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24 May 2010
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Venice - The only place where you can get seasick by crossing the street

इन्द्रधनुष के नन्हें पाठकों को इस बार में वेनिस घुमाने ले गयी "घुमंती बेन, लगता है आइस्लेंड के ज्वालामुखी ने आपके घुमक्कड़ पैरों पर रोक लगा दी है. " "हम्म ! ऐसा कभी हो सकता है क्या ? २१ अप्रेल से यूरोप के हवाई अड्डे दुबारा खुल गए और मैंने भी तुरंत टिकट
 
Poonam Misra
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यहाँ "अ पिंच ऑफ़ साल्ट" की जगह कहते हैं ..अ माइन ऑफ़ साल्ट ....एक नमक की खान ऐसी भी

यह श्रृंखला बाल पत्रिका इन्द्रधनुष के नन्हें पाठकों के लिए है जिसे मैं अपने चिट्ठे पर भी डाल देती हूँ.वैसे संपादिका की कैंची अभी चलनी बची है.इसलिए भूल चूक लेनी देनी ! उफ्फ,क्या फीका खाना है ! अरे क्या नमक डालना भूल गए ? ''नहीं .आपको ज्यादा नमक पसंद
 
Poonam Misra
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द ग्रेट बेरियर रीफ......

iन्द्रधनुष के बाल पाठकों को घुमंती बेन घर बैठे दुनिया की सैर करा रही हैं। इस बार वह उनको इस अनुपम जगह की सैर कराती हैं।घुमंती बेन ने अपने शोल को क़स कर भींचा और कांपते हुए बोलीं , "बाप रे । पता होता की यहाँ इतनी ठण्ड है तो मैं कुछ दिन बाद आती ।आखिर जाड़े
 
Poonam Misra
Feb 24 2010 09:20 AM
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26/11/2008

यह वेदना है, अपनी धरती के हाल पर या आक्रोश उभरा है सीने में सत्य ,अहिसा, की पावन भूमि पर आज दर्द मिला है जीने में. विक्षिप्त,विदीर्ण इस ह्रदय में क्रोध भी है , क्रंदन भी शर्म से झुक गयी आँख अगर गर्व से उच्च मस्तक भी . सहिश्रुता की सीमा कब तक हमको यूँ
 
Poonam Misra
Dec 29 2009 11:45 AM
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चिट्ठी पर चिटठा !

आज बहुत दिनों बाद ऐसा मौका हुआ की कुछ जन्मदिन के कार्ड डाक से भेजने थे। एक अदद पत्र पेटिका ढूंढते ढूंढते कई सडकों के चक्कर लगाए । आख़िर काफ़ी देर बाद एक छोटे से पोस्ट आफिस के सामने लेटर बॉक्स मिला। शहर में रहनेवालों के लिए अब चिट्ठी , स्टैंप, डाकघर म
 
Poonam Misra
Dec 29 2009 11:45 AM
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बाबू समझो इशारे हार्न पुकारे पम पम पम

कुछ दिन पहले यूँ ही न जाने कैसे गाडी का हार्न ख़राब हो गया.वैसे बाद में याद आया .बगल में बैठी बेटी ने सीट बेल्ट नहीं लगाई थी पर पुलिस वाले ने जब किनारे रोकने का इशारा किया तो हमारी बुद्धि जगी और उसने तुंरत बेल्ट लगा ली..पुलिसवाला भी समझदार था.हमें अप
 
Poonam Misra
Dec 29 2009 11:45 AM
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काबुल --एक दर्द भरा दिन

काबुल हमेशा सुंदर दिखे यह ज़रूरी नहीं.कल के हादसे में भारतीय दूतावास को निशाना बनाया गया । भारत के ब्रिग मेहता और भारतीय विदेश सेवा के वेंकटेश्वर राव तथा इंडो टिबेटन बार्डर पुलिस के दो जवान शहीद हो गए। एम्बसी के गेट के सामने ही एक बारूद भरी कार ने इन
 
Poonam Misra
Dec 29 2009 11:45 AM
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सलाम काबुल-४ (पंजशीर)

काबुल में अभी बहुत कुछ है देखने को पर पहले सैर करते हैं पंजशीर की. हमारे दोस्त सैफुलाह साहब और एक और भारतीय परिवार ने प्रोग्राम बनाया एक दिन पंजशीर जाने का.हम मेहमान थे वहाँ के एक सरदार जनरल मीर जान के जिन्होंने पहाड़ की चोटी पर बने अपने गेस्ट हाउस म
 
Poonam Misra
Dec 29 2009 11:45 AM
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सलाम काबुल-३

टिप्पणियों से हौसलाफजई हुई है...तशक्कुर . इसके जवाब में बड़ा ही मीठा सा " काबिले तशक्कुर नीस्त " सुनने को मिलता है. यह जवाब मुझे इतना मीठा लगता है की कहना नहीं भूलती . और आप भी शुक्रिया या तश्क्कुर का जवाब ऐसे पाएँगे सबकी ज़बान से ... मिलने पर असलाम वा
 
