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संदेशे तब और अब
यूँ ही बैठे बैठेयाद आए कुछ बीते पलऔर कुछ ....भूले बिसरे किस्से सुहानेक्या दिन थे वो भी जब ....छोटी छोटी बातों के पलदे जाते थे सुख कई अनजानेदरवाज़े पर बैठ करवो घंटो गपियानाडाकिये की साईकल की ट्रिन ट्रिन सुनबैचेन दिल का बेताब हो जानाइन्तजार करते कितने
Jun 09 2010 01:09 PM


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