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यही है वह जगह

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31 May 2010
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‘लैला’ के शान्त होने के अगले दिन जगन्नाथ पुरी

Filed under: travel Tagged: तूफान, पुरी, लैला, समुद्र तट, स्लाइडशो, cyclone, laila, puri, seashore, slideshow, storm
 
Aflatoon अफ़लातून
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झूम उठी बालों की देवी / सारा जोसेफ़

पहले भाग से आगे : कुटज के नीचे खुले बाल , खुली आँखों और चमकीली हँसी के साथ जैसे उस ने खुद अपना आविष्कार किया हो । फन फैलाये काले सर्प की तरह बालों की लटें , लहरा – लहरा कर मंजरी भरी कुटज की शाखाओं पर लिपट गईं । बारिश की तरह बरसते फूलों [...]
 
Aflatoon अफ़लातून
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झूम उठी बालों की देवी / सारा जोसेफ़ / अनु. चेन्नीत्तला कृष्णन नायर

[ अज़दक की पोस्ट पढ़ते हुए मेरी साथी डॉ. स्वाति को मशहूर मलयालम कथाकार (केन्द्रीय साहित्य अकादमी विजेता) सारा जोसेफ़ की कहानी झूम उठी बालों की देवी बरबस याद आ गई । इस कहानी का हिन्दी अनुवाद चेन्नीत्तला कृ्ष्णन नायर ने किया है । सारा जोसेफ़ का सम्पर्क पता -
 
Aflatoon अफ़लातून
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तीनों जनप्रिय लेखक एक दूसरे को श्रद्धांजली दे सकते हैं,क्या ?

हिन्दी चिट्ठेकारी के प्रति समर्पित तीन ’जनप्रिय लेखकों” को केन्द्र में रखकर काफ़ी लिखा जा रहा है। यह तीनों लम्बे समय से चिट्ठे लिखने में सातत्य बनाये हुए हैं ,जो इस माध्यम के लिए बहुत जरूरी है । ईस्वामी , चौपटस्वामी , काकेश , देबाशीष , ईपंडित , जीतेन्द्र
 
Aflatoon अफ़लातून
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कंपनी – विश्वविद्यालय की नई प्रजाति/ विश्वविद्यालय का व्यापार, शिक्षा का उद्योग/- सुनील -

कुछ साल पहले की बात है। उड़ीसा के कालाहांडी जिले के लांजीगढ़ क्षेत्र में नियमगिरी के पहाड़ों में बॉक्साईट खुदाई की वेदान्त कंपनी की परियोजना का काफी विरोध हो रहा था। यह काफी विवादास्पद बन गई थी। तभी खबर आई कि वेदान्त कंपनी पुरी के पास 10 हजार एकड़ भूमि में
 
Aflatoon अफ़लातून
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जाति आधारित जनगणना और यथास्थितिवाद की छटपटाहट

मेरी बहन डॉ. संघमित्रा की शादी हुई डॉ. सुरेन्द्र गाड़ेकर के साथ । शादी सुबह सार्वजनिक संडास-सफ़ाई और गौशाला सफ़ाई से शुरु हुई थी। शाम को आशीर्वाद -गोष्ठी में सर्वोदयी मनीषी दादा धर्माधिकारी ने कहा कि इस दम्पति की संतान ’महागुजबंगोड़िया’ होगी । दादा संविधान
 
Aflatoon अफ़लातून
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संघियों की आलोचना मंजूर है नीतीश को, अंग्रेजी-परस्ती से मिर्च लग रही है

नीतीश कुमार की पहली हिन्दी पोस्ट पर मेरी टिप्पणी रोक ली गई । टिप्पणी मुख्य मन्त्री ने रोकी अथवा उनके किसी सचिव ने ,पता नहीं । नीतीश कुमार उसके लिए जिम्मेदार हैं । बहरहाल, नीतीश कुमार द्वारा अंग्रेजी में ब्लॉगिंग शुरु करने को रवीश कुमार जैसे उनके प्रशंसक
 
Aflatoon अफ़लातून
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सेन्सरशिप में यकीन रखने वालों का माध्यम ब्लॉग नहीं है,नीतीश कुमार!

