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शब्‍दों का सफ़र

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17 Jun 2010
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गजनी, डीजी खान फिर गाजीपुर

“ अगर “अली” को “गढ़” से, “गाजी” को “पुर” से और “दिलदार” को “नगर” से अलग कर दिया जाएगा तो बस्तियां वीरान और बेनाम हो जाएंगी और अगर “इमाम” को “बाड़े” से निकाल दिया गया तो मोहर्रम कैसे होगा ! ” संबंधित कड़िया-1.गजनी, गजनवी और गजराज.2.माई नेमिज खान बहादुर
 
अजित वडनेरकर
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गजनी, गजनवी और गजराज

मुहम्मद गोरी जो खुद भी सेलजुक तुर्क था यानी वह महान हिन्दू राजा गज के नाम पर चले तुर्कों के एक वंश का प्रतिनिधि था जो नए धर्म की खातिर अपनी वंश परम्परा भूलकर, अपनों की ही धर्म, संस्कृति और सभ्यता को नष्ट-भ्रष्ट करने के लिए बार बार पसीना बहाता रहा… भारत
 
अजित वडनेरकर
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होलटाईमरी की उलटबांसियां [बकलमखुद-139]

…भूमिगत पार्टी सीपीआईएमएल उस समय अपने ज्यादातर राजनीतिक काम इंडियन पीपुल्स फ्रंट (आईपीएफ) के जरिए करती थी।  आरा शहर में आईपीएफ के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शराब के दो ठेकों के मालिक हैं और पार्टी का पिछला जुझारू संघर्ष एक गुंडे के हमले से उनकी दुकान
 
अजित वडनेरकर
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हाल कैसा है जनाब का!!

भा षा लगातार परिवर्तित होती है। यह बदलाव एक भाषा पर दूसरी भाषा के शब्दों की आमद के जरिए भी होता है और प्रभावशाली भाषा के भाषिक संस्कार अपना लेने से भी होता है। इसके अंतर्गत किसी एक भाषा बोली पर लम्बे समय तक सम्पर्क होने की वजह से एक भाषा के व्याकरण नियम
 
अजित वडनेरकर
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प्रस्ताव और स्तुति

किसी योजना की शुरुआत प्रस्ताव रखने से होती है अर्थात कार्ययोजना का परिचय, उसकी तारीफ ही प्रस्ताव है। यूं आप्टे कोश के मुताबिक प्रस्ताव का अर्थ है प्रवचन का प्रयोजन। किसी योजना अथवा कार्यक्रम के परिचय के लिए हिन्दी में प्रस्तावना, भूमिका या आमुख जैसे शब्द
 
अजित वडनेरकर
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प्रकांड, गैंडा और सरकंडा

संस्कृत की कण् धातु में निहित हिस्सा, शाखा, भाग, लघुतम अंश जैसे अर्थों से ही इसमें अध्याय या प्रसंग का भाव विकसित हुआ। घास प्रजाति के पौधे के लिए भी कांड शब्द प्रचलित हुआ जिसमें बांस से लेकर गन्ना भी शामिल है। किसी वृक्ष की शाखा, डाली अथवा तने को भी कांड
 
अजित वडनेरकर
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आरा में वह ‘पहली’ रात [बकलमखुद-138]

…धमकी देने वाले वाले उस रात ठीक १ बजे सचमुच वहाँ आये थे। उन्होंने गेट पर फायरिंग की, दरवाजा तोड़ा और टारगेट की हुई लड़की को बाहर तक खींच लाए। पूरी बिल्डिंग में किसी की हिम्मत नहीं पडी़ कि उनसे पंगा ले। तब ऊपर से हमारे साथी गया जी ने कट्टे से फायर मारा और
 
अजित वडनेरकर
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जरूर कोई ‘कांड’ हुआ है…

हि न्दी में कांड (काण्ड) शब्द खूब प्रचलित है। कांड का अर्थ है कोई घटना। आमतौर पर इसके साथ अप्रिय, अशुभ प्रसंग का संदर्भ जुड़ा है। कांड से काणा की भी रिश्तेदारी है। ऐसा कोई प्रकरण जो अतीत से चला आ रहा है, कांड के दायरे में आता है। मीडिया का भी यह प्रिय
 
अजित वडनेरकर
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काना राजा और काक दृष्टि

