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चिट्ठा चर्चा

http://chitthacharcha.blogspot.com/
ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
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13 Jun 2010
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कौन है सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगर?

आपका अपना कोई कोण हो सकता है – ब्लॉगिरी श्रेष्ठता का, और आप उसे ही मानते हैं, मानते रहेंगे. ठीक है पर दूसरे क्या कुछ कह रहे हैं उन पर एक बार नजर मार लेने में आपका जाता क्या है? राम त्यागी ने हाल ही में बताया - कौन है सर्वश्रेष्ट ब्लॉगर : वारेन बफेट
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भोपाल गैस त्रासदी- कौड़िल्ला छाप न्याय

परसों भोपाल गैस त्रासदी मामले में अदालत ने निर्णय सुनाया। जितने लोग इस दुर्घटना में हताहत हुये थे उसके मुकाबले में सजा बहुत कम थी। ऐसा लगा कि मुकदमा कानून की पिलपिली धारायें लगाकर लड़ा गया। रागदरबारी की भाषा में कहें तो यह एक कौड़िल्ला छाप न्याय है।भोपाल
 
अनूप शुक्ल
टैग: bhopal-genocide
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सुनो कवि !तुम भाषा की देह पर शब्द उलीचते कामगार हो बस !!

खामोशी की चीख सही जगह सुनाई देती है...बुद्धुओं की सवारी करते हैं शब्द. शब्दों की सवारी करते हैं बुद्ध ! जब तक हम शब्द इस्तेमाल करते हैं, हम कोई और हैं. आत्म-बहिष्कृत हैं. self-existed. और जब हम अपना 'स्वयं' होते हैं, तो शब्द नहीं हो सकता, क्योंकि शब्द
 
डॉ .अनुराग
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चेहरा, फ़र्क़ करने का माध्यम है. पहचानने का नहीं!

जिस चिट्ठाकार के प्रोफ़ाइल में दर्शित फोटू पर ये लिखा हो – चेहरा फर्क करने का माध्यम है, पहचानने का नहीं, तो उस फोटू को भले न सही, उस ब्लॉग को और उस ब्लॉग की प्रविष्टियों को जरा ध्यान से देखने की इच्छा तो होगी ही. तो, जरा ध्यान से इस ब्लॉग की
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शनिवार की चर्चा के साथ साथ दो चार बात

नमस्कार मित्रों! मैं मनोज कुमार एक बार फिर हाज़िर हूं शनिवार की चिट्ठा चर्चा के साथ। पिछ्ले शनिवार को नहीं प्रस्तुत कर सका चिट्ठा चर्चा, इसका मुझे दुख है। एक सप्ताह की छुट्टी पर गांव गया था, बिहार के मिथिलांचल में। लैपटॉप साथा में था, चिट्ठा चर्चा भी लगभग
 
मनोज कुमार
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बेटियां गढ़ती ही हैं पथरीली पगडंडियां

वर्तिका नन्दा अपने को मीडिया ट्रेवेलर लिखती हैं। दो साल पहले उन्होंने ब्लॉगिंग शुरू की। अभी तक कुल १०७ पोस्टें लिख चुकी हैं। मतलब प्रति वर्ष लगभग ५३। अपनी पहली पोस्ट की शुरूआत करते हुये उन्होंने अपने आईआईएमसी की प्रवेश परीक्षा देने के अनुभव लिखे यह लिखते
 
अनूप शुक्ल
Jun 04 2010 12:19 AM
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काव्य शास्त्र विनोदेन कालोगच्छति धीमताम

यह चित्र इवा सहाय का है जिन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (यू. पी. एस. सी.) द्वारा आयोजित भारतीय प्रशासनिक सेवा (आई. ए. एस.) के लिए वर्ष 2009 की परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर तीसरा स्थान एवं महिलाओं में प्रथम स्थान प्राप्त किया। इवा सहाय ने अपना २० साल से तय
 
अनूप शुक्ल
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बेकार के विवादों की निन्दा करना भी उन्हें बढ़ावा देना है

विनीत कुमार ने कल बज पर लिखा:चार लड़कियां एक साथ। किसी के हाथ में मदर डेरी दूध की थैली,किसी के हाथ में लीची,एक के हाथ में कोक और एक के हाथ में सब्जी की पॉलीथीन। सब मैगजीन की दूकान पर खड़ी होकर पढ़ रही थी- कैंपस- प्रेम,पॉलिटिक्स और पढ़ाई। मैं खड़ा देख
 
