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सुबीर संवाद सेवा म प्र

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14 Jun 2010
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असर करें जो दुआएं कभी फरिश्‍तों की, फि़ज़ा की कोख से पैदा अदीब होता है । साहित्‍यकार के बारे में इससे अच्‍छा कुछ नहीं कहा जा सकता है ।

राजस्‍थान के शायर श्री दिलीप सिंह दीपक की पुस्‍तक फि़ज़ा की कोख से में से मैंने ये शेर कोट किया है । इस शेर को पढ़कर मानों अपने अंदर एक प्रकार के गर्व का एहसास भर गया है । चूंकि ये शेर दुनिया के हर एक साहित्‍यकार के लिये लिखा गया है इसलिये ये कह सकता हूं
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एक छोटी सी नशिश्‍त की रिकार्डिंग सुनिये, श्री रमेश हठीला जी के निवास पर हुई इस नशिश्‍त में शामिल थे श्री रमेश हठीला, मोनिका हठीला, प्रकाश अर्श,

आठ मई के अखिल भारतीय मुशायरे के बाद अर्थात नौ मई को श्री रमेश हठीला जी के निवास पर एक नशिश्‍‍त का आयोजन किया गया । जिसमें दाल बाटी चूरमा की दावत के साथ शेरो शायरी का आनंद लिया गया । नशिश्‍त का संचालन किया अंकित सफर ने । श्री रमेश हठीला जी के निवास पर हुई
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शिवना प्रकाशन की पुस्‍तकों का विमोचन सीहोर से लेकर अमेरिका तक होता रहा, कहीं कवि सम्‍मेलन में तो कहीं मुशायरे में । कुछ जानकारी यहां पर देखिये ।

अग्रणी साहित्य प्रकाशन संस्था शिवना प्रकाशन तथा मप्र उर्दू अकादमी के संयुक्त तत्वावधान  में सुकवि मोहन राय की स्मृति में अखिल भारतीय मुशायरे का आयोजन किया गया । कार्यक्रम  में शिवना प्रकाशन की नई पुस्तकों मोनिका हठीला की एक खुशबू टहलती रही,
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ये कार्यक्रम जिसमें श्री विजय वाते, सुश्री नुसरत मेहदी जी, श्री माणिक वर्मा जैसे नाम श्रोताओं में बैठे थे और मेरे गुरू डॉ विजय बहादुर सिंह मुख्‍य

मित्रों का नेह कभी कभी मन को छू जाता है । अाप सब जानते ही हैं कि डॉ आज़म मेरे परम मित्रों में से हैं । उसी प्रकार से मेरे एक और मित्र हैं जनाब अनवारे इस्‍लाम जी जो कि भोपाल से एक शानदार पत्रिका सुखनवर निकालते हैं । अपने स्‍तर पर निकाली जाने वाली ये
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति (अमेरिका ) के कवि सम्मेलनों की श्रृंखला । कार्यक्रमों के संयोजक हैं--डॉ. सुधा ओम ढींगरा, डॉ. नंदलाल सिंह और अलोक मिश्रा।

अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति (अमेरिका ) के कवि सम्मेलनों की श्रृंखला का आरम्भ ९ अप्रैल २०१० को डैलस से हुआ.. उत्तरी अमेरिका में यह संस्था प्रत्येक वर्ष तक़रीबन पंद्रह से सत्रह कार्यक्रम करवाती है और इन कार्यक्रमों के संयोजक हैं--डॉ. सुधा ओम ढींगरा, डॉ.
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नव संवत्‍सर की मंगलकामनाएं और चैत्र नवरात्रि के अवसर पर सुनिये लता जी के स्‍वर में पंडित नरेंद्र शर्मा जी के आठ गीत जिन्‍हें संगीतबद्ध किया है पंडित

आज से नया संवत्‍सर प्रारंभ हो रहा है । नया संवत्‍सर और साथ में चैत्र नवरात्रि भी आज से ही प्रारंभ हो रही हैं । इन दिनों काफी अपने परिचितों एवं मित्रों के समाचार ठीक नहीं प्राप्‍त हो रहे हैं । स्‍वास्‍थ्‍य से संबंधी परेशानियां सबके साथ में दिख रही हैं ।
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प्रिय गौतम जन्‍मदिवस की शुभकामनाएं । तुम यूं ही जगमगाते रहो यूं ही खिलखिलाते रहो, संजीता और तनया के साथ जीवन पथ पर सफलता के साथ अग्रसर रहो ।