ए क आंख वाले व्यक्ति को परिनिष्ठित हिन्दी में एकाक्ष या एकाक्षी कहते हैं। जिस तरह से दृष्टिहीन को सौजन्यतावश सूरदास की संज्ञा दी जाती है वैसे ही एक आंखवालों को समदर्शी भी कहा जाता है। समदर्शी अर्थात जिसकी निगाह में सब समान हैं । इस रूप में समदर्शी तो
 
अजित वडनेरकर
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[नामपुराण-13] श्रोता से श्रोत्रिय तक…

... श्रोता से नजदीकी रिश्ता है श्रोत्रिय का। प्राचीनकाल में ज्ञानार्जन का जरिया श्रौतकर्म अर्थात श्रवण, मनन और चिन्तन ही था ... ब्राह्मणों के चिर-परिचित उपनामों या सरनेम में श्रोत्रिय का शुमार भी है। विद्याव्यसन और अध्यापन से ही जुड़ा हुआ शब्द है
 
अजित वडनेरकर
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आलूबड़ा और बड़ का पेड़…

भा रतीय शैली के व्यंजनों में एक बेहद आम शब्द है-बड़ा। उत्तर भारत में यह बड़ा के रूप में प्रचलित है तो दक्षिण भारत में यह वड़ा कहलाता है। इसके वडा और वड़ी रूप भी प्रचलित हैं। इस नाम वाले कितने ही खाद्य पदार्थ प्रचलित हैं मसलन मिर्चीबड़ा, भाजीबड़ा,
 
अजित वडनेरकर
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कुंदन जैसी आवाज वाले सहगल

... इस बार पुस्तक चर्चा कर रहे हैं सोलह वर्षीय अबीर जो भोपाल के केन्द्रीय विद्यालय में 12वीं कक्षा के छात्र हैं। इतिहास, भूगोल में बहुत दिलचस्पी रखते हैं। मानचित्र-पर्यटन के शौकीन हैं। पिछले साल भी उन्होंने शब्दों का सफर के लिए पुस्तक समीक्षा की थी। इस
 
अजित वडनेरकर
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उपाय, निरुपाय और जूतमपैजार

आज के दौर में निरुपाय लोग शत्रु के साथ सरेआम जूतमपैजार पर उतर आते हैं। अब कौटिल्य की कूटनीति तो राजा-रईसों के लिए थी, गरीब मजलूमों का उपायचतुष्टय तो हर रोज बदलता है। त रकीब अथवा युक्ति के अर्थ में उपाय शब्द भी हिन्दी में खूब प्रचलित है। उपाय बना है
 
अजित वडनेरकर
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ज़र्रा ए नाचीज़ का कुछ तो भी बयान...

किं चित, थोड़ा या अत्यल्प के अर्थ में हिन्दी में जरा शब्द सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। जरा सी बात, जरा सी चीज या जरा सा काम जैसे वाक्यांशों से साफ है कि बोलचाल में इस जरा का बहुत ज्यादा महत्व है। हिन्दी में किंचित, क्वचित की तुलना में सर्वाधिक लोकप्रिय
 
अजित वडनेरकर
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इनकी रामायण, उनका पारायण!!!

भा रतीय मनीषा का सबसे महत्वपूर्ण तत्व है आस्था जिसकी वजह से उसने ज्ञान के विविध आयामों को छुआ है। समष्टि के प्रति आस्था के भाव ने न सिर्फ सृष्टि के स्थूल रूप को अनुभव किया बल्कि इस स्थूल भाव में भी जीवन के स्पंदन का चिंतन किया। इस विराट विश्व चिंतन का
 
अजित वडनेरकर
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हिन्दी का संस्कृतीकरण-2

सुप्रसिद्ध प्रगतिशील आलोचक-विचारक डॉ रामविलास शर्मा भारत की भाषा समस्या पर आधी सदी तक लगातार लिखते रहे। उनके मुताबिक देश की जातीय समस्या का ही एक हिस्सा है भाषा समस्या। यहां पेश है दो भागों में उनका एक महत्वपूर्ण आलेख जो उन्होंने  1948 में लिखा था।
 
अजित वडनेरकर
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हिन्दी का संस्कृतीकरण

