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समाजवादी जनपरिषद

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13 Jun 2010
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भोपाल-तीन : राजेन्द्र राजन

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए भोपाल गैस कांड संबंधी फैसले से हर देश प्रेमी आहत हुआ है | पचीस साल पहले राजेन्द्र राजन ने इस मसले पर कवितायें लिखी थीं , इस निर्णय के बाद यह कविता लिखी है | भोपाल-तीन हर चीज में घुल गया था जहर हवा में पानी में
 
Aflatoon अफ़लातून
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भोपाल-तीन : राजेन्द्र राजन

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए भोपाल गैस कांड संबंधी फैसले से हर देश प्रेमी आहत हुआ है | पचीस साल पहले राजेन्द्र राजन ने इस मसले पर कवितायें लिखी थीं , इस निर्णय के बाद यह कविता लिखी है | भोपाल-तीन हर चीज में घुल गया था जहर हवा में पानी में
 
Aflatoon अफ़लातून
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जब दवा ही मर्ज बन जाए (बुनियादी संकटों के तकनीकी समाधान नहीं हो सकते) / – सुनील –

प्लास्टिक और पॉलीथिन आधुनिक विज्ञान और तकनालाजी की एक चमत्कारिक देन है। इसने पैकिंग और पैकेजिंग में एक क्रांति ला दी है और उसे काफी सुविधाजनक बना दिया है। कागज, लकड़ी, बांस, बेंत, घास, जूट, सूत, लोहा, टीन, पीतल, कांच, मिट्टी आदि की बनी वस्तुओं की जगह
 
Aflatoon अफ़लातून
Jun 01 2010 01:02 PM
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अम्बेडकर – लगन चालू है , सिकुड रही है गेहूँ की खरीद नीति

गेहूँ की फसल कट चुकी है । बनारस से बेलथरा रोड की संक्षिप्त रेल यात्रा में वे खेत भी अलग से दिखते हैं जहाँ हार्वेस्टर से कटाई के कारण भूसे में कटौती हुई है । उत्तर प्रदेश शासन ने तीन संस्थाओं के जरिए गेहूँ खरीदने की बात की है तथा खुद सरकार के आँकड़े बताते
 
Aflatoon अफ़लातून
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डॉ . अनुराग की जरूरी टिप्पणी पर गौर करें

डॉ. अनुराग एक गंभीर चिट्ठेकार हैं । ’ निरुपमा की मौत के बाद /स्त्री-पुरुष सम्बन्ध पर डॉ. लोहिया’ मेरी इस पोस्ट पर उन्होंने लम्बी और जरूरी टिप्पणी की है। इस टिप्पणी को अपने चिट्ठे पर एक पोस्ट के रूप में प्रकाशित करने की उन्होंने मुझे इजाजत दी है,जिसके लिए
 
Aflatoon अफ़लातून
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निरुपमा की मौत के बाद/स्त्री पुरुष सम्बन्ध पर लोहिया

[ निरुपमा की मौत ने झकझोर दिया है । विवाह,जाति-प्रथा और यौन शुचिता जैसे प्रश्न चर्चा में आये हैं । मैं इन सवालों पर डॉ. राममनोहर लोहिया के विचार यहां देना प्रासंगिक समझता हूं। सामाजिक यथास्थिति की ताकतों की सडाँध को पहचानने में मुझे इन विचारों से मदद
 
Aflatoon अफ़लातून
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लाड़ले और सौतेले बच्चे (मॉडल स्कूल या शिक्षा का दोषपूर्ण मॉडल) – सुनील –

खबर है कि भारत सरकार ने देश में नए 1000 मॉडल स्कूल खोलने का फैसला किया है। शैक्षिक रुप से पिछडे़ इलाकों में एक प्रखण्ड में एक मॉडल स्कूल खोला जाएगा। इसके पहले नवंबर 2008 में 2500 मॉडल स्कूलों की स्वीकृति दी गई थी। कुल मिलाकर देश में 6000 मॉडल स्कूल खोलने
 
Aflatoon अफ़लातून
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एनजियोकरण और विदेशी हाथ / सुनील

दंतेवाड़ा की घटना के बाद एक बार फिर माओवाद और उग्रवाद के पीछे विदेशी हाथ खोजने की कोशिश शुरु हो गई है। हथियार कहां से और किस रास्ते से आ रहे हैं, इसके अनुमान लगाए जा रहे हैं। इंटरनेट पर एक सज्जन ने पिछले सालों में स्वयंसेवी संस्थाओं को मिलने वाले विदेशी
 