अनूप शुक्ल
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फत्तू की कहानियाँ

कहानी नं. 1   :) फ़त्तू की सास का आई.क्यू. तो पता चल ही चुका है, आज ससुर का भी आई.क्यू. देख लीजिये। फ़त्तू अपनी ससुराल गया तो घर में केवल उसका ससुर ही था। थोड़ी देर के बाद फ़त्तू, जोकि अभी अभी कुछ महीने लखनऊ में बिताकर आया था, अपने ससुर से बोला,
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देसी तबेले में गर्मी बहुत है

उफ्फ गर्मी बहुत है...आग लगी है...प्‍यास लगी है। बिजली है...पंखे हैं...एसी भी है पर गर्मी फिर भी है। कमरा ठंडा है पर एसी अंदर की गर्मी बाहर फेंके दे रहा है पर यहॉं से वहॉं चले जाने से गर्मी खत्‍म नहीं होती, बनी रहती है। इस भीतर बाहर गर्मी के माहौल में
 
मसिजीवी
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....पढने के पहले टिपिया लें!

एक लाईनायशस्वी ब्लॉगर भवः !! :पैरोडी लेखनम कुरु उन्माद सुख .... :टुन्नावस्था की सहज उपलब्धि ऎ बहुरिया साँस लऽ, ढेंका छोड़ि दऽ जाँत लऽ : उनका फ़िरि-फ़िरि टिपियान दे!गबन की राशि लौटाने को कोषाध्यक्ष के नाम खुला पत्र : अधरस्ते से गायबछठा वेतनमान, सेल्स वालों
 
अनूप शुक्ल
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चिट्ठाचर्चा – बरास्ते पीडी : हिन्दी ब्लॉगिंग आखिर किस चुड़ैल का नाम है?

हिंदी ब्लॉगिन्ग को लेकर मेरी समझ मैं पहले ब्लौगिंग की प्रकृति को समझना जरूरी समझता हूँ फिर हिंदी ब्लॉगिंग की बात करूंगा.. ब्लॉग लिखने वाले सभी व्यक्ति जानते होंगे कि ब्लॉग शब्द "वेब लॉग" को जोड़कर बनाया गया है, और इसमें आप जो चाहे वह लिख सकते
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एक नन्हीं सी बेटी बड़ी हो गई

नमस्कार मित्रों! मैं मनोज कुमार एक बार फिर चिट्ठा चर्चा के साथ हाज़िर हूं। अदत से लाचार हूं। चर्चियाने से पहले बतियाने की आदत सी पड़ गई है। हमें लगता है हमें ऐसा समाज बनाना चाहिए जिसमें जाति, जातिसूचक शब्‍द, संकेत, प्रतीक भाव, आंतरिक संस्‍कार आदि का सर्वथा
 
मनोज कुमार
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दुविधा से मुझे डर लगता है वेताल

एक सहचर्चाकार आजकल गायब हैं उनसे पूछा कि ऐसा कयों ? उन्‍होंने कहा कि यार कुछ बोर होने लगे हैं कुछ नया दिखता ही नहीं ब्‍लॉग पर.. हमें हैरानी हुई इतने ब्‍लॉगर इतने पुरस्‍कार, इतने विवाद, कुत्‍तों से लेकर चॉंद तक हर विषय पर तो लिखा जा रहा है फिर दिक्‍कत
 
मसिजीवी
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बधाई,विडंबना, बहादुरी, अपनापन,कहानी और ब्लॉगिंग

अल्पना जी का नाम लिम्का बुक ऑफ़ रिकार्डस में शामिल किया गया----बधाई पोस्ट का यह शीर्षक जब मैंने देखा और उत्सुकतावश देखा तो पता चला कि अल्पना देशपांडे जी का नाम ग्रीटिंग कार्ड बनाने के लिये लिम्का बुक ऑफ़ रिकार्ड्स में शामिल किया गया। ललितजी ने अल्पनाजी के
 
अनूप शुक्ल
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...ये दुनिया की सबसे प्यारी आँखें हैं

ये फ़ोटो नीरज जाट की पोस्ट से लिया है। इसके बारे में लिखते हुये नीरज ने लिखा है:त्रिवेणी झरने का विहंगम दृश्य। त्रिवेणी नाम कहीं भी लिखा नहीं मिलेगा। मैं केवल सुविधा के लिये इस शब्द का इस्तेमाल कर रहा हूं। इन पहाडों में इस तरह के अनगिनत झरने हैं, एक से
 
