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समकालीन जनमत

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28 Apr 2010
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सृजनोत्सव

जसम ने बिहार की राजधानी पटना में 12से 14 मार्च तक जनकवि नागार्जुन की स्मृति को समर्पित सृजनोत्सव का आयोजन किया था। जिसमें दिनेश कुमार शुक्ल ने कई कविताओं का पाठ किया। इसके अलावा देश की कई सांस्कृतिक टीमों ने प्रस्तुति दी। 'दस्ता' की प्रस्तुतिविद्रोही जी
 
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इलाहाबाद का सांस्कृतिक हलका डूबा मार्कण्डेय के शोक में

२० मार्च, २०१०. इलाहाबाद.आज सायं ५ बजे से वरिष्ठ कथाकार मार्कण्डेय की स्मृति सभा का आरंभमहात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय विश्विद्यालय दूरस्थ शिक्षा इकाई केसत्यप्रकाश मिश्र स्मृति सभागर में हुआ. इलाहाबाद शहर के तमामबुद्धिजीवी, संस्कृतिकर्मी और वाम कार्यकर्ता
 
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तुम्हे कैसे याद करुँ भगत सिंह

-अशोक कुमार पाण्डेय जिन खेतों में तुमने बोई थी बंदूकेंउनमे उगी हैं नीली पड़ चुकी लाशें जिन कारखानों में उगता थातुम्हारी उम्मीद का लाल सूरजवहां दिन को रोशनी रात के अंधेरों से मिलती है ज़िन्दगी से ऐसी थी तुम्हारी मोहब्बतकि कांपी तक नही जबानसू ऐ दार पर
 
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सृजनोत्सव: जनसंघर्ष और प्रतिरोध के संस्कृतिकर्म को राष्ट्रीय मंच देने की पहल

सो रहा संसार, पूंजी का विकट भ्रमजालकिन्तु फिर भी सर्जना के एक छोटे से नगर में/ जागता है एक नुक्कड़चिटकती चिंगारियां/ उठता धुंआ है/ सुलगता है एक लक्कड़तिलमिलाते लोग सुनकर, देखकर अन्याय और लड़ने का अब भी बनाते मन मछन्दर फिर नए संघर्ष का उन्वान लेकर/ जाग मेरे
 
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होली के गीत

शोभा गुर्टू की आवाज में--- आज बिरज में होली-आबिदा परवीन की आवाज में----होली खेलन आया पिया...छन्नूलाल मिश्रा की आवाज में-----रंग डारूँगी
 
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Mar 01 2010 06:45 PM
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'सृजनोत्सव' तथा 'जसम की राष्ट्रीय परिषद की बैठक'

प्रिय साथियों , आगामी १२, १३, १४ मार्च, २०१० को पटना में कालिदास रंगालय ( गांधी मैदान, उत्तरी छोर) में "सृजनोत्सव" का आयोजन किया गया. है. इस कार्यक्रम में बंगाल, पंजाब, तमिलनाडू, आंध्रप्रदेश, असम, झारखंड, उत्तराखंड आदि राज्यों से जन संस्कृति मंच से जुड़े
 
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Feb 22 2010 07:09 AM
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अभिनेता निर्मल पांडे नहीं रहे

अभिनेता निर्मल पांडे की दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई है। सीने में दर्द के बाद निर्मल को अंधेरी, मुबंई के हॉस्पीटल में भर्ती किया गया था ।निर्मल पांडे ने ‘बैंडिट क्वीन’ (1994), दायरा (1996), ‘गॉडमदर’ (1999), ‘ट्रेन टू पाकिस्तान’ और ‘इस रात की सुबह
 
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फै़ज़ को क्यों और कैसे पढें

(मशहूर शायर फैज अहमद फैज की पैदाइश 13 फरवरी 1911 को सियालकोट में हुई। 2010 उनकी जन्मशती का साल है। एक मौका है जिसमें हम फैज के बारे और ज्यादा जानने की कोशिश कर सकते हैं। उनके विचारों को मौजूदा समय के साथ जोड़कर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की कोशिश
 
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फैज को क्यों और कैसे पढ़ें-2

(मशहूर शायर फैज अहमद फैज की पैदाइश 13 फरवरी 1911 को सियालकोट में हुई। 2010 उनकी जन्मशती का साल है। एक मौका है जिसमें हम फैज के बारे और ज्यादा जानने की कोशिश कर सकते हैं। उनके विचारों को मौजूदा समय के साथ जोड़कर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की कोशिश
 
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वार- नो मोर....