नीतीश कुमार के ब्लॉग पर उनकी हिन्दी में लिखी पहली पोस्ट पर मैंने टिप्पणी की है । मेरी समझ से उनके प्रति अत्यन्त संवेदना के साथ। फिलहाल ( २८ अप्रैल,शाम ४.५८ बजे) २८ अनुमोदित टिप्पणियों में मेरी टिप्पणी नहीं है । इसका मतलब नीतीश रचनात्मक आलोचना भी बरदाश्त
 
Aflatoon अफ़लातून
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एनजियोकरण और विदेशीकरण के खतरे

‘एनजीओ’ एक नया अंग्रेजी शब्द है, जो भारत में भी काफी प्रचलित हो गया है। पंजीकृत गैरसरकारी स्वयंसेवी संगठनों की जो बाढ़ पिछले कुछ सालों में आई है, उनकी जात के लिए यह नाम है। हर जिले में ही नहीं, हर प्रखंड में दर्जनों एनजीओ अचानक कुकुरमुत्ते की तरह उग आए
 
Aflatoon अफ़लातून
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बौद्धिक साम्राज्यवाद:प्रोफ़ेसर रिछारिया की आपबीती :उनकी जुबानी

कटक ‘केन्द्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (कटक) में मेरे अंतिम दिन बहुत दुख में गुजरे, जिसका कारण मेरे द्वारा अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (मनीला) के उच्चाधिकारियों की खुलेआम दखलंदाजी का विरोध था। ……………मनीला संस्थान द्वारा
 
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बौद्धिक साम्राज्यवाद और किस्सा-ए-प्रोफ़ेसर रिछारिया : सुनील

15 अगस्त, 1947 को भारत आजाद तो हो गया, किन्तु भारतीय दिमाग गुलामी से मुक्त नहीं हो पाया। इस दिमागी गुलामी को बनाए रखने का काम हमारे विश्वविद्यालयों, शिक्षण संस्थाओं और उनको मदद करने वाली अंतरराष्ट्रीय एजेन्सियों के जरिये चलता रहा। हमारा ज्ञान, हमारे
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उठी लोक मानस में आंधी निहारो : स्व. रामगोपाल दीक्षित

उठी लोकमानस में आंधी निहारो, तुम्हें जो गगन से धरा पर उतारे. क्षितिज लाल होता चला जा रहा है, तुम्हें ये प्रकृति की छटा जंच रही है, दबी दीन आहों की ज्वाला धधक कर, रुधिर क्रान्ति की नव दिशा रच रही है, अभी पात पीले ही केवल झड़े हैं, कभी आगे चल कर न जड़ से
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ज्ञानेन्द्रपति : कविता पोस्टर

Gyanendrapati Originally uploaded by Afloo कवि ज्ञानेन्द्रपति को ’पहल’ सम्मान दिए जाने के मौके पर लगाई गई पोस्टर प्रदर्शनी से लिया गया पोस्टर । Filed under: Uncategorized
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ज्ञानेन्द्रपति : कविता पोस्टर

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ज्ञानेन्द्रपति : कविता पोस्टर

Gyanendrapati Originally uploaded by Afloo कवि ज्ञानेन्द्रपति को ’पहल’ सम्मान दिए जाने के मौके पर लगाई गई पोस्टर प्रदर्शनी से लिया गया पोस्टर । Filed under: Uncategorized
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मित्र की किताबों के जैकेट : हुसैन

उत्तराखण्ड की किसी वादी में हुसैन नैसर्गिक सौन्दर्य को अपनी पेन्टिंग में उकेर रहे थे । वहीं लोहिया ने उनसे कहा कि हिन्दुस्तान के दिमाग़ पर ऐतिहासिक लोगों से भी ज्यादा असर राम और कृष्ण और शिव का है । राम और कृष्ण तो इतिहास के लोग माने जाते हैं , हों या न
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उर्दू रामायण ,राममनोहर और भारतमाता ?