अनूप शुक्ल
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जेसिका, मित्रता, नास्टेलजिया, बापी , कृष्ण और पापुलर मेरठी

कल अभय ने जुझारू जेसिका के बारे में जानकारी दी! देखिये:सात मास समुद्र में अकेले! चालीस फ़ुट ऊँची लहरों के मुक़ाबिल एक ‘अबला’ षोडशी? जिसके लिए एक आम राय ये बन रही थी कि उसके माँ-बाप ने उसे एक आत्मघाती अभियान पर जाने की अनुमति दी है, वो लड़की लौट आई, न सिर्फ़
 
अनूप शुक्ल
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चिट्ठा चर्चा – बरास्ते हिमांशु मोहन

किसी समय चिट्ठाचर्चा को जमीन में गाड़ देने की बात कहने वाले ज्ञानदत्त ने अपने आज के ब्लॉग पोस्ट में चर्चायन (मिनी चर्चा?) में एक कड़ी हिमांशु मोहन के ब्लॉग की पकड़ाई है. वहाँ जाने पर कड़ी पे कड़ी जुड़ती गई. घूमते विचरते हिमांशु मोहन के एक पोस्ट पर नजर
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समय परे ओछे बचन, सब के सहे रहीम

  नमस्कार मित्रों! एक बार फिर शनिवार की चिट्ठा चर्चा के साथ हाज़िर हूँ।   गर्मी बहुत बढ गई है। ऐसे गर्म माहौल में पहले तो सोचा कि आज छोड़ ही दूँ चर्चियाना। पर फिर याद आया कि एक दायित्व लिया है तो उसे निभाना चाहिए। तो अभी शाम के आठ बजे बैठा हूँ …
 
मनोज कुमार
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…गलत जो बात लगती है गलत ही मैं बताता हूं

आज की चर्चा की शुरुआत 10 मई की ऐतिहासिक घटना की याद से। 10 मई 1857 की याद में के द्वारा कृष्ण कुमार यादव पहले स्वतंत्रतता संग्राम की याद करते हैं!   1857 की क्रान्ति को लेकर तमाम विश्लेषण किये गये हैं। इसके पीछे राजनैतिक-सामाजिक-धार्मिक-आर्थिक सभी
 
अनूप शुक्ल
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चिट्ठे को भी सोशियल नेटवर्किंग बना दिया है

कल मदर्स डे के मौके पर रवि रतलामीजी चर्चा की थी उसमें कल तक प्रकाशित पोस्टों के जिक्र किये थे। देखियेगा।इस मौके पर बोधिसत्व ने भी कवितायें पोस्ट कीं। एक में वे अपनी मां से दिल्ली के नाम पर दिल्लगी करते हैं:माँ,अगर बनी रही दिल्लीतो दिल्लगी नहीं करता मैंघर
 
अनूप शुक्ल
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हैप्पी मातृ दिवस Alles Gute zum Muttertag Bonne Fête des Mères Feliz Dia das Mães Feliz Día de las Madres 母親節快樂 روز مادر مبارک سعيد عيد الأم יום שמח

मातृ दिवस पर आपके लिए पेश है खास मातृ दिवस के लिए तैयार किया गया यह विशिष्ट ब्लॉग - http://mothersdayfunontheweb.blogspot.com/ टैग लाइन पर लिखा है - Mother's Day is a very special day for honouring and celebrating Mothers around the world. I hope you
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जो बड़ेन को लघु कहें, नहिं रहीम घटि जाहिं

नमस्कार मित्रों! एक बार फिर, मैं मनोज कुमार चिट्ठा चर्चा के साथ हाज़िर हूँ। इसमें हमने सप्ताह की कुछ पोस्टों को शामिल किया है। हो सकता है कई पोस्ट छूट गए हों, जो अधिक महत्व के हों, या फिर कई पोस्ट अन्य चर्चाकारों द्वारा चर्चा कर लिए गए हों। मेरे साथ
 
मनोज कुमार
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कोसल में विचारों का अनादर है

पत्रकार व ब्‍लॉगर राजकिशोर के संपादन में एक नई पत्रिका शुरू हुई है 'विचार' इसका प्रवेशांक मेंरे हाथ में है, संपादकीय श्रीकांत वर्मा की इन पंक्तियों से शुरू होता- 'कोसल में विचारों की कमी है'   राजकिशोर अपने कोसल पर विचार करते हैं तथा इसमें तनिक
 