Poonam Misra
Dec 29 2009 11:45 AM
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सलाम काबुल- २ (बुज़काशी )

बुज़काशी अफगानिस्तान का पारम्परिक राष्ट्रीय खेल है । यह घोडों पर सवार होकर खेला जाता है। घुड़सवारों की टीमें होती हैं और बीच में सफ़ेद रंग से एक गोला (दायरे- हलाल) बना दिया जाता है । एक बकरी को मारकर धड़ अलग कर उसके शरीर को बीच में रख देते हैं.घुड़सवा
 
Poonam Misra
Dec 29 2009 11:45 AM
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सलाम काबुल -१

इस बार फ़िर गर्मी की छुट्टियों में काबुल जाने का कार्यक्रम बना। अफगानिस्तान का नाम सुनते ही लगता है की अरे यह भी कोई जगह हुई जाने की । दिल्ली से एयर इंडिया की उड़ान है सवेरे ७.४० पर। १ घंटे ४५ मिनट का सफर है और जब तक आप सवेरे की टूटी हुई नींद पूरी करत
 
Poonam Misra
Dec 29 2009 11:45 AM
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काबुल फ़िर से २००८

खँडहर कहते हैं इमारत की बुलंदियों की कहानी काबुल का दारुल अमन (शान्ति का घर) जो एक समय यहाँ के राजा का महल था .१९२० में यहाँ के राजा अमानुल्लाह खान ने इसको बनवाया था और उनका इरादा था अफगानिस्तान में प्रजातंत्र स्थापित करना । नब्बे के दशक में यह शानदा
 
Poonam Misra
Dec 29 2009 11:45 AM
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जोधा अकबर

बोर्ड की परीक्षाएँ खत्म हुईं और प्रोग्राम बना जोधा अकबर देखने .फिल्म तो पिछले महीने रिलीस हो गई थी पर इम्तिहान के चलते देखने का मौका अब मिला। देखने का मुझे बहुत शौक नहीं है और ह्रितिक रोशन , ऐश्वर्य राय दोनों ही मुझे कोई ख़ास नहीं सुहाते पर आशुतोष गो
 
Poonam Misra
Dec 29 2009 11:45 AM
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मेरा अपने से क्या रिश्ता है

कितने रिश्ते बनाते हैं हम और न जाने कितने रिश्ते निभाते हैं हम पर अपने से कोई रिश्ता बनाया है क्या हमने कभी ख़ुद से कुछ निभाया है हमने ? सब रिश्ते बेमानी हैं अगर ख़ुद को नहीं पहचाना है हमने भाई बहन ,माँ बाप,पति, पत्नी, पिता,पुत्र, पुत्री,मित्र,सहेली
 
Poonam Misra
Dec 29 2009 11:45 AM
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मोनार्क तितलियों का अद्भुत प्रवास

एक शाम को घुमंती बेन मिलीं तो मैंने उनसे पुछा," अरे बेन, क्या बात है कोई नयी जगह की सैर पर नहीं गयीं. घुमंती बोली," अरे जब मैं दक्षिण अमरीका गयी थी ,तभी उत्तर की और ,उत्तरी अमेरिका महाद्वीप के मेक्सिको देश में एक और विश्व विरासत स्थल है ,उसको भी देख
 
Poonam
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एमज़ोन के वर्षा वन

इन्द्रधनुष के लिए UNESCO विश्व विरासत श्रृंखला की यह पहली कड़ी है . अभी सम्पादकीय कैंची से यह गुज़रा नहीं है । मेरे एक दोस्त हैं घुमक्कड़ मियां।उनके पैरों में तो जैसे चक्करघिन्नी लगी हुई है . जब देखो अपना बैग उठाते हैं और चल देते हैं दुनिया की सैर करने
 
Poonam
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सौंप और उनका विष

इन्द्रधनुष के लिया लिखा एक लेख । सांप का नाम सुनते ही हम सबको बस एक चीज़ ध्यान में आती है और वह है सांप का ज़हर । सांप के डसने से सबको डर लगता है और इसलिए सांप दिखते ही उसे मार दिया जाता है। .लेकिन ऐसा ज़रूरी नहीं की सांप का ज़हर हमेशा जान ही ले ले.क
 
Poonam
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इन्द्रधनुष ..एक बाल पत्रिका

हिमाचल में मंडी-कुल्लू सीमा पर एक छोटा सा गाँव है शोझा .यहाँ पहुचने के लए ६ किमी की कठिन चढाई करनी पड़ती है. वहां से एक निवासी हर महीने एक निश्चित तारीख को इसलिए नीचे आता है की उसे ४ प्रति इन्द्रधनुष की लेनी है अपने गाँव के बच्चों के लिए. १२ रुपये की
 
Poonam
Oct 14 2009 07:42 PM
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सास बहू और बहुत कुछ ......

