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22 May 2010
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ग्रामोफोनीय रिकोर्ड के कबाड़खाने से कुछ रचनाएँ

बात बहुत पुरानी है, इतिहास में  झांकियेगा तब पता चल  ही जाएगा...   समझिये ग्रामोफ़ोन भारत में आया ही था, उस ज़माने में कितनों के पास ग्रामोफ़ोन रहा होगा ? सन १९०० के आस पास की बात है,  उस ज़माने में महिलाओं का घर से
 
vimal verma
May 22 2010 04:57 PM
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एक अफ़गानी की आवाज़ में ....जब दिल ही टूट गया

आज आपका परिचय कराता हूँ एक अफ़गानी ग़ायक  सादिक़ फ़ितरत (NASHENAS)से जो कंधार में पैदा हुए लेकिन काबुल में अपने जीवन में सबसे ज़्यादा रहे । वैसे NASHENAS अफगानिस्तानी भाषाओं, दरी और पश्तो और साथ ही उर्दू में दोनों मेंगाते हैं . ।1970 के शुरुआती
 
vimal verma
टैग: nashenas
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बड़े गुलाम अली खान पर एक वीडियो......संगीत प्रेमियों के लिये खास।

भारतीय कार्यक्रम आते ही हम रेडियो बन्द कर दिया करते थे,अक्सर किसी ऑर्केश्ट्रा कार्यक्रम में ऐसे संगीत के बारे में मिमिक्री आर्टिस्ट मिमिक्री करते हुए मज़ाक में यही कहता कि ऐसा गाने के लिये जाड़े की सुबह लोटे -लोटे पानी से नहाने पर जो मुंह से ध्वनि निकलती
 
vimal verma
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कवि नीरज जी की आवाज़ में... " कारवां गुज़र गया ग़ुबार देखते रहे "

                                                     आज एक बहुत ही पुराना कोई गाना सुन रहा था वो गीत १९५० के आसपास का
 
vimal verma
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जब फागुन रंग झमकते हों

                                                                      
 
vimal verma
टैग: होली
Mar 01 2010 11:53 AM
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डा: कुमार विश्वास की एक रचना, कवि सम्मलेन को याद करते हुए......

क्या कवि सम्मेलनों का दौर ख़त्म होता जा रहा है, एक समय था जब छोटे छोटे शहरों में कवि सम्मेलनों और मुशायरों की वजह से शहर में चहल पहल खूब हुआ करता था, वाह वाह और मुक़र्रर का शोर
 
vimal verma
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नन्हें मुन्हें बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या है ?

कल तक जिन गीतों को मेरे पिता गुनगुनाते थे उनके बाद उन गीतों को हमने भी गाया गुनगुनाया .... अब हमारे बाद आने वाली पीढ़ी भी उन्हें गुनगुना और गा रही है,जब भी इन गीतों को पहले पहल गाया या सुना गया होगा सोचिये कैसा लगा  होगा...आज गीत वही है समय और स
 
vimal verma
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हम नामवर न हुए तो का ! हमको ना बुलाओगे ?

बड़ी भिन्नाट हो रही है, बड़े समय बाद अपने बिलागवतन में लोग इलाहाबाद के मीट का चूरमा बना रहे हैं , अफ़सोस त ई है कि हमहुं को वहां ना बुलाके इसके संयोजक लोगो बहुतै गलत काम किया और उस पर ये कि नामवर लोग वहां इकट्ठा थे उनमें एक ठो नामवर पर इतना समय और ऊर
 
vimal verma
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किरण आहलुवालिया की आवाज़ में कुछ ग़ज़लें

कुछ ही दिन हुए कि एक पुराने गीत को याद करते हुए एक पोस्ट ठुमरी पर चढ़ाई थी, रचना अधूरी थी तो अपने मित्र पंकज ने पूरी रचना मेरे पास भेजी मैने उसे हूबहू चढ़ा दी ये सोचते हुए कि कम से कम वो रचना अंतर्जाल पर तो हमेशा रहेगी ही, खैर कुछ टिप्पणिया भी आईं उन
 
vimal verma
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हर लोमड़ी यहां पर अंगूर खा रही है, खा पाये जो न उसको खट्टा बता रही है ...

