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मेरी कलम से

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17 Jun 2010
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श्याम और लव देश

विक्रम संवत् की दसवीं-ग्यारहवीं शती में 'थाई' (ताई : Tai) लोग चीन के नानचाओ प्रदेश से इस दक्षिण-पूर्व एशिया में आए। पश्चिम में ब्रम्ह देश से लगे प्रदेश में अपने को तेलंगी कहने वाले 'मान' लोग (हरिपुंजय राज्य) प्रभावशाली थे और कंबोज के विस्तृत राज्य में
 
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Jun 17 2010 10:49 AM
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अंग्कोर थोम व जन-जीवन

विक्रम संवत् की नौवीं शताब्दी में जयवर्मन द्वितीय के द्वारा कंबुज की पुन: प्रतिष्ठा हुयी। तब 'अंग्कोर युग' का प्रारंभ हुआ, जो कंबुज के इतिहास में 'स्वर्ण युग' कहा जाता है। इसी युग में इंद्रवर्मन ने अनेक मंदिरों एवं झीलों का निर्माण कराया। यशोवर्मन (दशम
 
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लघु भारत

कौंडिन्य के वंशजों में फूनान साम्राज्य के प्रतापी सोमवंशी राजा चंद्रवर्मा, जयवर्मा, रूद्रवर्मा आदि हुए जिन्होंने हिंदु संस्कृति की दुंदुभि बजायी। अन्य राज्यों को दूत भेजकर संबंध स्थापित किए। हिंदु जीवन के प्रचारक एवं बौद्घ भिक्षु चीन तथा दक्षिण-पूर्व
 
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दक्षिण-पूर्व एशिया

दक्षिण-पूर्व एशिया में भारतीय संस्कृति का प्रकाश जिन्होंने फैलाया, उनकी चार लहरों की चर्चा शरद हेबालकर ने अपने पुस्तक 'भारतीय संस्कृति का विश्व-संचार' (Indian Culture over the World by Sharad Hebalkar) में की है। प्रथम, भारतीय अन्वेषक तथा व्यापारी के रूप
 
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Apr 26 2010 06:33 AM
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ब्रम्ह देश

बौद्ध मन्दिर - चित्र विकिपीडिया सेब्रम्ह देश के बीच से बहती भारत की नौ पवित्र नदियों में से एक है इरावती नदी (Ayeyarwady)। इसी के पूर्वी तट पर मांडले के दक्षिण-पश्चिम में बसा पैगन नगर तथा पास में है प्राचीन विष्णु मंदिर के खंडहर। भग्न मूर्तियों के बीच
 
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अगस्त्य मुनि और हिन्दु महासागर

अगस्त्य मुनि की प्रतिमा का चित्र - विकिपीडिया के सौजन्य सेअब हिंदु महासागर के द्वीप एवं दक्षिण-पूर्व एशिया के देश। कभी अगस्ति (अगस्त्य) (Agastya) मुनि ने हिंदु महासागर का अन्वेषण किया था। इसी से आलंकारिक भाषा में कहते हैं, उन्होंने उस 'महासागर को चुल्लू
 
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चीन को भारत की देन

स्वभाव से गर्वीले और दुनिया से अलग लोगों के बीच बौद्घ मत के प्रसार की कहानी भारतीय संस्कृति की अलौकिक प्रक्रिया का उदाहरण है। सम्राट अशोक के समय हुयी तीसरी संगीति के बाद मोग्गालिपुत्र तिस्स के नेतृत्व में सारे संसार में पुनः भारतीय संस्कृति के संदेशवाहक
 
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china

प्रागैतिहासिक युग में चीन में सिया (Hsia) व शांग (Shang) वंशों का राज्य कहा जाता है। किसी बड़े कार्य को प्रारंभ करते समय पशुबलि तथा नरबलि दी जाती थी। राजघराने के व्यक्ति के शरीरांत पर उसके शव के साथ सुविधापूर्वक जीने की वस्तुएँ, भोजन तथा पेय, यहाँ तक कि
 
