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Naya Samay ......... A Hindi Literature Blog

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08 Jun 2010
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शलभ श्रीराम सिंह की कवितायें

आज बहुत दिनों के बाद कोई पोस्ट लगा रहा हूँ। अब ऐसा क्यूँ हुआ इसके कारणों में गए बिना कुछ नया पोस्ट करना चाह रहा हूँ।इधर मैने सोचा है कि अपने आस-पास (फैजाबाद और आस पास) के कुछ वरिष्ठ कवियों की कवितायेँ पढ़ी पढाई जाएँ, तो आज शुरू कर रहा हूँ शलभ श्रीराम सिंह
 
विशाल श्रीवास्तव
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चे ग्वेरा के कुछ यादगार फोटोग्राफ्स

पहले सोचा था कि चे पर कुछ लिखा जाये, पर बाद में लगा कि क्यों न चे के कुछ यादगार फोटो डाल दिये जायें, यहां कुछ फोटोग्राफ्स हैं, सबसे महत्वपूर्ण फोटो वह ग्रुप फोटो है जो अमेरिकी इंटेलीजेंस के अधिकारियों ने उनके शरीर के साथ खिंचवाया था ......
 
विशाल श्रीवास्तव
Dec 29 2009 11:51 AM
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मुन्नू मिसिर का आलाप

बहुत पक्का गला है मुन्नू मिसिर का अद्भुत गाते हैं मुन्नू मिसिर फिर भी भव्य सभाओं में नहीं जाते मुन्नू मिसिर कहीं किसी किताब में नहीं छपा है उनका नाम उनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं अयोध्या के नयेघाट पर गली जैसा कुछ गली जैसे कुछ में मोड़ जैसा कुछ म
 
विशाल श्रीवास्तव
Dec 29 2009 11:51 AM
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क्यों बन रहें हैं क्लासिक फिल्मों के रीमेक

कुछ दिन पहले किसी ने हिन्दी सिनेमा के शहंशाह से सवाल किया कि हिन्दी फिल्में आस्कर की दौड़ में पीछे क्यों रह जाती हैं, तब उन्होनं अपने शहंशाही अंदाज़ में जवाब दिया कि आप लोग क्यों बार-बार आस्कर या विदेशों में पहचान की बात करते हैं, हिन्दी सिनेमा अपने आप
 
विशाल श्रीवास्तव
Dec 29 2009 11:51 AM
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कवि के रक्त में डुबकी लगाकर

घबराइये नहीं यह पंक्ति मेरी नहीं है। यह पंक्ति मैंने उधार ली है अजीत चौधरी की कविता से। कविता का नाम है - 'समीक्षक जानते है', यह कविता वागर्थ के अगस्त अंक में छपी है। यह कविता मुझे जोरदार लगी। अजीत चौधरी को मैंने काफी दिनों बाद पढ़ा है, काफी पहले उनकी
 
विशाल श्रीवास्तव
Dec 29 2009 11:51 AM
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वो आई

वो आई उसके आने ने जैसे रात के आसमान में फेंका कंकड़ खिड़की के आकाश में पहले चाँद थरथराया फिर जल काँपा आसमान का फिर एक एक करके झिलमिलाये तारे सबने कहा देखो वो आई उसके आने से जागा मेरे कमरे का ऍंधेरा उसकी तांबई रंगत से खुश हुआ दरवाजा खुश हुए मेरे गन्दे क
 
विशाल श्रीवास्तव
Dec 29 2009 11:51 AM
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वन हण्ड्रेड इयर्स ऑफ सालीटयूड और मार्खेज़

आप सोचेंगे मार्खेज़ को अचानक याद करने का मतलब? लेकिन हुआ यूँ कि हाल में ही मार्खेज़ का प्लीनीयो मेन्दोज़ा द्वारा लिया गया साक्षात्कार पढ़ा तो खुद को लिखने से रोक नहीं सका। गद्य के जादू को अगर महसूस करना है तो इस उपन्यास को पढ़ें, यह एक ऐसा उपन्यास है जो व
 
विशाल श्रीवास्तव
Dec 29 2009 11:51 AM
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मित्र

मित्र थे जो चुनते थे शर्ट की आस्तीन से अदृश्य भुनगे कन्धे से साफ़ करते थे धूल ख्याल से भरकर छूते थे माथा ध्यान रखते थे मित्र झूठ बोलकर बचाते थे मित्र क्रूर शिक्षक और क्रुध्द पिता से मित्र थे जिन्होंने सिखाया प्रेम करना जो हमें चौराहों पर मिलते थे जिनस
 
