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कुछ विशेष

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31 Dec 2009
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बिल्ली के गले में घण्टी बाँधेगा कौन?

इ तो पहिले से छपी गया हिन्दी- मीडिया पर अपुन को तो पताईच नही चला...:) हिन्दी-मीडिया कब मिटेंगे आतंक के साये हर रोज यही सवाल बेचैन करता रहता है? जब कभी घर के किसी सदस्य को चोट लग जाती है हम परेशान हो जाते हैं, देखो सम्भलकर चलना कहीं ठोकर न लग जाये, जल
 
सुनीता शानू
Dec 29 2009 11:55 AM
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शेयर का शेर

शेयर का शेर आजकल शेयर का शेर पड़ौस वाले शुक्ला जी के घर में घुस गया है और उसने वहाँ ऎसी उठा-पटक मचाई है कि घर के सभी सदस्यों को अपने शिकंजे में कस लिया है। न ढ़ंग से नाश्ता मिलता है न खाना, सुबह के दस बजे से लेकर दोपहर के चार बजे तक घर के सभी सदस्य टी
 
सुनीता शानू
Dec 29 2009 11:55 AM
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बीड़ी कहाँ जलइले!

अमर उजाला पर प्रकाशित एक व्यंग्य सार्वजनिक स्थानों पर स्मोकिंग पर प्रतिबंध लगते ही सिगरेट पीने वालों के सिर पर पहाड़ टूट पड़ा है। ऑफिस में स्मोकिंग जोन नहीं है, और बाहर सिगरेट पीने पर पुलिस पकड़ लेगी। एक मशहूर फिल्म में देव आनंद साहब सिगरेट का धुआं उ
 
सुनीता शानू
Dec 29 2009 11:55 AM
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बम तू कहाँ नहीं...

कुछ समय पहले लिखा हुआ एवं प्रकाशित "बीबी जी कल से मै काम पर नही आ पाऊँगी", क्यों ? क्या हुआ! मैने कामवाली से पूछा' वह बोली, आप देख नही न रही हैं, रोज टी.वी.पर बतला रहे हैं, रोज धमाका होत है, बा पुलिसवा को आप रोजही देख रहीन, किसी की तलाशी न लेत है, मु
 
सुनीता शानू
Dec 29 2009 11:55 AM
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गुनाहगारों की रिएलिटी एक व्यंग्य...

हिंदी मीडिया पर प्रकाशित बिग बॉस बड़ा अच्छा शो है, एक साथ इतने सारे अजनबी लोगो का साथ-साथ परिवार की तरह रहना, वाह मज़ा आ गया! श्रीमान जी चहक कर बोले अजनबी!! सबको तो जानते हो, नया कौन है भला ? ये अहसान कुरैशी कितनी बार कविता सुना-सुना कर हँसाता रहा है स
 
सुनीता शानू
Dec 29 2009 11:55 AM
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हर चैनल पर चीर हरण

हिन्दी-मीडिया पर प्रकाशित ऎ गणपत चल दारू ला, क्या परोस रहे हैं हम और आप अपने बच्चों को" एक टी वी चैनल पर रामायण का विज्ञापन दिखाया जाता है, कि आईये हम अपने बच्चों का भविष्य संवारें, परन्तु जैसे ही रामायण शुरू होती है बच्चे मुँह बना उठ खड़े होते है और
 
सुनीता शानू
Dec 29 2009 11:55 AM
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सर्दी में कैसे नहाएं

सर्दी में कैसे नहाएं सुनीता शानू सर्दी के मौसम में रजाई से निकलकर नहाने के लिए जाना भी एक विकट समस्या है। इस मौसम में शर्मा जी खुद को सबसे बदनसीब प्राणी समझते हैं। हर सुबह उस व1त उनका मूड उखड़ जाता है, जब पत्नी न नहाने पर बार-बार उलाहना देती है। आखिर
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दहेज के कारण पुरुषों का भी उत्पीड़न (नई दुनिया के विडंबना कॉलम में प्रकाशित)

दहेज के कारण पुरुषों का भी उत्पीड़न देश भर में वर्ष में ७० हजार मामले भारतीय दंड संहिता की धारा "४९८-ए" के अंतर्गत दर्ज किए जाते हैं। प्रतिदिन अनेक निर्दोष आरोपित पुरुष या नाते रिश्तेदारों को सजा हो जाती है, यहां तक की छोटे मासूम बच्चों व घर के बुजुर्
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घूरना मना है (नई दुनिया के संपादकीय पृष्ठ पर)

राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी क्या शुरू हुई कि जिधर देखो उधर उथल-पुथल मच गई।दिनोदिन बढ़ती ही जा रही है। उन दिनों कुछ खास है,जैसे अब कहीं गाय भगाई जा रही है तो कहीं कुत्ता, कहीं एमसीडी वाले बंदर के पीछे उछल रहे हैं तो कहीं सूअर भगा रहे हैं। बाकी सब तो ठी
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प्रेम मे लाठी

प्रेम में लाठी ( अमर उजाला के सम्पादकीय पृष्ठ पर प्रकाशित) मियां-बीवी राजी, तो क्या करेगा काजी? लेकिन वस्तुत: ऐसा है नहीं। दो प्रेम करने वालों के बीच से दुनिया की दीवार हटने का नाम ही नहीं लेती। यह प्यार भी, समझ में नहीं आता कि ऊटपटांग परिस्थितियों म
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जातीय दबाव से दम तोड़ती ममता

