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'उड़ जायेगा हंस अकेला' :कुमार गंधर्व। अफ़सोस उनकी फ़रमाईश पूरी न हो सकी और वो चली गयीं।
विविध-भारती और रेडियोवाणी दोनों ही प्लेटफार्म ऐसे हैं जहां गाने सुनने सुनाने का सिलसिला चलता रहता है। अब तो इसमें फेसबुक भी शामिल हो गया है। ज़ाहिर है कि सोशल-नेटवर्किंग के ज़रिए 'अपनी तरह' के लोग आपको अपने आप ही मिलते रहते हैं। मुझे ख़ुशी है कि
Jun 06 2010 01:11 PM


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