विशाल श्रीवास्तव
Dec 29 2009 11:51 AM
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विस्लावा शिम्बोर्स्का की कविताएँ

अनुवाद : विशाल श्रीवास्तव) तीन मुश्किल शब्द जब मैं बोलती हूँ एक शब्द : भविष्य तो पहले अक्षर जुड़ते हैं बीते हुए समय से जब मैं बोलती हूँ खामोशी मैं इसे नष्ट करती हूँ जब मैं कहती हूँ कुछ नहीं मैं कुछ ऐसा बनाती हूँ जिसे कोई अपने हाथों में नहीं रख सकता एक
 
विशाल श्रीवास्तव
Dec 29 2009 11:51 AM
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ताज़ा कविता

अपभ्रंश में हँसता हुआ आदमी मॉल के भीतर खड़ा वह आदमी निखालिस अपभ्रंश में हँस रहा था और जब हिन्दी की काया में प्रवेश कर गई हों तमाम भाषाओं की संक्रामक आत्माएँ और चमक गया हो उसका चोला इतना बड़ा बाज़ार चलता हो उसके सहारे भयानक है न किसी का अपभ्रंश में हँसना
 
विशाल श्रीवास्तव
Dec 29 2009 11:51 AM
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भारतीय साम्यवाद के शिल्पी पी. सी. जोशी

भारतीय साम्यवादी आन्दोलन के बारे में यह आम मध्यवर्गीय समझ है कि अत्यन्त जनोन्मुख होते हुए भी यह सही अर्थों में भारतीय नहीं बन सका। अर्थात् यह एक नितान्त राजनीतिक आन्दोलन बना रहा, उसमें भी एक ऐसा आन्दोलन जिसमें अपने माक्र्सवाद या माक्र्सवाद-लेनिनवाद क
 
विशाल श्रीवास्तव
Dec 29 2009 11:51 AM
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आज़ादी के नाम पर 1947 का समझौता 1857 की क्रान्ति के शहीदों के प्रति एक बड़ा धोखा था

फैजाबाद, 10 जून। डॉ. रमाशंकर तिवारी त्रिभुवन ट्रस्ट द्वारा प्रथम स्वाधीनता संग्राम की 150वीं वर्षगाँठ के सन्दर्भ में ''1857 : मुक्तिसंघर्ष का पुनर्स्मरण'' विषय पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी के मुख्य वक्ता श्री सुधीर विद्यार्थी थे। श्री विद्य
 
विशाल श्रीवास्तव
Dec 29 2009 11:51 AM
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आलोचना के लिए कुछ भी पवित्र नहीं ____ रघुवंश मणि

संस्कृति की नगरी वाराणसी में 5 और 6 मई को हिन्दी की प्रसिध्द छायावादी कवयित्री महादेवी वर्मा पर आयोजित एक संगोष्ठी 'महादेवी वर्मा: वेदना और विद्रोह' ने अकारण विवाद का रूप ले लिया। इस गोष्ठी के समापन सत्र में हिन्दी के शीर्षस्थ आलोचक डॉ। नामवर सिंह ने
 
विशाल श्रीवास्तव
Dec 29 2009 11:51 AM
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जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनका भी अपराध (विजय कुमार के लेख को पढ़ने के बाद) विजय कुमार का लेख 'कवित्ता ही कवित्ता है', संरचनात्मक स्तर पर एक कमज़ोर लेख है। तमाम बड़े प्रश्नों को उठाने के बाद भी यह लेख अपनी प्रश्नाकुलता की बजाय भदेस भाषा के प्रयोग और अनैत
 
विशाल श्रीवास्तव
Dec 29 2009 11:51 AM
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आखिरी बार कब आपने अपने मन की सुनी थी?

