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भारत-ब्रिगेड

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16 Jun 2010
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कथा-गीत: मैं बूढा बरगद हूँ यारों... ---संजीव 'सलिल'

कथा-गीत: मैं बूढा बरगद हूँ यारों... संजीव 'सलिल' * * मैं बूढा बरगद हूँ यारों... है याद कभी मैं अंकुर था. दो पल्लव लिए लजाता था. ऊँचे वृक्षों को देख-देख- मैं खुद पर ही शर्माता था. धीरे-धीरे मैं बड़ा हुआ. शाखें फैलीं, पंछी आये. कुछ जल्दी छोड़ गए मुझको- कुछ
 
दिव्य नर्मदा divya narmada
Jun 17 2010 12:36 AM
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महफ़ूज़ भाई किधर हो आज़ कल

आर्ची आज़ भी महफ़ूज़-भैया को तलाशती है अंकुर-भैया और महफ़ूज़ भैया में उसके लिये कोई फ़र्क नहीं है. आर्ची एक सा स्नेह बांटती है दौनो से दूर सपने संजोती है अंकुर भैया आएंगे मेरे पास खूब सारी गुडिया हो जाएंगी खेलने को ...आर्ची
 
गिरीश बिल्लोरे
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चंद मुक्तक -संजीव 'सलिल'

चंद मुक्तक संजीव 'सलिल' * * कलम तलवार से ज्यादा, कहा सच वार करती है. जुबां नारी की लेकिन सबसे ज्यादा धार धरती है. महाभारत कराया द्रौपदी के व्यंग बाणों ने- नयन के तीर छेदें तो न दिल की हार खलती है.. * कलम नीलाम होती रोज ही अखबार में देखो. खबर बेची-खरीदी
 
दिव्य नर्मदा divya narmada
Jun 14 2010 10:15 AM
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भोपाल के हसन,अब्दुल,ज़ाकिर,करीम,सोहन,राम,मीना,सन्जू,मन्जू, को क्या कहोगे बाल दिवस पर ?

तस्वीर फ़िरदौस खान के ब्लाग से साभार बुआ वाला भोपाल तब से अब तक बीमार हैं ..... आखिरी सांस का इन्तज़ार करती बुआ अभी भी तीन दिसम्बर चौरासी से अब तक ज़िन्दा है उनके साथ ज़िंदा हैं अब तक सवाल जो व्यवस्था,कानून,न्याय और व्यापार के अगुओं से पूछे जाने हैं. उनकी
 
गिरीश बिल्लोरे
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भारत में कुपोषण चिन्ता ही नहीं चिन्तन भी कीजिये

श्रद्धा मंडलोई की रिपोर्ट में वे कहतीं हैं "यूनिसेफ के मुताबिक विकसित देशों में 150 मिलियन (15 करोड़) बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। जैसाकि हम सभी जानते हैं भारत दक्षिण एशिया में बसा हुआ है, जहां करीब 78 मिलियन बच्चे कुपोषित हैं। भारत में तीन साल से कम उम्र
 
गिरीश बिल्लोरे
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इश्क प्रीत लव पर अब तक

इश्क प्रीत लव पर अब तक प्रस्तुत ब्लाग्स सादर प्रस्तुत हैं आप भी पुरानी पोस्ट के लिंक दे सकते हैं ब्लॉगवाणी की सहायता से आप को इश्क़ है तो मन प्याली, मदिरा थी प्रीत ..! ह्रदय की सुराही तौ पर न रीती तेरी पूजा के तरीके से बेख़बर हूं मैं न ही उपवास मुझसे हो
 
गिरीश बिल्लोरे
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त्रिपदिक नवगीत : नेह नर्मदा तीर पर ---- संजीव 'सलिल'

: अभिनव सारस्वत प्रयोग : त्रिपदिक नवगीत : नेह नर्मदा तीर पर - संजीव 'सलिल' * नेह नर्मदा तीर पर, अवगाहन कर धीर धर, पल-पल उठ-गिरती लहर... * कौन उदासी-विरागी, विकल किनारे पर खड़ा? किसका पथ चुप जोहता? निष्क्रिय, मौन, हताश है. या दिलजला निराश है? जलती आग पलाश
 