गौतम राजरिशी, नाम में क्‍या रखा है ये भले ही शेक्‍सपियर ने कहा हो । लेकिन मैं शैक्‍सपियर को नहीं मानता । नाम में काफी कुछ रखा होता है । गौतम नाम अपने आप में ही सम्‍पूर्ण नाम होता है और तिस पर राजरिशी का सरनेम सामने लगा हो तो बात वैसे ही मुकम्‍मल हो जाती
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महिला दिवस पर एक कविता, जो समर्पित है मेधा पाटकर, किरण बेदी और कल्‍पना चावला जैसे नामों को, नाम जो विद्रोह हैं, महिला बने रहने से विद्रोह के नाम ।

महिला दिवस जुट पड़ी हैं ढेर सारी महिलाऐं सभागार में, आठ मार्च जो है..! लिपिस्टिक से पुते होठों, कांजीवरम की साड़ियों, और इत्र फुलैल का महिला दिवस! मेधा पाटकर तो नहीं लगाती कभी भी लिपिस्टिक..! मेरे ख्याल से लक्ष्मी बाई ने भी नहीं लगाई होगी कभी..! किरण बेदी
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होली का तरही मुशायरा अंतिम भाग:- होली नहीं ये होला है, ये रंगों का गोला है । आज वरिष्‍ठों का छिछोरपन देखने का दिन है । राकेश खंडेलवाल जी, नीरज

नोट :- होरी आ चुकी है और कल रंगों का दिन है । जो भी रंगों से परहेज करते हों वे घर से न निकलें । मेरे जैसे छिछोरे रंग लेकर घूम रहे हैं और जो किसी का कोई लिहाज नहीं करते हैं रंग डालने से पहले । हम तो पहिले ही कहे रहे कि ये सब कुछ ऊपर की पीढ़ी से ही आ रहा
Feb 28 2010 11:04 AM
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होली का तरही मुशायरा:- आज के मुशायरे में न केवल जूते पड़ रहे हैं बल्कि मारे भी जा रहे हैं । क्‍योंकि आज हैं सुलभ सतरंगी, अर्चना तिवारी और पारुल ।

नोट : होरी में अब केवल दो दिन ही बाकी हैं सो सभीको अगाह किया जाता है कि भजिये, गुझिये, आदि हर वो चीज जो दिखने में हरी हो उसे संभल कर खाएं क्‍योंकि उसमें भंग होने की प्रबल संभावना है । अब माटसाब भी का करें जब पूरे कुंए में ही भंगवा घुरी हो । पर आज तो हम
Feb 27 2010 03:02 PM
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होली का तरही मुशायरा :- सनम की गली में आज किसकी बारी है, और किसकी हो सकती है बर्थडे बाय के सिवा । तो आज एकल काव्‍य पाठ सुनिये प्रकाश अर्श का ।

नोट : सूचना मिली है कि होली को देखते हुए सरकार ने अखंड भारतमंडल में सनम की गली में जाने पर लगा प्रतिबंध हटाने की घोषणा कर दी है । सो अब सब आराम से आये जाएं कोई राकेने वाला नहीं है । ई बेवार हमार बबुआ अभीन तलक सिरफ जन्‍मदिन ही मना रहा है । बाकी के सारे
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होली का तरही मुशायरा :- आज आ रही है एक चांडाल चौकड़ी जिसमें शामिल हैं गिरीश पंकज, डॉ. मोहम्‍मद आज़म, राजेन्‍द्र स्‍वर्णकार और जोगश्‍वर गर्ग । सनम की

( नोट : होली तक के लिये समूचे भारतवर्ष में किसी भी प्रकार के दिमागी काम पर रोक लगा दी गई है । वे सारे लोग जो कि होली के अवसर पर किसी भी प्रकार से दिमाग का उपयोग करते पाये जाएंगें उनका रोमगोपाल वर्मा की आग फिल्‍म पूरे सप्‍ताह भर दिखाई जायेगी । होली दिमाग
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होली का तरही मुशायरा:- दो दिन से जूते चल रहे हैं तो आज देखें कि कौन उतार रहा है जूतों से आरती ? हैं ये तो निर्मला कपिला दी, शार्दूला दीदी और कंचन

