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धरती का गीत
धरती पर फ़ैली है,सरसों की धूप-सी धरती बन आई है, नवरंगी रूपसी ॥ फ़ूट पड़े मिट्टी से सपनों के रंग नाच उठी सरसों भी गेहूं के संग। मक्की के आटे में गूंथा विश्वास वासंती रंगत से दमक उठे अंग। धरती के बेटों की आन-बान भूप-सी धरती बन आई है,नवरंगी रूपसी॥ बाजरे की
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Dec 29 2009 11:43 AM


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