दिव्य नर्मदा divya narmada
Jun 07 2010 08:44 PM
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मुक्तिका: .....डरे रहे. --संजीव 'सलिल'

मुक्तिका .....डरे रहे. संजीव 'सलिल' * हम डरे-डरे रहे. तुम डरे-डरे रहे. दूरियों को दूर कर निडर हुए, खरे रहे. हौसलों के वृक्ष पा लगन-जल हरे रहे. रिक्त हुए जोड़कर बाँटकर भरे रहे. नष्ट हुए व्यर्थ वे जो महज धरे रहे. निज हितों में लीन जो समझिये मरे रहे. सार्थक
 
दिव्य नर्मदा divya narmada
May 30 2010 03:34 PM
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इस आवेदन पत्र के प्रारूप का प्रिंट निकालिये

कार्यालय भारतीय-ब्लागर संघ , पता:द्वारा ब्लागवाणी,चिट्ठाजगत,क्रमांक/ /2010 दिनांक:- प्रतिभारतीय जनगणना कार्यालयनई-दिल्ली, {जहां कुछ दिन पहले ब्लागर मीट हुई थी } द्वारा:- अविनाश वाचस्पति,खुशदीप जी, अजय झा जी मान्यवर भारतीय ब्लागर आपसे अपेक्षा करतें हैं कि
 
गिरीश बिल्लोरे
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ज़टिल और कुंठित पोस्ट से ब्लाग अरुचिकर हो जाते हैं

ब्लाग को पढ़ने लायक बनाना एक अहम सवाल है ज़रूरी है कि ब्लाग-पोस्ट लिखने के पहले विषय का चुनाव सही, समयानुकूल, सार्थक हो ..... ब्लाग लेखकों के अलावा कम लोग ही पोस्ट पढ़ने को आतें हैं. आते ही अगर वे किसी विषय में प्रवेश करतें हैं तो उनको उसके [पोस्ट के ]
 
गिरीश बिल्लोरे
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धर्म सियासत और सौन्दर्य अलावा भी विषय हैं ब्लाग के लिये

' ज़टिल और कुंठित पोस्ट का ब्लाग पर प्रभाव सदैव ही होता है. यहां आज़ बात आरम्भ करना चाहूंगा महत्वपूर्ण टिप्पणी को यथा रूप प्रस्तुत कर रहा हूं हिमांशु जी , -आपका सुझाव सीमित रूप में लागू है। अगली कड़ी में शायद कुछ और पते की बात मिले, मगर इस बारे में तो यही
 
गिरीश बिल्लोरे
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विशेष लेख: हिंदी की प्रासंगिकता और चिट्ठाकार -संजीव वर्मा 'सलिल

विशेष लेख: हिंदी की प्रासंगिकता और चिट्ठाकार संजीव वर्मा 'सलिल' हिंदी जनवाणी तो हमेशा से है...समय इसे जगवाणी बनाता जा रहा है. जैसे-जिसे भारतीय विश्व में फ़ैल रहे हैं वे अधकचरी ही सही हिन्दी भी ले जा रहे हैं. हिंदी में संस्कृत, फ़ारसी, अरबी, उर्दू , अन्य
 
दिव्य नर्मदा divya narmada
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मुक्तक : माँ के प्रति प्रणतांजलि: संजीव 'सलिल'

माँ के प्रति प्रणतांजलि: तन पुलकित, मन सुरभित करतीं, माँ की सुधियाँ पुरवाई सी. दोहा गीत गजल कुण्डलिनी, मुक्तक छप्पय रूबाई सी.. मन को हुलसित-पुलकित करतीं, यादें 'सलिल' डुबातीं दुख में- होरी गारी बन्ना बन्नी, सोहर चैती शहनाई सी.. * मानस पट पर अंकित नित नव
 
दिव्य नर्मदा divya narmada
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ब्लाग जगत ने कहा -“चिरायु भव:अक्षय कात्यानी “

अक्षय कात्यानी अविनाश वाचस्पति जी ,सीमा गुप्ता जी,मनोज कुमार शर्मा,बी एस पाबला जी से लेकर कई ज्ञात-अज्ञात ब्लागर्स ने जब सहयोग का हाथ बढ़ाया तो अक्षय कात्यानि के पिता श्री सुधीर कात्यानी का मन कृतज्ञता से भर गया कल शाम तक बिना अपने आप को प्रकाशन में लाये
 