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मंगोलिया

गोबी मरूभूमि के सीमावर्ती मंगोलिया के घास के मैदान में रहने-विचरने वाली अश्वारोहिणी मंगोल जाति ने कभी पूर्व में चीन के बड़े भूभाग पर राज्य किया था- बीजिंग (Beijing) (पेकिंग) को राजधानी बनाकर। पश्चिम की ओर बढ़कर कश्यप सागर तक, जिसे तुर्किस्तान कहते हैं,
 
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उत्तर दिशा का रेशमी मार्ग

अब भारतीय संस्कृति के उत्तर दिशा की ओर जाने वाले रेशमी मार्ग (silk route) की चर्चा। दुर्गम पहाड़ों और अनजाने क्षेत्र से होकर भारत के पुत्रों ने पीढ़ियाँ खपाकर भारतीय संस्कृति के श्रेष्ठ जीवन का संदेश यहाँ पहुँचाया। गांधार (कंधार), कपिशा (काबुल) और उसे
 
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रोमन साम्राज्य

रोमन साम्राज्य (Roman empire) की कहानी थोड़ी-बहुत विदित है। वह सामंतों और गुलामों की कहानी है। वहाँ नरबलि भी दी जाती थी। रोमन सभ्यता में एक यवन साधु और सिंह की गाथा है, जिसे बर्नार्ड शा ने अपने प्रसिद्घ नाटक 'आंद्रकुलिस और सिंह' (Androcles and the
 
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ईसाई चर्च

उनके सभी शिष्यों ने, जो ईसा की गिरफ्तारी के समय छिप गए थे, रोमन शासक की आज्ञा से शव को दफना दिया। पर इसके तीसरे दिन लोगों ने देखा कि कब्र खाली थी। इसे ईसा का पुनर्जन्म कहा जाता है। सामी सभ्यताओं में यह विश्वास प्रचलित था कि मानव का उसी देह में पुनर्जन्म
 
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ईसा मसीह का अवतरण

यह अरब प्रायद्वीप, जहाँ संसार के दो बड़े पंथों ने जन्म लिया, प्राचीन काल में 'अर्व' (संस्कृत अर्वन्=घोड़े) देश के नाम से प्रसिद्घ था। यह घास का मैदान, जहाँ संसार के श्रेष्ठ घोड़े पाए जाते थे, धीरे-धीरे मरूभूमि में परिणत हो गया। इसी प्रकार अफ्रीका में
 
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मखदूनिया

मखदूनिया (Macedonia) के लोग भाषा एवं जाति की दृष्टि से यूनानी थे, पर सांस्कृतिक दृष्टि से पिछड़े तथा अर्द्घ-बर्बर। एक समय आया जब सिकंदर के पिता फिलिप ने, और उसकी मृत्यु के बाद सिकंदर ने सारा यूनान और एथेंस शस्त्रों के बल पर जीता। सिकंदर के विश्व-विजय के
 
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कस्सी व मितन्नी आर्य

इसके बाद मध्य-पूर्व (दक्षिण-पश्चिम) में आया एक-दूसरे से संघर्षरत साम्राज्यों का युग। एक कस्सी (कसाइट) जाति ने बैबिलोनिया पर कब्ज़ा कर लिया। कस्सी (अथवा 'कश्यप') जाति, जिसके ऊपर 'कश्यप सागर' नाम पड़ा, उसकी तटवासिनी थी। कुछ पुरातत्वज्ञ इसे आर्य जाति की
 
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सारस्वत सभ्यता का अवसान

ऐसा ही एक रहस्य सारस्वत सभ्यता के अवसान का कहा जाता है। बदलती जलवायु की दैवी आपदा ही शायद इसका कारण बनी। एक जगह सीढ़ी पर कंकाल देखकर कुछ विद्वान कल्पना करते हैं कि शत्रु द्वारा पीछा करने पर सीढ़ी से ऊपर भागने की दशा में उनका शरीरांत हुआ। परंतु उस दृश
 
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Dec 29 2009 11:40 AM
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यूनान

