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कथा-गीत: मैं बूढा बरगद हूँ यारों... ---संजीव 'सलिल'
कथा-गीत:
मैं बूढा बरगद हूँ यारों...
संजीव 'सलिल' * *
मैं बूढा बरगद हूँ यारों... है याद कभी मैं अंकुर था. दो पल्लव लिए लजाता था. ऊँचे वृक्षों को देख-देख-
मैं खुद पर ही शर्माता था. धीरे-धीरे मैं बड़ा हुआ.
शाखें फैलीं, पंछी आये.
कुछ जल्दी छोड़ गए मुझको-
कुछ
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Jun 17 2010 12:36 AM


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