गिरीश बिल्लोरे
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नव गीत: समर ठन गया... --संजीव 'सलिल'

* तुमने दंड दिया था मुझको, लेकिन वह वरदान बन गया. दैव दिया जब पुरस्कार तो, अपनों से ही समर ठन गया... * तुम लक्ष्मी के रहे पुजारी, मुझे शारदा-पूजन भाया. तुम हर अवसर रहे भुनाते, मैंने दामन स्वच्छ बचाया. चाह तुम्हारी हुई न पूरी, दे-दे तुमको थका विधाता. हाथ
 
दिव्य नर्मदा divya narmada
May 01 2010 08:40 PM
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हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग की ताकत को कम करके आंकना बिल्‍कुल ठीक नहीं है

हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग की ताकत को कम करके आंकना बिल्‍कुल ठीक नहीं है 'जीतेन्द्र चौधरी', 'चौपटस्वामी', 'अनूप शुक्ल (फुरसतिया)', 'भड़ास' की बातें
 
अविनाश वाचस्पति
Apr 27 2010 11:20 PM
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गीत: .....चेंज चाहते संजीव 'सलिल'

* परिवर्तन तज, चेंज चाहते युवा नहीं हैं यंग अनेक..... * मठा-महेरी बिसर गए हैं, गुझिया-घेवर से हो दूर.. नूडल-डूडल के दीवाने- पाले कब्ज़ हुए बेनूर.. लस्सी अमरस शरबत पन्हा, जलजीरा की चाह नहीं. ड्रिंक सोफ्ट या कोल्ड हाथ में, घातक है परवाह नहीं. रोती छोडो,
 
दिव्य नर्मदा divya narmada
Apr 27 2010 10:14 PM
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गीत हे समय के देवता! ... ---आचार्य संजीव 'सलिल'

हे समय के देवता! संजीव 'सलिल' हे समय के देवता! गर दे सको वरदान दो तुम... * श्वास जब तक चल रही है, आस जब तक पल रही है, अमावस का चीरकर तम- प्राण-बाती जल रही है. तब तलक रवि-शशि सदृश हम रौशनी दें तनिक जग को. ठोकरों से पग न हारें- करें ज्योतित नित्य मग को. दे
 
दिव्य नर्मदा divya narmada
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सरस्वती वंदना: अर्चना चावजी ,इन्दौर के स्वर में

मित्रो पेश सरस्वति वंदना अर्चना जी के स्वरों में
 
गिरीश बिल्लोरे
Apr 25 2010 01:23 PM
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मुक्तक: संजीव 'सलिल'

मन मंदिर में जो बसा, उसको भी पहचान. जग कहता भगवान पर वह भी है इंसान.. जो खुद सब में देखता है ईश्वर का अंश- दाना है वह ही 'सलिल' शेष सभी नादान.. ************ संबंधों के अनुबंधों में ही जीवन का सार है. राधा से,मीरां से पूछो, सार भाव-व्यापार है.. साया छोडे
 
दिव्य नर्मदा divya narmada
Apr 21 2010 01:57 AM
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दारू पीने वाले के कुछ मूल मंत्र

जी हां आज पेश किया जा रहा है दारू पीने वाले के कुछ मूल मंत्र , और ये अब साबित हो चुका है कि ये वो ब्रह्म वाक्य हैं जो बेवडे मूड में आने के बाद अवश्य ही प्रयोग करते हैं ।१. तू मेरा भाई है ....२. गाडी आज मैं चलाऊंगा ....३.मैं तेरी दिल से इज्जत करता हूं
 
अजय कुमार झा
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ये जाने अनजाने छायाकार

>>दीपक 'मशाल'
बहुत दुःख भी है और तनिक संतोष भी कि जल्दी ही हकीकत से रु-ब-रु हो गया.. बहुत कुछ सोच कर और उम्मीदें लेकर आया था ब्लॉगजगत में लेकिन.... खैर छोड़िये यहाँ बात करते हैं पहले अहसास की.. लेकिन इतना फिर भी कहना चाहूंगा कि इस चापलूसी लोक(ब्लॉगजगत) में अच्छे इंसां
 
दीपक 'मशाल'
Apr 07 2010 06:52 PM
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दिल के दोहे: संजीव वर्मा 'सलिल'