यूनान के इतिहास में होमर युग 'मध्य काल' के नाम से जाना जाता है। यह बृहत्‌ प्रव्रजनों (great migrations) का भी कालखंड था। यवनों ने तब एजियन सागर के द्वीपों से होते हुए अनातोलिया के दक्षिण-पश्चिमी किनारों पर उपनिवेश बसाए। इसी से इसके प्रारंभिक काल को '
 
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ईसाई चर्च द्वारा प्राचीन यरोपीय सभ्यताओं का विनाश

चित्र विकिपीडिया ईसाई पंथ के प्रवर्तन के समय से इन 'द्रविड़ों' पर घनघोर अत्याचार हुए। ईसाई पादरियों की समझ में प्राचीन द्रविड़ 'अगम' ( Ogham ) लिपि नहीं आती थी (तुलना करें संस्कृत 'आगम' एवं 'निगम')। 'द्रविड़' जंगलों में आश्रम बनाकर पठन-पाठन का कार्य
 
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योरोपीय सभ्यता के 'द्रविड़'

इसी प्रकार प्राचीन सेल्टिक सभ्यता के दिशा-निर्देशकों को 'द्रविड' ( Druids )  के नाम से जाना जाता है। भारत के ब्राम्हणों में एक वर्ग द्राविड़ कहलाता है (देखें- ब्राह्मणों का वर्गीकरण 'पंचगौड़'  एवं 'पंचद्राविड़', पृष्ठ ४३)। 'द्रविड़' (अथवा '
 
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योरोप की सेल्टिक सभ्यता

यूनान तथा रोम की सभ्यताएँ पश्चिमी विचारधारा पर ऐसी छा गयी है कि यह दृष्टि से ओझल हो गया कि उसके पहले भी यूरोप में कोई (संस्कृत: सुरूपा) सभ्यता थी। और कौन थे वे जिन्होंने उस सभ्यता को दिशा दी, उसका नेतृत्व किया? यूरोप की उस सभ्यता को 'सेल्टिक' (Celtic
 
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फणीश अथवा पणि

ऐसे ही फणीश ( Phoenicians ) थे। इनका उल्लेख वेदों में 'पणि' नाम से आता है। ये नाग-पूजक थे और संभवतः पुराणों में वर्णित यही 'नाग' जाति है। ये भूमध्य सागर के पूर्वी तट आधुनिक लेबनान (Lebanon) और इसराइल के तटवर्ती प्रदेश के निवासी कहे जाते हैं। इतिहास इ
 
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एजियन सभ्यताएँ व सम्राज्य

भूमध्य सागर की बाकी सभ्यताएँ {एजियन सभ्यताएँ ( Aegean civilizations)} साम्राज्यों से ग्रथित हैं और उनके साये में पली हैं। केवल अपवादस्वरूप यूनान का एक छोटा कालखंड रहा है जब गणतंत्र के प्रयोग हुए और कला, विज्ञान, साहित्य एवं दर्शन, सभी क्षेत्रों में य
 
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जाति संहार के बाद इस्रायल का पुनर्निर्माण

पर लगभग अस्सी वर्ष की स्वाधीनता के बाद इस्रायल पुनः रोम के आक्रमण का शिकार बना। इस भीषण युद्घ में हजारों यहूदी मारे गए और बाद में नर-संहार हुआ। रोमन साम्राज्य आने के लगभग दो शताब्दी बाद यहूदियों पर और भी भीषण अत्याचार बरपे गए। उसका वर्णन 'हिंदी विश्व
 
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यहूदी और बौद्ध मत

यह समय था जब बौद्ध तथा अन्य प्रचारक भारत (जिसके अंतर्गत गांधार भी था) की पश्चिमी सीमा लाँघ कर ईरान और सुदूर पश्चिमी एशिया में अहिंसा का संदेश लेकर फैले। इस भारतीय संस्कृति के संदेश से यहूदियों में नए संप्रदाय उत्पन्न हुए। ऐसे 'फारिसी' ( Pharisee ) थे
 
