य खुद का व् सामाज का
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मेरे कोरे दिल की कल्पना हो तुम

मेरे कोरे दिल की कल्पना हो तुम,कविता में पिरेशब्दों की व्यजंना हो तुम,मर्म-स्पर्शी नव साहित्य कीसृजना हो तुम,नव प्रभा की पथ प्रदर्शकलालिमा हो तुम,मेरे कोरे दिल की कल्पना हो तुम,स्वप्न दर्शी सुप्त आखों मेंबसी तलाश हो तुम,सावन की कजरी में घुलीमिठास हो
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तस्वीर .....(कविता) ..नीशू तिवारी

मंदिरों की घंटियों की गूँज से ,शंखनाद की ध्वनियों सेवीररस से भरे जोशीले गीत सेनव प्रभात की लालिमा ली हुई सुबह से ,कल्पित भारत वर्ष की छवि आँखों में रच बस जाती है लेकिननंगे बदन घूमते बच्चों को ,कुपोषण और संक्रमण से जूझती गर्भवती महिला को और चिचिलाती धुप
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एक जवान = १० लाख (हो सकता है ये भी न मिले ) .....सरकार aap सो जाओ

नक्सलियों द्वारा सेना पर हुआ हमला पूरी तरह से नियोजित था .....लेकिन क्या ऐसी चूक हुई की देश के सबसे बड़े हमले को रोका न जा सका ....सरकार ने नक्सल समस्या से निबटने के लिए भले ही अभी तक लाख कोशिशे की हो लेकिन इस वारदात से हकीकत सामने आ गई और सरकार की पोल
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कल रात नींद न आई

कल रात नींद न आई करवट बदल बदल कर कोशिश की थी सोने कीआखें खुद बा खुद भर आईतुम्हारे न आने परमैं उदास होता हूँ जबभीऐसा ही होता है मेरे साथफिर जलाई भी मैंने माचिस औरबंद डायरी से निकली थी तुम्हारी तस्वीर कुछ ही देर में बुझ गयी थी रौशनीऔर उसमे खो गयी
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मीडिया व्यूह

çÁ×ðÎæÚU ·¤æñÙ? ¥æS‰ææ ¥æñÚU çßàßæâ ·¤æ Îðàæ ææÚUÌ ßcæü æÚU ·ð¤ æèÌÚU æç€Ì °ß¢ Ÿæhæ ·ð¤ ¿ÜÌð âñ·¤ÇU¸æð´ ÁæÙð´ »ßæ¢Ìæ ãUñÐ æ»ÎÇU¸ ·¤è ·é¤À ƒæÅUÙæ°¢ çÙØç×Ì ¥¢ÌÚUæÜ ÂÚU ãUæðÌè ÚUãUè ãUñ´Ð çãU׿¿Ü ÂýÎðàæ çS‰æÌ ÙñÙæ Îðßè ×¢çÎÚU ãUæð Øæ çȤÚU ©UžæÚU
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तेंदुलकर ने फिर रचा इतिहास

क्रिकेटर और क्रिकेट प्रशंसक जो शायद सपने में ही सोचते हैं वह सचिन तेंदुलकर ने ग्वालियर में कर दिखायारिकॉर्डों के बादशाह तेंदुलकर ने ग्वालियर में इतिहास लिखते हुए वनडे क्रिकेट की दुनिया का पहला दोहरा शतक ठोंकाइस दौरान तेंदुलकर ने 147 गेंदों का सामना किया
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जीवन बना जन्नत

____ जीवन बना जन्नत ____वेलेन्टाईन डे पर अपनों से बिछड़ों से संवाद करोरुठ गये जो साथी उनसे अपनत्व का इजहार करोना रखो मन में कोई विकार थाम लो स्नेह मशालजला कर ज्योति प्रेम की खुशियों का इजहार करो.॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰विनोद बिस्सा
Feb 14 2010 04:53 PM
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वेलेन्टाइन डे बनाम प्यार में धोखा.......... ( सावधान लड़कियां )

इन दिनों बाजार जाकर काफी शुकून मिल रहा हैं , ऐसा लगता है मानों कि किसी बगीचे में आ गये हों , चारों ओर गुलाबी खुशबू फैली है । तरह तरह के स्टाइल में सजे गुलाब के फूलों को देख प्रसन्नता होती है , वैसे तो आम दिनों में इन गुलाबों की कीमत पांच रूपये के आस पास
Feb 11 2010 05:48 PM
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महिलाओं ने बदला पानपाट

