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01 May 2010
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ले लो, ले लो झुमके अमलतास के

इन दिनों सुबह सैर पर निकल रहा हूँ तो रास्ते में जगह जगह अमलतास फूला हुआ है. चटख़ रंगो वाले गुलमोहर की बहार भी छाई हुई है लेकिन अमलतास का शबाब कुछ और ही है. हरे पत्तों से लदा पेड़ तपती धूप में कब पीले झुमकों में तब्दील हो जाता है मालूम ही नहीं पड़ता. एक झूमर
 
sanjay patel
टैग: कविता
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कुमार गंधर्व के जन्मदिन पर विविध भारती की सुरीली सौग़ात.

पं.कुमार गंधर्व अपनी विशिष्ट गायकी के साथ मालवा के लोक-संगीत और निरगुणी पदों के गायन के लिये हम सब संगीतप्रेमियों के चहेते हैं. 8 अप्रैल को उनके जन्मदिन से विविध भारती द्वारा अपने लोकप्रिय कार्यक्रम संगीत-सरिता में एक नई श्रंखला प्रारंभ हो रही है जिसमें
 
sanjay patel
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आज से उजाले अपनी यादों के लेकर आ रहे हैं सलीम ख़ान

विविध भारती एफ़.एम. सेवा पर ’उजाले अपनी यादों के’श्रोताओं का बेहद पसंदीदा कार्यक्रम रहा है. हाल ही में हुए कार्यक्रम परिवर्तन के मुताबिक अब यह कार्यक्रम प्रत्येक रविवार को अपराह्न ४ बजे प्रसारित होगा. कार्यक्रम की समय सीमा भी एक घंटे की कर दी गई है.४
 
sanjay patel
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मुझे कौन चाहता है ?

मेरे बच्चे और पत्नीजिनके लिए मैं हमेशा एक बेयरर चैक हूँख़ुशियों का, उल्लास का या अपनेपन का.कुछ परिजन ?जो चाहते हैं कि मैं उनसे हमेशा सहमत हो जाऊँवे कुछ भी कहें; मैं उनकी हाँ में हाँ मिलाऊँकुछ मित्रजो मुझे ज्ञानमार्गी,ज़िद्दी,अपनी बात परअड़ा रहने वाला शख़्स
 
sanjay patel
Mar 05 2010 04:37 PM
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मन को पतंग बना लो

उड़ती है वह बेख़बरजैसा उड़ाने वाला चाहेकितना समर्पण है उसमेंन कोई चाहनान कोई शर्तहवा के रूख़ को हमसफ़र बना करउड़ती रहती है वह अनंत आकाश मेंहम मन को भी पतंग बना लें तो कितना अच्छा होअनंत में उड़ते रहेंबिना किये परवाहकौन उड़ा रहा हैकौन काट डालेगाक्या होगा मेरा
 
sanjay patel
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गुणीजनों हो सके तो मुझे माफ़ करना.

मुझे क्या आता है ? भीमसेन जोशी के भारतरत्न होने पर एक आदरांजलि शब्दों का अतिरेकी जंजाल और सुने सुनाए संस्मरण वह तो नहीं आता जो पंडितजी के कंठ से झरता है रज़ा के रचना संसार और उनकी कूँची का प्रवाह जिसकी समीक्षा कर मैं आत्मप्रवंचना से भर जाता हूँ वह तो
 
sanjay patel
Dec 29 2009 11:41 AM
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श्रोता की खसलत कार्यक्रम का सत्यानाश कर देती है !

बात थोड़ी लम्बी कह गया हूँ ; यदि दस से पन्द्रह मिनट का समय दे सकते हैं तो ही इसे पढ़ें.हाँ इस पोस्ट में व्यक्त किये गए दर्द को समझने के लिये एक संगीतप्रेमी का दिल होना ख़ास क्वॉलिफ़िकेशन है. बीते तीस बरसों से तो मंच पर बतौर एक एंकर पर्सन काम कर ही रहा हू
 
sanjay patel
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इठलाइये उन गीतों के लिये जिनमें लता की आत्मा का वास है.

कभी कभी गंगा घर चल कर आ जाती है. हुआ यूँ कि 27 सितम्बर की शाम को इन्दौर में लता दीनानाथ ग्रामोफ़ोन रेकार्ड संग्रहालय का शुभारंभ था.इसी आयोजन में सम्मानित किये ऐसे क़लमकार जिन्होंने अपने लेखन से संगीत के सुरीलेपन में निरंतर इज़ाफ़ा किया है. रविराज प्रणामी
 
sanjay patel
Dec 29 2009 11:41 AM
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इन्दौर में लता दीनानाथ मंगेशकर ग्रामोफ़ोन रेकॉर्ड संग्रहालय का शुभारंभ २७ को

पुराने गीत-संगीत ने भारतीय अवाम को जो सुख और सुकून अता किया है; वह बेमिसाल है। स्वर-साम्राज्ञी भारतरत्न लता मंगेशकर के जन्मदिवस की पूर्व संध्या में ऐसे ही मधुर संगीत के दुर्लभ ग्रामोफ़ोन रेकॉड्र्स की विशाल लायब्रेरी "लता दीनानाथ मंगेशकर ग्रामोफ़ोन रेकॉ
 
sanjay patel
Dec 29 2009 11:41 AM
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लावण्या बेन भी तो मना रहीं हैं आज अपना जन्मोत्सव.