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पुलस्तिन् के यहूदी

भूमध्य सागर के पूर्वी भाग का जिन प्राचीन सभ्यताओं से संबंध का वर्णन आता है; उनमें बाइबिल के 'पूर्व विधान' में वर्णित यहूदी जाति और सभ्यता है। उनका देश था पुलस्तिन् (फिलिस्तीन), बाइबिल ने जिसे दूध एवं मधु का देश कहा। आज प्राचीन इतिहास के 'उर्वर अर्धचं
 
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मिस्र सभ्यता का मूल्यांकन

पर पश्चिमी जगत में सबसे गौरवपूर्ण कही जाने वाली इस प्राचीन सभ्यता का मूल्यांकन?   साम्राज्य युग ही इसके जीवन का वैभव काल रहा। उत्तरी और दक्षिणी प्रदेशों को संयुक्त करके जो अनेक राजवंश आए उसी की विरूदावली गायी जाती है। इन राजवंशों के साम्राज
 
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भूमध्य सागरीय सभ्यताएँ

कभी इतिहास में भूमध्य सागर के दोनों ओर के देश ही यूरोप की दुनिया थी। इसी से कहा 'भूमध्य सागर'। यूरोपीय विद्वान प्रारम्भ में यही सभ्यताएँ जानते थे और इन्हें प्राचीनतम मानव सभ्यता समझते थे। इनमें भी सबसे प्राचीन है मिस्र की सभ्यता ( Egypt , संस्कृत : '
 
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भारत से उत्तर-पश्चिम के व्यापारिक मार्ग

कारगिल से पर्वतमाला भारत से उत्तर-पश्चिम की ओर जाने का व्यापारिक भू-मार्ग सदा से रहा है। एक मार्ग 'करगिल' (कश्मीर) [कारगिल] होकर था। करगिल का शाब्दिक अर्थ है, जहाँ करों की 'गिला' (शिकायत) अथवा अपवंचना हो, अथवा जो कर-मुक्त स्थान (पत्तन: Free port) हो।
 
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Oct 14 2009 07:36 PM
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सिकंदर (अलक्षेन्द्र) और भारत

सिकंदर (Alexander) के साथ भारत में क्या हुआ, इस बारे में यवन इतिहासकारों ने असंगत बातें लिखी हैं पर राजा पुरू (Porus) की संधि बताती है कि वह विजेता एवं विजित के बीच न थी। यवन इतिहासकार कहते हैं कि वह संधि तब हुयी जब सिकंदर के पूछने पर कि उसके साथ कैसा
 
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Sep 12 2009 08:17 PM
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ईरान और अलक्षेन्द्र (सिकंदर)

प्राचीन ईरान की ऐतिहासिक घटनाओं का उल्लेख आवश्यक है। दक्षिण ईरान में 'पर्सु' नामक प्रांत था, जहाँ हखामनीषी वंश के लोगों का शासन था। इसी 'पर्सु' (संस्कृत परशु) से अंग्रेजी में 'पर्शिया' (Persia)  नाम पड़ा। इस वंश की कीर्ति शिखर पर पहुँचाने का श्रेय
 
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Sep 05 2009 01:05 PM
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आर्यान (ईरान)

प्राचीन काल में भारत और ईरान (प्राचीन नाम आर्यान : आर्य देश) की सभ्यताओं का सहोदर नामा रहा है। वहाँ के खुर्द (Kurd) लोगों में आज भी एक कहावत प्रचलित है-'खुर्दी हिंदी भ्रा' (खुर्दी हिंदी भाई) ये अपने आपको आर्यों की छोटी शाखा 'खुर्दी' कहते हैं। सात-साठ सौ
 
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असुर जाति

लगातार एक हजार वर्षों तक सतत युद्घ के कारण युद्घ करना ही असुर जाति का पेशा बन गया और वे स्वयं क्रूर एवं अत्याचारी हो गए। जिन नगरों को उन्होंने जीता, उनका क्वचित् नागरिक ही सामूहिक हत्याकांड से बच पाया। प्रमुख लोगों के हाथ-पैर, नाक-कान काटकर, आँखें फोड़कर
 