दिल ने दिल में झाँककर, दिल का कर दीदार. दिलवर से हँसकर कहा- 'मैं कुरबां सरकार'. दिल ने दिल को दिल दिया, दिल में दिल को देख. दिल ही दिल में दिल करे, दिल दिलवर का लेख. दिल से दिल मिल गया तो, शीघ्र बढ़ गयी प्रीत. बिल देखा दिल फट गया, लगती प्रीत कुरीत.. बेदिल
 
दिव्य नर्मदा divya narmada
Apr 05 2010 10:51 PM
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नेता, अभिनेता और प्रचार विक्रेता

जब हम तीनों बहन भाई छोटे थे, तब आम बच्चों की तरह हमको भी टीवी देखने का बहुत शौक था, मुझे सबसे ज्यादा शौक था। मेरे कारण ही घर में कोई टीवी न टिक सका, मैं उसके कान (चैनल ट्यूनर) मोड़ मोड़कर खराब कर देता था। पिता को अक्सर सात बजे वाली क्षेत्रिय ख़बरें सुनी
Apr 01 2010 08:25 PM
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काव्य रचना: मुस्कान --संजीव 'सलिल'

काव्य रचना: मुस्कान संजीव 'सलिल' जिस चेहरे पर हो मुस्कान, वह लगता हमको रस-खान.. अधर हँसें तो लगता है- हैं रस-लीन किशन भगवान.. आँखें हँसती तो दिखते - उनमें छिपे राम गुणवान.. उमा, रमा, शारदा लगें रस-निधि कोई नहीं अनजान.. 'सलिल' रस कलश है जीवन सुख देकर बन
 
दिव्य नर्मदा divya narmada
Mar 31 2010 10:33 PM
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पहेली का ज़वाब :किसी ने नहीं दिया

"मुकुल और महाशक्ति ": इस पहेली का ज़वाब :मिलेगा ज़नाब ? इस लिंक को क्लिक कीजिये और गौर से देखिये फ़िर बताइये एक गलती हुई थी हमारे प्रिय एग्रीगेटर ”ब्लाग वाणी” से हमने एक सवाल किया था जो समीर जी ओर वकील साब भी हल न कर सके इस प्रतियोगिता में तीन विजेता होने
 
गिरीश बिल्लोरे
Mar 31 2010 11:08 AM
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कविता: कवि-मनीषी -आचार्य श्यामलाल उपाध्याय

साधना संकल्प करने को उजागर औ' प्रसारण मनुजता के भाव विश्व-कायाकल्प का बन सजग प्रहरी हरण को शिव से इतर संताप मैं कवि-मनीषी. अहं ईर्ष्या जल्पना के तीक्ष्ण खर-शर-विद्ध लोक के श्रृंगार से अति दूर बुद्धि के व्यभिचार से ले दंभ भर उर रह गया संकुचित करतल
 
दिव्य नर्मदा divya narmada
Mar 29 2010 10:08 AM
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एक दर्द बयां करती टिप्पणी

सेG.N. J-puri कोgirishbillore@gmail.com दिनांक२८ मार्च २०१० ४:५० PM विषय[भारत-ब्रिगेड] जबलपुर के बारे में पूछ कर बहुत हत प्रभ किया पाबला ... पर नई टिप्पणी. इसके द्वारा मेल किया गयाblogger.bounces.google.com के द्वारा हस्ताक्षरितblogger.com विवरण छिपाएं
 
गिरीश बिल्लोरे
Mar 28 2010 12:32 PM
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बावरे-फकीरा रिलीज़ 14 मार्च को एक बरस पूरा हुआ सव्यसाची कला ग्रुप द्वारा नए अगले एलबम हेतु सुरों की तलाश जारी

बावरे फकीरा लांचिंग के एक बरस पूर्ण होने पर समारोह की याद ताज़ा करतीं ये तस्वीरें सव्यसाची कला ग्रुप को उत्साहित और प्रेरित कर रही है पिछले बरस की यादें जो बावरे फकीरा की लांचिंग 14 मार्च 2009 से बाबस्ता हैं हम कर रहें हैं नए एलबम की तैयारी आप भी कीजिये
 
गिरीश बिल्लोरे
Mar 28 2010 04:14 AM
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जबलपुर के बारे में पूछ कर बहुत हत प्रभ किया पाबला जी ने