ब्लॉग बिरादरी की एक अत्यंत स्नेहल क़िरदार... लावण्या शाह .रहतीं हैं अमेरिका में लेकिन दिल है हिन्दुस्तानी. वे परिवेश,संगीत,कविता,छायाकारी के शानदार सिलसिले अपने ब्लॉग पर जारी रखती हैं.आज (22 सितम्बर ) उन्होंने मेरे जन्मदिन पर एक पोस्ट लिख डाली लेकिन उ
 
sanjay patel
Dec 29 2009 11:41 AM
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बस इसीलिये हार जाती है हमारी हिन्दी !

फ़िर आ गया है हिन्दी दिवस और शुरू हो गए हैं वही पारम्परिक शगुन.पिछले दिनों जनसत्ता में जाने माने साहित्यकार श्री राजकिशोर का एक लेख राष्ट्रभाषा को लेकर प्रकाशित हुआ था और उसके कुछ ही दिनों बाद मेरे शहर के शिक्षाविद,व्यंग्यकार और कार्टूनिस्ट श्री जवाहर
 
sanjay patel
Dec 29 2009 11:41 AM
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नेक सीख से ज़िन्दगी सवाँरने वाला शिक्षक !

हमने अपने बचपन में माड़साब,गुरूजी,सर,टीचरजी जैसे संबोधन सुने हैं.अब बड़ी हो रही पीढ़ी मैम तक आ गई है. शिक्षक दिवस की बेला में मुझे लगता है जीवन में स्कूल के अध्यापक ने हमारे जीवन को कितना सँवारा.किताबों की सीख तो अपनी जगह है लेकिन जीवन को कई नेक मशवरों
 
sanjay patel
Dec 29 2009 11:41 AM
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ज़माने को बार-बार याद करना होगा कि उसका पहला और आखरी बंधन भाषा है

ये ललित निबंध लिखा है जाने माने साहित्यकार और चित्रपट संगीत पर अदभुत शब्दलोक के रचनाकार श्री अजातशत्रु ने. सन 2001 में खंडवा से प्रकाशित नवगीत एवं ललित निबंध की पत्रिका अक्षत में मैंने इसे पढ़ा तो लगा कि लेखन पर एक नज़रिया ये भी हो सकता है. आप भी पढ़िये
 
sanjay patel
Dec 29 2009 11:41 AM
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ऐ मेरी काली माटी ,वीर प्रसूता,तू कभी बाँझ मत होना ! धन्य हे मेरे देश.

नरहरि पटेल मध्य-प्रदेश के प्रमुख शहर इन्दौर के बाशिंदे हैं. मालवा उनका मादरे-वतन है.वे यहाँ की लोक संस्कृति,संगीत,गीत नाट्य के वरिष्ठ संस्कृतिकर्मी के रूप में जाने जाते हैं..मालवी ग़ज़लों पर नरहरिजी ने बहुत शिद्दत से काम किया है. अब तक उनके आठ मजमुए शा
 
sanjay patel
Dec 29 2009 11:41 AM
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शास्त्रीय संगीत के प्रति रूझान जगाता राग मियाँ मल्हार-पं.भीमसेन जोशी

कई मित्रों से जब शास्त्रीय संगीत सुनने का इसरार करता हूँ तो वे पूछते हैं ऐसा क्या सुनें जिससे क्लासिकल म्युज़िक के प्रति रूझान बढ़े ? एक सूची थमाता हूँ अक्सर जिसमें ये बंदिश ज़रूर होती जिसे आज पोस्ट कर रहा हूँ.आपको सुनाने का मक़सद तो है ही साथ ही लगातार
 
sanjay patel
Dec 29 2009 11:41 AM
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फ़्रेंडशिप डे-मित्र हो तो ऐसा

दोस्त ऐसा जिसे कहो कुछ नहीं समझ जाए लिखो कुछ नहीं पढ़ ले आवाज़ दो उसके पहले सुन ले मुझे गुण-दोष सहित स्वीकार करे ग़र चोट लगे उसे दर्द हो मुझे कमाल मैं करूँ गर्व हो उसे अवसाद से उबार दे स्नेह दे , सत्कार दे आलोचना का अधिकार दे रिश्तों को विस्तार दे दु:ख
 
sanjay patel
Dec 29 2009 11:41 AM
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सखाराम बाइंडर,विजय तेंडुलकर और प्रिंटिंग प्रेस.

