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16 Jun 2010
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बड़े धर्म और छोटे देवता

चर्चित इतिहासकार विलियम डैलरिंपल ने हाल में अमेरिकी पत्रिका नैशनल इंटरेस्ट में प्रकाशित एक लेख में दक्षिण भारत के अपने एक अटपटे अनुभव का उल्लेख किया है। ईसाइयों और हिंदुओं की मिली-जुली आबादी वाले केरल के एक इलाके में वर्जिन मेरी को देवी भगवती की बहन माना
 
चंद्रभूषण
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सुनो, चिड़िया कुछ कहती है

चिड़िया हमारे पर्यावरण की थर्मामीटर जैसी हैं। उनकी सेहत, उनकी खुशी बताती है कि जिस माहौल में हम रह रहे हैं , वह कैसा है। प्रदूषित हवा से होने वाली तेजाबी बारिश का असर हमारी जिंदगी में देर से जाहिर होता है , लेकिन इससे चिड़ियों के अंडे पतले पड़ने लगते हैं
 
चंद्रभूषण
Jun 11 2010 02:35 PM
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युद्ध और उबासियां

पीछे उबासियां थीं और आगे युद्ध थाहमने नदी पार करने की सोची ताकि युद्ध में उतर सकेंअंतहीन चौड़ी लगती थी नदीचांदनी रात में उसकी लहरें ठोस चांदी की तरह चमकती थींलेकिन हमें रोक पाता ऐसा उनमें कुछ भी नहीं थाजैसे-तैसे हमने नदी पार कीफिर एक नजर डोंगियों पर डाली
 
चंद्रभूषण
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नेपाल के माओवादी नेता पार्थ छेत्री से बातचीत

छह दिनों के जबर्दस्त तनाव के बाद नेपाल की सड़कों पर दोबारा शांति लौट आई है। प्रधानमंत्री पद से माधव नेपाल की विदाई और माओवादियों के नेतृत्व में नई सरकार के गठन पर सहमति बन जाने की खबर है, लेकिन संतुलन अभी काफी नाजुक किस्म का ही है। विरोध का मुद्दा
 
चंद्रभूषण
May 15 2010 07:29 PM
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यूं ही तो नहीं हुआ होगा

यहां तक मेरा आनाइतने सरंजाम सजानायूं ही तो नहीं हुआ होगाकिसी शाम नाकारा जानकरछोड़ दिया गया होऊंगाइतने बड़े सिर वाला बानर का बच्चाजो मां के पेट से चिपक भी नहीं पाताओह, तब भी इतना ही बड़ा था यह सिरजब शेयर बाजार नहीं बने थेलाला लोग मीडिया नहीं चलाते थेऔर
 
चंद्रभूषण
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नफरत का नाश्ता

लगता है गलत चुनापर चुनने को कुछ था नहींहोता तो प्यार चुनतानफरत क्यों चुनताजो कोलतार की तरहसदा चिपटी ही रह जाती हैकोई चांस नहीं थाजहां तक दिखा नफरत ही देखीउसी का कुनबा उसी का गांव उसी का देश और उसी की दुनियाजहां वह कम दिखती थीलोग उसे प्यार कहते थेफिर खाली
 
चंद्रभूषण
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आन्या स्मिरनोवा से बातचीत

भरतनाट्यम की महत्वपूर्ण नृत्यांगना, यूक्रेन निवासी आन्या स्मिरनोवा पिछले दिनों भारत आई थीं। दिल्ली में और विशेष रूप से तंजौर में उनकी प्रस्तुतियां काफी चर्चित रहीं। यूक्रेन की राजधानी कीव में नक्षत्र नाम से एक भारतीय थिएटर चलाने वाली आन्या उन विरले
 
चंद्रभूषण
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क्रांति और खुदकुशी

कॉमरेड कानू सान्याल की आत्महत्या की खबर सुनकर मन बहुत दुखी है। हमारे अखबार में यह खबर कवर पर है लेकिन खबर में ही नहीं, खबर के शीर्षक में भी नाम की जगह कनु सान्याल लिखा हुआ है। हाई प्रोफाइल मीडिया के लोग ऐसी गलतियों पर अब पछताते नहीं। टोकने पर हिकारत से
 