सुप्रसिद्ध प्रगतिशील आलोचक-विचारक डॉ रामविलास शर्मा भारत की भाषा समस्या पर आधी सदी तक लगातार लिखते रहे। उनके मुताबिक देश की जातीय समस्या का ही एक हिस्सा है भाषा समस्या। यहां पेश है तीन भागों में उनका एक महत्वपूर्ण आलेख जो उन्होंने  1948 में लिखा था।
 
अजित वडनेरकर
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गरारे, खर्राटे, गार्गल और गर्ग

पिछली कड़ी-अजगर करे न चाकरी…  खां सी होने या गला खराब होने की स्थिति में अक्सर गरारा करने की नौबत आती है। गौरतलब है कि गरारा के लिए अंग्रेजी में भी इससे मिलता जुलता शब्द है गार्गल जिसका अर्थ है कुल्ला करना, गरारे करना आदि। गरारा यानी गर्म पानी के
 
अजित वडनेरकर
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अजगर करे न चाकरी…

अ जगर करे न चाकरी, पंछी करे न काम। दास मलूका कह गए, सबके दाता राम।। इस दोहे में अजगर निरीह जंतुओं को भकोसने की वजह से नहीं बल्कि अपने निकम्मेपन की वजह से बदनाम हो रहा है। सर्प प्रजाति के इस विशालकाय जंतु का अजगर नाम हिन्दी में खूब लोकप्रिय है। मलूकदास ने
 
अजित वडनेरकर
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जनमत के बंद होने की भूमिका[बकलमखुद-137]

…चुनाव खत्म होने के बाद पटना में वापस जनमत के डेरे पर पहुंचकर मैंने रामजी भाई से कहा कि जनमत में अब मेरा मन नहीं लग रहा है और अब मैं आरा जाकर पार्टी का काम करना चाहता हूं। मेरी तरफ से यह एक किस्म का बिट्रेयल, एक तरह की गद्दारी थी… चंद्रभूषण हिन्दी के
 
अजित वडनेरकर
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अंतर्धान हुआ अंतर्यामी…

पिछली कड़ी-अंदरखाने की बात और भितरघात सं स्कृत का अंतर शब्द बड़ा करामाती है। इससे बने अंतर्धान और अंतर्यामी हिन्दी में खूब इस्तेमाल होते हैं। इन दोनों शब्दों में अंतर की महिमा झलक रही है। इन पर बात करने से पहले इस अंतर को कुछ और जान लें जिसका अर्थ मूलतः
 
अजित वडनेरकर
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अंदरखाने की बात और भितरघात

बोलचाल में अंदरखाना शब्द का खूब प्रयोग होता है जिसका अर्थ है भीतरी कक्ष। हालांकि इस अर्थ में इसका इस्तेमाल नहीं होता बल्कि सिर्फ भीतरी या आंतरिक या अंदर की जैसे भाव ही अंदरखाना में निहित हैं। अंदरखाना में मुहावरे की अर्थवत्ता है जैसे अंदरखाने की बात।
 
अजित वडनेरकर
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कहो कटुआप्रेमी, आड़ में क्यों हो?[बकलमखुद-136]

…दोपहर बाद से अखबारों के दफ्तरों में संख्याओं का खेल शुरू हुआ। अयोध्या में मुल्ला मुलायम की चलाई गोलियों से कितने लोग मारे गए। मैंने खुद नहीं देखा, लेकिन बाद में कवि और संपादक वीरेन डंगवाल से उस दिन के किस्से सुने। … चंद्रभूषण हिन्दी के वरिष्ठ पत्रकार
 
अजित वडनेरकर
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शुद्धतावादियों, आंखे खोलो…

भा षायी शुद्धतावाद के समर्थकों को इस बात का गुमान भी न होगा कि हिन्दी में बेरोजगार शब्द का कोई प्रचलित विकल्प ही नहीं है। ऐसे अनेक शब्द हैं जो अरबी, फारसी, तुर्की, पुर्तगाली, अंग्रेजी आदि भाषाओं से आकर हिन्दी में घुलमिल गए हैं और हम उनके साथ देशी बोलियों
 
अजित वडनेरकर
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“शहीद” का शहादतनामा