घूंघट में रहने वाली महिलाओं ने देवास जिले के कन्नौद ब्लाक के गाँव ‘पानपाट’ की तस्वीर ही बदल दी है। उन्होंने यह सिद्ध कर दिखाया है कि – कमजोर व अबला समझी जाने वाली महिलाएं यदि ठान लें तो कुछ भी कर सकती हैं। उन्हीं के अथक परिश्रम का परिणाम है कि आज पानपाट
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Feb 10 2010 01:41 PM
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सफलता का सूत्र

सफलता का सूत्र___________ असफलता से मत घबरानायह सफलता का सूत्र हैराह पता चल इससेकहां है मंजिल क्या कठिन हैराह पता हो मंजिल तय होआने वाली मुश्किलें तय होठान लो बस आगे बढ़नाविजय सुनिश्चित जय जयकार होयह सब असफलता से मिलतेइसलिये ना डरना तुमअसफलता है पथ
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वीर शहीद- कविता

"साख से टूट जायें वो पत्ते नहीं हैं हम ,आंधियों से कह दो कि औकात में रहा करे।।"गर्व है उन पर राष्ट्र को, जो आज प्राप्ति हैं वीरगति को, गूंजती है तालियां नाम पर उनके, आखें छलकती हैं साहस पर उनके।क्या जोश था इन वीरों का ? जो सामने से ये लड़े, न खौफ था मौत
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बिकनी पर राजनीति की रोटी क्यों सेकते हो नेता जी ?

समाज में संस्कृति को लेकर कसीदे हमेशा ही पढ़े जाते हैं । भारतीय होने के नाते हम भी इस पर खुली बहस कर सकते हैं (बिना राजनीति के ) । समाज की दृष्टि में सभी नागरिक समान हैं और इसलिए किसी एक ( सत्ताधारी ) को यह अधिकार नहीं कि वह अपना निर्णय सभी पर थोपे ।
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प्रतियोगिता आयोजित

हिन्दी साहित्य मंच "चतुर्थ कविता प्रतियोगिता" मार्च माह में आयोजित कर रहा है। इस कविता प्रतियोगिता के लिए किसी विषय का निर्धारण नहीं किया गया है अतः साहित्यप्रेमी स्वइच्छा से किसी भी विषय पर अपनी रचना भेज सकते हैं । रचना आपकी स्वरचित होना अनिवार्य है ।
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अतुल्य भारत से सेक्स टूरिजम तक

देश से गायब होने वाले नाबालिक बच्चों के खरीदफरोख्त की समस्या बहुत ही विकराल है । इन बच्चों को राज्य से दूसरे राज्य अथवा पड़ोसी देशों में बेच दिया जाता है । इन बच्चों को सेक्स वर्कर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है । आकड़ों की माने तो ७० फीसदी से अधिक
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संस्कृति के बहाने राजनीति में तानाशाही कितनी जायज ?

राजनीति के बल पर कुछ भी किया जा सकता है क्या ? और वह भी तब जब सत्ता आपके हाथ में हो । भारतीय परिपेक्ष में यह बात तो हम सभी को आये दिन देखने , सुनने और पढ़ने को मिल ही जाती है । लोकतंत्र में तानाशाही का समावेश देखना हो तो हमें भारत से कहीं बाहर जाने की
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देश अहम है या पैसा ?

देश के राष्ट्रीय खेल हाकी की दुर्दशा से सभी वाकिफ और हताहत है । ऐसे में खिलाड़ियों और हाकी इण्डिया का विवाद उत्पन्न होना वाकई बहुत ही दुखद है । और वह भी तब जब कि हाकी विश्व कप शुरू होने में कुछ ही महीने बचे हैं । खिलाड़ियों द्वारा पैसा न मिलने पर पुणे
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हवा के झोंके में तुम्हारी याद ...........................कविता

