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शब्‍दार्थ

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28 May 2010
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५०० वर्ष पुराना राजगोपुरम ध्वस्त. हम कब चेतेंगे?

आन्ध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में स्थित १५वीं शताब्दी में बने कलाहस्ती मंदिर का गोपुरम कल ध्वस्त हो गया। दक्षिण भारत के मंदिरों के प्रवेश द्वार को गोपुरम कहा जाता है और गोपुरम का महत्व मंदिर से कम नहीं माना जाता। ध्वस्त गोपुरम को महाराजा कृष्णदेवा राय ने
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शुभ विवाह से लक्ष्मी जी आउट!

ये शादी के कार्ड्स पर "शुभ विवाह" क्यूँ लिखते हैं?कोई "अशुभ विवाह" भी होता है क्या? जो अशुभ होता भी है तो विवाह के बाद ही होता है, शुरू शुरू में तो शुभ ही शुभ होता है! अपवाद के तौर पर झारखंड में बी जे पी और जे एम एम के बीच का गठबंधन ध्यान में आता है,
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मायावती के समर्थक जवाब देंगे क्या?

मायावती ने वही किया जो उनसे उम्मीद थी। हमेशा की तरह केंद्र सरकार की किसी भी योजना के लिए उत्तर प्रदेश के पास पैसे नहीं हैं। उत्तर प्रदेश के पास अभी कुछ दिन पहले प्रतापगढ़ में भगदड़ में मरे लोगों को मुआवजा देने के लिए भी पैसे नहीं थे, (मुख्यमंत्री जी ने बी
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टाइम्स ऑफ़ इंडिया की पत्रकारिता का मुलाहिज़ा फरमाइए!

मीडिया में गला काट प्रतिस्पर्धा का इससे प्रत्यक्ष उदाहरण और क्या मिलेगा! जैसा कि आप देख सकते हैं टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने माइक से 'जैन टी वी' का लोगो गायब कर दिया। टाइम्स नाउ और जैन टी वी का भला क्या मुकाबला है लेकिन फिर भी, दूसरे चैनल का नाम भी क्यूँ
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कुछ बिछड़े हुए दोस्त!

सियालदाह से मुझे एअरपोर्ट जाना था, बाकियों को हावड़ा स्टेशन।बाकी यानी सौगत, विकास, एमएसआर। सौगत और विकास मुंबई जा रहे थे, एमएसआर चेन्नई। मेरी हैदराबाद की फ्लाईट थी।मुझे एअरपोर्ट की टैक्सी में सौगत ने इतनी जल्दी बिठाया कि ठीक से अलविदा कहने का मौका भी
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अमन की आशा? जब तक सांस, तब तक आस!

गुलज़ार साहब की इस बेहद खूबसूरत कविता के उस अंश पर नज़र अटक गयी।"सरहदों पे जो आये अबके तो लौट के न जाए कोई"इसमें नयी बात कुछ नहीं है, पाकिस्तानी घुसपैठिये और अवैध रूप से भारत में रह रहे पाकिस्तानियों ने तो इस बात को हमेशा से अपनाया है :)'अमन की आशा' एक
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मुझे ग्रीटिंग कार्ड आया है. सचमुच वाला!!!

अंकुर ने ग्रीटिंग कार्ड भेजा है। सचमुच का, कागज़ का!ई-कार्ड नहीं है, कहीं क्लिक करने पर संगीत नहीं बजता, सीनरी बदलती नहीं, अन्दर का सन्देश भी वैसे का वैसे ही रहता है। लेकिन पेज बंद करते ही गायब नहीं हो जाता, पास रहता है, छू सकता हूँ उसे।छूता हूँ भी! बार
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ये हैं हमारे 'इंटरनेश्नल' अंग्रेजी स्कूल!

ये फोटो है हैदराबाद के नए 'फीनिक्स ग्रीन्स' स्कूल के पैम्फलेट की। ज़रा ऊपर लिखी लाइन पढ़िए: "Our Curricula is a little different". "Curricula" शब्द बहुवचन (Plural) है इसलिए "is" का प्रयोग गलत है!बिलकुल छोटी सी बात है, और बहुत संभावित है कि ये विज्ञापन
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चढ़ते सूरज को सब सलाम करते हैं!