आज यूँ कहीं पढ़ रहा था कि प्रसिद्ध कवि मुक्तिबोध अपनी मनःस्थिति का बेहद सम्मान करते थे। जाहिर है उनकी इन मनःस्थितियों में दो चीज+ें अवश्य थीं - बतियाना और चाय पीना। सुना है कि अपने ब्याह में वे सिर्फ इसलिए विलम्ब से पहुँचे कि नदी के किनारे किसी से बति
 
विशाल श्रीवास्तव
Dec 29 2009 11:51 AM
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वेलकम टू सज्जनपुर या वेलकम टू बेनेगल्स ट्रैजेडी

कल श्याम बेनेगल के नाम पर इस फिल्म को देखना हुआ। फिल्म की शुरुआत और स्टोरीटेलिंग से लगा कि फिल्म अच्छी होगी। लेकिन ज्यों-ज्यों फिल्म आगे बढ़ती गई, मन बेहद निराश हुआ। कॉमेडी बनाने की कोशिश में फिल्म का कबाड़ा हो गया। वैसे कला का यह एक सामान्य सत्य है, क
 
विशाल श्रीवास्तव
Dec 29 2009 11:51 AM
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एक आलसी कवि की डायरी

यह एक अजीब सूनेपन का समय है। सच कहूँ तो बहुत दिनों से कुछ नहीं लिखा न ब्लॉग पर और न कागज पर। शायद ध्यान दूँ तो कॉलेज के रोजनामचे और चेक बुक्स के अलावा दस्तखत भी कहीं नहीं किये। इतना सूनापन तो कभी नहीं था। कुछ कुछ जीवन बचपन की गर्मियों की दोपहर जैसा ह
 
विशाल श्रीवास्तव
Dec 29 2009 11:51 AM
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बरात जाब जरूरी है

अवध के ग्रामीण अंचल में बारात जाना एक अद्वितीय अनुभव है..... जो न गया हो वह उसे जान नहीं सकता, कहें तो यह एक अविगत अनुभव है; फिर भी अवधी के एक अनाम कवि की यह बानगी प्रस्तुत है। बरात जाब जरूरी है बुधई के लड़िका कै ब्याह रहा हमरे जियरा मा चाह रहा दस बीस
 
विशाल श्रीवास्तव
Dec 29 2009 11:51 AM
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चुरा के मेरी पोस्ट कहां तुम चले

मेरी पोस्ट वन हण्ड्रेड इयर्स ऑफ सालीटयूड और मार्खेज़ हूबहू शशि भाई ने अपने ब्लाग पर डाल दी है। उन्होंने कर्टसी में मेरा नाम भी नहीं दिया। बहुत आहत महसूस कर रहा हूं। शशि भूषण जी बेहद प्रतिभाशाली कथाकार हैं व्यक्तिगत रूप से उनकी कहानियों का मैं बड़ा प्र
 
विशाल श्रीवास्तव
Dec 29 2009 11:51 AM
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एट एण्ड ए हाफ : कलात्मक क्राइसिस के बीच काँपते हुए स्वप्न

आज बड़े दिनों बाद कुछ फुर्सत निकली तो फेडेरिको फेलिनी की फिल्म 'एट एण्ड ए हाफ' देखी। इस फिल्म को वर्ष 1963 में सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा की फिल्म का एकेडमी एवार्ड मिला था। फेलिनी इतालवी सिनेमा की बेहद चर्चित शख्सियत रहे हैं। 'एट एण्ड ए हाफ' का नाम पहले
 
विशाल श्रीवास्तव
Dec 29 2009 11:51 AM
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प्रकाश

प्रकाश हमें चाहिए धूप कि हम पढ़ सकें जीर्ण पन्नों को सुधार सकें नये लिखे के हिज्जे हमने बोई है आसमानी खेत पर उजाले की कुँवारी हरी दूब हमारा रक्त पहले से है वातावरण में देखा है हमने आकाश के आईने में अपने पीले चेहरों का अक्स हम पोंछते हैं नारंगी सूरज पर
 
विशाल श्रीवास्तव
Dec 29 2009 11:51 AM
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नया समय के हुलिये में बदलाव

आज मैंने नयासमय का हुलिया थोड़ा बदल दिया है, आशा है आप लोगों को पसन्द आयेगा, अविनाश व बोधि भाई की तर्ज पर कुछ दोस्तों के चिट्ठे भी लिंकित करना शुरू किया हैं .....
 
विशाल श्रीवास्तव
Dec 29 2009 11:51 AM
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राम दोहाई पांड़े भईया

मुंह से खाली राम राम बा छूरी बाटै आंड़े भइया, राम दोहाई पांड़े भईया। मची अहै अंधेर करेरे, मनई मिलिहैं हेरे हेरे। कुलि बगुला भगतन कै ठठ्ठर, काव कही यक यक से कट्टर। फांसै के बीसन हथकंडा, खायं खुलासा मीट औ अण्डा। राम नाम कै धरे दुपट्टा, पियैं सराब औ खेल
 
विशाल श्रीवास्तव
Dec 29 2009 11:51 AM
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