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बैबिलोनिया

लगभग ५०० वर्ष के पश्चात पश्चिमी सामी जाति, जिसे 'अमोरी' कहते हैं, ने काबुल से बढ़कर सुमेर और एलम तक अधिकार कर लिया। तभी बैबिलोनिया (Babylonia) साम्राज्य-निर्माता हम्मूराबी ने एक नवीन संहिता प्रतिपादित की। यह संहिता पुरानी सुमेरी संहिता का, सामी जाति के
 
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Aug 09 2009 07:09 PM
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अक्कादी

अक्काड के राजा का चित्र विकिपीडिया सेअनुशासनयुक्त पंक्तिबद्घ लड़ने के कारण सुमेर निवासी आसपास की जंगली जातियों के आक्रमण बचा सके पर अंत में उत्तरी भाग की एक सामी जाति 'अक्कादी' के वे शिकार बने। इन अक्कादियों ने धनुष-बाण के व्यापक प्रयोग के कारण ऐतिहासिक
 
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Aug 01 2009 02:21 PM
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सुमेर व भारत

सुमेर के ऐतिहासिक युग (लगभग ३२०० वर्ष विक्रम संवत् पूर्व) के सहस्त्राब्दियों पहले से देश अनेक नगर-राज्यों में बँटा था। ये नगर स्वायत्तशासी थे। आख्यानों से लगता है कि इन नगर-राज्यों की सत्ता जनसभाओं के हाथ में थी। प्रत्येक नगर-राज्य में दो सदन होते थे।
 
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Jul 27 2009 06:47 AM
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सुमेर

सुमेर ( Sumer ) कुछ समय पहले तक प्राचीनतम समझी जाने वाली सभ्यता, जहाँ की कुछ बातें सारस्वत सभ्यता से मिलती-जुलती हैं। यह बाइबिल में वर्णित 'शिनार ( Shinar ) की दजला और फरात के दो-आबे के दक्षिणी-पूर्वी भाग की कहानी है। इस दो-आबे में प्राचीन काल में हर
 
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सारस्वत सभ्यता

परंतु भारत की धरती पर उत्पन्न और पली संसार की इस प्राचीनतम सभ्यता के उदय के बारे में पश्चिम के कुछ पुरातत्वज्ञों ने प्रश्नचिन्ह खड़ा किया। वे कहते हैं कि वैदिक सभ्यता और सारस्वत सभ्यता भिन्न थीं, क्योंकि एक ग्राम्य कृषि प्रधान सभ्यता थी तो दूसरी नागर
 
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सारस्वती नदी व प्राचीनतम सभ्यता

आज सिंधु घाटी की सभ्यता प्राचीनतम सभ्यता जानी जाती है। नाम के कारण इसके शोध की दिशा बदल गयी। वास्तव में यह सभ्यता एक बहुत बड़ी सभ्यता का अंश है, जिसके अवशिष्ट चिन्ह उत्तर में हिमालय की तलहटी (मांडा) से लेकर नर्मदा और ताप्ती नदियों तक और उत्तर प्रदेश
 
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सभ्यता का आदि देश

विद्यार्थी जीवन में एक प्रसिद्घ जासूसी कहानी पढ़ी थी। यदि एक बात को आधार मानकर चला जाय तो एक निष्कर्ष पर पहुँचते हैं, जो निश्चित दिशा को इंगित करता है। पर यदि क्षण भर दूसरा आधार, जो उतना ही सुसंगत है, मानें तो सारा दृश्य उलट जाता है और सभी संकेत एवं
 
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सभ्यताएँ और साम्राज्य

वैज्ञानिक गल्पों की एक प्रसिद्घ माला इस सदी का असिमोव ( Asimov ) लिखित 'संस्थान त्रयी' ( Foundation Trilogy ) है। उसमें आज से बीस सहस्त्राब्दी बाद, जब आकाशगंगा के सभी वासयोग्य ग्रहों में मानव जाकर बसे, तब पुरानी किंवदंतियों के आदि ग्रह 'पृथ्वी' की खो
 
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