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आवारा बंजारा

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16 Jun 2010
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छत्तीसगढ़ से एक और ब्लॉग

आशुतोष मिश्रा , छत्तीसगढ़ के पुराने पत्रकार हैं। अपने प्रोफाइल पर वे सवाल पूछते हैं कि "लोग इतने ज्यादा असहज होकर क्यों जीना चाहते हैं ???", जवाब मिले तो बताया जाए।  जनाब पहले रेडिफ पर ब्लॉगलेखन करते थे, वह भी रोमन में। क्योंकि हिंदी कैसे लिखी जाए
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हबीब तनवीर की पहली पुण्यतिथि पर

 पांच से आठ जून तक इप्टा का राष्ट्रीय नाटय समारोहचरणदास चोर से होगी समारोह की शुरुआतछत्तीसगढ़ के विश्वविख्यात रंगकर्मी स्व. हबीब तनवीर की पहली पुण्यतिथि पर इप्टा, रायपुर चार दिवसीय नाटय समारोह का आयोजन कर रही है। पांच जून से प्रारंभ इस राष्ट्रीय नाटय
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संतोष चौबे की एक कविता…आना जब मेरे अच्छे दिन हों…

2003 की गर्मियों में एक रविवार को जनसत्ता का रविवारीय अंक पढ़ते हुए मेरी नज़र संतोष चौबे की इस कविता पर पड़ी थी, और तब से मानों यह कविता मेरे दिमाग मे घूमते  ही रहती है ना जानें क्यों...। जब-जब इसे पढ़ता हूं तब-तब मानों यह एक नया अर्थ दे जाती है। इस
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आप दे सकते हैं जवाब?

बस्तर के सुकमा के समीप यात्री बस उड़ाए जाने के बाद एक सज्जन ने मुझसे सवाल पूछा, उसका क्या जवाब दूं यही सोचता रह गया। दरअसल उन्होंने जानना चाहा कि अब क्या अंतर है आतंकवादियों में और नक्सलियों में?नक्सलवाद के पीछे जो वाद था वह अब कहां है, नहीं है इसलिए ही
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बापीयॉटिक तो नहीं पर बापी के बहाने-5

गतांक बापीयॉटिक तो नहीं पर बापी के बहाने-4 से आगे....इस सीरिज की पहली किश्त पढ़कर मित्र सूर्यकांत (सूर्या) को ब्राह्मणपारा का वो जमाना ही  याद हो आया। उन्होंने कमेंट भी किया और फोन भी। यह कहते हुए कि लिखो,  ये भी लिखो-वह भी लिखो।  सूर्या भी
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बापीयॉटिक तो नहीं पर बापी के बहाने-4

गतांक बापीयॉटिक तो नहीं पर बापी के बहाने-3 से आगे बापी के गांव वाले घर में जाना कई मायनों में सुखद रहता है। घर के बड़े से आंगन में कबूतरों का निवास, इतने सारे कबूतर गूंटरगूं करते व दाना चुगते दिखते हैं कि पूछो ही मत। घर में गोबर गैस प्लांट। बापी से
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बापीयॉटिक तो नहीं पर बापी के बहाने-3

बापीयॉटिक तो नहीं पर बापी के बहाने-2 से आगे  बापी आजकल एक अरसे से एक फाइनांस कंपनी में रिकवरी में हैं। नेशनल हाईवे  पर आजाद चौक में स्थित बड़ा सा मकान जिसे स्थानीय भाषा में बाड़ा कहते हैं, का बड़ा हिस्सा सड़क चौड़ीकरण की भेंट चढ़ गया। हालांकि उनका घर
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बापीयॉटिक तो नहीं पर बापी के बहाने - 2

गतांक बापीयॉटिक तो नहीं पर बापी के बहाने-1 से  आगे बापी में एक जो सबसे अलहदा गुण दिखा वह यह कि पशु पक्षियों के प्रति प्रेम। इतना कि किसी भी गली का कुत्ता या बिल्ली हो, बस बापी को पांच मिनट दीजिए वे उससे ऐसे घुलमिल जाएंगे मानो बापी ने ही बरसों से उसे
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बापीयॉटिक तो नहीं पर बापी के बहाने-1