बन्दर नहीं बनाते घर , घूमा करते इधर-उधर, आ-कर करते खों-खों-खों ’रोटी हमे न देते क्यों ? ’ भान्जी और बिटिया के बचपन में यह कविता उनके बीच लोकप्रिय थी । बनारस स्टेशन के प्लैटफ़ोर्म की छत पर रात साढ़े ग्यारह बजे यह समूह सो रहा है – एक दूसरे को सहारा और
 
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क्या पहली अप्रैल को पूरे देश को मूर्ख बनाया जा रहा है ?

क्या पहली अप्रैल को पूरे देश को मूर्ख बनाया जा रहा है ? 1 अप्रैल 2010 को देश में ‘मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार कानून’ लागू हो रहा है। यह बताया जा रहा है कि यह एक क्रांतिकारी काम है। इससे देश के सारे बच्चों को शिक्षित करने का काम हो जाएगा। लेकिन सच
 
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‘विपरीत नृशास्त्र’ का प्रबल प्रवक्ता ,चार्ल्स डारविन का वंशज फ़ेलिक्स पैडल

नृशास्त्र या मानवशास्त्र या एन्थ्रोपॉलॉजी मानवता के अध्ययन की विधा है । अन्य आधुनिक शास्त्रों की भाँति यह शास्त्र भी आधुनिक विश्व और इस औद्योगिक व्यवस्था द्वारा उत्पन्न समस्याओं का समाधान करने में असमर्थ है । अगर यूँ कहें कि इस विधा की मुख्यधारा आधुनिक
 
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कोका-कोला २०० करोड़ का हर्जाना दे : शासकीय विशेषज्ञ पैनल का निर्देश

केरल राज्य सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव के. जयकुमार की सदारत में कोका-कोला के पालघाट जिले के प्लाचीमाड़ा स्थित संयंत्र द्वारा सामाजिक-आर्थिक नुकसान का आकलन करने के लिए गठित नौ सदस्यीय विशेषज्ञ पैनल अपनी अन्तिम रपट में केरल सरकार से इस बहुराष्ट्रीय कम्पनी
 
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समाज को बदलने का आगाज़ : वृन्दा करात

माकपा पोलितब्यूरो की सदस्य तथा राज्य सभा सदस्य वृन्दा करात का यह लेख दैनिक हिन्दुस्तान के आज के सम्पादकीय पृष्ट पर प्रकाशित हुआ है । उत्तर प्रदेश ,बिहार के सपा,बसपा और जद(यू),राजद के आँकड़े देकर वृन्दा महिला आरक्षण लागू हो जाने पर पिछड़े,अनुसूचित जाति तथा
 
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होली का मर्म

अपने आप को धर्म और भगवान से ऊँचा मानने वाला हिरण्यकश्यप नाम का एक राजा था। वह चाहता था कि सब लोग उसे ही भगवान मानें और उसकी पूजा करें । पर हिरण्यकश्यप के पुत्र ने उसे भगवान मानने से साफ इनकार कर दिया । बहुत यातना व अत्याचार के बाद भी [...]
 
अफ़लातून
Feb 28 2010 10:49 AM
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आपके दिल में

आपके दिल में थोडा सा प्यार चाहिए राम ओर रहीम के लिए – श्याम ओर सलीम के लिए आपके दिल में थोड़ी सी सद्भावना चाहिए ईद ओर होली के लिए – यूं हंसी ठिठोली के लिए आपके दिल में थोडा -सा जज्बा चाहिए इबादत ओर पूजा के लिए -व्रत ओर रोज़ा के लिए आपके दिल
 
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Feb 27 2010 04:06 PM
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खेल दुनिया की अपारदर्शिता,कलमाडी और ‘बोफ़ोर्स’

देश-रक्षा की तरह हमारा राष्ट्र-प्रेम खेल के मामले में भी उत्कटता के साथ प्रकट होता है । खेल और रक्षा मामलों में एक समानता और है , वह है अपारदर्शिता (या पार- अदर्शिता ?) । बोफ़ोर्स तोप सौदों में खाई गई घूस के बाद रक्षा-सौदों के मामले में कई दिशा-निर्देश तय
 
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Feb 21 2010 07:29 AM
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गाँव में डॉक्टर ? ना , भई ना !