Aflatoon अफ़लातून
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दन्तेवाड़ा (२)

पिछला हिस्सा इन छोटे-छोटे जनांदोलनों की जो कमी या विफलता है, वह यह है कि वे मिलकर व्यवस्था-परिवर्तन की कोई बड़ी धारा नहीं बना पा रहे हैं। एक-एक मुद्दे वाले इन आंदोलनों में कई बार वैचारिक-राजनैतिक दृष्टि का अभाव रहता है। इसीलिए वे कोई बड़ी शक्ल नहीं ले पा
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दन्तेवाड़ा की जड़ें / सुनील

[ स्कूल के दौरान ही सुनील को गाँधीजी की आत्मकथा मिली थी और वे उससे प्रभावित हुए थे। मध्य प्रदेश बोर्ड की परीक्षा में मेरिट सूची में स्थान पाने के बाद एक छोटे कस्बे से ही उन्होंने स्नातक की उपाधि ली। देश का अभिजात विश्वविद्यालय माना जाने वाले - जनेवि में
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बाबा साहब अम्बेडकर का एक जरूरी व्याख्यान

[ मद्रास के प्रसिद्ध पत्र संडे आबजर्वर के सम्पादक श्री पी. बालासुब्रम्ण्या ने बाबा साहब के सम्मान में , २३ दिसम्बर १९४४ को वहाँ के कन्नेमारा होटल में एक लंच दिया था । ] मित्रों ,जहाँ तक मैंने अध्ययन किया है , मैं कह सकता हूँ कि मद्रास की अब्राह्मण-पार्टी
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हिंसक रणनीति की सीमा

* ” जो सरकार किसी भी प्रकार के लोकमत से चुनी गई हो ,चाहे वह फर्जी लोकमत ही क्यों न हो तथा कम से कम संवैधानिक- कानूनी दिखने वाली होगी वहाँ गुरिल्ला विद्रोह को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता,चूँकि शान्तिपूर्ण संघर्ष की संभावनाओं को पूरी तरह आजमाया नहीं जा
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खनिज सम्पदा की लूट और कलिंगनगर पर दूसरा हमला

पिछले साल नौ सितम्बर को ’ब्लैक रोज़’ नामक मंगोलियाई पानी का एक बड़ा जहाज ओड़िशा के पारादीप बन्दरगाह के निकट डूब गया । जहाज में हजार २३८४७ टन लौह अयस्क लदा था । जिनका माल लदा था उन्होंने यह कबूल कर लिया कि एक अन्य जहाज ’टोरोस पर्ल’ के दस्तावेजों को जमाकर
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साध्य नहीं साधन है महिला आरक्षण भी

इस चिट्ठे पर मेरी पिछली पोस्ट पर जो टिप्पणियां आई हैं उनके अलावा फ़ेसबुक के जरिए भी कुछ मित्रों ने उस पर चर्चा की है । इस बहस में मेरे लेख की आलोचना में जो प्रमुख बाते कही गयी हैं उन्हें सब से पहले यहाँ एक साथ रख रहा हूँ : * इस आरक्षण में क्रीमी [...]
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पिछड़े नेता और औरत के लिए आरक्षण

लोक सभा और विधान सभा में औरतों के लिए ३३ फीसदी सीटें आरक्षित किए जाने का कानून बनाने का विरोध सामाजिक न्याय के तथाकथित पुरोधा मुलायम सिंह , मायावती , शरद यादव करते आये हैं । वे आरक्षण में आरक्षण की माँग कर रहे हैं । यानी इन आरक्षित सीटों में पिछड़ी जाति
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स्त्रियाँ : गाँधीजी : अनु. काशीनाथ त्रिवेदी

हिन्दुस्तानकी स्त्रियाँ जिस अँधेरेमें डूबी हुई थीं , उसमें से सत्याग्रहके तरीकेने उन्हें अपने-आप बाहर निकाल लिया है ; और यह भी सच है कि दूसरे किसी तरीकेसे वे इतने कम समयमें , जिस पर विश्वास नहीं हो सकता , आगे न आ पातीं । फिर भी स्त्री-जातिकी सेवाके कामको
Mar 06 2010 01:37 PM
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माँग रहा है हिन्दुस्तान ,सबको शिक्षा एक समान