सतीश पंचम जी के बापी और फिर ज्ञानदत्त जी के बापीयॉटिक पोस्ट की दरकार की दरकार, दोनो को ही पढ़ने के दौरान मुझे अपना बापी याद आया। नाम तुषार लेकिन घर में पुकारने का नाम बापी। उम्र में मुझसे करीब दो साल बड़ा। बापी के संपर्क में मैं जब आया तो मै नवीं या दसवीं
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उफ…ये गर्मी…

रायपुर की गर्मी…पारा तो आज 44.2 पर पहुंच गया।दिन में बाहर भटको तो हवाएं जैसे जला डालना चाह रही हो, धूप जैसे पिघला देना चाहता हो और सूरज तो मानों अपनी तपिश की प्रचंडता दिखाने पर उतर आया हो।इस बार गर्मी तो ऐसा लगता है कि पिछले सभी रिकार्ड ध्वस्त कर ही
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शौचालय कम मोबाइल ज्यादा!

भई यह अपन नहीं कह रहे। यह तो कह रही है संयुक्त राष्ट्र संघ की एक रपट। इसमें कहा गया है कि आंकड़ों के मुताबिक  भारत में  54।5 करोड़ मोबाइल फोन हैं जिससे देश की 45 फीसदी जनसंख्या की जरुरत पूरी होती है।अब देश में शौचालयों का हाल देखा जाए तो 2008 तक
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माओवाद के शहरी समर्थक अब तो विचार करें - दिवाकर मुक्तिबोध

सिर्फ एक दशक की बात करें। बीते दस सालों में देश में नक्सली हिंसा की अनेक घटनाएं हुई, अनेकों जवान मारे गए, पुलिस अधिकारी भी खेत रहे और न जाने कितने मासूम आदिवासियों की जानें गई लेकिन सबसे ज्यादा विचलित करने वाली घटना दंतेवाड़ा जिले के चिंतलनार के जंगल में
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अब क्या करे सरकार?..........दिवाकर मुक्तिबोध

नहीं, हरगिज नहीं। कोई किंतु-परंतु नहीं। चिंतलनार सामूहिक नरसंहार पर किसी को माफी नहीं दी जा सकती। न छत्तीसगढ़ सरकार को और न केंद्र सरकार को। करीब 6 माह पूर्व जब आपरेशन ग्रीन हंट की योजना बनी और राज्य सरकार के सहयोग से इस पर अमल शुरू हुआ तब क्या यह नहीं
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माओस्तान में अरुंधति का अवतार

(छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से प्रकाशित सांध्य दैनिक छत्तीसगढ़ के संपादकीय पेज पर रविवार को एक लेख छपा है। आवारा बंजारा ने उसे पढ़ा और फौरन अखबार के संपादक महोदय से इस लेख को अपने पाठकों के लिए अपने ब्लॉग पर डालने की इजाजत ली। सो पेश है वह लेख)माओस्तान में
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अंकल कहोगे तो नहीं दूंगा…

विधानसभा सत्र चलने की वजह से पिछले कई दिनों से अवकाश नहीं मिला था, साप्ताहिक अवकाश भी नहीं। इस बीच तबियत भी खराब हुई, गर्मी ने पेट पर हमला कर दिया। सो शुक्रवार को विधानसभा सत्रावसान के बाद छुटी की अर्जी लगा दी।अब आज शनिवार को घर के  कई काम निपटाने
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रामनवमीं पर कुछ तस्वीरें, नजारे आस्था के

रामनवमीं के मौके पर एक छायाकार की नजरभगवान राम-सीता व लक्ष्मण का विशेष श्रृंगारकन्या भोजजंवारा विसर्जन के लिए जाती महिलाएंसांग और बाना धारण किए श्रद्धालुओं का हुजुम……आस्था…॥और सबसे  अंत में इन सबके कारण हुआ ट्रैफिक जाम(सभी तस्वीरें : राजीव सोनकर)
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प्रभाष जोशी के शोक में जश्न! : एक ईमेल

आज जैसे ही ईमेल बक्सा खोला। देखा एक ईमेल आई है। उसमें ऐसा कुछ नहीं है जिसे निजी की श्रेणी में रखा जाए बल्कि उसे पढ़कर लगा कि उसे विमर्श के लिए ही भेजा गया है। वह ईमेल यहां प्रस्तुत है।प्रभाष जोशी के शोक में जश्न " प्रभाष जोशी को गुजरे अभी चार महीने भी
Feb 16 2010 12:41 PM
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विनोद कुमार शुक्ल के नाम पर स्पैमर्स का धावा?