एक अधूरी रचना जो मेरे अंदर इस चुनाव के वातावरण में रह रह कर याद आ रही थी..और खास बात कि पूरी रचना मुझे याद भी नहीं हो पा रही  थी...इस विश्वास के साथ मैने पिछले पोस्ट में उस रचना को ठुमरी पर चढ़ा दी कि अपने पुराने मित्र जब पढेंगे तो इसे कम से
 
vimal verma
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दिल्ली में दीखता है जंगल का ही नज़ारा

चुनाव का मौसम आ गया पूरे देश में  विधान सभा के चुनाव हो रहे है हैं,हर जगह नेताओं की मुस्कुराती तस्वीर के होर्डिंग, भाषण , रैली का दौर बस कुछ दिन, जनता से जुड़ाव, और फिर चुनाव के बाद शान्ति,नेताओं के वादे इरादे सब उनके पास , अभी गठरी पर एक इस
 
vimal verma
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अजयजी की गठरी का ब्लॉग जगत में स्वागत करें !

अजयजी हमारे मित्र है उन्होंने भी गठरी नाम से अपने ब्लॉग की शुरूआत की है,आप भी उनका हौसला बढ़ाएं, उम्मीद है उनकी गठरी से  ब्लॉग जगत लाभान्वित होगा।
 
vimal verma
टैग: गठरी
Sep 22 2009 03:45 PM
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अतीत होते हमारे लोकगीत.....!!!

पिछली पोस्ट में त्रिनिडाड के बैठक संगीत के बारे मैने लिखा था पर ऐसा नहीं है कि ये बैठक संगीत सिर्फ़ और सिर्फ़ कैरेबियन देशों की थाती है....भाई हम भी कभी अपनी अंतरंग बैठकों में कुछ ऐसे गीतों को गाते रहे हैं कि जिस गाने से महफ़िल शुरू हुई होती वहां
 
vimal verma
Sep 19 2009 03:30 PM
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त्रिनिडाड का बैठक संगीत सुनना हो तो इधर आईये.......

बहुत दिनों से सिर्फ़ चिंतन के अलावा कुछ हो नहीं रहा, पिछले दिनों अपने समाज में सच का सामना से लेकर बरसात,सूखा, मंहगाई, स्वाइन फ़्लू, और जिन्ना का जिन्न सब एक एक करके दिमाग खराब कर रहे थे, ऐसा भी नहीं कि कुछ ढ्ट टेणन टाईप ही सही कुछ अपनी ज़िन्दगी ही चल
 
vimal verma
टैग: चटनी
Aug 22 2009 02:45 AM
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सच का सामना करने से क्या लोग डरने लगे हैं.....

पिछले दिनों "सच का सामना" को लेकर बहुत माहौल गरम है और गरम इस कदर है कि संसद को भी इसपर ध्यान देना पड़ा, अभी तक जितना मैने इस बारे में पढ़ा है सबने एकांगी पहलू पर ही ज़्यादा बात की गई है पर बैड्फ़ेथ पर जो विचार मैने पढ़े मुझे ऐसा लगता है कि इस लेख को पढ़ना
 
vimal verma
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याद पिया की आये..........वडाली बंधुओं की यादगार महफ़िल से कुछ मोती....

उस्ताद पूरन चन्द और प्यारे लाल वडाली बन्धुओं को बहुत तो सुना नहीं पर इन बन्धुओं का गायन वाकई अद्भुत है,काफ़ी समय हो गया " टाइम्स म्युज़िक " ने एक एल्बम रिलीज़ किया था "याद पिया की" उसमें बहुत सी रचना पंजाबी में थी, पंजाबी मैं थोड़ा बहुत समझ पाता हूँ,जैसे
 
vimal verma
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एक कजरी पं.छन्नूलाल मिश्र जी की आवाज़ में ....

लोग ना जाने किन किन बहसों में लगे हैं, कभी इन बहसों का अन्त होने वाला भी नहीं है ,तो घड़ी भर जहां मन को सुकून मिले ऐसी विषम स्थितियों में कुछ अच्छा गीत संगीत सुनने से जो मन के अन्दर जो उर्जा मानव मन को मिलती है उसका कोई जोड़ नहीं है। रिमझिम बरसात की फु
 
vimal verma
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पंचम दा को याद करते हुए......

