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16 Jun 2010
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मुखिया दरबार : प्लेन पोलिटिक्स

नीतिश जी - ये क्या हो रहा है ?  रामचंद्र बाबु को राज्य-सभा भेज आप क्या सन्देश दे रहे हैं ? आप तो खुद को 'ईमानदार' नेता कहते हैं ! ये कौन सी ईमानदारी है ? 'ईमानदारी' की परिभाषा सिर्फ और सिर्फ 'पैसा लेन देन' तक ही सीमित नहीं होती है ! खैर , आपकी
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मेरा गाँव - मेरा देस - भाग आठ

आखिरकार वो कैसी घड़ी रही होगी - जब मोहनदास करमचंद गाँधी - सूट बूट में - चमड़े की सूटकेस और अंग्रेजों की चाबुक ! बैरिस्टर साहब की जिंदगी बदल गयी ! उस वक्त 'ब्लॉग' नहीं होता था - वरना वो अपनी बेइज्जती 'ब्लॉग' पर उतार शांत हो जाते ! खैर ...क्षेत्रीयता क्या है
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मेरा गांव - मेरा देस - ( सिनेमा - सिलेमा ) भाग सात

अभी अभी 'प्रकाश झा' की "राजनीति" देख लौटा हूँ ! शाम को फेसबुक पर बैठ - इस कोठी का चाऊर उस कोठी कर रहा था - तब तक एक मित्र ने फोन कर दिया की - 'सिनेमा चलना है - फिर क्या था :) झटपट जींस चढ़ाया - एक सफ़ेद टी पहना और चल दिया - घर के बिलकुल पास में
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मेरा गाँव - मेरा देस ( राजनीति ) - भाग छह

प्रकाश झा साहब की फिलिम 'राजनीति' रिलीज होने वाली है ! सन १९८४-८५ में उनकी 'दामुल' दूरदर्शन पर देखी थी ! एक सांस में देख लिया था :)  उनकी लगभग सभी फिल्मे देख चूका हूँ ! 'राजनीति' भी देख लूँगा :) मै 'फिलिम्ची' नहीं हूँ - सिनेमा देखते वक्त
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मेरा गाँव - मेरा देस ( लगन 'टाईट' बा ) - भाग - पांच

एक जमाना था - लड़का ने 'मैट्रिक' का फॉर्म नहीं भरा की 'बरतुहार' ( अगुआ - शादी विवाह वाले , लडकी वाले ) आना शुरू कर देते थे ! गाँव या टोला में एकता है तो जल्द 'शादी' ठीक हो जाती वर्ना ..लड़का बी ए फेल भी कर जाता और शादी नहीं हो पाती थी ! इन दिनों
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मेरा गाँव - मेरा देस ( लगन 'टाईट' बा ) - भाग - पांच

कल 'रणजीत' जी के फेसबुक पर एक 'दूल्हा' का तस्वीर देखा और देखते ही मेरे मुह से निकल गया 'लगन टाईट बा' ! गर्मी की छुट्टी और 'लगन' ( शादी विवाह ) का मौसम ! एक जमाना था - लड़का ने 'मैट्रिक' का फॉर्म नहीं भरा की 'बरतुहार' ( अगुआ - शादी विवाह वाले , लडकी वाले )
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मेरा दिल - मेरा बचपन - मेरी जवानी ( भाग - चार )

ये पोस्ट भी 'मेरा गाँव - मेरा देश ' का ही पार्ट है ! कल रात कुछ 'सीरियस चीज़ें' पढ़ रहा था - इस इलज़ाम के साथ की - मै 'सीरियस चीज़ें' नहीं पढता ! अब मै कैसे कहूँ की आँखें खुली ही तो 'कादम्बिनी - सारिका' जैसी पत्रिकाओं से ! रांची याद आ गया ! 'नाना जी ' उन
Jun 01 2010 03:34 PM
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मेरा गाँव - मेरा देस - ( मेरा पटना ) - भाग ३