मसिजीवी
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कसाब, कबाड़ कोबाल्ट और कन्फ़्यूज्ड सूरज

आज मुम्बई हमलों के दोषी कसाब को मौज की सजा सुनाई गयी। न्यूज चैनल इस मामले को पेश करने के लिये अदालत के फ़ैसले का इंतजार कर रहे थे। जब फ़ैसला आया तो जिस तरह एक न्यूज चैनल का संवाददाता भागता हुआ न्यूज लाया और हांफ़ते हुये माइक पर जिस तरह कसाब की मौत की सूचना
 
अनूप शुक्ल
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निरुपमा : कुलीनता बनाम स्त्रीविमर्श और समाज

बिजनेस स्टैण्डर्ड में कार्यरत पत्रकार निरुपमा पाठक की  ह्त्या/आत्म-ह्त्या के मामले में पिछले अनुभवों की ही तरह जल्दी ही मीडिया ट्रायल किया  जा चुका है ....और वह भी इस हद तक कि उसमे बहुत विचार - पुनर्विचार की गुंजाइश नहीं दिखती | पहले
 
प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI
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हिंदी ब्लाग जगत का भविष्य बहुत शानदार है......

कल अदालत ने तमाम सुबूतों और गवाहों को मद्द-ए-नज़र रखते हुए कसाब को दोषी करार दे दिया. मतलब ये कि मुंबई पर जो हमला हुआ उसमें कसाब का भी हाथ था. दोषी करार देने के बाद जज साहब अब सज़ा सुनायेंगे. ये तो कसाब के मुकदमे की बात है. उसपर फैसला आ गया है. उधर
May 04 2010 02:55 PM
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...भ्रम टूटने के लिये अभिशप्त होते हैं

अपने देश में मा्ननीय न्यायाधीश महोदयो द्वारा समाज के प्रभावशाली वर्ग को फ़टकारते रहने का रिवाज है। उनकी समझाइश के दायरे में राजनेता, नौ्करशाह , मास्टर,पढ़वैया बच्चे वगैरह आते हैं। नये मनोनीत माननीय मुख्य न्यायाधीश महोदय ने समझाइश का दायरा बढ़ाकर न्यायधीशों
 
अनूप शुक्ल
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ये क्या कबाड़िया पोस्ट है?

कबाड़खाना नाम का ब्लॉग आपकी नजरों से अछूता नहीं रहा होगा जो अपने नाम के उलट, दुनिया जहान से हीरे चुन-चुन कर पेश करता है. पर, क्या कोई ऐसा ब्लॉग भी है वो भी हिन्दी में जो सचमुच कबाड़ की बात करे? हाल ही में दिल्ली में एक कबाड़ी की दर्दनाक मौत सिर्फ इसलिए
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वायु जु ऐसी बह गई, बीचन परे पहार

नमस्कार मित्रों! पिछ्ले हफ़्ते की ब्रेक के बाद फिर से हाज़िर हूँ चर्चा के साथ। वैदिक संस्कृति का पुराण साहित्य पर आख्यान हो रहा है बाबा गुरुघंटाल आश्रम में कृष्णा द्वारा। १८ पुराणों के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी गई है। एक संग्रहणीय पोस्ट। वैदिक वाङ्मय
 
मनोज कुमार
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नीतीश स्‍पीक्‍स- लफत्‍तू रीड्स

लफत्‍तू हिन्‍दी ब्‍लॉगजगत के लिए नए नहीं हैं नीतीश जरूर हैं इसलिए लपूझन्‍ना के लफत्‍तू के सामने नीतीश जो बेचारे पहली पहली हिन्दी ब्लॉग पोस्ट लिख रहे हैं (दरअसल इतिहास की पहली मुख्‍यमंत्रीय हिन्‍दी पोस्‍ट) को इतने जमे हुए पात्र लफत्‍तू के सामने खड़ा कर
 
मसिजीवी
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दागदार न्यूज चैनल वर्धा-पुराण और अटकी हुई टिप्पणी

कल विनीतकुमार ने दागदार हुआ स्टार न्यूज, वहशी बॉस हुए बेनकाब पोस्ट में स्टार न्यूज की अन्दरकी कहानी बयान की। एक प्रतिष्ठित माने जाने वाले न्यूज चैनल में एक महिला कर्मी के शोषण की कहानी बताते हुये अपनी बात कहते विनीत ने लिखा:ये एक ऐसे चैनल की कहानी है जो
 
अनूप शुक्ल
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अरुंधति.....क्रांति...... नक्सलवाद .....आदिवासी..ओर वेंटिलेटर पे देश .....

