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अंत की शुरुआत
१वक्त के साथ साथखोते जाते हैं सपने.बेचकर आशायें,खरीद लिये जाते हैं अनुभव.लड़का ठहर जाता हैआदमी होने के बीच में कहीं.और लड़की बन जाती है औरतऔरत हो जाने के बहुत पहले.आशाओं को बेच खरीदा गया अनुभवरहता है ताकता, मूक बधिर सा.२एक टुकडा जीवन में,सच के दो
May 20 2010 02:41 AM


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