सातवीं की परीक्षा 'जिला स्कूल - मुजफ्फरपुर ' से पास कर लिया ! परबाबा से लेकर मुझ तक हम चार पीढ़ी इस स्कूल में पढ़ लिए :) गौरव की बात है , न ! वार्षिक परीक्षा चल रही थी - तभी बाबु जी का ट्रांसफर 'मुजफ्फरपुर' से 'पटना' हो गया ! नाना जी , बड़े बाबा
May 29 2010 08:31 PM
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मेरा गाँव - मेरा देस - भाग 'दो' ( शादी विवाह )

बचपन के दिन याद आ गए ! घर - परिवार - ननिहाल में शादी होता था - हम सभी पन्द्रह दिन पहले ही गांव पहुँच जाते थे ! पहला रस्म होता था - 'फलदान' - लडकी वाले कुछ फल इत्यादी लेकर 'वर' के घर जाते थे ! बहुत दिनों तक - बहुत ही कम लोग आते थे - पर धीरे - धीरे यह एक
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मेरा गांव - मेरा देस - भाग - एक !! ( परिवार )

मंगलवार को थोडा कम काम होता है - सो 'समय' मिल जाता है ! सुबह सुबह एक दोस्त को फोन किया - वो मुझे अपना दोस्त नहीं मानता पर मै मानता हूँ - गाँव वाला जो हूँ ! बातों ही बातों में 'गांव' की बात आ गयी और नॉएडा में बैठे बैठे अपना 'गांव' याद आ गया ! समझ नहीं आ
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अब 'मंगला' पढ़ेगा !!

गांव याद आ गया ! बचपन में कुछ दिनों के लिए गांव के स्कूल में पढ़ा था ! 'मंगला' नाम था उसका ! मेरे परिवार के लिए माल मवेशी को खिलाने- पिलाने वाले 'फिरंगी' का बेटा ! 'फिरंगी' बहुत गोरे थे इस लिए उनका नाम 'फिरंगी' रखा गया होगा ! हर सुबह दस बजे 'मंगला' अपने
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बिहार सरकार का विज्ञापन !

मै हर रात १० बजे ईटीवी –बिहार समाचार देखता हूँ फिर अगर मूड हुआ तो १०३० बजे रात ‘महुआ चैनल’ ! कल रात भी देखा – अचानक से ‘महुआ चैनल’ पर नीतीश कुमार नज़र आये वो भी ‘इकोनोमिक टाईम्स अवार्ड’ समारोह में ! पहले तो बढ़िया लगा ! फिर मै चौंका – अरे ये तो ‘विज्ञापन’
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कौन बोलेगा की हम ‘बिकाऊ’ हैं

ऐसी टकसाल नहीं जो मुझे खरीद सके : नीतीश हुज़ूर , कौन बोलेगा की हम ‘बिकाऊ’ हैं ? हुज़ूर कुछ बातें साफ़ साफ़ हैं – ‘उत्पाद एंड मध निषेध’ विभाग के मंत्री हैं – जमशेद शरीफ ! जमशेद शरीफ खुद बहुत बड़े व्यापारी हैं – ईमानदार भी हैं !‘छः महीना से जमशेद जी,
Feb 13 2010 09:56 AM
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भ्रष्टाचार की जरूरत !

अपूर्व शेखर जी हमसे बहस कर रहे थे – समाज में ‘क्रिमनल’ की कितनी जरुरत है ! वो दलील पर दलील दिए जा रहे थे – खास कर बिहार के सन्दर्भ में ! बढ़िया लगा ! ‘क्रिमिनल’ और ‘भ्रष्टाचार’ दोनों एक ही सिक्के के पहलू हैं! चलिए पहले गौर फरमाते हैं – ‘भ्रष्टाचार’ कितना
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बिहार बदल रहा है !

    बिहार बदल रहा है ! सड़कें चौड़ी हो गयी हैं ! स्कूल में शिक्षक आ गए ! अस्पताल में डाक्टर ! और क्या चाहिए ! चारों तरफ बिहार के राजा ' नीतीश कुमार ' जी की जयकार हो रही है - पर वो आदमी खुद को समाज का सेवक बताता है ! यही तो बड़प्पन है !
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राजा शयन-कक्ष में आराम हेतु चले गए हैं !