हि न्दी की विकास यात्रा के दौरान सैकड़ों वर्षों में अरबी-फारसी के हजारों शब्द दाखिल होते रहे हैं जो अब बोलचाल की भाषा में इस कदर घुलमिल गए हैं कि उनके विदेशज होने का आभास भी नहीं होता। शहीद या शहादत भी ऐसे ही शब्द हैं। किसी पवित्र उद्धेश्य की खातिर
 
अजित वडनेरकर
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नकलनवीस के नैन-नक्श

अरबी में नक्ल अर्थ स्थानान्तरण भी है। गौर करें कि किसी दस्तावेज की अनुकृति बनाना दरअसल मूल कृति की छवि का स्थानान्तरण ही है। अ रबी का नक़ल शब्द अनुकरण के विकल्प के तौर पर हिन्दी में कुछ इस क़दर प्रचलित हुआ कि अब नकल शब्द के लिए कोई दूसरा शब्द ध्यान ही
 
अजित वडनेरकर
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नकदी, नकबजन और नक्कारा

लो गों की भाव-भंगिमाओं को हाव-भाव के साथ प्रस्तुत करने को नकल करना या नकल उतारना कहते हैं। ऐसा करनेवाला व्यक्ति नक़लची या नक्काल कहलाता है। नकलची में ची तुर्की-फारसी का प्रत्यय है और नक्काल में आल प्रत्यय हिन्दी का लगा है। कुछ बदले हुए अर्थों में इसे
 
अजित वडनेरकर
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बस्ती बस्ती, कटरा कटरा[आश्रय-29]

... ताजा कड़ियां- कसूर किसका, कसूरवार कौन? [आश्रय-26].सब ठाठ धरा रह जाएगा…[आश्रय-25] पिट्सबर्ग से रामू का पुरवा तक…[आश्रय-24] शहर का सपना और शहर में खेत रहना [आश्रय-23] क़स्बे का कसाई और क़स्साब [आश्रय-22] मोहल्ले में हल्ला [आश्रय-21] कारवां में वैन और
 
अजित वडनेरकर
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अपना हाथ जगन्नाथ…यानी महिमा हाथ की

भा रतीय मनीषियों ने हाथों का प्रतीकार्थ और उसका आध्यात्मिक महत्व बहुत पहले जान लिया था इसीलिए "प्रभाते करदर्शनम्" जैसे आत्मानुशासन की व्यवस्था की। वे हाथ, जो हमारे भाग्यविधाता हैं, उनकी स्तुति दर्शनमात्र से हो जाती है। मनुष्य के हाथों में ही
 
अजित वडनेरकर
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बिकट रूप धरि….

विकट शब्द का मुहावरेदार प्रयोग भी बोलचाल में होता है जैसे विकट आदमी या विकट मनुष्य। क ठिन या मुश्किल के अर्थ मे हिन्दी में विकट शब्द का प्रयोग होता है। मूलतः विकट में कठिनाई कम और विस्तार ज्यादा है अर्थात विकट शब्द गुणवाची कम और परिमाणवाची ज्यादा है।
 
अजित वडनेरकर
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भुजबल और बाहुबली का बांहें चढ़ाना..

  हि न्दी में बांह चढ़ाना मुहावरा खूब चलता है जिसका अर्थ है ताव में आना, आमना-सामना करने की तैयारी, किसी को चुनौती देना या किसी की चुनौती स्वीकार करना। हिन्दी में जो बांह शब्द है वह मूलतः इंडो-ईरानी भाषा परिवार से आ रहा है। बांह का एक रूप बाज़ू
 
अजित वडनेरकर
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सैनिक सन्यासियों का स्वरूप/आस्था का अखाड़ा-2

देशभर में दशनामियों की कुल 52 मढ़ियां हैं जो शंकराचार्यों की चारों पीठों द्वारा नियंत्रित हैं। सर्वाधिक 27 मठिकाएं गिरि दशनामियों की है शंकराचार्य ने दशनामी परम्परा को महाम्नाय के अनुशासन से बांधा। आम्नाय का अर्थ है रीति, वैदिक ज्ञान, पुण्य-प्रेरित
 
अजित वडनेरकर
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[नामपुराण-12] वाचस्पतिजी के संबंधी हैं वाजपेयीजी