भला इंटरनेट पर स्पैम हमला करने वालों को  साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त प्रसिद्ध कवि, लेखक विनोद कुमार शुक्ल से क्या लगाव हो सकता है?यह मुद्दा अपनी समझ से बाहर है। दरअसल यह बात इसलिए दिमाग में आई क्योंकि फरवरी  2008 में लिखी हुई 
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Feb 11 2010 01:21 PM
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ब्लॉग के बहाने प्रतिक्रियावादियों की जमात खड़ी की जा रही है!

तीन दिन पहले  शहर के एक वरिष्ठ पत्रकार का फोन आया, उनके साथ एक अलग ही आत्मीयता है। वे ब्लॉग जगत में अवतरित हो चुके हैं। उन्होंने फोन किया था,ब्लॉग पर विजिट काउंटर आदि की जानकारी लेने के लिए।चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि " यार देख, ये ब्लॉग-व्लॉग के
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मुद्दों का वर्चुअल स्पेस से फिजीकल प्रेजेंस तक जाना, कितना सही और कितना गलत

पिछली से पिछली पोस्ट में आए विनीत के कमेंट में कही गई बात में दम है।उनके लंबे कथन में जो कहा गया उसका एक अंश महत्वपूर्ण और विचारणीय है, महज इस लिहाज से नहीं कि चिट्ठाचर्चा डोमेन का मसला यहां हावी था, बल्कि इस संपूर्ण ब्लॉग जगत या ब्लॉगिंग के लिहाज से यह
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कथन: विनीत, राजकुमार ग्वालानी, अनूप शुक्ल और झा जी के

आइए कुछ बात करें अब छत्तीसगढ़ ब्लॉगर मीट की रपट पर मिली टिप्पणियों पर। इनमें सबसे खास ध्यान देने लायक हैं विनीत कुमार, राजकुमार ग्वालानी और अनूप शुक्ल जी की। दरअसल ये टिप्पणी ही नहीं बल्कि पोस्टनुमा टिप्पणी हैं इसलिए इनकी चर्चा अलग से आवश्यक है। एकदम
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फिर मिलने की आशा के साथ छत्तीसगढ़ ब्लॉगर बैठक संपन्न, एक रपट

प्रतीक्षित छत्तीसगढ़ ब्लॉगर बैठकी रविवार को रायपुर के प्रेस क्लब में संपन्न हुई। हालांकि इसके बारे में यह भी कहा जा रहा था कि यह ब्लॉगर की यह बैठक प्रायोजित है। पता नई, लेकिन शामिल होने के बाद से अपन को नई लगा कि प्रायोजित थी। हो सकता है कि अपन इस बारे
Jan 25 2010 02:27 PM
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सोच और उसके होने के बीच के लोचे

पता नईं क्यों अक्सर ऐसा होता है कि हम जो पहले से तय करते हैं, उसमें लोचे आ ही जाते हैं। दरअसल सोमवार से यह तय कर के बैठा था कि इस शुक्रवार यानी कि आज अपन अपना साप्ताहिक अवकाश होने की वजह से आराम से बैठेंगे और शब्दों का सफर में चंदू भाई के आत्मकथ्य को
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कहीं न जाने के बाद भी लौटना

कहीं न जाने के बाद भी लौटनाएक लंबे अरसे के बाद ब्लॉग पर लिखना, पता नहीं इसे लंबा अरसा कहना चाहिए या नहीं क्योंकि मेरे ब्लॉग पर पिछली पोस्ट 2009 के अगस्त माह की 27वीं तारीख की है लेकिन वह भी मेरी लिखी हुई नहीं। इसी तरह 26 अगस्त की भी पोस्ट मेरी नहीं। मैने
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90 में एक अरबपति, 22 करोड़पति