( विशेष नोट : होली के तरही मुशायरों की ग़ज़लों को पढ़ने के लिये अपने दिमाग को उसी प्रकार खूंटी पर टांग दें जिस प्रकार से आप डेविड धवन की कामेडी फिल्‍मों को देखते समय करते हैं । यदि दिमाग को साथ रखेंगें तो मनोर‍ंजन की हमारी कोई जिम्‍मेदारी नहीं है ।) तभी
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होली का तरही मुशायरा :-सनम की गली में जूते खाने आज आ रहे हैं पाठशाला के तीन छिछोरतम विद्यार्थी गौतम राजरिशी, रविकांत पांडे और वीनस केसरी ।

( वैधानिक और संवैधानिक सूचना :- इस ब्‍लाग के लिखने वाले ने किसी प्रकार की कोई भांग या अन्‍य नशीला पदार्थ का सेवन नहीं किया है । और पढ़ने वालों को इस बात पर विश्‍वास करना ही होगा । विश्‍वास न करो तो भाड़ में जाओ । ) हम कल से ही कह रहे थे कि भांग ऊंग खइबे
Feb 23 2010 07:39 AM
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पड़े वो जूते तेरी गली में , होली के तरही मुशायरे के ठीक पहले ही दिन देखिये किस प्रकार से प्रकाश पाखी हजामत बना रहे हैं निर्मल सिद्धू जी की ।

आज से होली का तरही मुशायरा प्रारंभ हो रहा है । होली का माहौल तो बनने लगा ही है । हालांकि हमारे यहां तो इस बार बादल पानी का मौसम हो रहा है और उसके कारण कुछ होली का रंग बनने में देर लग रही है । खैर तो आज से हम चालू करते हैं होली का तरही मुशायरा । उतर गया
Feb 22 2010 08:26 AM
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होली का रंग बनाने के लिये नज़ीर अकबराबादी का पूरा गीत पढि़ये, ये पूरा सातों छंद के साथ आपने कहीं नहीं पढ़ा होगा । जब फागुन रंग झकमते हों तब देख

जब फागुन रंग झमकते हों तब देख बहारें होली की। और दफ़ के शोर खड़कते हों तब देख बहारें होली की। परियों के रंग दमकते हों तब देख बहारें होली की। ख़ूम शीश-ए-जाम छलकते हों तब देख बहारें होली की। महबूब नशे में छकते हो तब देख बहारें होली की।। हो नाच रंगीली
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उतर गया है बुखार सारा पड़े वो जूते तेरी गली में, उतारो जूतों से आरती सब सनम हैं आए गली हमारी । होली के स्‍पेशल तरही मुशायरे के लिये ये हैं दो मिसरे ।

लो साहब देखते ही देखते होली का त्‍यौहार आ गया ।  अभी तो आप देखिये कि क्‍या क्‍या होता है । लेकिन फिलहाल आज तो केवल तरही के मिसरे के बारे में कुछ बातें । जिहाल-ए-मिस्कीं मकुन तगाफुल, दुराय नैना बनाय बतियाँ। अमीर खुसरो की ये रचना पहले तो इतने तरीकों
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चले जा रहे हम हैं ठेले पे लद कर, खुदा यूं किसी की न मय्यत उठाए । श्रोताओं के बहुत अनुरोध पर आ रहे हैं श्री भभ्‍भड़ कवि 'भौंचक्‍के अपनी एक ग़ज़ल और एक

इस बार के तरही को लेकर मन बहुत ही गार्डन गार्डन है । जितने उत्‍साह के साथ लोगों ने इसमें भाग लिया उससे मैं अभिभूत हूं । सबसे बड़ी बात ये है कि सबने मुशायरे में इस प्रकार से भाग लिया जैसे ये उनका अपना ही कार्यक्रम है । सच है ये आप सबका ही तो कार्यक्रम है
Feb 04 2010 07:30 AM
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वो कातिल अदायें लिये घूमते हैं, भला अपनी मंजिल कोई कैसे पाए । आज तरही मुशायरे का समापन श्री तिलकराज कपूर जी और निर्मला कपिला जी की रचनाओं के साथ ।

वैसे सोचा तो ये था कि इस बार के तरही को क्‍योंकि ये नये साल का है इसलिये जनवरी में ही समापन कर देंगें । लेकिन अपना सोचा कब होता है वो जब सोचे तब होता है । और बहुत प्रयास करने के बाद भी फरवरी में मुशायरा प्रवेश कर गया है । और आज इसका समापन होना है । समापन
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बहुत हो चुका अब न झांसे में आना 'न जाने नया साल क्या गुल खिलाए' समापन के एक पायदान पहले सुनिये श्रद्धेय दादा भाई महावीर शर्मा जी और देवी नागरानी जी को