आज अगर हमारे बीच पंचम दा होते तो सत्तर बरस के होते,कल ही तो उनके जन्म दिन पर हम उन्हें याद कर रहे थे,सचिन दा के बेटे तो थे पर उनकी पहचान पर कभी सचिन दा का साया नहीं पड़ा,यही तो उनकी खासियत थी, "सुबह" नाम का एक सीरियल आया करता था दूरदर्शन पर उसका शीर्ष
 
vimal verma
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भोजपूरी फ़िल्म "लागी नाहीं छूटे रामा " के कूछ गाने....

इरफ़ान जी ने टूटी बिखरी में भोजपूरी के बदनाम गानों की एक लम्बी फ़ेहरिस्त लगाकर वाकई बहुत अच्छा काम किया,दर असल अगर देखा जाय तो भोजपूरी के नाम पर इसके सिवा कोई बहुत अच्छा का काम हुआ भी नहीं है और आज भोजपूरी फ़िल्में धड़ाधड़ बन तो रही हैं पर माल काटने के चक
 
vimal verma
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हे गंगा मईया तोहे पियरी चढ़ईबो

आज भोजपुरी फिल्म का स्तर वाकई बहुत गिर गया है पर जब भोजपुरी फिल्म की शुरुआत हुई थी तब ऐसी स्थिति नहीं थी जो आज है, साठ के दशक में भोजपुरी में बनी पहली फिल्म "हे गंगा मईया तोहे पियरी चढ़इबो" में कम से कम सामाजिक सरोकार तो दिखता था पर ये ज़रुर है कि कुछ
 
vimal verma
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नये ब्लॉगिये का स्वागत करें......

भाई, मेरे मित्र अखिलेश धर हैं, बहुत दिनों से सोचते सोचते आखिरकार उन्होंने अपना ब्लॉग BADFAITH के नाम से खोल दिया है,अभी उन्होंने अपनी लिखी एक कविता पोस्ट की है। उम्मीद है कि अपने ब्लॉग के माध्यम से वो ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक अपने विचार ले जा पायेंग
 
vimal verma
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नय्यरा नूर की गाई कुछ बेहतरीन रचनाएं......

गज़ल, कव्वाली,सूफ़ी रचनाएं सब बीते दिनों की बात हो गई हो जैसे,हम जैसे लोग आज भी गज़लों को सुनते हैं, गुनगुनाते हैं, मौका मिले तो गाते हैं,पर आज की पीढ़ी को तो ये सब स्लो स्लो सा लगता है,और हम हैं कि ग़ज़लों के मायने समझते हुए बड़े तल्लीन भाव से सुनते हैं,गज़
 
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सचिन दा की आवाज़ आज भी हमारे इर्द-गिर्द गूंजती है.........

स चिन देव बर्मन बेहतरीन संगीतकार तो थे ही पर उससे भी बेहतर उन्होंने अपनी आवाज़ का खूबसूरती से प्रयोग किया था,उनके गाये सभी गीत सीधे आपके दिल से तादात्म्य स्थापित कर लेते थे, दादा की आवाज़ में गज़ब की कशिश थी जिसे बीस तीस पचास साल भी आप भुला नहीं सकते
 
vimal verma
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ठुमरी की सालगिरह....

पिछले दिनों यूनुस जी ने रेडियोवाणी की दूसरी साल गिरह मनाई थी,आज ११ अप्रैल को ठुमरी भी दो साल की हो गई, ठुमरी पर जो मेरी पहली पोस्ट थी उसे आज फिर से पोस्ट कर रहा हूँ। बचपन की सुहानी यादो की खुमारी अभी भी टूटी नही है.. जवानी की सतरगी छाव बलिया,आज़मगढ़,
 
vimal verma
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गुलज़ार साहब वाकई कलम और आवाज़ के जादूगर हैं......

गुलज़ार साहब वाकई कलम और आवाज़ के जादूगर हैं,अपनी रचनाओ में जब शब्दों को रंग की तरह भरते चले जाते है तो वो रचना बहुत कुछ अपने अनुभव का कोलाज सा लगने लगती है, कभी कभी तो कुछ शब्दों का इस्तेमाल करके आपको चौंका देते है,अपनी गीतों में कुछ ऐसा संसार रचते है
 
vimal verma
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रंगी सारी गुलाबी चुनरिया रे मोहे मारे नजरिया संवरिया रे ........