अखिल भारतीय शिक्षा अधिकार मंच की ओर से 24 फरवरी 2010 को दिल्ली में रामलीला मैदान से संसद मार्ग तक कूच किया गया जो संसद मार्ग पर एक विशाल जनसभा में तब्दील हो गया। इस रैली में 16 राज्यों के लगभग 35 शिक्षक व विधार्थी संगठन,शिक्षा अधिकार समूह एवम् विभिन्न
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इक्कीसवीं सदी में पूंजीवाद की समझ और समाजवाद की तलाश : लोहिया की मदद से/ लेखक -सुनील

पूंजीवाद एक बार फिर संकट में है। पिछले दिनों आई जबरदस्त मंदी ने इसकी चूलें हिला दी है और दुनिया अभी इससे पूरी तरह उबरी नहीं है। पूंजीवाद का संकट सिर्फ बैंकों, कंपनियों व शेयर बाजार तक सीमित नहीं है। दुनिया में भूखे, कुपोषित, बेघर और बेरोजगार लोगों की
Feb 22 2010 07:45 AM
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केरल में राष्ट्रीय आन्दोलन की याद में

गाँधी : क्या आप मुझे यह साबित कर सकते हैं कि आपको उन्हें सड़क का इस्तेमाल करने से रोकने का हक है ? मुझे यह बात पक्की तौर पर लगती है कि इन दलित वर्गों के लोगों को सड़क के इस्तेमाल का आप जितना ही हक है । नम्बूदरी प्रतिनिधि : महात्माजी , आप इन तबकों [...]
Feb 19 2010 11:24 AM
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एक नदी थी जहाँ अब हाइ-स्कूल ,खेल का मैदान और मछली बाजार हैं

बीते गणतंत्र दिवस पर केरल के कन्नूर जिले के श्री पल्लिपरम प्रसन्नन कमर तक प्रदूषित पानी में तीन घण्टे तिरंगा ले कर खड़े रहे । उनके साथी दिन भर के उपवास पर थे । यह जगह कन्नूर नगरपालिका की सरहद से केवल चार किलोमीटर दूर स्थित पुज़ाथी पंचायत के अन्तर्गत है।
Feb 17 2010 06:23 PM
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दस नम्बरी अध्यक्ष और सैमसुन्ग – साहित्य अकादमी गठजोड़ / जनसत्ता / अफ़लातून

भारत में खेल , संगीत और कला के क्षेत्र में उपभोक्तावाद का अनुप्रवेश ढाई -तीन दशक पहले भली-भाँति हो चुका था । संगीत सम्मेलनों ,कला-प्रदर्शनियों और खेल-कूद स्पर्धाओं को कम्पनियाँ प्रायोजित करने लगी थीं । क्रिकेट मैच में पुरस्कार ,खिलाड़ियों के लिबास ,
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राष्ट्रमण्डल खेल बनाम शिक्षा का अधिकार

शिक्षा अधिकार मंच, भोपाल के तत्वाधान में 24 जनवरी 2010 को मॉडल शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परिसर में ’’राष्ट्रमंडल खेल-2010 बनाम शिक्षा का अधिकार’’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में प्रख्यात समाजवादी नेता श्री सुनील द्वारा लिखित एवं समाजवादी जनपरिषद और
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‘रक्षा कवच’ क्या दान दे दिया गया है , ममता बनर्जी ?

पिछले एक माह में रेल गाड़ियों के टकराने की कई दर्दनाक घटनायें हुई है । ज्यादातर घटनायें उत्तर प्रदेश में हुई हैं , दो यात्री ढ़ोने वाली गाड़ियों के बीच हुई हैं तथा कोहरे की वजह से हुई हैं । इनमें दर्जनों यात्रियों की मृत्यु हुई हैं । खानापुरी करने वाली [...]
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मुम्बई के आतंकी हमले पर अमेरिका में आरोप पत्र

मुम्बई में हुए आतंकी हमले के षड़यंत्र के सन्दर्भ में संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के इलिनॉय के उत्तरी जिले के पूर्वी डिविजन की अदालत ने गिरफ़्तार पाकिस्तानी नागरिकों पर आरोप निश्चित किए हैं । इस आरोप-पत्र में लश्करे तैय्यबा तथा पाकिस्तान में रचे गये षड़यंत्र की
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मध्यप्रदेश में नई राजनीति की शुरूआत : बाबा मायाराम