अमीर धरती कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ के गरीब आदिवासियों के लिए यह एक विडंबना ही कही जाएगी किराज्य की विधानसभा में उनके प्रतिनिधि के रूप में पहुंचे 90 विधायकों में से एक जहां अरबपति है तो 22 करोड़पति है।यह बात संतोषजनक कही जा सकती है कि छत्तीसगढ़ की तीसरी व
Dec 29 2009 11:40 AM
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आखिरकार बहस शुरु तो हुई

पहल चाहे देर हो या सबेर हो, पहल ही होती है। एक लंबे अरसे से कम से कम छत्तीसगढ़ में तो इस बहस के शुरु होने की प्रतीक्षा की जा रही थी कि मानवाधिकार कार्यकर्ता व संगठन नक्सली हिंसा होने पर तो खामोशी ओढ़े रहते हैं लेकिन जहां सरकार के या उसके पुर्जों के ह
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छत्तीसगढ़ी अस्मिता का प्रश्न

छत्तीसगढ़ी अस्मिता का प्रश्न रविंद्र गिन्नौरे छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ी भाषा के उत्थान के लिए एक सार्थक पहल हुई है। प्रदेश के राज्यसभा सदस्य गोपाल व्यास ने राज्यसभा में एक निजी विधेयक पेश किया। 16 दिसंबर को प्रस्तुत इस निजी विधेयक में छत्तीसगढ़ी राजभाषा को
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क्या हल्ला बोलेंगे ये हल्ला करने वाले - आलोक तोमर

क्या हल्ला बोलेंगे ये हल्ला करने वालेआलोक तोमरभारत के सबसे सिद्व और प्रसिद्व संपादक और उससे भी आगे शास्त्रीय संगीत से ले कर क्रिकेट तक हुनर जानने वाले प्रभाष जोशी के पीछे आज कल कुछ लफंगों की जमात पड़ गई है। खास तौर पर इंटरनेट पर जहां प्रभाष जी जाते नहीं,
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हम कत्ल भी करते हैं तो चर्चा नही होती

हम कत्ल भी करते हैं तो चर्चा नही होती संजय तिवारीकिसी शायर ने लिखा था खुद ब खुद कातिल का मसला यूं हल हो गया, कत्ल होते जिसने देखा था वो पागल हो गया। बात देश की राजनीति में अहम स्थान रखने वाले प्रदेश उत्तर प्रदेश की है और केंद्र में हैं पत्रकार।कुछ ही दिन
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उम्मीदें जगा गए 'युवराज'

कांग्रेस के 'युवराज' कहे और माने जाने वाले महासचिव राहुल गांधी की दो दिवसीय छत्तीसगढ़ यात्रा ने कांग्रेसियों को ही आपस में चर्चा करने का एक और मौका दे दिया है। न केवल कांग्रेसियों को ही बल्कि भाजपा को भी। चर्चा इस बात की कि छत्तीसगढ़ कांग्रेस में प्रभारी
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फालतू की बहस !

15 अगस्त की पूर्व संध्या पर दफ्तर में काम करते हुए कुछ काम अपने जूनियर्स को सौंपने के बाद शहर के अखबारों की फाईल पलट रहा था। अचानक एक अखबार नई दुनिया पर नजर पड़ी। उसके मुख्य संस्करण को बांचने के बाद शहर वाले संस्करण को जैसे ही उठाया पहले पन्ने पर ही
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छत्तीसगढ़ द मोस्ट हैप्पेनिंग स्टेट

बीते दिनों में छत्तीसगढ़ में बहुत कुछ हुआ, इन बहुत कुछ होने के दौर में मेरे कुछ अपनों नें मुझे टोका कि क्या बात है इतना कुछ हुआ लेकिन तुम्हारा ब्लॉग खामोश क्यों है। जवाब मेरे पास नहीं था पर मन में कुछ शायद बहुत कुछ चल रहा था। जो कुछ हुआ उसमें बारिश की
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छत्तीसगढ़ में खत्म हुई दो बच्चों वाली बाधा

