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इन्दौरनामा

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28 Jan 2010
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११ फ़रवरी को भरोसा सम्मान से नवाज़े जाएंगे जावेद अख़्तर…

जानेमाने शायर और गीतकार जावेद अख़्तर को इस बरस का भरोसा सम्मान दिया जा रहा है.ग़ौरतलब है कि बीते दो सालों से भरोसा न्यास एक शानदार मुशायरे की दावत इन्दौर में दे रहा है और इसके अंतर्गत देश के जाने माने शायर/कवि काव्य-प्रेमियों से रूबरू हो रहे हैं.पहले बरस
 
इन्दौरनामा
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इन्दौरनामा

दुनियाभर में दमकती सुरीली कल्पना वे पचास की हो गयीं हैं .मालवा में पं.कुमार गंधर्व को लाकर बसाने वाले कुमारजी के अनन्य सखा मामा साहेब मुजुमदार की यशस्वी पुत्री कल्पना झोकरकर इन्दौर के संगीत को अब विश्वव्यापी पहचान देने में मसरूफ़ हैं . कल्पना ने अपने
 
इन्दौरनामा
Dec 29 2009 12:01 PM
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हलचल

ह ल च ल - देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कुलपति डाँ.भागीरथप्रसाद के भगीरथी प्रयासों और डाँ.बालकृष्ण पंजाबी के अथक के परिश्रम से 1857 के प्रथम स्वातंत्र्य संग्राम पर एकाग्र कार्यक्रम का एक भावपूर्ण आयोजन शहर में सम्पन्न हुआ.इस अवसर पर डाँ.पंजाबी द्वारा
 
इन्दौरनामा
Dec 29 2009 12:01 PM
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इस मीठे शहर में…सदभाव हो रोशन

सदभाव था रोशन इस मीठे शहर में ये कौन यहॉं बो गया दुःख-दर्द के रोपे कौन इसे दे गया नफ़रत के ये तोहफ़े फूटे अब करुणा की नदी इसकी नज़र से अब और नहीं रोना इसे मनहूस ख़बर से ये व़क़्त है आओ मिलजुल के विचारें शांति से चलो आज हमदर्दी उचारें ग़ालिब की ग़ज़ल तुलसी की
 
इन्दौरनामा
Dec 29 2009 12:01 PM
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कर्फ़्यू के बाद थोड़ी हवा भी आने दो !

सारे चैनल देख लिये सारे अख़बार पढ़ लिये रिश्तेदारों से भारत भर में बातें हो गईं पडौसी से अबोला था वह भी टूट गया जो न पढ़ने थे वे चिट्ठे भी पढ़ लिये गली में क्रिकेट भी हो गया दाल-चावल भी खा लिये कई बार राजनीति भी हो ली और ख़ून की होली सारे शगुन तो हो गए कर
 
इन्दौरनामा
Dec 29 2009 12:01 PM
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कर्फ़्यू के साये में ख़ामोश मेरे शहर से एक इल्तिजा !

नसीब से मिलता है किसी शहर को अमन नसीब से मिलती है धूप गली मोहल्ले की रौनक़े बच्चों की आवाज़ें,शोर नसीब से मिलता है दरवाज़े पर दूध अख़बार और सब्ज़ियाँ मिलते हैं नसीब से पास-पडौस सोहबतें और ठहाके नसीब से मिलता है विश्वास,अपनापन और हँसी नसीब से ही मिलते हैं
 
इन्दौरनामा
Dec 29 2009 12:01 PM
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ये सिर्फ़ एक शहर नहीं ; इंसानियत की आवाज़ है !

झुलस रहा मेरा शहर कोई चाह रहा है करो इसे बंद कोई चाह रहा है खुला रहे ये ग़रीब कुलबुला रहा है महंगाई में अमीर मना रहा है पिकनिक उसे मिल गया है सप्ताहांत का एक बहाना केसरिया ने कहा करो बंद हरा कहेगा अब करो बंद रंगो में बटा मेरा शहर अमन पसंद है इसकी तहज़ी
 
इन्दौरनामा
Dec 29 2009 12:01 PM
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इन्दौरनामा

फ़िर आया है रफ़ी सा. को याद करने का महीना जुलाई का महीना बहुत तकलीफ़ देनेवाला है. इसी महीने में हमसे संगीतकार मदनमोहन,गायिका गीता दत्त बिछडीं और 31 जुलाई 1980 को रूख़सत हुए सर्वकालिक महान गायक मोहम्मद रफ़ी साहब.उनकी लोकप्रियता का अंदाज़ इसी बात से लगाया जा
 
इन्दौरनामा
Dec 29 2009 12:01 PM
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डॉ.राहत इन्दौरी के ग़ज़ल संग्रह का विमोचन 8 जनवरी को.

इन्दौर की अदबी फ़िज़ाँ को यश देने वाले नामचीन शायर डॉ.राहत इन्दौरी का नया ग़ज़ल संग्रह छपकर तैयार है और ख़ुशी की बात यह है कि ये हिन्दी में छपा है. दुनिया भर में अपनी शायरी से छा जाने वाले राहत भाई की इस नई किताब का इजरा(विमोचन) 8 जनवरी को प्रस्तावित है औ
 
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