तबादला न हो पाने से आजकल कुछ ऐसी स्थिति बन गई है की मैं एक हफ्ता लखनऊ और एक हफ्ता दिल्ली मैं रहती हूँ। दिल्ली में रहने पर छुट्टी लेनी पड़ती है सो दिन भर घर पर ही रहती हूँ। बहुत दिनों बाद घर पर ब्रॉडबैंड चालू हो पाया । दिन भर या तो कोई किताब पढो या टी
 
Poonam
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पुनरागमन दिल्ली

दिल्ली से लखनऊ और लखनऊ से दिल्ली करते अब दो महीने हो गए.लखनऊ से दिल्ली तबादले की अर्जी दी है ,न जाने कब होगा उसका असर. तब तक हर सप्ताहांत हवाई यात्रा के न्यूनतम किराये की खोज कर एक हफ्ते आफिस और एक हफ्ते घर सँभालने का सिलसिला जारी है. करीब ३ साल बाद
 
Poonam
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होली के रंग

होली के रंग हैं रंगे अंग अंग हैं अंग में तरंग है तरंग से उमंग है । अबीर है गुलाल है गुलाल से लाल है लाल हुए गाल हैं गले सब मलाल हैं नगाड़ा है ढोल है ढोल के बोल हैं बोल पर डोल रहे डोले दिल खोल हैं मस्तानों की टोली है टोली में रंगोली है रंगों की यह होली
 
Poonam
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प्रेम पत्र या प्रमाण पत्र

कुछ अरसा हुआ सुनीता (शानूजी ) एक कविता पढ़ी थी प्रमाण पत्र जिस पर मैंने एक टिप्पणी की । उनकी कविता से सधन्यवाद प्रेरित होकर उसी टिप्पणी को विस्तार देकर यह कविता गढ़ी है. पति की बातों पर मत जाना प्रेम पत्र बहकावा है इश्क विश्क की बातें करना मर्दों का छल
 
Poonam
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बसंत

गेहूं की बाली है,अमवा की डाली है चारों ओर बहती पवन मतवाली है। पीताम्बरी सरसों कैसे लजाती है , झूम झूम कैसे शरमाती इतराती है। कोयलिया काली बावरी हुई जाती है , कुहू कुहू करती सबको तडपाती है। नई कली कैसे मंद मंद मुस्काती है तरु तरु नई कोपल नई आस जगाती ह
 
Poonam
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सलाम काबुल....७ ( कुछ खरीदारी हो जाए)

काबुलीवाला जब हिंदुस्तान आता था तो उसके झोले में रहते थे सूखे मेवे । अफगानिस्तान का बादाम,किशमिश,अखरोट , अंजीर और पिस्ता बहुत दुनिया भर में पसंद किए जाते हैं. वहाँ का मौसम खुश्क रहता है इसलिए इन सूखे मेवों का ख़राब होने का डर नहीं रहता। काबुल में है
 
Poonam
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सलाम काबुल..६( पोटरी)

हमारे देश में अगर खुर्जा और लखनऊ के नजदीक चिनहट की पोटरी मशहूर है वैसे ही काबुल के पास एक गाँव है इस्तलिफ जहाँ के कुम्हारों ने अपने हुनर को तमाम मुश्किलों के बावजूद बरकरार रखा है। यहाँ पर इस कला को यहाँ के कलाकारों ने पिछले ३०० साल से संजोया हुआ है।
 
Poonam
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सलाम काबुल ....५(सलांग)

काबुलीसे १००किमि दूर है हिन्दू कुश की पर्वतमाला में सलांग पास जो काबुल और उत्तरी अफगानिस्तान के बीच आवाजाही सुगम बनाता है.हमने तय किया की एक दिन माला. . माला घूमने जायेंगे . निश्चय हुआ सवेरे निकल पड़ेंगे जिससे शाम को अँधेरा होने से पहले काबुल के अन्दर
 
Poonam
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सलाम काबुल ....बर्फ और स्नोमन

सुबह खैर काबुल! इस बार काबुल की ठण्ड देखने का प्प्रोग्राम बना और नए साल का आगाज़ भी वहां पर ही.सो यह जाड़े की छुट्टियों में पहुँच गए काबुल.वैसे भारतीय दूतावास में आत्मघाती हमले के बाद काबुल यात्रा का वृतांत लिखने की बहुत इच्छा नहीं हुई । एयर इंडिया के
 
Poonam
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आइये शाम का नाश्ता मेरे साथ

दाल चावल रोटी की खुशबू से खिंची जब उस रसोई में पहुँची तो एक से एक शानदार रेसिपी दिखीं .मेरे मन मुताबिक,बनाने में आसान और स्वाद में बेमिसाल.सोचा ,आज सोचना छोड़ कुछ कर लिया जाए. सो आफिस से घर पहुँचते ही पुदीने के पत्ते किचेन गार्डन से तोडे. बेसन घर में
 
Poonam
Jul 04 2008 01:58 PM