एक ओर जहां अब यह मांग होने लगी है कि संसद से लेकर विधानसभा तक भी दो से ज्यादा बच्चों वालों के चुनाव लड़ने पर रोक लगाई जाए वहीं छत्तीसगढ़ सरकार नगरीय निकाय चुनाव लड़ने के लिए दो बच्चों से ज्यादा न होने की अनिवार्यता के अधिनियम को वापस लेगी। आज देर शाम हु
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खदबदाहट के बीच जैसे पकना

भीतर की खदबदाहट जैसे उकसाती है………वही खदबदाहट जो चूल्हे पर चढ़े भात के बर्तन में होती है………………पर जब इसमें उफान आता है तो फिर क्या होता है………कारण मालूम नहीं इस खदबदाहट का……लेकिन इक बेचैनी सी तारी रहती है……… हावी नहीं होता खुमार किसी चीज का……………लेकिन भरी
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किनारे कर दिए गए गांधी जी…

गांधी जी को तो हम किनारे कई सालों से करते आ रहे हैं फिलहाल यहां बात गांधी की उस प्रतिमा की है जो रायपुर शहर का पिछले पचास-पचपन सालों से साक्षी रहा है और आगे भी रहेगा।शहर अब राजधानी है, तरक्की कर रहा है लेकिन उसकी पुरानी पहचान खोती जा रही है। हर वह ची
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ऐसे कैसे ब्लॉग लिखोगे भई

ब्लॉग की चर्चा-परिचर्चा इतनी होने लगी है कि एक तरह से लोगों को ब्लॉग की अवधारणा को समझे बिना ही ब्लॉग "लिखने" का फैसिनेशन होने लगा हैं। खासतौर से बड़े अफसरान और वरिष्ठ पत्रकार, साथ ही साहित्यकार भी। चाहते हैं कि उनका भी ब्लॉग हो, लोग पढ़ें, वाह-वाह करे
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आईटी इंजीनियरों ने समाज सेवा के लिए बनाया 'स्वर्ग'

आईटी इंजीनियरों ने समाज सेवा के लिए बनाया 'स्वर्ग' रूसेन कुमार बात 2007 की है। पार्थिबन, देवनाथन और देशभर से साफ्टवेयर इंजीनियर, सूचनाप्रौद्योगिकी क्षेत्र की अग्रणी कंपनी इंफोसीस टेक्नॉलॉजीस के बैंगलोर स्थित 'इंफोसीस ट्रेनिंग सेंटर' में ट्रेनिंग ले र
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अरूंधति राय,लेखिका,मानवाधिकार कार्यकर्ता व एक्टिविस्ट के नाम एक छत्तीसगढ़िया का पत्र

प्रति, अरूंधति राय, लेखिका,मानवाधिकार कार्यकर्ता व एक्टिविस्ट जो दो दिन पहले छत्तीसगढ़ आईं थी आदरणीया, आप 2007 में रायपुर आईं थी। जब छत्तीसगढ़ सरकार ने राजधानी रायपुर में एक "मानवाधिकार कार्यकर्ता" को नक्सलियों को मदद पहुंचाने व उनसे संपर्क रखने का आरो
Apr 08 2009 03:10 PM
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राम आखिर गए कहां थे जो लौट आए?

अभी दिन में खाना खाते हुए आदतानुसार टीवी पर चैनल सर्फ कर रहा था। एनडीटीवी पर भाजपा के घोषणा पत्र जारी होने की खबर आ रही थी, जिसका शीर्षक था 'भाजपा में लौटे राम'। दिमाग में ख्याल आया कि राम आखिर गए कहां थे जो लौट आए? राम तो थे हैं और रहेंगे ही। मनस मे
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ब्लॉगजगत पर एक और राजनैतिक व्यक्तित्व

इन दिनों लगातार राजनीति और फिल्म जगत से जुड़े या कहें कि सेलिब्रिटिज ब्लॉग जगत में आ रहे हैं इसी कड़ी में नया नाम जुड़ा है छत्तीसगढ़ में मंत्री रहे और वर्तमान में रायपुर लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी भूपेश बघेल का। कांग्रेस की परंपरा की टिकट वितरण