अब जाके लग रहा है कि होली आने को है,जब किसी छत से फेंका गया गुब्बारा जिसमें भरा था पानी.....मेरे सर को छू कर निकल गया तब मुझे लगा कि होली आ गई है....ऊपर देखा तो एक छत की मुंडेर पर इक बच्चा मुझे देखकर मुस्कुरा रहा था जैसे.... बच गये बाबू .....खैर मैं
 
vimal verma
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जब फागुन रंग छमकते हों तब देख बहारें होली की

एक और नये साथी ने आभासी दुनियाँ में कदम रखा है, ये हमारे बहुत ही पुराने मित्र हैं साथ साथ संगीत के साथ लिट्टी चोखा की बात जब आये तो चेहरा साथी का खिल खिल जाता है फिर अपने हाथों से बनाने का भी अच्छा शौक है इन्हें.... नाम है इनका मयंक राय और इन्होंने अ
 
vimal verma
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गुलाम अली साहब की आवाज़ में कुछ यादगार रचनाएं

पिछले दिनों मैं अपने बड़े भाई विनय के पास मऊ (उत्तर प्रदेश ) गया था,मऊ से भी बीस किलोमीटर दूर घोसी चीनी मिल है (जहां से कांग्रेस के कल्पनाथ राय सांसद हुआ करते थे) और दूर से ही चीनी मिल की महक ने अपनी दस्तक दे दी थी कि घोसी आने वाला है,वहां की खुशबू जब
 
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हमरी अटरिया पे आजा रे संवरिया देखा देखी तनिक होई जाय......

भाई हमें तो सुजात हुसैन खां साहब का ये अंदाज़ बहुत पसन्द है, सितार पर जिस अंदाज़ से उनकी उंगलियाँ चलती है उससे अलग उनकी डूबी हुई आवाज़ भी कम नहीं है।आज आप सुनिये पर पता नहीं क्यौ एक बात जो दिल में है आज कह लेना चाहता हूँ, इतना नाम पं जसराज और पं भीमसेन
 
vimal verma
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ओ मेरे आदर्शवादी मन, ओ मेरे सिद्धान्तवादी मन, अब तक क्या किया? जीवन क्या जिया!!

पिछले दिनों मै मुक्तिबोध की कविताएं पढ़ रहा था और संयोग देखिये वही कविता कुछ अलग अंदाज़ में कुछ मित्रों ने गाया है और आज मेरे पास मौजूद है,अपनी संवेदना भी अब कुछ ऐसे हो गई है, कि बहुत सी बातों का असर हम पर होता ही नहीं,अपने आस पास ही कुछ ऐसे स्थितियाँ
 
vimal verma
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स्वानन्द किरकिरे के इन गीतों से इस साल का आगाज़ करते हैं.....

भाई नया साल सबको मुबारक हो,बीते सालों की गलतियाँ फिर ना दोहराएं बस यही अपनी चाहत है, आज इस सुनहरे मौक़े दमदार आवाज़ के धनी स्वानन्द किरकिरे की आवाज़ से आगाज़ करते हैं,स्वानन्द किरकिरे की गायकी का अपना अलग अन्दाज़ है, कुल छ: गीत जो मुझे बेहतरीन लगे वो आपकी
 
vimal verma
Jan 01 2009 04:20 PM
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सुनना है तो इसे सुनें..फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की गलियों के आवारा कुत्ते

आज कुछ अलग सा सुनाने को मन है,एक समय था जब जनवादी गीतों को गाने वाले ग्रुप बहुत थे,अगर वो कभी कैसेट या सीडी निकाल भी लेते तो सही तरह से डिस्ट्रीब्यूट कर नहीं पाते थे..और ज़्यादा लोग उसे सुन भी नहीं पाते थे।जब इलाहाबाद में था तब हमने बिगुल नाम से जनवाद
 
vimal verma
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१०८ है चैनल, फिर दिल बहलते क्यौं नहीं?