आम के पेड़ के नीचे बैठक चल रही है। इसमें दूर-दूर के गांव के लोग आए हैं। बातचीत हो रही है। यह दृश्य मध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिले के आदिवासी बहुल केसला विकासखंड स्थित किसान आदिवासी संगठन के कार्यालय का है। यहां 5 जनवरी को किसान आदिवासी संगठन की मासिक बैठक
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वरिष्ट समाजवादी अश्विनी कुमार नहीं रहे

वरिष्ट समाजवादी और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अश्विनी कुमार कल रात गुजर गये । वे पिछले कुछ समय से सदर अस्पताल गोरखपुर में भर्ती थे । वे ८२ वर्ष के थे । राष्ट्रीय आन्दोलन में उनकी पहली भागीदारी हुई थी जब कक्षा नौ के छात्र थे । अश्विनी कुमार ’भारत छोड़ो
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कोपेनहैगन : राष्ट्राध्यक्ष इतिहास न बना सके लेकिन जनता ने बनाया

रात भर चली वार्ताओं में विश्व के राष्ट्राध्यक्ष कोपेनहेगन एक लचर सहमती पर पहुँचे जिसमें पृथ्वी के गरम होने की प्रक्रिया पर रोक लगाने के लिए उद्योगों के उत्सर्जन पर नकेल कसने के लिए कोई लक्ष्य तय नहीं किए गये हैं । यह समझौता फन्डिंग के मामले में मजबूत
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पत्रकार / चिट्ठेकार बाबा मायाराम की पुस्तक का लोकार्पण

बाबा मायाराम द्वारा लिखी गयीं सशक्त रिपोर्टों से चिट्ठा जगत परिचित है । ’सतपुड़ा के बाशिन्दे’ नामक उनकी किताब का लोकार्पण कल इटारसी में हुआ । इस अवसर पर प्रबुद्ध नागरिकों के अलावा उन क्षेत्रों के ग्रामीण भी शामिल थे, जिनके बारे में इस पुस्तक में विवरण
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इरोम शर्मिला को बचायें ,’आफ़्स्पा’ हटायें :ऑनलाईन प्रतिवेदन पर हस्ताक्षर करें

मित्रों , इस ब्लॉग पर आप मणिपुर की जुझारू महिला सत्याग्रही इरोम शर्मिला के ऐतिहासिक अहिंसक प्रतिकार के बारे में पढ़ चुके हैं । इरोम शर्मिला की मांगों के प्रति नैतिक एकजुटता प्रकट करने के लिए समाजवादी जनपरिषद की इकाइयों ने कार्यक्रम भी लिए । इरोम शर्मि
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आफ़्स्पा ( AFSPA ) के खिलाफ़ धरना और सभा

अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के अवसर पर समाजवादी जनपरिषद ने लंका , वाराणसी में आफ़्स्पा (Armed Forces Special Power Act, AFSPA,1958 ) के खिलाफ़ धरना एवं सभा का आयोजन किया । धरना कवियित्री एवं जुझारू कार्यकर्ता ईरोम शर्मिला चानू के साहसिक संघर्ष के दस
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राजनीति का धंधा और धंधे की राजनीति : ले. सुनील

अखबार की वह खबर हैरान करने वाली थी। मैंने सोचा कि शायद छपाई की कोई गलती है या दशमलव बिन्दु इधर-उधर हो गया है। लेकिन दूसरे अखबार में भी देखा। वह सच थी। यह खबर चालू वित्त वर्ष की प्रथम छ:माही में अग्रिम आयकर जमा करने वाले शीर्षस्थ लोगों के बारे में थी।
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औद्योगिक सभ्यता ,गाँधी ,नए संघर्ष : ले. सुनील(४)

पूंजीवादी और औद्योगिक सभ्यता के इस विनाशकारी पहलू का अहसास उन्नीसवीं शताब्दी में मार्क्स सहित यूरोपीय विचारकों को नहीं होना स्वाभाविक था ,लेकिन गांधी ने इसे बहुत पहले ताड़ लिया था ।इसीलिए गांधी ने इसे राक्षसी सभ्यता कहा था । यूरोप – अमेरिका में
Dec 03 2009 01:17 AM
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राजनीति में मूल्य : किशन पटनायक