चंद्रभूषण
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सपनों की बात

एक बंद दरवाजा खुलता हैएक गहरा आंगन दिखता हैएक बड़ा पीतल का हंडाएक चापाकलएक चीनी की बोरी खुली हुईनाबदान पर मांजने कोया चढ़ाने से पहले धोने को रखे बर्तनयहां कोई आयोजन हो चुका हैया शायद होने वाला हैलेकिन मैं यहां क्यों हूंपता नहीं चलताएक उखड़े हुए सूखे पेड़
 
चंद्रभूषण
Feb 20 2010 06:39 PM
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सुन्न शिखर का मुसाफिर

वहां अब शब्द नहीं हैंध्वनियां हैं फकत...और भागती हुई तस्वीरेंकुछ धुंधले अर्थों के गिर्द मंडराती हुईखिंचे चेहरे और ऐंठी जीभ से निकलाएक सवाल मुझ तक पहुंचता हैआप क्या वीर है?वीर? कौन? अजी मैं कहां?एक मुस्कान धूमिल जर्द चेहरे पर दिखती हैनिराशा से भरी हुई,
 
चंद्रभूषण
Feb 18 2010 06:24 PM
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शादी का घर

यह एक सुंदर वैवाहिक दृश्य हैदो शिक्षित, सुरुचि संपन्न ब्राह्मण परिवारएक आरआई और दूसरा एनआरआईस्नेह बंधन में बंध रहे हैं।मोहल्ले के झगड़े की तरह मंत्र धांसताबनारस का एक चतुर चिबिल्ला पंडितदोनों तरफ से हजार-हजार के नोटझींटते हुए ठग मुद्रा में हंस रहा है।एक
 
चंद्रभूषण
Feb 13 2010 06:32 PM
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दर्द ज्यादा है और मौत करीब

दर्द ज्यादा है और मौत करीबधूप-छांह और अकुलाहट भरी उमस के बीचखुले निचाट में मैं लेटा हुआ हूंमेरे लोग मुझे देखकर छिप-छिप जाते हैंजैसे मैं अभी उठूंगा और उन्हें खोज लूंगामां मेरी उठकर कहीं दूर चली जाती हैकि जैसे लौटेगी तो भला-चंगा मिलूंगा उसेमैं भी कुछ देर
 
चंद्रभूषण
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ठंड काफी है मियां, बाहर निकलो तो कुछ पहन लिया करो

पिछले सप्ताह दिवंगत हुए समाजवादी नेता जनेश्वर मिश्र ने करीब चार साल पहले डॉ. राम मनोहर लोहिया से जुड़ा यह किस्सा मुझे सुनाया था। मैं और शशिधर पाठक उस वक्त सहारा समय साप्ताहिक में थे और लोहिया के जन्मदिन पर उनसे कुछ बातचीत करने गए थे। जनेश्वर जी मिठाई के
 
चंद्रभूषण
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रोमन हिंदी भी हिंदी है

जब हम हिंदी भाषा के विनाश पर दुखी हो रहे होते हैं या उसका स्वर्ण युग दर्ज कर खुशी जता रहे होते हैं तो अनजाने में हमसे एक छोटी सी गलती हो रही होती है। अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, स्पेनिश या अरबी, फारसी, चीनी, जापानी की तरह हिंदी कोई यकसार भाषा नहीं है। ह
 
चंद्रभूषण
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यहां और वहां क्या, तब और अब क्या

ईसा से करीब एक हजार साल पहले रचे गए अथर्व वेद में आई एक ऋचा का अर्थ यह है कि अगले दिन तक याद रह जाने वाला कोई सपना अगर आधी रात से पहले देखा गया हो तो उसका प्रतिफल अधिक समय बाद देखने को मिलता है, लेकिन यदि इसे प्रात:काल के आसपास देखा गया हो तो इसका शी
 
चंद्रभूषण
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अंग्रेजी अपनी दिव्यता खो रही है