से ज़्यादा पूर्णाकार नाटक,7 एक-पात्रीय,6 बच्चों की नाटिकाएँ,लघु-कथाओं के 4 संकलन,3 निबंध संग्रह और 17 फ़िल्मों की पटकथाएँ रचने वाले ख्यात नाटककार विजय तेंडुलकर विगत 19 मई को हमसे बिछुड़े थे. अपने बेहतरीन कथानकों के लिये तेंडुलकरजी खासे चर्चित रहे और मूल
 
sanjay patel
Dec 29 2009 11:41 AM
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मिश्री सी मीठी आवाज़ की पुण्यतिथि है कल

दुनिया में कुछ चीज़ों की तुलना ही नहीं की जा सकती। तुलना तो ठीक, उनके लिए उपमाएँ ढूँढना भी एक मुश्किल काम हो जाता है। भारतीय फ़िल्म संगीत में गीता दत्त का नाम भी कुछ ऐसा ही है। गीताजी की आवाज़ की रिक्तता आज भी जस की तस है। संगीत के सात सुरों में भी ऐसा
 
sanjay patel
Dec 29 2009 11:41 AM
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नये साल के लिये कुछ तल्ख़ प्रस्ताव !

है तो यह अंग्रेज़ी रिवायत कि नये साल के लिये कुछ रिज़ॉल्यूशन्स पास किये जाएँ लेकिन सच कहूँ एक मौक़ा ज़रूर देती है यह कि आप गुज़रे के बारे में सोचें और तय करें कि आपको आगे क्या करना है. मैंने सोचा मन कट्ठा कर के कुछ तो तय कर लिया जाए ; देखें कितना निभ पाता
 
sanjay patel
Dec 29 2009 11:41 AM
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विवाह समारोहों में ख़त्म हो रही आत्मीयता,बढ़ता जा रहा भौंडापन !

इन दिनों विवाह समारोहों की धूम रही. एक विचित्र बात इन समारोहों में ये देखने में आई कि सर्वत्र आर्थिक मंदी का ढोल बज रहा है लेकिन ब्याह-शादियों के ये प्रसंग इसका अपवाद ही कहे जाने चाहियें.बेतहाशा पैसा ख़र्च होता है इनमें.डेकोरेशन हो,संगीत हो या व्यंजन
 
sanjay patel
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क्रिसमस पर मन को सुक़ून देते सदभावना के संदेश !

कल बड़ा दिन था. मेरे शहर के चर्च के बाहर वैसा ही उल्लास और उमंग नज़र आई जैसी दीपावली पर मंदिरों के बाहर और ईद के दिन मस्ज़िदों के बाहर नज़र आती है. सजे धजे क्रिश्चियन भाई-बहन और उनकी उंगली थामें प्यारे बच्चों के चेहरे पर क्रिसमस की ख़ुशी साफ़ देखी जा सकती
 
sanjay patel
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आज है मुनव्वर राना और राजकुमार केसवानी का जन्मदिन.

सबसे पहले तो इन दोनो सुख़नवर की लम्बी उम्र की कामना करें.मुनव्वर राना और राजकुमार केसवानी को अलग-अलग इलाक़े के इंसान हैं लेकिन दोनो में एक समानता है कि ये अपनी शर्तों पर अपनी ज़िन्दगी बसर करते हैं.दोनों में ज़िन्दादिली एक स्थायी भाव है और मस्तमौला तबियत
 
sanjay patel
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उड़ गया....कागद कारे करने वाला हँस अकेला !

आज सुबह आकाशवाणी समाचार में वरिष्ठ हिन्दी पत्रकार श्री प्रभाष जोशी के अवसान का समाचार सुना. यूँ लगा जैसे मालवा का एक लोकगीत ख़ामोश हो गया. उनके लेखन में मालवा रह-रह कर और लिपट-लिपट कर महकता था. नईदुनिया से अपनी पत्रकारिता की शुरूआत करने वाले प्रभाषजी
 
sanjay patel
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उज्जैन में एक हीरो की तरह विदा हुए पं.ओम व्यास

लग रहा था वह किसी की अंतिम यात्रा नहीं;श्रावण मास में उज्जैन में निकलने वाली भगवान महाकाल की शाही सवारी है.पूरे देश में उज्जैन को और अधिक ख्याति देने वाले जनकवि ओम व्यास की पार्थिव देह को दिल्ली में 8 जुलाई को दिल्ली से उनके गृहनगर लाया गया.कलेक्टर,क
 
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इन्दौर का सिख मोहल्ला अब कहलाएगा भारतरत्न लता मंगेशकर मार्ग