राजनीति एक व्यवहार है । जैसे-जैसे किसी राजनैतिक व्यक्ति या समूह की क्षमता और प्रभाव बढ़ने लगता है , उसको अपने आदर्श और नीति का कार्यरूप बतलाना पड़ता है । सिद्धान्त और व्यवहार में तालमेल रखना एक कठिन काम प्रतीत होने लगता है । सत्ता से वह जितना दूर रहेगा
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Dec 03 2009 01:17 AM
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मेरी चिट्ठाकारी और उसका भविष्य

दिसम्बर २००३ में साइबर कैफ़े में बैठ कर Anti MNC Forum नामक अंग्रेजी चिट्ठा बनाया । राजनैतिक विचारधारा के अनुकूल संजाल पर जो पढ़ता था उस चिट्ठे पर डाल देता था । कुछ अंग्रेजी के लेख और एकाध हिन्दी से अंग्रेजी तर्जुमे भी उसमें थे । उड़ीसा में बॉक्साइट खनन
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Dec 03 2009 01:17 AM
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‘नारी के सहभाग बिना , हर बदलाव अधूरा है ।’

परिवर्तन, नारी सहभाग, चिट्ठेकारी बोध गया के महन्तों की सैंकड़ों एकड़ खेती की जमीन पर ‘जो जमीन को जोते बोए, वो जमीन का मालिक होवे’ के पुराने नारे के अनुरूप भूमिहीनों के हक की लड़ाई छात्र युवा संघर्ष वाहिनी ने लड़ी और जीती थी । इस आन्दोलन के दर
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अमृत घूंट (३)[चार्ली चैप्लिन और बर्नॉर्ड शॉ से भेंट] : ले. नारायण देसाई

पहला तथा दूसरा भाग ] यॉर्कशायर के मिल मालिकों के एक विश्रांति गृह में बेरोजगार लोगों के संगठन ने खास उपासना का आयोजन कर प्रार्थना की कि ‘प्रभो , तुम्हारी इच्छा पूरी हो ।’ गांधीजी करुणा-सभर लेकिन दृढ़ थे । ‘ मैं आपके साथ ईमानदार न बनू
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भोपाल गैस काण्ड : पच्चीस वर्ष : कवितायेँ : राजेन्द्र राजन

भोपाल गैस काण्ड के २५ वर्ष पूरे होने जा रहे हैं | दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदी से जुड़े सवाल ज्यों के त्यों खड़े हैं | हाल ही में इस बाबत मनमोहन सिंह से जब प्रश्न किए गए तो उन्होंने इन सवालों को भूल जाने की हिदायत दी | राजेन्द्र र
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आर.एस.एस , भाजपा को कुम्हला देने वाले आरोप , लेकिन कार्यवाही की सिफारिश – सिफ़र ! – सिद्धार्थ वरदराजन , डेप्युटी एडिटर – द हिन्दू द्वारा समाचार विश्ल

हिन्दुस्तानी में कहावत है लम्बे तथा कठिन रियाज के बाद जब नतीजा अपेक्षतया बहुत कम निकलता है उन हालात में इस मुहावरे का इस्तेमाल किया जाता है । न्यायमूर्ती एम.एस. लिबर्हान ने १७ साल परिश्रम किया जिस दरमिया
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कुमारेन्द्र सेंगर चाहते क्या हैं?महान स्त्रियों के बारे में बताना या स्त्रियों को नीचा दिखाना?

कभी कभी हम कोई अच्छा काम करना भी चाहते हैं तब भी यदि हमारी नीयत साफ न हो तो वह प्रयत्न व्यर्थ जाता है। यही सेंगर जी के प्रयास के साथ हुआ। वैसे यह भी मुमकिन है कि वे अच्छा नहीं करना चाहते थे इसीलिए अच्छे उपाय अपना कर उसमें उलझ गये हैं । मैं महिला [...
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इरोम शर्मिला का सत्याग्रह:सैन्य दमन के खिलाफ़ बहादुराना प्रतिरोध

यह मणिपुरी कवियत्री और कार्यकर्ता ईरोम शर्मिला चनू की भूख हड़ताल का दसवां साल है । शर्मिला अपने राज्य में पिछले ५१ सालों से लागू आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पावर्स एक्ट , १९५८ ( सैन्य बल विशेष शक्तियाँ कानून , १९५८ ) या ” आफ़्स्पा ” के खिलाफ़ सत्य