'मेहताना' की आवाज़ मजदूरों ने बुलंद कर दी है ! आपको यहाँ तक ठेल कर लाने वाले - अब , पसीने की कीमत मांग रहे हैं ! आपको ठेल कर गद्दी तक पहुँचाने वाले - आपके चवन्नी और अथ्ठंनी से खुश नहीं हैं - आपके जैसे जिद्दी को ठेलना आसान नहीं था ! आप अकड़ में ही बैठे
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नितीश को बैसाखी की जरुरत नहीं रही ...

"आईडिया सेलुलर" का एक प्रचार आया था ..जिसमे 'भूमिहार और कुर्मी' की लड़ाई दिखाई गयी थी ! एन डी टी वी - इंडिया ने एक छोटी रिपोर्ट भी बनाई थी ! 'आईडिया' के श्रीवास्तव जी बहुत खुश होकर रविश को बता रहे थे - कितना 'क्रिएटिव' प्रचार है ! अब यह सच्चाई हो गयी है
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नितीश कुमार दूध के धुले हैं - बाकी सब चोर !!!

नितीश कुमार ने नया कानून लाया है ! बढ़िया है ! पर मेरे भी कुछ सवाल हैं - हुज़ूर , आपके पहले तीन साल में सिर्फ और सिर्फ आपका एक डिपार्टमेंट करीब १०० करोड़ का प्रचार अखबारों में करता है ! अगर पांच साल का हिसाब जोड़ा जाये तो यह आंकड़ा करीब २०० करोड़ तक पहुँच
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रविश कुमार

 हिंदी इलेक्ट्रोनिक मीडिया रिपोर्टिंग में दो नाम हैं - जो बेमिसाल है - कमाल खान और रविश कुमार ! बहुत पहले की बात है - इनका कोई रिपोर्ट देखा और अपने एक स्कूल के सिनिअर से पूछा - भैया , ये बिहारी लगता है ! वो बोले - हाँ बिहारी है और वैशाली में ही रहता
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हसरतें -१

कई दिन हो गए ..कुछ लिखे हुए ...क्या लिखूं समझ में नहीं आ रहा था ...नया साल आ गया ...हर साल की तरह ये भी बीत जायेगा ...हाँ ...फेसबुक पर बिजी हो गया था . पहली दफा में करीब ८०० लोग नेटवर्क में थे ...प्रोफाइल डिलीट हो गया ....दुबारा एक नया प्रोफाइल बनाया
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महबूब कैसा हो ? पार्ट -४

तेरी बाहों में है जानम , मेरे जिस्म-ओ-जान पिघलते ! काफी दिनों के बाद शायद वर्षों बाद कल शाम "सिलसिला" देखी ! अमिताभ की कुछ चुनिन्दा फिल्मों में से एक ये भी है जिसके गीतों को मै कई हज़ार बार गुनगुना चुका हूँ ! १९८१ में जब यह रिलीज़ हुई उस वक्त शायद फ्ल
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नीतिश कुमार ने "ललकार" दिया है !

नीतिश ने ललकार दिया है ! कुब्बत है तो चुनाव लड़िये ! राजनेताओं को गाली मत दीजिए ! बात में दम है ! लेकिन नीतिश बाबु - नेतागिरी को आपलोगों ने भले आदमी के लिए कहाँ छोडा है ? अब कौन राजेन बाबु आएगा ? आप लोग धर के उसको जात पात में ऐसा लपेटियेगा की वोह बेचा
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मतवाला हाथी !

यूँ तो हम भी एक ब्राह्मण है ! लेकिन दादा- परदादा खेती बारी कराने लगे और छोटे मोटे खेतिहर बन गए ! बड़े बड़े जमींदारों को देख दरवाजे पर उनलोगों ने एक हाथी रख लिया ! हम सभी बचपन की हाथी की सवारी करते थे ! कभी कभी हाथी का महावत खेतों से उसको ले कर जाता थ
Dec 29 2009 11:41 AM
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महबूबा कैसी हो ? भाग - २