  आज़ादी के बाद अगर विस्थापित लोगो का रजिस्टर टटोला जाए तो हिसाब ४० करोड़ का दिखता है जिसमे ४० प्रतिशत हिस्सा आदिवासी आबादी का है ....ये भी सोचने की बात है के वर्ष २००९ -१० के लिए आदिवासी समाज के लिए कुल आवंटित बजट ३२०५ करोड़ होता है पर राज्य सरकारे
 
डॉ .अनुराग
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ब्लॉग में समाचार या समाचार में ब्लॉग?

वैसे तो कई हैं, पर उदाहरणार्थ कुछ प्रस्तुत हैं -           ऐसा नहीं लगता कि आपके शहर / मुहल्ले का भी ऐसा कोई समाचार स्थल होना चाहिए? आपके विचार में, ब्लॉग के चंद बेहतर प्रयोगों के बेहतरीन नमूनों में से एक, नहीं लगते हैं ये? (साइट
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मिले बस चैन दिन का और गहरी नीद रातों की

बहुत दिनों बाद आज चर्चा करने की सोची. एक बार के लिए मन में विचार आया कि बहुत दिन बीत गए हैं, चर्चा कैसे की जाती है पता नहीं वो याद है या नहीं? फिर कहीं से सूचना मिली कि आदमी अगर एकबार साइकिल चला ले या फिर एक बार चर्चा कर ले तो फिर उसे भूल नहीं सकता. इस
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अज्ञान के आनंद में डुबकी लगाती चर्चा अनइग्‍नोरेबुल की

  अज्ञान में अपूर्व आनंद है। अरसे से ब्‍लॉगक्रीड़ा से परे हैं, सप्‍ताह दर सप्‍ताह अनूपजी हमें बताते रहे कि चर्चा करनी है हम इस मेल के साथ वैसा ही बरताव करते रहे जैसा मितव्‍ययता के सरकुलरों के साथ सरकारी दफ्तर में होता है। अपनी आखिरी पोस्‍ट हमने
 
मसिजीवी
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...संकलकों के बहाने एक चर्चा

पिछले दिनों अदाजी ने एक के बाद एक ब्लागजगत के कुछ लोगों की नकारात्मक प्रवृत्तियों पर चोट करने की मंशा से ताबड़तोड़ लेख लिखे। शुरुआत इस पोस्ट से करके फ़िर या तो ब्लॉग वाणी इनपर कार्यवाही करे नहीं तो ब्लॉग वाणी का ही बहिष्कार होना चाहिए.... ब्लॉगवाणी से कल
 
अनूप शुक्ल
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ब्लॉगजगत की कुछ पोस्टें इधर-उधर से

हिन्दी ब्लॉगिंग पर लिखे जितने भी लेख मैंने देखे उनकी जब मैं याद करना शुरू करता हूं तो मुझे सबसे पहले याद आता है अनूप सेठी जी के लेख का यह अंश:यहां गद्य गतिमान है। गैर लेखकों का गद्य। यह हिन्दी के लिए कम गर्व की बात नहीं है। जहां साहित्य के पाठक काफूर की
 
अनूप शुक्ल
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...कभी वो मुस्कुराते हैं ,कभी वो रूठ जाते हैं

विकट गर्मी का मौसम चल रहा है। हर तरफ़ पारा उचकता जा रहा है। बकौल संजीत:दिन में बाहर भटको तो हवाएं जैसे जला डालना चाह रही हो, धूप जैसे पिघला देना चाहता हो और सूरज तो मानों अपनी तपिश की प्रचंडता दिखाने पर उतर आया हो। यह फोटो भी संजीत के ब्लॉग से ली गयी
 
अनूप शुक्ल
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मामू.. आई लव्ड दिस वन रे… क्या लिखते हैं आप…!

जीन्स गुरू के एक पोस्ट पर आई टिप्पणी है यह. जीन्स गुरू ‘हर्ष’ ने अपने अंग्रेज़ी-हिन्दी दुभाषी चिट्ठे में कुछ शानदार पोस्ट हिन्दी में लिखे हैं. वैसे तो उन्होंने वहाँ कॉपीराइट का बड़ा सा बोर्ड तान रखा है, मगर हमने इसे अनदेखा करते हुए उनकी एक पूरी की पूरी