तरही का समापन आ ही चुका है । आज की पोस्‍ट के बाद अब केवल एक और पोस्‍ट शायद लगे । क्‍योंकि मैं चाह रहा था कि समापन एक शायर और एक शायरा से हो । वैसे तो आज भी यही काम्बिनेशन है लेकिन अंतिम प्रस्‍तुति में भी यही होगा । ये चारों नाम मैंने आखिरी दो पोस्‍टों के
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ये कैसे भंवर में फँसी जिंदगानी, न पूछो वजह क्यूँ कदम डगमगाए । समापन की तरफ बढ़ रहे तरही मुशायरे में आज सुनिये अभिनव चतुर्वेदी, प्रकाश अर्श और वीनस

तरही मुशायरे को लेकर इस बार काफी व्‍यस्‍तता हो गई है और ऐसा लग रहा है कि अगली बार से इसका कुछ फार्मेट तय करना होगा कि किस प्रकार से इतन सारे कवियों को लगाया जाये । लोगों में उत्‍साह है और सब इस मुशायरे को अपना समझ रहे हैं । ये ही बड़ी बात है । वैसे भी ये
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कोई जा के रूठे हुए को मनाए, उमीदों के दीपक सहर ने जलाए । तरही मुशायरे के सप्‍ताह के प्रथम खंड में आज सुनिये अर्चना तिवारी जी और सुलभ सतरंगी को ।

गणतंत्र दिवस की सभी को शुभकामनाएं और बरसों पहले किसी कार्यक्रम के लिये लिखी हुई ये कविता आज भारत के संविधान को समर्पित आज़ाद जहां तन है और मन स्‍वतंत्र है ये जन का है ये मन का है ये गण का तंत्र है जनता का है जनता के ही द्वारा रचा गया जनता के लिये संविधान
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'थ्री जीनियस' श्री नीरज गोस्‍वामी जी, श्री समीर लाल जी और श्री योगेन्‍द्र मौदगिल जी। नये साल के तरही मुशायरे के विशेष आमंत्रण खंड में आज सुनिये तीन

नये साल का तरही मुशायरा इस मायने में सफल तो कहा ही जा सकता है कि कई सारे आमंत्रितों ने अपनी क़लम की चुप्‍पी को तोड़ कर ग़ज़लें भेजीं हैं । और उसी कारण ये हुआ है कि इस बार बहुत ही आनंद रस की वर्षा हो रही है । वसंत पंचमी के शिवना प्रकाशन के आयोजन की रपट आप
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वसंत पंचमी की सभी को मंगल कामनाएं, मां शारदा के चरणों में ग़ज़ल के पुष्‍प चढ़ा रहे हैं आज के तरही मुशायरे में गौतम राजरिशी, कंचन चौहान और अंकित सफर ।

या कुन्देन्दु- तुषारहार- धवला या शुभ्र- वस्त्रावृता या वीणावरदण्डमन्डितकरा या श्वेतपद्मासना | या ब्रह्माच्युत- शंकर- प्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा || आज वसंत पंचमी है । मां शारदा का प्राकट्य दिवस । वसंत का उल्‍लास
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हंसी दर्द में लाज़मी तो है लेकिन, कोई तो चिराग़े मोहब्बत जलाये तरही मुशायरे में आज सुनिये दो नयी प्रविष्टियां मुस्‍तफा माहिर पंतनगरी और इस्मत ज़ैदी

तरही मुशायरा नये साल की एक बेहतरीन शुरूआत रही है । और जैसा कि हर सप्‍ताह किया जा रहा है । इस बार भी वही कि सप्‍ताह का पहला अंक नयी प्रविष्टियों का, दूसरा अंक पाठशाला के छात्रों का और तीसरा शनिवारीय अंक विशेष आमंत्रित खंड के रूप में । इस प्रकार सप्‍ताह
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करूं काम तो मन बहुत गीत गाए, गया वक्‍त जाकर न फिर लौट पाए । तरही मुशायरे के विशेष आमंत्रित खंड में आज दो अग्रजाओं लावण्‍य दीदी साहब और शार्दूला दीदी

आज तरही में विशेष आमंत्रित रचनाओं को सुनने का दिन है । पिछले शनिवार को हमने आज के दिन गीत और ग़ज़ल की जुगलबंदी सुनी थी । राकेश जी और प्राण साहब ने मिल कर समां बांध दिया था । आज भी एक जुगल बंदी है । आज की जुगल बंदी दो अग्रजाओं की है । इनमें भी शार्दूला
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न पनघट न झूले न पीपल के साए, हरे खेत जख्मों के फ़िर लहलहाये । तरही में आज सुनिये दो शायरों दिगम्‍बर नासवा और रविकांत पांडेय की ग़ज़लें ।