हवा के झोंके ने बंद पन्नों को बिखेरा है , आज फिर से , जिसमें तुम्हारी चंद यादें फिसल गयी, फर्श पर आंखों के मोती बनकर । मैंने रोकना चाहा खुद को पर नाकाम ही रहा , तुम्हारी तस्वीर पर पड़े आंसू ने महसूस करना चाहा था तुम्हारे स्पर्श को , तुम्हारी खुश्बू क
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" महिलाएं ही महिलाओं की सबसे बड़ी दुश्मन हैं "..........मीडिया चर्चा

भारतीय समाज की परिकल्पना स्त्री के बिना संभव ही नहीं लगती परन्तु ऐसे में हमारा समाज पितृसत्तामक ही रहा है या कह लीजिये कि स्त्री को जो अधिकार , स्थान और सम्मान मिलना चाहिए था वह आज भी उससे वंचित रही है तो गलत न होगा । समाजिक ढ़ाचे को संतुलित करने के
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रिश्ते बंद है आज चंद कागज के टुकड़ो में

रिश्ते बंद है आज चंद कागज के टुकड़ो में, जिसको सहेज रखा है मैंने अपनी डायरी में, कभी-कभी खोलकर देखता हूँ उनपर लिखे हर्फों को जिस पर बिखरा है प्यार का रंग, वे आज भी उतने ही ताजे है जितना तुमसे बिछड़ने से पहले, लोग कहते हैं कि बदलता है सबकुछ समय के साथ
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हिन्दू एकता सिद्धांत

यहाँ पर यह स्पष्ट करना भी जरूरी है कि संसार में हिन्दू धर्म ही एकमात्र ऐसी जीवन पद्धति है जिसे किसी संप्रदाय विशेष के साथ नहीं जोड़ा जा सकता,जिसमें कभी किसी संप्रदाय विशेष को अपना शत्रु घोषित नहीं किया गया,इन्सान तो इन्सान पेड़ पौधों जीव-जन्तुओं, पशु
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गजल ( क्या भूला क्या याद रहा )

इस मंजिल के रस्ते में, क्या-क्या छूटा कुछ याद नहीं। ये भी नहीं लगता कि कोई मंजिल इसके बाद नहीं।। रूह थकी सी लगती है, ऐ यारो अब तो जिस्म के साथ, दो पल चैन से कब सोया था यह भी ठीक से याद नहीं।। माँ ने प्यार से समझाया था, क्या करना, क्या न करना, क्या भू
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एक हिन्दू क्या है जानते हो ?????

हिन्दू' शब्द मानवता का मर्म सँजोया है। अनगिनत मानवीय भावनाएँ इसमे पिरोयी है। सदियों तक उदारता एवं सहिष्णुता का पर्याय बने रहे इस शब्द को कतिपय अविचारी लोगों नें विवादित कर रखा है। इस शब्द की अभिव्यक्ति 'आर्य' शब्द से होती है। आर्य यानि कि मानवीय श्रे
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वन्दे मां को कैसे भूल सकता है तू ????????

जी हाँ बिल्कुल सही सुना आपने। अगर ऐसा वाकया आपको देखने को मिले जहाँ कोई अपनी माँ को माँ कहने में शर्म महसुस करता हो और पुछने पर कहता हो ये बताने के लिए कि ये माँ है,माँ कहना जरुरी नहीं है। जरा सोचिए कितनी शर्मसार करने वाली घटना है। मेरा ये कहना उनके
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गाय काटने वालो का क्यों ना सर कलम कर दिया जाये?????

गाय " जिसे हमारे धर्म (हिन्दू) में माता का दर्जा प्राप्त है। अब माता क्यों कहा जाता है ये सबको पता है। भारत कि गौरवशाली परंपरा में गाय का स्थान सबसे ऊँचा और अत्यन्त महत्वपूर्ण रहा है। गाय माता की महिमा पर महाभारत में एक कथा आती है। यह कथा रघुकुल के र
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आज तुम फिर मुझसे खफा हो .........जानता हूँ मैं

आज तुम फिर खफा हो मुझसे, जानता हूँ मैं, न मनाऊगा तुमको, इस बार मैं। तुम्हारा उदास चेहरा, जिस पर झूठी हसी लिये, चुप हो तुम, घूमकर दूर बैठी, सर को झुकाये, बातों को सुनती, पर अनसुना करती तुम, ये अदायें पहचानता हूँ मैं, आज तुम फिर खफा हो मुझसे, जानता हूँ