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असर करें जो दुआएं कभी फरिश्तों की, फि़ज़ा की कोख से पैदा अदीब होता है । साहित्यकार के बारे में इससे अच्छा कुछ नहीं कहा जा सकता है ।
राजस्थान के शायर श्री दिलीप सिंह दीपक की पुस्तक फि़ज़ा की कोख से में से मैंने ये शेर कोट किया है । इस शेर को पढ़कर मानों अपने अंदर एक प्रकार के गर्व का एहसास भर गया है । चूंकि ये शेर दुनिया के हर एक साहित्यकार के लिये लिखा गया है इसलिये ये कह सकता हूं
Jun 15 2010 07:56 AM


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