हमारे देश के डॉक्टरों ने ग्रामीण स्वास्थ्य में सुधार के लिए प्रस्तावित देहाती चिकित्सा पाठ्यक्रम का पुरजोर विरोध किया है । इस विरोध में हमारे देश के डॉक्टरों की अभिजात्य- वृत्ति छुपे नहीं छुपती । वैसे भी सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के तहत देहातों में स्थापित
 
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मनुष्य बाघ संवाद / कविता / भारत डोगरा

[ प्रसिद्ध लेखक और सामाजिक कार्यकार्ता भारत डोगरा की यह कविता बाबा मायाराम की लिखी किताब ’सतपुड़ा बाशिन्दे’ से साभार ली गई है । ] पलामू के एक जंगल में एक ट्राइबल को एक टाइगर मिल गया दोनों के सम्बंध अच्छे नहीं थे उन दिनों तो भी पुराने दिनों की
 
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राष्ट्रमंडल खेल २०१०-आखिर किसके लिए?

राष्ट्रमंडल खेलों का अगला आयोजन ३ से १२ अक्टूबर २०१० तक दिल्ली में होने वाला है। जिसके लिए कई वर्षों से बड़ी धूमधाम से तैयारी चल रही हैं। भारत सरकार और दिल्ली सरकार ने इन खेलों के समय पर निर्माण कार्य पूरा करने के लिए पूरी ताकत और धन झोंक दिया [...]
 
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निकलने को है राजाज्ञा : ज्ञानेन्द्रपति

[ वरिष्ट कवि ज्ञानेन्द्रपति से कल सैमसुंग-साहित्य अकादमी पुरस्कार की बाबत चर्चा हुई तो उन्होंने कला संकाय के चौराहे पर यह कविता सुनाई तथा इसे छापने की इजाजत दी । कवि के प्रति आभार ।] निकलने को है राजाज्ञा (एक तारकशाली साहित्यिक संगोष्ठी में कविता की
 
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एक साथ कई खातों में लॉगिन करें

कई लोग पेशेवर और निजी पत्राचार के लिए भिन्न-भिन्न ईमेल खाते रखते हैं । कई परिवारों में जहां एक ही कम्प्यूटर पर कई लोगों को अपने अपने खाते बार-बार खोलने की जरूरत होती है – एक दिक्कत आती है । एक वेबसाईट पर साइन-इन कर लेने पर उसी वेबसाईट पर दूसरी
 
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वसंतोत्सव

काशी विश्वविद्यालय यही है वह जगह जहां नामालूम तरीके से नहीं आता है वसंतोत्सव हमउमर की तरह आता है आंखों में आंखे मिलाते हुए मगर चला जाता है चुपचाप जैसे बाज़ार से गुज़र जाता है बेरोजगार एक दुकानदार की तरह मुस्कराता रह जाता है फूलों लदा सिंहद्वार इस बार वसंत
 
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वसंतोत्सव

काशी विश्वविद्यालय यही है वह जगह जहां नामालूम तरीके से नहीं आता है वसंतोत्सव हमउमर की तरह आता है आंखों में आंखे मिलाते हुए मगर चला जाता है चुपचाप जैसे बाज़ार से गुज़र जाता है बेरोजगार एक दुकानदार की तरह मुस्कराता रह जाता है फूलों लदा सिंहद्वार इस बार वसंत
 
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राष्ट्रमण्डल खेल : कैसा इन्फ़्रास्ट्रक्चर ? किसके लिए ? : सुनील

पिछले भाग से आगे : यह कहा जा रहा है कि राष्ट्रमंडल खेलों के लिए जो इन्फ्रास्ट्रक्चर बन रहा है, वह बाद में भी काम आएगा। लेकिन किनके लिए ? निजी कारों को दौड़ाने और हवाई जहाज में उडने वाले अमीरों के लिए तो दिल्ली विश्व स्तरीय शहर बन जाएगा। (वह भी कुछ समय के
 