पिछली कड़ियां-1.नाम में क्या रखा है 2.सिन्धु से इंडिया और वेस्ट इंडीज़ तक 3.हरिद्वार, दिल्लीगेट और हाथीपोल 4. एक घटिया सी शब्द-चर्चा 5.सावधानी हटी, दुर्घटना घटी 6.नेहरू, झुमरीतलैया, कोतवाल, नैनीताल 7.दुबे-चौबे, ओझा-बैगा और त्रिपाठी-तिवारी 8.यजमान का जश्न
 
अजित वडनेरकर
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[नामपुराण-11] घुड़दौड़ वाले वाजपेयीजी

दे वीप्रसाद चट्टोपाध्याय अपनी पुस्तक लोकायत में वाजपेय का रिश्ता अन्न और पेय से जोड़ते हैं। वाजपेय यज्ञ सोमयज्ञ की श्रेणी में आता है। अपने सरल रूप में वाजपेय जैसे अनुष्ठान का रिश्ता अन्न और पेय से ही है। अन्न उत्पादन और कृषि उत्पादन कार्यों के संदर्भ में
 
अजित वडनेरकर
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आस्था का अखाड़ा और दशनामी-1

  उ त्सवों और पर्वों के लिए ख्यात भारतीय संस्कृति में चार माह तक चलनेवाला कुम्भ पर्व सदियों से भक्ति और आस्था का परम प्रतीक बना हुआ है। देश के चार प्रमुख तीर्थों पर बारह वर्ष के अंतराल पर यह विराट आयोजन होता है। प्राचीनकाल में देश के करोड़ों
 
अजित वडनेरकर
May 02 2010 03:29 AM
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[माइक्रोपोस्ट] स्वाद चखाना, स्वाद बिगड़ना

संबंधित कडियां-1.ज़ाइका, ऊंट और मज़ाक़.2.मज़ाक़ और मज़ेदारियां दु निया में जायका किसे पसंद नहीं होता। जायकेदार भोजन, जायकेदार बातें। जायका यानी लज्जत। लज्जत यानी  मजा और मजा यानी स्वाद। किसी वस्तु अथवा विचार का जब सार हासिल हो जाता है तो उसी बिन्दु
 
अजित वडनेरकर
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[नामपुराण-10] वाजपेयीजी की गति, जोश और शक्ति

ब्राह्मणों के चिर-परिचित उपनामों या कुल गोत्रों में एक वाजपेयी भी है। इसे बाजपेई , बाजपायी भी लिखा जाता है किन्तु सही रूप वाजपेयी ही है। वाजपेयी उपनाम भी ज्ञान परम्परा से जुड़ा है और इसका रिश्ता वैदिक संस्कृति के एक प्रमुख अनुष्ठान वाजपेय यज्ञ से है जो
 
अजित वडनेरकर
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[नामपुराण-9] पुरोहित का रुतबा, जादूगर की माया

पिछली कड़ियां-1.नाम में क्या रखा है 2.सिन्धु से इंडिया और वेस्ट इंडीज़ तक 3.हरिद्वार, दिल्लीगेट और हाथीपोल 4. एक घटिया सी शब्द-चर्चा 5.सावधानी हटी, दुर्घटना घटी 6.नेहरू, झुमरीतलैया, कोतवाल, नैनीताल 7.दुबे-चौबे, ओझा-बैगा और त्रिपाठी-तिवारी 8.यजमान का जश्न
 
अजित वडनेरकर
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[नाम पुराण-8] यजमान का जश्न और याज्ञिक

प्रा चीनकाल में ज्ञान परम्परा से जुड़ी बातें धर्म के दायरे में आ जाती थीं। अधिकांशतः यह होता रहा कि धर्म-कर्म की जानकारियां ही किसी व्यक्ति के ज्ञान का पैमाना होती थीं। प्राकृतिक शक्तियों को ही मनुष्य ने विकास के प्रारम्भिक चरण से आजतक सर्वोपरि माना।
 
अजित वडनेरकर
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रासलीला और रहस का रहस्य

प्रा चीन संस्कृति में प्रेम की उदात्त अभिव्यक्ति होती थी। कृष्ण की रासलीला इसका प्रतीक है। भक्तिकाव्य में रासलीला शब्द का खूब प्रयोग हुआ है। दरअसल रास एक कलाविधा है। प्रेम और आनंद की उत्कट अभिव्यक्ति के लिए कृष्ण की उदात्त प्रेमलीलाओं का भावाभिनय ही
 
अजित वडनेरकर
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