रीडिफ़.कॉम पर ये विज्ञापन देखा तो यही याद आया। आज जहाँ धोनी साब की फ़ोटो है कभी सचिन तेंदुलकर की होती थी। खैर...
Dec 29 2009 11:41 AM
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दान कीजिये अपने पुराने कंप्यूटर को

आपके पुराने कंप्यूटर से आपकी काफ़ी यादें जुड़ी होंगी लेकिन अब उन यादों पर सिर्फ़ धूल पड़ रही है और आप अपने लैपटॉप पर ही काम करते हैं, क्यूंकि उस पुराने कंप्यूटर में ना तो ज़रूरत के मुताबिक रैम है, न प्रोसेसर स्पीड। हार्ड डिस्क भी कम ही है और अब आप उस 80
Dec 29 2009 11:41 AM
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क्या इसी भारत पर गर्व है आपको?

ये ब्लॉग पढ़ने से पहले ज़रा रीडिफ़ . कॉम पर इस लेख पर आयी हुई टिप्पणियों को पढ़िये, और फ़िर वापिस आइये। अगर आपने पढ़ लिया तो सोच कर बताइये, ये कौन लोग हैं? क्या इसी हिंदुस्तान के हैं, इसी मिट्टी के जिससे आप और मैं निकले हैं? अगर हाँ तो मुझे तो अपने आप पर
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सत्यम शिवम् ... 'सुन्दरम'? फिलहाल तो नहीं!

राजू का झूठ खुलने के बाद 'सत्यम' ने अपना नाम बदल लिया है। नया नाम और लोगो पहले से ज़्यादा बदला नहीं है:
Dec 29 2009 11:41 AM
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बहन (जी) के लिए इतना भी नहीं कर सकते?

हद कर दी आपने। (पता है गोविंदा, रानी मुख़र्जी की फ़िल्म का नाम है, टॉपिक चेंज मत करो!) बहन कहते हो और बहन का जन्मदिन मनाने में नानी मरती है (अब यह मत कहना कि नानी नहीं, इंजिनियर मरता है!) । एक तो इतने अहमक भरे पड़े हैं बी एस पी में कि हर काम बेचारी एक
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विविध भारती का 'चित्रलोक' याद है?

अब तो काफ़ी टाइम से विविध भारती तो क्या कोई हिन्दी स्टेशन नहीं सुना। यहाँ हैदराबाद में जब से रेडियो सिटी भी पूरी तरह से तेलुगु बन गया तब से रेडियो सुनना लगभग ख़त्म हो गया है। करीब ८ साल हो गए हैं इलाहाबाद छोड़े हुए, और तभी से विविध भारती से नाता टूटा।
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सिर्फ़ नेताओं को गाली देने से काम नहीं चलेगा

इन दिनों आतंकवाद के ख़िलाफ़ काफ़ी सारे 'आन्दोलन' चल रहे हैं। कहाँ? इन्टरनेट पर, टीवी चैनलों पर और अखबारों में। सभी में दो ही बातें हो रही है, नेताओं के ख़िलाफ़ गुस्सा और 'आतंकवाद का विरोध'। सिर्फ़ 'बातें'. चाहे वो कैंडल लाइट रैली हों या हस्ताक्षर अभि
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"वोट बैंक बनो". साथ दीजिये इस नए आन्दोलन में.

अगर आपने सुकेतु मेहता की ' मैक्सिमम सिटी : बॉम्बे लॉस्ट एंड फाउंड ' पढ़ी है तो मुंबई के बारे में आप काफ़ी बातें जानेंगे। उनमें से एक ये है , कि चुनाव के समय कोई नेता दक्षिण मुंबई की अमीर सोसाइटीज़ में वोट मांगने नहीं जाता। ऐसे ही आन्ध्र प्रदेश में जय
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रिक्त

शब्द, आंसू और क्रोध अब कुछ नहीं बचा है इस मन में। रिक्त हो गया है ये अब तो। क्या कहूँ, किससे कहूं! हर कन्धा तो आंसुओं से भीगा हुआ है। (चित्र आभार )
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ग्लोबल वार्मिंग

अब बारिश में मेढक नहीं टरटराते। रातों में जुगनू नहीं जगमगाते. आसमान भी अब स्लेटी सा है, तारे भी नहीं दिखते अब टिमटिमाते॥ अब पानी पड़ने पर मिटटी नहीं महकती। अब बालकनी में सुबह गौरैया नहीं चहकती। अब सर्दी बस सर्दियों की छुट्टियों जितनी होती है। और गर्मी
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बदली