मकर संक्रांति, पोंगल और लोहड़ी की शुभकामनाऍं तरही में इस बार काफी रचनाएं मिली हैं और सबसे अच्‍छी बात ये है कि इस बार सभी रचनाएं एक से बढ़कर एक हैं । प्रतियोगिता जैसी तो कोई बात नहीं है लेकिन ये तो तय है कि प्रतिस्‍पर्धा हमेशा ही गुणवत्‍ता को जन्‍म देती
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मुहब्बत मुहब्बत मुहब्बत मुहब्बत, ये क्या कर दिया उसने बैठे बिठाये नये साल का तरही मुशायरा । आज सुनिये निर्मल सिद्धु और शाहिद मिर्जा को तरही मुशायरे

पहले सोचा था कि एक बार की पोस्‍ट में केवल दो ही शायरों को लगाया जायेगा किन्‍तु जिस प्रकार से तरही के लिये ग़ज़लें प्राप्‍त हुई हैं उसके कारण लगता है कि यदि जनवरी में समापन करना है तो इस निर्णय को बदलना होगा या फिर एक सप्‍ताह में तीन पोस्‍ट लगानी होंगीं
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आदरणीय राकेश खंडेलवाल जी और आदरणीय प्राण साहब की जुगलबंदी कैसी रहेगी आज के अंक के लिये

बहरे मुतकारिब, नये सीखने वालों को उस्‍ताद अक्‍सर एक ही बात कहते हैं जाओ मुहब्‍बत की झूठी कहानी पे रोये इस गीत को सुनो और इस की धुन पर कोई ग़ज़ल लिख कर लाओ । दरअसल में ये गीत नये सीखने वालों के लिये कखग सीखने जैसा है । इसमें रुक्‍न बहुत सीधे सीधे टूटे हुए
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बहुत घना कोहरा, कड़ी ठंड और उसके बीच चलता हुआ एक मुशायरा । तरही मुशायरे में आज सुनिये दो शायरों की ग़ज़लें, गिरीश पंकज और प्रकाश पाखी की ग़ज़लें ।

देखते ही देखते नया साल आ भी गया है । 2010, देखने में ही सुंदर अंक लग रहा है । अब देखते है कि ये बीस दस क्‍या गुल खिलाता है । आज कोहरे का जो आलम देखा वो अनोखा था । इतना कि वास्‍तव में हाथ को हाथ ही नहीं सूझ रहा था । हर तरफ धुंध और धुंआ । ठंड इतनी कि मोटर
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नया साल जीवन में सुख ले के आए : यही है ग़ज़ल की कक्षा की तरफ से सबके लिये कामना । आज ही से प्रारंभ हो रहा है ग़ज़ल की तकनीक पर आधारित ब्‍लाग ग़ज़ल का

    आप लोग हैरत में पड़ रहे होंगें कि ये अचानक मिसरा बदला हुआ क्‍यों आ रहा है । दरअसल में मिसरा तो वही है किन्‍तु नये साल के लिये उसे थोड़ा बदल कर कह रहा हूं । उसके पीछे एक कारण ये है कि कल ही शार्दूला दीदी का मेल मिला जिसमें उन्‍होंने कहा है
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तरही मुशायरा ठीक नये साल से प्रारंभ होगा और ठीक नये साल से ही प्रारंभ होगा ग़ज़ल का नया ब्‍लाग । तरही को लेकर कई सारी ग़ज़लें मिल चुकी हैं कई बाकी है

तरही मुशायरे को लेकर रोज एक दो ग़ज़लें मिल रही हैं । बहुत ही अच्‍छी और सुंदर ग़ज़लें मिल रही हैं । लेकिन कुछ नियमित लिखने वाले अभी भी सो ही रहे हैं और जाने किस बात की प्रतीक्षा कर रहे हैं । रविकांत ने मुशायरे की तारीख को लेकर कई बार प्रश्‍न किया है म
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तरही मुशायरे को लेकर कुछ लोगों की ग़ज़लें मिल चुकी हैं क्रिसमस से प्रारंभ करने की इच्‍छा है । आज जानिये ये कि कैसे बनती हैं ग़ज़लें, उसके मूल तत्‍व क