ये गीत बॉब मार्ले का है और तकरीबन 40-50 साल पहले लिखा और गाया था।प्लेइंग फॉर चेंज ने दुनिया के अलग-अलग जगहों और वहां के बेहतरीन गायकों को साथ लेकर इस गीत को नए अंदाज में कंपोज किया है। Until the philosophy which hold one race superiorAnd
 
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इब्नबतूता का जूता

-सर्वेश्वर दयाल सक्सेनाइब्नबतूता पहन के जूतानिकल पड़े तूफान मेंथोड़ी हवा नाक में घुस गईघुस गई थोड़ी कान मेंकभी नाक को, कभी कान कोमलते इब्नबतूताइसी बीच में निकल पड़ाउनके पैरों का जूताउड़ते उड़ते जूता उनकाजा पहुँचा जापान मेंइब्नबतूता खड़े रह गयेमोची की
 
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नयी शताब्दी कथेतर गद्य की: प्रो. रामबक्ष

उदयपुर। कल्पनाशीलता का पुराना युग समाप्त हो गया है और अब इसकी आंशिक संभावना गद्य में ही दिखाई दे रही है। तथ्य के प्रति बढ़ रहा आकर्षण बताता है कि पाठक अब ठीक-ठीक जानना चाहता है। यही कारण है कि नयी शताब्दी में कथेतर गद्य विद्याओं को पारम्परिक विधाओं की
 
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दिल्ली पुस्तक मेला में जसम का अभियान

जन संस्कृति मंच ने अपने घोषित कार्यक्रम के तहत आज से विश्व पुस्तक मेले में साहित्यकारों और पाठकों के बीच साहित्य के कारपोरेटाइजेशन के खिलाफ अभियान के शुरुआत की। आज पुस्तक मेले के गेट न. 12 पर कवि आलोचक विष्णु खरे, कवि शोभा सिंह, कथाकार योगेन्द्र आहूजा,
 
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सैमसुंग-साहित्य अकादमी पुरस्कारों के खिलाफ मानव श्रृंखला

जन संस्कृति मंच ने बहुराष्ट्रीय उपभोक्ता उत्पाद कंपनी सैमसुंग के साथ मिलकर साहित्य अकादमी द्वारा टैगोर साहित्य पुरस्कार दिए जाने के विरोध में सोमवार को मानव श्रृंखला खला बनाई। पहले यह मानव श्रृंखला पुरस्कार के आयोजन स्थल ओबेराय होटल के सामने बनाई जानी
 
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साहित्य की स्वाधीन और जनपक्षधर परंपरा का उपहास है समसुंग पुरस्कार

समसुंग कंपनी और साहित्य अकादमी की ओर से दिया जा रहा टैगोर साहित्य पुरस्कार साहित्य अकादमी की स्वायत्ता, भारतीय साहित्य की गौरवशाली परंपरा और टैगोर की विरासत के ऊपर एक हमला है। देश की तमाम भाषाओं के साहित्यकारों व साहित्यिक-सांस्कृतिक संगठनों को इस
 
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सैमसुंग प्रायोजित साहित्य अकादमी पुरस्कार का बहिस्कार करें

जन संस्कृति मंच ने बहुराष्ट्रीय उपभोक्ता उत्पाद कंपनी सैमसंग के साथ मिलकर साहित्य अकादमी द्वारा दिए जा रहे टैगोर साहित्य पुरस्कारों की कड़ी भर्त्सना की है और लेखकों-साहित्यकारों से उनके बहिष्कार का आह्वान किया है।साहित्य अकादमी द्वारा ये पुरस्कार सोमवार,
 
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क्रांतिकारी कवि ज्वालामुखी को जन संस्कृति मंच की श्रद्धांजलि

सुप्रसिद्ध क्रांतिकारी तेलुगू कवि,संस्कृतिकर्मी और मानवाधिकारवादी श्री ज्वालामुखी (वीर राघवाचारी) का गत 15 दिसंबर को 71वर्ष की आयु में हैदराबाद में देहान्त हो गया। श्री ज्वालामुखी आंध्रप्रदेश के क्रांतिकारी किसान आंदोलन का हिस्सा थे। श्रीकाकुलम,गोदाव
 
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Dec 29 2009 11:40 AM
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जनसंस्कृति मंच का 'मुक्तिबोध स्मृति फ़िल्म और कला उत्सव'

१३-१५, नवम्बर, २००९):एक संक्षिप्त रिपोर्ट मुक्तिबोध के जन्मदिवस पर शुरु हुआ भिलाई में जन संस्कृति मंच का 'मुक्तिबोध स्मृति फ़िल्म और कला उत्सव'( १३-१५, नवम्बर, २००९). प्रथम मुक्तिबोध स्मृति व्याख्यानमाला की शुरुआत की जसम के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. मै
 