प्रमोद मेरे बचपन का साथी था ! मालूम नहीं - अभी वोह कहाँ है ? +२ तक हम सभी साथ में थे ! ११ विन में उसको मुहब्बत हो गया था ! जाडे के दिन थे - पूरा दिन छत पर ही गुजरता था ! कभी तो दर्शन होंगे ! ठीक जैसे आज कल मै जीमेल के सामने बैठा होता हूँ की कभी तो मु
Dec 29 2009 11:41 AM
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महबूबा कैसी हो ? भाग - एक

महबूबा कैसी हो ? तीखे नाक , घुंघराले बाल , मृगनयनी आँख और मालूम नहीं क्या क्या ? कहते हैं 'दिल लगी दिवार से फिर परी क्या चीज़ है ' ! कई शिकायत करते हैं की उनकी महबूबा की जुबान बहुत तीखी है - बहूत मूडी है - मै कहता हूँ - ' एक परवाना जला इस कदर शोर मचा
Dec 29 2009 11:41 AM
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पेट भरुआ बिहारी

कोई मुद्दा नहीं है लिखने का - क्या लिखें ? आसाम , महाराष्ट्र और अब पंजाब - पेट भरुआ बिहारी लात खा रहे हैं ! नियति है - नियति को कौन टाल सका है ! एक बड़े पत्रकार को टोका - कुछ कीजिए - बोला बंगाली - पंजाबी- मारवारी के यहाँ नौकरी कर रहा हूँ - अपना पेट प
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अब डाकिया चिठ्ठी नहीं लाता !

अब चिठ्ठी नहीं आती ! कॉलेज में था - बाबा का चिठ्ठी आता था , माँ और बहन का भी आता था ! चिठ्ठी मिलते ही - कई बार पढ़ता था - घर से दूर था ! फिर चिठ्ठी को तकिया के नीचे या सिरहाने के नीचे रख देता - फिर कभी मौका मिलता तो दुबारा पढ़ लेता ! बाबू जी को चिठ्ठी
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आज खरना है - कल्ह सँझिया अरग !!!

आज खरना है - शाम को खरना का प्रसाद खाने अपने मित्र अभय के घर जाऊँगा ! मदर डेयरी के दुकान में सब्जी नहीं आ रहा है - किराना वाला होम डेलिवरी नहीं कर रहा है - कहता है - सभी वर्कर बिहार चले गए हैं ! मुझे लगता है - अब "छठ पूजा" को राष्ट्रिये अवकाश घोषित क
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दलाली - एक राष्ट्रिये पेशा !

पटना याद आ गया ! वहां एक बस स्टेशन होता था - हार्डिंग पार्क ! हम लोग रिक्शा से वहां तक पहुंचते - अभी रिक्शा रुका भी नहीं की "दलाल" चारों तरफ से घेर लेते थे ! कोई "डोलची" उठा लिया तो किसी ने रिक्शा वाला का हाथ पकड़ लिया और किसी ने धकेल के किसी बस में चढा
Jul 30 2009 12:52 PM
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१० बजिया स्कूल !

सुबह सुबह "झड़प" शुरू हो जाता है ! ६ बजे से ही चिल्ल पों ! बच्चा लोग को स्कूल के लिए तैयार करो ! बस्ता चेक करो - लंच देखो ! नहाओ - धुलाओ ! फिर खुद भी गदहा की तरह बोझा लेकर खटने के लिए तैयार ! सब कुछ है - अपना फ्लैट है - गाडी है - लोन है - पर सकून नही
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कुछ ख़ास नहीं !!!

किसी ने मुझ से कहा - नीतिश "गदरा" गए हैं और लालू "दुबरा" गए हैं ! सत्ता चीज़ ही ऐसी है ! कुर्सी का दम देखिये - नीतिश की भोज में नालंदा बस रहा था ! लालू की भोज में ठहरी हुई एक छोटी सी उम्मीद ! उम्मीद पर दुनिया कायम है सो - लालू पटना में है ! पूरा पटना
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ले लीजिये न , प्लीज !!!