इस बार के तरही को लेकर कुछ विशेष करने की इच्‍छा है । इच्‍छा ये है कि इस बार तरही का आयोजन दोनों प्रकार से हो । हालंकि तारीख को लेकर कुछ असमंजस है फिर भी वसंत पंचमी को शिवना प्रकाशन का एक आयोजन होता है सरस्‍वती पूजन का, जो कि पिछले कई सालों से होता आ
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नीरज गोस्‍वामी जी और आदरणीय भाभीजी को विवा‍ह की वर्षगांठ की शुभकामनाएं, और कुछ बातें इस बार के तरही मुशायरे के मिसरे की मुश्किलों के बारे में ।

नीरज जी ये बात हो रही थी उस दिन तो उन्‍होंने मुझसे पूछा कि आपने 10 दिसंबर को ही शादी क्‍यों की मैंने कहा कि नीरज जी दरअसल में बात ये है कि दो दिसंबर की रात को भोपाल गैस कांड हुआ, फिर उसके बाद में छ: दिसंबर को बाबरी मस्जिद कांड हुआ तो मुझे लगा कि अपना
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और ये रहा नये साल के तरही मुशायरे के लिये मिसरा 'न जाने नया साल क्‍या गुल खिलाए' बहरे मुतकारिब पर एक गैर मुरद्दफ मिसरा

पिछली बार का तरही मुशायरा काफी शानदार रहा है और उसके बाद से ही ग़ज़ल की कक्षाओं में कुछ सुस्‍ती आ गई है । किसी भी सफल आयोजन के बाद ऐसा होता ही है कि कुछ दिनों के लिये मन कुछ करने को नहीं होता है । ग़ज़ल की कक्षाओं में वैसे तो हम काफी कुछ काम करते ही
Dec 07 2009 07:36 AM
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फिर कुछ आनंद के पल जुड़े हैं, कल गौतम राजरिशी और संजीता की शादी की वर्षगांठ है, रविकांत पांडे के आंगन में गत रविवार को एक नन्‍हीं परी का आगमन हुआ, बध

वीनस का मेल मिला है कि ग़ज़ल की कक्षाएं क्‍यों बंद हैं । मेरे विचार में ग़ज़ल की कक्षाएं अभी भी चल रही हैं और अभी जो चल रहा है वो अभ्‍यास कार्य चल रहा है । तरही के माध्‍यम से अभ्‍यास किया जा रहा है और उसी दौरान ही सीखा भी जा रहा है । चूंकि काफी कार्य
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आज राकेश खंडेलवाल जी और आदरणीय मधु खंडेलवाल जी की शादी की वर्षगांठ है उन्‍हें बधाई । कल यानी 22 नवंबर को लावण्‍य दीदी साहब का जन्‍मदिन है उनको भी बहु

नवंबर का महीना बहुत से आयोजनों का महीना होता है ।कल परी का जन्‍मदिन था । आज आदरणीय राकेश जी और मधु भाभी की शादी की वर्षगांठ है और कल लावण्‍य दीदी साहब का जन्‍मदिन है । सो मैंने बीच का दिन तय किया पोस्‍ट लगाने के लिये । परी का जन्‍म दिन कल मनाया गया ।
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"वक्त की पाठशाला में एक साधक"-श्री समीर लाल ’समीर' , बिखरे मोती की समीक्षा सुप्रसिद्ध शायरा आदरणीया देवी नागरानी जी की क़लम से । पंकज सुबीर

श्री समीर लाल समीर काव्‍य संग्रह बिखरे मोती समीक्षक देवी नागरानी जी कलम आम इन्सान की ख़ामोशियों की ज़ुबान बन गई है. कविता लिखना एक स्वभाविक क्रिया है, शायद इसलिये कि हर इन्सान में कहीं न कहीं एक कवि, एक कलाकार, एक चित्रकार और शिल्पकार छुपा हुआ होता ह
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शिवना प्रकाशन सीहोर द्वारा युवा शायर अंकित सफर तथा कवियित्री मोनिका हठीला के सम्‍मान में काव्य गोष्ठी आयोजित, पढि़ये कार्यक्रम की एक चित्रमय रपट -पंक

दीपावली का त्‍यौहार बीत गया और एक वर्ष के बीत जाने के संकेत मिल रहे हैं । दीपावली का तरही मुशायरा बहुत अच्‍छा हुआ है तथा श्रोताओं ने खूब आनंद लिया । दादा भाई आदरणीय महावीर जी का आदेश था कि अज्ञात को सामने आना चाहिये सो उस आदेश का पालन कर रहा हूं । वै