दुनिया की सबसे सुरीली आवाज़ लता मंगेशकर का जन्म (28 सितम्बर 1929) इन्दौर में हुआ है. आने वाले सितम्बर में लताजी पूरे 80 बरस की हो जाने वालीं हैं.इन्दौर की नगर पालिक निगम ने सैध्दांतिक रूप उस एक प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है जिसके तहत इन्दौर के सिख मोहल्
 
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आइये कविवर ओम व्यास के स्वास्थ्य लाभ की कामना करें

वह मालवा का ऐसा सशस्त काव्य हस्ताक्षर है जिसने इन दिनों हिन्दी काव्य मंचों को अपनी अनूठी कहन और शिल्प से ठहाकों से लबरेज़ कर रखा है. एक विशष्ट स्वांग और अभिव्यक्ति का कवि पं.ओम व्यास ओम भोपाल के एक निजी नर्सिंग होम में जीवन और मृत्यु के बीच संघर्षरत ह
 
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लिखावट को सुन्दर बनाने वाला एक जुनूनी हिन्दी प्रेमी

इसे कोई दैवीय प्रेरणा कहें या जुनून; श्याम शर्मा नाम का ये शख्स है बहुत फ़ितरती. मेरे शहर के नगर पालिक निगम का यह युवा इंजीनियर यूँ तो भवनों के निर्माण की अनुमति जारी करता है लेकिन इसके साथ ही एक और ख़ास काम वह बीते कई बरसों से कर रहा है और वह है हिन्द
 
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आज फ़िर याद आ गईं दिव्यमयी महादेवीजी

सरस्वती का साक्षात स्वरूप मानीं जाने वालीं हिन्दी कविता की पूजनीय हस्ताक्षर महादेवी वर्मा का जन्मदिन होली के दिन ही आता है. 1984 में लायन्स क्लब की युवा इकाई लियो क्लब के लिये महादेवीजी को इन्दौर न्योता था. लोक साहित्य के जाने माने लेखक दादा रामनाराय
 
sanjay patel
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शब्दों से कहीं बेहतर और कुछ ज़्यादा ही कहते हैं चित्र

पहले भी कहीं लिखा था कि इन्दौर में जनसत्ता एक दिन बाद मिलता है. उसके बाद भी उसका समाचार संकलन,ले-आउट और भाषा संस्कार मन को लुभाता है. मेरा शहर तो बाक़ायदा अख़बारों की मण्डी बन चला है और तमाम कौतुक रचते अख़बार रोज़ सुबह निगाहों के सामने होते हैं.कुछ बाक़ाय
 
sanjay patel
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न ये चाँद होगा न तारे रहेंगे,मगर हम हमेशा तुम्हारे रहेंगे.

गीता दत्त की बरसी पर एक श्रध्दांजली एक दिन पहले लिख ही चुका था.कुछ मित्रों के इसरार पर आज गीता जी का ही गाया एक गीत सुनिये. फ़िल्म शर्त से लिये गए इस गीत को लिखा एस.एच.बिहारी ने और संगीतकार हैं हेमंतकुमार.संयोग से इस गीत को हेमंत दा ने भी गाया है और
 
sanjay patel
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सात गीतों के साथ -आज की रात - करें सात सुरों की बात !

आज विश्व संगीत दिवस की इस रात मेरे शहर इन्दौरमें घने बादल छाये हुए हैं.संगीत सुनने का ऐसा समाँमिल जाए तो क्या बात है. आपके लिये सजाई है मनको ख़ुशी देने वाली ऐसी सात धुनें जो अपने आप मेंकविता और संगीत की दृष्टि से पूरे एक दौर की नुमाइंदगीकरती है. सहगल,
 
sanjay patel
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आज उस कबीर का प्रकटोत्सव जो कभी ग़ायब ही नहीं हुआ !

आज कबीरदास जी के प्रकटोत्सव पर शहर में कई कार्यक्रम- मेरे शहर के अख़बारों में ये शीर्षक पढ़कर सुबह-सुबह मन विचलित हो गया.सोचने लगा मैं कि जो शख़्स आज अपने लिखे से प्रति-पल हमारे इर्द-गिर्द मौजूद है उसका प्रकट होना चौंकाता है. इसका मतलब हम कबीर के लिखे क
 
sanjay patel
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फ़ादर्स डे....नई पीढ़ी में बीतती पीढ़ी का अक्स देखना बेमानी होगा न ?

उनकी मौजूदगी और आवाज़ से हीधूजनी चल जाती थी.उनका आदेश यानी पत्थर की लकीरउनसे ज़्यादा जानकारी किसी और को हो ही नहीं सकती थी.वे थे एक स्कूलएक संस्था...तहज़ीब,संगीत,भूगोल और न जाने कितनीऔषधियों की.वे नाम के पिता नहीं थेउनके ठसके और रूतबे में झलकता थापिता क
 
sanjay patel