अंग्रेजी से मेरे परिवार की मुठभेड़ गुलाम भारत में शुरू हुई थी। दादा जी संस्कृत के अध्यापक थे। एक बार उनकी बनारस में रहने वाले गांव के ही एक सज्जन से कुछ झड़प हो गई तो उनके अंग्रेजीदां लड़के ने डैम फूल जैसी कोई गाली बक दी। दादा जी इसका मतलब नहीं समझ प
 
चंद्रभूषण
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जितने नाकारा उतने धर्मधुरीण

तांत्रिकों और कथावाचकों का मंत्री बनना, सड़क घेर कर मंदिर और ग्रीन बेल्ट छेंक कर गुरद्वारे खड़े हो जाना, हर रात ही सिर खाते माता के जगराते, नए-नवेले भगवानों और धर्मगुरुओं का बढ़ता दायरा, हर जुमे को सड़कों पर आना-जाना दूभर बनाती नमाजी जमातें, और खुद क
 
चंद्रभूषण
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अठार में लिया बाई में बेक दिया

कल तो मैंने नेगी की ले ली- रोहित ने आज सुबह अचानक घोषणा की। रोज मेरे साथ वॉलीबॉल खेलने वाले रोहित पाल ऐसे बहुत सारे लोगों में एक हैं जो बिना किसी काम-धंधे की व्यवस्था किए घर पर बाप की जुगाड़ी संपत्ति से दिल्ली के आसपास एक फ्लैट खरीद कर यहां धूल से रस
 
चंद्रभूषण
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दुख क्या इतना बुरा है?

किसी बड़े मकसद के लिए बिना किसी से शिकायत किए चुपचाप तकलीफ सहना। कुछ इस तरह जैसे यह किसी ज्यादा गहरी खुशी की तलाश हो। लोग आज भी ऐसा करते हैं, लेकिन इसका कोई मेल आज के आम मिजाज से नहीं बनता। किसी और के लिए तो छोड़िए, अपने शरीर से जुड़ा इंसान का छोटा स
 
चंद्रभूषण
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प्रलय का लोकल ब्रोडकास्ट

कोई तीस साल पहले की बात है। जैसे अभी हॉलिवुड की फार्म्युला फिल्म 2012 को लेकर उठे हल्ले ने कई लोगों की हालत खस्ता कर रखी है, कुछ-कुछ वैसा ही हाल हमारे गांव का था। रेडियो में बराबर खबरें आ रही थीं कि स्काईलैब नाम की कोई बड़ी भयानक चीज धरती पर गिरने वा
 
चंद्रभूषण
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टिनहा सा टीटी

ठीक है, ठीक है, ले लेंगे लेकिन टेबल कहां है जो टेबल टेनिस खेलोगे। कई दिन से जा खा रहे बेटे को समझाने की एक और कोशिश मैंने की। टेबल नहीं, बेंच पर खेलेंगे, बेंच पर। कष्ट काटने के लिए मैं एक रैकेट खरीदने दुकान की तरफ रवाना हुआ। वहां ढाई सौ रुपये में एक
 
चंद्रभूषण
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बिल्डर ब्रोकर का कॉमनवेल्थ

आलम में इंतखाब दिल्ली शहर धूल और बारिश में बारी-बारी भच-भच करता कॉमनवेल्थ नाम के अगम-अगोचर गोदो का इंतजार कर रहा है। लगभग हर चौराहे पर फ्लाईओवर या तो बन गए हैं या बनने की प्रक्रिया में हैं। सड़कें खुदी हुई हैं। बगल में पड़ा ढेर सारा लोहा सड़ रहा है।
 
चंद्रभूषण
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पैसे का क्या है

पैसे का क्या हैवो तो हाथ का मैल हैपता भी नहीं चलता और चिपकता जाता हैकाफी जम जाए तो भी नजर नहीं आतादेखने में बिल्कुल साफ दिखते हैं हाथमगर पानी में डालो तो समझ नहीं पड़ताकि कालिख इतनी कहां छिपी थीपैसे का क्या हैइधर से आता है उधर चला जाता हैघेर-घार लेकिन
 