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भूपेन की राह चले सुमन चटोपाध्याय

कबीर सुमन की भी वही हालत होने जा रही है जो कुछ साल पहले भूपेन हजारिका की हुई थी। कबीर सुमन को अब जाकर यह एहसास हुआ कि तृणमूल कांग्रेस तो वैसी ही है जैसी सीपीएम या कांग्रेस। कबीर सुमन 24 परगना के यादवपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद है। कबीर का कहना है कि
 
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कारवां बढ़ता रहेगा

सुधीर सुमन शशिभूषण नहीं रहा, इसका मुझे यकीन नहीं हो रहा है। दिल्ली में मानो वह नए सिरे से मुझे मिला था, श्रीराम सेंटर के पास एक दिन। एनएसडी के पूर्व छात्र विजय कुमार के साथ 1999 में ‘रेणु के रंग’ लेकर पूरे देश के भ्रमण पर निकला था, तबसे उससे कभी-कभार
 
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प्रभाष जोशी को जन संस्कृति मंच की श्रद्धांजलि

७ नवम्बर,२००९. नैनीताल. जन संस्कृति मंच और युगमंच द्वारा आयोजित नैनीताल फ़िल्म समारोह शुरु होने से पहले मूर्धन्य पत्रकार प्रभाष जोशी को श्रद्धांजलि दी गई और उनकी याद में एक मिनट का मौन रखा गया. इस अवसर पर जसम के महासचिव प्रणय कृष्ण, जन-कवि व गायक गिर्
 
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प्रभाष जोशी का निधन

मशहूर पत्रकार प्रभाष जोशी नहीं रहे। 72 साल के जोशी जी का निधन दिल का दौरा पड़ने से हुआ। प्रभाष जोशी ने पत्रकारिता की शुरुआत नई दुनिया से की थी। वे 1983 में शुरू होने वाले जनसत्ता अखबार के संस्थापक संपादकों में से एक थे। 1995 में अखबार से सेवानिवृत्त
 
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संरचनावाद के योद्धा लेवी स्ट्रॉस नहीं रहे

संरचनावादी मानवशास्त्री क्लाउद लेवी स्ट्रॉस नहीं रहे। सौ साल के थे। इस दार्शनिक और मानवशास्त्री ने दर्शन की पूरी समझ पर गहरा असर डाला है। पचास-साठ के दशक में जब युरोप के मशहूर दार्शनिक सात्र कमजोर हो रहे थे तब लेवी स्ट्रॉस के विचार,दर्शन से लेकर साहि
 
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जनता में बदलता देश

मेरा देश ४७ में जनता की तरह पैदा हुआ थाजिसे मैं प्यार नहीं करता थादया दिखाता था या फिर गोली मार देता थामैं इतना गतिशील था उस समयकि हर चेहरा मेरा ही चेहरा हो जाता थाजब भी कुछ बदलने की कोशिश करता-तबमैं गांधी हो जाता और देश हरिजनमैं नेहरु हो जाता और देश
 
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चौथा खंभा भी गया

पी साईनाथ सी राम पंडित अब अखबार का साप्ताहिक कॉलम लिख सकते हैं। डॉ पंडित (बदला हुआ नाम) अर्से से महाराष्ट्र से निकलने वाले भारतीय भाषा के प्रतिष्ठित अखबार में कॉलम लिखते आए हैं। लेकिन महाराष्ट्र चुनाव में नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख के बाद उनका
 
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लोकतंत्र का खतरा या खतरे में लोकतंत्र !

न्यूज चैनल CNNIBN पर प्रसारित करण थापर के साथ अरुंधती राय साक्षात्तकार कई मायनों में महत्वपूर्ण है। ये महज सवाल और जवाब नहीं है। इसमें साक्षात्तकार देने और लेने वाले दोनों अपने अनकुल लोकतंत्र को बचाने की कोशिश कर रहे है। एक 'लोक'को दरकिनार करके लोकतं
 
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गुणाकर मुळे को श्रद्धांजली

हिन्दी और अंग्रेजी में विज्ञान लेखन को लोकप्रिय बनाने वाले गुणाकर मुळे का 13 अक्टूबर को निधन हो गया। 1935 में विदर्भ के अमरावती जिले के सिंदी बुजरूक गांव में जन्म लेने वाले मुले की शुरुआती पढ़ाई गांव के मराठी माध्यम वाले स्कूल में हुई। उन्होने स्नातक
 
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पेड़ों को दु:ख है

पेड़ों को दु:ख है कि उस कवि ने भी कभी अपनी कविताओं में उसका ज़िक्र नहीं किया जो रोज़ उसकी छाया में बैठ लिखता रहा देश-दुनियां पर कविताएं.. पेड़` कविता से : अशोक सिंह
 
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मैने उससे ये कहा...