ले लीजिये न , प्लीज !!! लालू जी : ये मैडम , प्लीज , ले लीजिये न हमारा समर्थन ! देखिये न , हम तीनो भाई लोग एकदम लाईन में खडा हैं ! रात से खाना नहीं खाए हैं - एकदम भूखे हमर पेट फूल के ढोलक हो गया है ! आप समर्थन ले लीजिये गा ता हम कुछ खायेंगे पीयेंगे !
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हमारी बहने और बेटियाँ

कल शाम से ही न्यूज़ चॅनल पर शुभ्रा सक्सेना , शरणदीप कौर और किरण कौशल के चर्चे शुरू हो गए ! आखिर हो भी न , क्यों ? भारत में मध्यम वर्ग के लिए बना बेहतरीन नौकरी "आई ० ए ० यस ०" की परीक्षा में इन तीनो ने प्रथम , द्वितीये और तीसरा स्थान प्राप्त किया है !
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देश का बीमा कैसे होगा ?

देश का बीमा कैसे होगा ? किसके हाथ देश सुरक्षित रहेगा ? इतिहास कहता है - किस किस ने लूटा ! जिस जिस ने नहीं लूटा - वोह इतिहास के पन्नों से गायब हो गया ! गाँधी जी , राजेन बाबु , तिलक इत्यादी को अब कौन पढ़ना और अपनाना चाहता है ? विनोद दुआ मेरे सब से पसंद
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रेलगाडी का अपहरण

रेलगाडी का अपहरण ! मतलब की सुन के माथा चकरा गया ! आदमी का , हवाई जहाज का पनिया जहाज का , ई सब का अपहरण सुने थे - रेलगाडी के अपहरण का आईडिया जिसके पास आया था - उसको पुरस्कार मिलाना चाहिए ! बच्चा थे त चरी सुने थे , फिर डकैती कैसे होता है सुने और देखे भ
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मुसलमानों को भी जीने दो !!

अजीब तमाशा है ! बिहार के चुनाव में मुसलमानों को पेर कर रख दिया है ! नेता और मीडिया ने उनके रातों को नींद ख़राब कर दी है ! क्या किसी का गुनाह सिर्फ इसलिए हैं की वोह मुस्लमान में जनम ले लिया ? क्यों नहीं हम भी उनको अपनी तरह मानते हैं ? कितना थूक का घूँ
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चुनाव और लगन !!

बिहार में चुनाव और लगन दोनों का जोर है ! छपरा जिला के लौंडा के नाच और पटना के चुनाव - दोनों में कोई फरक नहीं नज़र आता है - मुझे ! अजीब हाल है - पढ़ा लिखा , नौकरी पेशा वाला जात को बस "नचनिया - बजनिया " ही अपना नेता नज़र आता है ! ये चुनाव नहीं जिद है ! दु
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चुनाव स्पेशल : - देश का दुर्भाग्य !

चुनाव स्पेशल : देश का दुर्भाग्य ! मालूम नहीं कब और कैसे धीरे धीरे क्षेत्रीय राजनितिक दल दिल्ली की कुर्सी अपने अपने हाथों से हिलाने लगे और कुर्सी दिन बा दिन कमज़ोर होती गयी ! वाजपयी जी तो आंध्र के चन्द्र बाबु नायडू के शिकार बने तो मन मोहन के चारों तरफ
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अमिताभ और जया बच्चन से एक सवाल !

अमिताभ और जया बच्चन से एक सवाल ! जया जी का एक बयान आया है ! स्लाम्डाग विदेशी फ़िल्म है - भारत में इतना शोर क्यों हैं ? बात में दम है ! अमिताभ जी सन १९८४ में एक चुनाव लड़े थे - अलाहाबाद से लोकसभा चुनाव ! पर उनके जितने की खुशी में "मुजफ्फरपुर" में मिठाई
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श्री नीतिश कुमार की विकास यात्रा समाप्त हुयी !

दालान पर हुए सर्वे से पता चलता है की करीब ५८ % जनता मानती है की श्री नीतिश कुमार की विकास यात्रा "एक अछ्छी पहल " है ! वहीँ १७ % जनता मानती है की यह आने वाले लोकसभा की तयारी और जनता की नब्ज़ जानने की एक कोशिश है ! कुछ लोग इसे बकवास भी मानते हैं क्योंक