नई दुनिया के सम्पादकीय पृष्ठ पर प्रकाशित) पिछले दिनों सगोत्रीय विवाह से नाराज एक पिता द्वारा अपनी पुत्री की नृशंस हत्या और उससे पहले क्रूररतम उत्पीड़न की खबर आई । राजधानी के महिपालपुर इलाके की इस घटना ने लोगों को दहला दिया । इसी संदर्भ में सवाल उठता ह
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करामाती इंजेक्शन (नई दुनिया के संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशित)

करामाती इंजेक्शन एक जमाना था जब इंजेक्शन का नाम सुन कर बड़ों-बड़ो की हवा खराब हो जाती थी। बचपन में डॉक्टर जब सुई लगाने के लिये निकालता था सुई देखने के साथ ही उई निकल जाती थी। आज वही सुई करामाती इंजेक्शन बनकर देशभर में मशहूर हो गई है। एक जरा सी सुई और क
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मिस कॉल की भाषा (अमर उजाला के संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशित)

मिस कॉल की भाषा   सबसे पहले हम पाठको को बता दें कि मिसकाली जी क्या हैं। ये वो शख्सियत हैं जिससे बड़े-बड़े भी अपनी पहचान छुपाते हैं। अब अपने शर्मा जी से ही ले लो। पिछले दो हफ़्ते से बेचारे सो नही पाये हैं। इस मिसकाली ने नाक में दम कर रखा है। कब,कहाँ
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भ्रूण हत्या पर आधारित...मिस इंडिया की पहल से उपजे प्रश्न

मिस इंडिया की पहल से उपजे प्रश्न ( अमर उजाला के काम्पेक्ट में प्रकाशित ) मिस इंडिया पूजा चोपड़ा सेव द गर्ल चाइल्ड के लिए 10 लाख रूपए जुटाने के एक अभियान पर हैं। पूजा खुद एक ऐसे परिवेश से आती है, जहां उनके पिता ने उनकी मां को छोड़ दिया। पूजा की मां की
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छप्पर फ़ाड़ के (आई नेक्स्ट के संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशित)

छप्पर फाड़ के सुनीता शानू( १ सितम्बर आई नेक्स्ट के सम्पादकीय पृष्ठ पर प्रकाशित )माफ़ कीजियेगा मै यहाँ ऎसा कुछ लिखने नही जा रही कि बच्चों ने छप्पर फ़ाड़ा होगा। यहाँ बात ऊपर वाले की है कि ऊपर वाला जब भी देता है लेकिन ऎसा वो करता क्यों है? जिसे चाहिये एक उसे दस
 
सुनीता शानू
Sep 02 2009 08:43 PM
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बीमारी का लाभ

अमर उजाला पर प्रकाशित एक व्यंग्य....इधर जब से शर्मा जी को हल्की सी खाँसी आई हैं, ऑफ़िस में रूबी भी हाथ मिलाने से हिचकिचाती है।शर्मा जी बहुत परेशान हैं। बाहर स्वाइन फ़्लू का बढ़ता हुआ आतंक और घर में बीबी का। बार-बार हाथ धोते-धोते परेशान हो गये थे। गले लगाना
 
सुनीता शानू
Aug 18 2009 07:22 PM
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आदमी हूँ आदमी से प्यार करता हूँ

आदमी हूँ आदमी से प्यार करता हूँ (२० जुलाई को अमर उजाला में प्रकाशित)आज तो बहुत जोर-जोर से गला फ़ाड़ देने वाली आवाज़ में गाया जा रहा है...आदमी हूँ आदमी से प्यार करता हूँ... जाने क्या बात है आज सुबह से शर्मा जी बहुत बन-ठन के घूम रहे हैं, घर में बहुत चहल-पहल
 
सुनीता शानू
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समलैंगिकता: संस्कृति और संविधान

डेली न्यूज एक्टिविस्ट में प्रकाशित समलैंगिकता: संस्कृति और संविधान सुनीता शानू समलैंगिगकता के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ही अंतिम फ़ैसला करेगा, फ़िर भी इस विषय पर वैचारिक बहस शुरू हो चुकी है।ये सच है कि स्त्री-पुरूष के बीच आपसी संबंध ही एक सुन्दर समाज का
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यंगिस्तान में बुजुर्गों की जगह कहाँ है(अमर उजाला पर प्रकाशित)

भारत की युवा आबादी को देखते हुए ही इसे भविष्य की एक ताकत के रूप में आंका जा रहा है।लेकिन तस्वीर का दूसरा पक्ष यह है की युवा होते भारत में बुजुर्ग दयनीय और उपेक्षित जीवन बिताने को मजबूर हो रहे हैं।अब तो वैश्विक संस्थाएं भी इसकी तसदीक करने लगी हैं। विश
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घर मां बुलाईके जुता लगाईके अहा!

वो क्या है न कि हमारे यहाँ प्रथा हैं मशहूर होने की, कि कैसे अपनी टी आर पी बढ़ाई जाये, सो जो आ जाये लपेट में लपेट ही लो, कितना अच्छा युग्म है हमारा कि कोई कार्टून बना रहा है तो कोई जूता लगा रहा है, और एक हम शालीनता से श्रोता बन सब देख सुन रहे हैं, मगर
Dec 30 2008 05:19 PM
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सबसे सुखी गरीब

अमर उजाला के तीर-ए-नजर में प्रकाशित एक व्यंग्य प्रस्तुत है... महंगाई जब आती है, अमीरों के सिर चढ़ जाती है, मिडिल क्लास फ़ैमिली को मुँह चिढ़ाती है, परन्तु गरीबी के पेड़ की एक डाल भी हिला नही पाती... वो कल भी तरसते थे रोटी को और रोटी आज भी गरीब को भाव दिख