ये रचना नेट के माध्यम से मुझ तक पहुँची थी...मेरे मित्र अजय कुमार ने कुछ शब्दों में हेर फेर भी किया है..फिर भी कुछ कमियाँ ज़रूर हैं,ये किसकी रचना है मुझे मालूम नहीं। अब आप ही पढ़ें और बताएं कैसी है? शहर की इस दौड़ में दौड़ के करना क्या है? जब यही जीना है
 
vimal verma
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अपने प्रियतम शहर इलाहाबाद की एक खूबसूरत सुबह.......भाग -2

आपकी बधाईयाँ मिंकी तक पहुंच चुकी हैं,कुछ तस्वीरें मिंकी के पास और थीं संगम तीरे की शेष थी देखिये तो सही क्या नज़ारा है पिछले पोस्ट में आपके उत्साह को देखते हुए मैं आपको एक बार फिर से संगम से रूबरू करवा रहा हूँ,वैसे सीगल ने तो संगम पर अपना कब्ज़ा जमा रख
 
vimal verma
Dec 22 2008 10:24 PM
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अपने प्रियतम शहर इलाहाबाद की एक खूबसूरत सुबह......

अब साल २००८ अलविदा कहने को है....नये साल का आगमन होने को है...२००९ सबके लिये खुशियाँ लेकर आये अपनी तो यही चाहत है......अभी कुछ तस्वीरें इलाहाबाद की देखकर मन फ़्लैशबैक में डूब गया...इलाहाबाद से दूर रहकर इन तस्वीरों को देखना मेरे लिये एक सुखद एहसास है..
 
vimal verma
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बच्चों को सिखाना !

आज मैं अपने मित्र अजय कुमार की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ,और इस रचना को लिखते हुए अजय कहते है" विगत दिनों के आतंकी हमलों ने ऐसा कहने पर मजबूर कर दिया इसलिये मैं बुज़ुर्गों,बच्चों, और अभिभावकों से माफ़ी चाहता हूँ " अब अपने नन्हें-बच्चों को पाठ विनम्रता
 
vimal verma
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उनकी आवाज़ का जादू गज़ब है, पंडित छन्नू लालजी सबसे अलग हैं !!

पंडित छन्नू लाल मिश्र जी की आवाज़ के बारे बहुत कुछ लिखा जा चुका है, यूनुस जी ने अपने ब्लॉग पर उनके बारे में बड़े तफ़्सील से लिखा था, ,मैने भी उनके बारे लिखा था, पर उस समय तकनीकी मामले में अपना मामला थोड़ा कमज़ोर था तो सिर्फ़ एक पोस्ट ही लिख पाया था, पंडितज
 
vimal verma
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सभी मनोरंजन चैनल का फ़ैसला, नहीं दिखाएंगे नये कार्यक्रम सोमवार से...

पूरी दुनियाँ आर्थिक मंदी के दौर से गुज़र रही है,अपना देश भी इससे अछूता नही था पर टी वी देखने वाले दर्शकों को इस सोमवार पुराने प्रोग्राम देखकर ही संतोष करना होगा,हां भाई सारे मनोरंजन चैनल सोमवार से हड़तात पर जा रहे हैं, पिछले कुछ दिनों से छोटे पर्दे की
 
vimal verma
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ये कैसी दुनियाँ है.........मन बौरा रहा है

अजीब सी बात है......कि हम संगीत में डूबे रहे.....और इस बीच किसी परिवार ने बहत्तर क्रेडिट कार्ड रखने के बाद भी जीवन लीला समाप्त कर ली ........घर में चार सदस्य थे और सुबह का सूरज देख नही पाये, ये घटना मुम्बई के बोरीवली की है..... हम संगीत सुनते रहे...
 
vimal verma
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एक आवाज़ अमानत अली साहब की.......

संगीत अकेलेपन का साथी है...और साथ साथ दोस्तों की महफ़िल में संगीत की बैठकी हो तो पूरा का पूरा हुजूम थिरक रहा होता है या अकेले हों तो भी संगीत आपका अच्छा साथी होता ही है,पर इधर बहुत दिनों से कुछ नया सुना भी नहीं है...और अब लगता है गुलाम अली,मेंहदी हसन,
 
vimal verma