ज्ञानरंजन भिलाई से ब्लॉग-जगत में मशहूर ब्लॉगर मित्र श्री बी एस पाबला जी ने आज मुझे तब हतप्रभ कर दिया जब उन्हौने जबलपुर शहर के बारे में चर्चा की. सामान्य रूप से जबलपुर यानी jabalpur या पुराने लोग jabblpore के नाम से जानते. हैं साहित्यकार मोहन शशि आमादा
 
गिरीश बिल्लोरे
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राम नवमी पर विशेष: श्री राम भजन:बाजे अवध बधैया --स्व. शांति देवी वर्मा

बाजे अवध बधैया बाजे अवध बधैया, हाँ-हाँ बाजे अवध बधैया... मोद मगन नर-नारी नाचें, नाचें तीनों मैया. हाँ-हाँ नाचें तीनों मैया, बाजे अवध बधैया.. मातु कौशल्या जनें रामजी, दानव मार भगैया हाँ-हाँ दानव मार भगैया, बाजे अवध बधैया... मातु कैकेई जाए भरत जी, भारत भार
 
दिव्य नर्मदा divya narmada
Mar 23 2010 08:33 PM
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खुला ख़त अनिल पुसदकर जी के नाम किन्तु इससे उनका कोई लेना देना नहीं जो........व्यक्तिगत विचारों को सर्वोपरि मानते हैं......?

अनिल पुसदकरजी सादर अभिवादन आपके ब्लॉग 'अमीर-धरती ........' पर प्रकाशित आलेख 'लड़कियां मोबाईल का प्लान नही है टाटा सेठ जो चाहे रोज़ बदल लो! ' पर टिप्पणी कर मेरे अभिन्न मित्र राज़-भाटिया जी ने टिप्पणी कर के आफत मोल ले ली है आपके ब्लॉग पर. दर असल भाटिया जी
 
गिरीश बिल्लोरे ''पॉडकास्टर''
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निमाड़ी दोहा: संजीव 'सलिल'

पाठक बंधुओं! वन्दे मातरम. मैं मूलतः खड़ी बोली हिन्दीभाषी हूँ. देश के विविध भागों में हिन्दी विविध रूपों में बोली जाती है. मेरा प्रयास उन रूपों को समझकर उनमें लिख, पढ़ कर बोलने योग्य होना है. आज मैं आपके साथ निमाड़ी के दोहे बाँटने आया हूँ. इन्हें पढ़ें और
 
दिव्य नर्मदा divya narmada
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ब्लॉग में अपार संभावनाएं हैं : कनिष्क कश्यप

ब्लॉगप्रहरी के कल्पनाकार कनिष्क कश्यप से हुई भेंट वार्ता सादर सुधि श्रोताओं के लिए सादर प्रस्तुत है ''संवाद एवं विमर्श'' पर इधर पेश है .
 
गिरीश बिल्लोरे ''पॉडकास्टर''
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जबलपुर में चिट्ठा चर्चा पर दोहे: ---'सलिल'

जबलपुर में चिट्ठा चर्चा पर दोहे: चिट्ठाकारों को 'सलिल', दे दोहा उपहार. मना रहा- बदलाव का, हो चिट्ठा औज़ार.. नेह नरमदा से मिली, विहँस गोमती आज. संस्कारधानी अवध, आया- हो शुभ काज.. 'डूबे जी' को निकाले, जो वह करे 'बवाल'. किस लय में 'किसलय' रहे, पूछे कौन
 
दिव्य नर्मदा divya narmada
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वरिष्ठ कवि प्रो. श्यामलाल उपाध्याय, मंत्री हिंदी वांग्मय पीठ कोलकाता की कवितायेँ--

वरिष्ठ कवि प्रो. श्यामलाल उपाध्याय, मंत्री हिंदी वांग्मय पीठ कोलकाता की कवितायेँ-- १. तितीर्षा भाव की प्रत्यंच धर कार्मुक सजीला कर्म का ज्ञान का शर सिद्ध हो अनिरुद्ध हो पथ व्यक्ति का. डूब जाएँ सिन्धु में सागर-महासागर सभी पर तितीर्षा लोक जीवन की शमित होगी
 
दिव्य नर्मदा divya narmada