मद्धम स्लेटी, कितने सारे बादल छाये हैं। अद्भुत मेरे सतरंगी सपने सब एक रंग में ही आए हैं! मद्धम स्लेटी से उन बादलों में, खोजता हूँ तुम्हारा चेहरा। वो शायद नाक है वहाँ और वो शायद आँखें जहाँ रंग है गहरा।। तस्वीर तुम्हारी ये हर पल बनती है, बिगड़ती है सुध
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तो "राजकुमार" को क्या कहेंगे?

सामंती उपाधियों के इस्तेमाल नहीं करेंगे कांग्रेसी" तो " राजकुमार" की नयी पदवी क्या होगी ;)
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वैलेंटाइन डे और प्रमोद मुतालिक के बन्दर!

अब तक आपने ' पिंक चड्ढी कैम्पेन ' के बारे में तो सुना/पढ़ा होगा ही, कईयों ने तो कुछ पिंक न सही लाल पीली भेज भी दी होंगी। आज पता चला कि श्री राम सेना चड्डियों के बदले साड़ियाँ भेज रही है। मैं तो कहता हूँ कि इस साल ५-६ बार वैलेंटाइन डे मना लेते हैं, देश
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मेरी पहली फ़िल्म: यू, मी एंड डीवाईपीसी

बचपन से ही फ़िल्म डाइरेक्टर बनने का ख्वाब था, जो सिर्फ़ ख्वाब ही रहा। टाटा इंडिकॉम का ऐड देखा 'सुनो दिल की आवाज़'। सो मैंने सोचा दिल की आवाज़ सुनने का इससे अच्छा टाइम नहीं मिलेगा, रिसेशन का ज़माना है, कल को कंपनी निकाल दे तो कुछ तो और ऑप्शन रहना चाहिए न
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ऐसे ठगता है रिलायंस फ्रेश!

दो-तीन दिन पहले अपने नजदीकी रिलायंस फ्रेश स्टोर में सब्जी लेने गया था। और वहाँ पर पैक्ड गोभी के एक पैकेट पर नज़र पड़ी और ठहर गयी। २ और पैकेट पड़े थे उनको भी उठाकर देखा और सारा खेल समझ में आ गया। हर पैकेट पर लगे लेबल को इस तरह से फाड़ दिया गया था कि उसकी
Dec 29 2009 11:41 AM
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जब शब्द कम पड़ जाते हैं....

जिसने कभी कहा कि एक तस्वीर हजारों शब्दों से बढ़कर होती है वो ज़रूर एक ऐसा आलसी लेखक होगा जो एक लम्बी यात्रा पर गया और बहुत सारी फ़ोटो खीचीं। वापिस आने के बाद लिखने बैठा तो समझ नहीं पाया कि क्या क्या लिखे और सोचा चलो बस फ़ोटो ही दिखा दो! इसलिए अब ज़्याद
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राहुल महाजन का स्वयंवर

मेरी इसी शीर्षक की अंग्रेज़ी पोस्ट का हिन्दी अनुवाद किया मेरी मित्र मेघना ने। ये पोस्ट उन्हीं के शब्दों में!) सरकार आर्थिक मंदी को गंभीर मुद्दा मान रही है या नहीं ये भले ही चर्चा का विषय हो पर NDTV इमेजिन पर कुछ बुद्ध्जीविओं ने लैंगिक समता को ज़रूर ही
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माया का स्वयंवर

आम दिनों की तरह उस दिन भी करीब २६२७८ आई ए एस, आई पी एस, आई सी एस, आई एफ़ एस, पी सी एस, टी सी एस, एम एन एस वगैरह के तबादले करने और अपनी ६४८२३६ और कांशीराम की २ मूर्तियों की स्थापना के आदेश देने के बाद बहनजी को लगा कि एस पी, कांग्रेस, बी जे पी, आर जे डी,
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सीखना सिखाना

कल कनुप्रिया को पिंग किया, उनकी माता जी के ब्लॉग का लिंक पूछने के लिए। इस माँ बेटी की जोड़ी की कहानी अपने आप में प्रेरणास्पद है. एक हादसे में परिवार के एक सदस्य के असमय निधन के बाद जब आंटी की हिम्मत टूटने लगी थी, कनुप्रिया ने उनको एक बार फ़िर एक दिशा
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वर्षा जल संग्रहण (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) करने की विधि

अभी कुछ महीने पहले अपनी कंपनी और स्वयंसेवी संस्था प्रेमालयम के साथ मिलकर, हैदराबाद के एक प्राइमरी स्कूल में एक मध्यम क्षमता का रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाया। इसके लिए क्या तैयारी करनी पड़ती है, निर्माण का तरीका और कितना खर्चा आता है इसकी पूरी जान
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चुनाव: पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त...