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कॉमनवेल्थ गेम्स : गुलामी और लूट का तमाशा : सुनील

आजाद भारत के लिए यह एक शर्म का दिन था। २९ अक्टूबर २००९ को आजाद और लोकतांत्रिक भारत की निर्वाचित राष्ट्रपति सुश्री प्रतिभा पाटील अगले राष्ट्रमंडल खेलों के प्रतीक डंडे ब्रिटेन की महारानी से लेने के लिए स्वयं चलकर लंदन में उनके महल बकिंघम पैलेस में पहुंची
 
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मृगेन्द्र प्रताप सिंह का शिल्प : डॉ. लोलार्क द्विवेदी द्वारा समीक्षा

[ वरिष्ट कला समीक्षक एवं ’आर्यकल्प ’ के सम्पादक डॉ. लोलार्क द्विवेदी ने मृगेन्द्र प्रताप सिंह की इस शिल्प कृति पर लिखी जीवन्त समीक्षा को छापने की अनुमति सस्नेह दी है । आभार । ] … और अभी मीलों चलना है मृगेन्द्र प्रताप सिंह ( प्राध्यापक , मूर्तिकला
 
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‘एकला संघ’ का स्वागत करें

मेरे चिट्ठे पर मित्र जसवीर की मौत पर कवितायें छपी थीं और अनेक मित्रों ने पसन्द की थीं । जसवीर भाई ने अब अपना ब्लॉग ’एकला संघ’ शुरु कर दिया है । आप सब से दिली अपील है कि इस ब्लॉग पर जायें और अपनी बेबाक राय व्यक्त करें । मुझे भरोसा है कि ’एकला [...]
 
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स्वामी विवेकानन्द जयन्ती पर

मैं आज स्वामी विवेकानन्द का स्मरण करूँगा । ’हिन्दुस्तान ’ अखबार द्वारा दिए गये २०१० के पंचाग के अनुसार ६ जनवरी , काशी से प्रकाशित ठाकुर प्रसाद के प्रसिद्ध पंचाग के हिसाब से ७ जनवरी तथा रोमां रोलां द्वारा लिखी गयी स्वामीजी की जीवनी के अनुसार १२ जनवरी को
 
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मौत पर कुछ कवितायेँ : जसवीर अरोड़ा

एक हकीकत मेरी लाश अभी आयी है एक लाश और आ रही है दूजी अधजली है तीसरी की राख ठंडी पड़ चुकी है | तैयारियां चल रही हैं उस इंसानी जिस्‍म को फूँकने की- जिसे हम अब तक रिश्‍तों से बुलाते थे | सभी इंतजार में हैं अर्थी को चिता पर रखते लकडियों से उस ढ
 
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‘कीमत अदा की गई ‘ खबरों पर एडिटर्स गिल्ड बोला – अफलातून

गत दिनों हुए विधान सभा चुनावों तथा उसके पहले लोक सभा के लिए हुए आम चुनाव में अख़बारों द्वारा प्रत्याशियों द्वारा ‘ पैसे लेकर खबरें छापने’ का मुद्दा ठंडा नहीं पड़ा है | लोक सभा चुनाव के दौरान समाजवादी जनपरिषद की तरफ से मैंने चुनाव आयोग
 
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कवितायें : जसवीर अरोड़ा

यूनिफार्म एक-सी वर्दी पहने हुए सड़क पर मार्च करती भीड़ के लोगों से मुझे डर लगता है। चाहे वह केसरिया वाले साधु हों चाहे आर्मी के जवान चाहे श्‍वेत साड़ी वाली बहनें चाहे ईद पर जा रहे नमाजी या फिर खादी वाले गांधीवादी। न जाने कब जुनून सवार हो जाए औरों की
 
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भोपाल के सबक : सुनील

भोपाल गैसकांड इस देश की सरकारों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों की गहरी सांठगांठ का नतीजा था। कंपनियों की खुली तरफदारी और गुलामी का एक नया दौर इस कांड से शुरु हुआ। ………….. भोपाल गैसकांड से कोई सबक सीखे बगैर भारत की सरकारों ने वैश्वीकर
 
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