पाकिस्तान के वामपंथी कवि हबीब जालिब की ये नज्म मुशीर यानी सलाहकार के नाम से मशहूर है। जालिब ने ये नज्म अयुब खान के सलाहकार हाफिज जालंधरी से बातचीत के बाद लिखी थी। ये नज्म आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। लाल बैंड का गाया एक और गीत-
 
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पाकिस्तान का 'लाल बैंड'

लाल बैंड’ पाकिस्तान की प्रगतिशील गायन टीम है। फैज अहमद फैज,हबीब जालिब और अहमद फराज की रचनाओं को अपनी आवाज देता हुआ ये बैंड पाकिस्तान में अपनी अलग पहचान बना चुका है। लाल बैंड अपने को पाकिस्तान की प्रगतिशील परंपरा के हिस्से के बतौर देखता है। इस ग्रुप म
 
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संगमन के बहाने कथा-साहित्य की जनपक्षधरता पर विमर्श

हिन्दी साहित्य में गंभीर पहचान बना चुके ´संगमन´ का 15वां आयोजन उदयपुर में 2 से 4 अक्टूबर 2009 को हुआ। नगर के समीप गांव बेदला स्थित आस्था प्रशिक्षण केन्द्र में आयोजित इस समारोह के सहयोगी जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ (डीम्ड विश्वविद्यालय) के जन
 
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समकालीन जनमत अब मासिक पत्रिका के रूप में

समकालीन जनमत’ हिन्दी की ऐसी पत्रिका है जो तीन दशक की अपनी यात्रा के दौरान न सिर्फ पटना से लेकर दिल्ली तक का सफर तय किया है बल्कि समय की मांग और जरूरत के अनुसार अपना स्वरूप बदलती रही है। जन आकांक्षा के अनुरूप इसके तेवर और कलेवर में भी बदलाव आता रहा है
 
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हबीब तनवीर के नाटक पर प्रतिबंध

छत्तीसगढ़ सरकार ने अपनी छवि के अनुकूल ही आचरण करते हुए १९७४ से खेले जा रहे हबीब तनवीर के अंतर्रष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त नाटक 'चरण दास चोर' पर शनिवार ८ जुलाई से प्रतिबंध लगा दिया. मूलत: राजस्थानी लोककथा पर आधारित यह नाटक श्री विजयदान देथा ने लिखा था जिसका नाम
 
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अभिव्यक्ति

-लू सुनस्वप्न में मैंने अपने अध्यापक से पूछा - सही विचारों को ठीक-ठाक कैसे व्यक्त किया जाए ? अध्यापक ने कहा - मैं इस मसले पर एक कहानी सुनाता हूँ... एक परिवार में बच्चा पैदा हुआ। एक ने कहा - यह बच्चा आगे चल कर बहुत धनवान होगा। बच्चे के माँ-बाप ने कहने
 
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प्रणय कृष्ण का साक्षात्कार

प्रखर हिंदी आलोचना और जन संस्कृति मंच के महासचिव प्रणय कृष्ण को मिला देवी शंकर अवस्थी पुरस्कार उनकी समग्र रचनाधर्मिता का सम्मान है। प्रस्तुत है इस मौके पर अनिल सिद्धार्थ से उनककी बातचीत के प्रमुख अंशहिंदी आलोचना के इस प्रतिष्ठित सम्मान पर आपकी त्वरित
 
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शहीद चंद्रशेखर की याद में...

मार्च चंद्रशेखर की शहादत दिवस है। 31 मार्च 1997 को सिवान में आरजेडी सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन के गुंडो ने चंद्रशेखर और उनके एक साथी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। 11 साल पूरे हो गए हैं लेकिन अभी तक हत्यारों को सजा नहीं हुई है। चंद्रशेखर की हत्या ने कई
 
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मैं नास्तिक क्यों हूँ: भगत सिंह

यह लेख भगत सिंह ने जेल में रहते हुए लिखा था जो भगत सिंह के लेखन के सबसे चर्चित हिस्सों में रहा है. इस लेख में उन्होंने ईश्वर के प्रति अपनी धारणा और तर्कों को सामने रखा है।प्रत्येक मनुष्य को, जो विकास के लिए खड़ा है, रूढ़िगत विश्वासों के हर पहलू की आल
 
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