समय: १२.३७ अपरान्ह, १६ मई २००९ ५४३ सीटों के नतीजे और रुझान आ चुके हैं और लगभग सब ने मान लिया है कि फ़िर से 'सिंह इज किंग'। अब मेरे दिमाग में कुछ सवाल आने शुरू हो गए हैं: १) मायावती का क्या होगा? उत्तर प्रदेश में अब वो हस्ती नहीं रही बहन जी की। कांग्रे
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उम्मीद

कल सुबह बहुत अच्छी होगी। कल सुबह सब ठीक हो जाएगा! " - श्रीमती किरन सिन्धु ज़रा सी दो लाइनें दिल छू गयीं। शायद इसी लिए कहते हैं कि उम्मीद पर दुनिया है! ( कनुप्रिया के ब्लॉग से साभार)
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क्या मीडिया वाकई पक्षपाती है?

एन डी टी वी इंडिया पर एक चर्चा में अगर ज़िक्र नहीं आता तो मुझे तो शायद इस घटना का पता भी नहीं चलता। (मालूम नही कि आपको पता है कि नहीं!) चुनाव आयोग ने कोंग्रेस के इमरान किदवई को एक चुनाव सभा में धार्मिक मुद्दे पर बोलने के लिए नोटिस जारी किया है। किदवई
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जैसे हम, वैसे हमारे नेता

चलो अब मेनका गांधी खुश होंगी। इतने साल से बेटे का कैरियर बनाने में लगी थीं, कुछ हो नहीं रहा था। कोई नाम तक नहीं जानता था। लेकिन अब घर घर में बेटा चर्चा का केन्द्र बना हुआ है। राजनीति में सही तरीके से अब पदार्पण हुआ है। भड़काऊ भाषण बाज़ी, पकड़े जाने पर
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वैलेंटाइन डे और प्रमोद मुतालिक के बन्दर!

अब तक आपने ' पिंक चड्ढी कैम्पेन ' के बारे में तो सुना/पढ़ा होगा ही, कईयों ने तो कुछ पिंक न सही लाल पीली भेज भी दी होंगी। आज पता चला कि श्री राम सेना चड्डियों के बदले साड़ियाँ भेज रही है। मैं तो कहता हूँ कि इस साल ५-६ बार वैलेंटाइन डे मना लेते हैं, देश
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मेरी पहली फ़िल्म: यू, मी एंड डीवाईपीसी

बचपन से ही फ़िल्म डाइरेक्टर बनने का ख्वाब था, जो सिर्फ़ ख्वाब ही रहा। टाटा इंडिकॉम का ऐड देखा 'सुनो दिल की आवाज़'। सो मैंने सोचा दिल की आवाज़ सुनने का इससे अच्छा टाइम नहीं मिलेगा, रिसेशन का ज़माना है, कल को कंपनी निकाल दे तो कुछ तो और ऑप्शन रहना चाहिए न
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ऐसे ठगता है रिलायंस फ्रेश!

दो-तीन दिन पहले अपने नजदीकी रिलायंस फ्रेश स्टोर में सब्जी लेने गया था। और वहाँ पर पैक्ड गोभी के एक पैकेट पर नज़र पड़ी और ठहर गयी। २ और पैकेट पड़े थे उनको भी उठाकर देखा और सारा खेल समझ में आ गया। हर पैकेट पर लगे लेबल को इस तरह से फाड़ दिया गया था कि उसकी
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सत्यम शिवम् ... 'सुन्दरम'? फिलहाल तो नहीं!

राजू का झूठ खुलने के बाद 'सत्यम' ने अपना नाम बदल लिया है। नया नाम और लोगो पहले से ज़्यादा बदला नहीं है: