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सब हिल-मिल आज खेलो होली - सुनिये ये मालवी गीत
सब हिल-मिलआज खेलो होरीअध-बूढ़ा ने बूढ़ा-आड़ाबण ग्या है छोरा-छोरीगेंद-गुलाबी रूप लजीलीमान करे क्यूं ए गोरीफ़ागण तो रंगरेज हठीलोरंग दियो अंगो और चोलीबिरहण ऊबी पीहर कँवरेमन में भरम भर्यो भोरी(भाव:बिरहन अपने प्रीतम से दूर मायके में हैऔर उसके मन में कई भोली भ्रम
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Mar 01 2010 11:21 AM


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