चंद्रभूषण
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गिलहरी का घोंसला

घर के सामने एक शहतूत और एक बकाइन का पेड़ है। दोनों मेरे ही लगाए हुए हैं। शकरपुर में लंबे समय तक रहते चिड़ियों की आवाजें भूल गया था। वैशाली, गाजियाबाद में अपना फ्लैट हुआ तो सबसे पहली चिंता यही हुई कि यहां चिड़ियां कैसे लाई जाएं। ये दोनों ऐसे पेड़ हैं जो
 
चंद्रभूषण
Aug 10 2009 07:15 PM
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सूखे में बारिश का इंतजार

पिछले पंद्रह दिनों से यही हाल है। कभी सुबह से ही ऐसा माहौल बनता है जैसे अभी जम कर बारिश हो जाएगी। लेकिन थोड़ी ही देर में बादल साफ हो जाते हैं या धुंधले पड़ जाते हैं। कभी शाम को बिजलियां कड़कती हैं लेकिन सारा किस्सा कहीं दूर का मालूम पड़ता है। हवा में
 
चंद्रभूषण
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एक थे उत्तम

कबाड़खाना पर समलैंगिक संबंधों को लेकर जारी उत्तम बहस देखकर उत्तम की याद आ गई। मेरे परिचय में आए लोगों में वह अकेले ही हैं जिन्हें मैं शुद्ध और सबलाइम स्तर तक पहुंचता हुआ समलैंगिक मान सकता हूं। बाकी जो भी लोग इस श्रेणी में दिखे, वे निरपवाद रूप से बाइस
 
चंद्रभूषण
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चुप लेटे मदान

इतवार की सुबह-सुबह एक अजीब घटनाक्रम में पता चला कि ब्रजेश्वर मदान को पैरालिसिस हो गया है। फोन किया तो कोई उठा नहीं रहा था। दो-चार फोन इधर-उधर खटकाने के बाद स्थिति का पता चला। घर उनके कुल दो बार ही जाना हुआ था लेकिन बिना किसी से रास्ता पूछे स्कूटर ठीक
 
चंद्रभूषण
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शादी में संपादक

मित्र प्रदीप एनडीटीवी में हैं- उत्साही फ्रीलांस रिपोर्टर से धीरे-धीरे वजनदार डेस्क हैंड में तब्दील होते हुए। अभी चार-पांच दिन पहले उनकी शादी थी। शादी के आयोजन में मिले पत्रकारिता जगत के तमाम बड़े छोटे लोग। प्रभाष जोशी से लेकर ओम थानवी और राजेश रपरिया
 
चंद्रभूषण
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मेरे नाम से भेजो

जिंदगी में आज पहली बार कोई मनीऑर्डर भेजा। अपने घर नहीं। वहां तो अब कोई रिसीव करने वाला ही नहीं है। इसकी डिलीवरी पलंगी के घर होगी। बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले में चेनमारी टी गार्डेन की फागू लाइन में। पलंगी एक मेड एजेंसी के जरिए हमारे घर में डोमेस्टिक हेल
 
चंद्रभूषण
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मार्क्सवादी, माओवादी और मालेवादी

वामपंथी मुख्यधारा का नेतृत्व भारत में लंबे समय से सीपीएम ही करती आ रही है। लेकिन इस बार के चुनावी नतीजों से न सिर्फ उसके लिए बल्कि उसके नेतृत्व में चलने वाली सीपीआई, आरएसपी, फॉरवर्ड ब्लॉक और कुछ छिटपुट अन्य वाम दलों के लिए भी एक मुश्किल दौर की शुरुआत
 
चंद्रभूषण
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रमाकांत-सूर्यकांत

एक सुबह दिल्ली आने के लिए कप्तानगंज से बस पकड़ते हुए दोनों एक साथ ही मिल गए। बस सेकंड भर का खुटका, और लगा कि अभी कल ही शाम बस्ता कंधे पर टांगे स्कूल से घर जाने के लिए अलग हुए हों। रमाकांत उपाध्याय और सूर्यकांत राय। माट्साब लोग इन्हें दो बैलों की जोड़
 
चंद्रभूषण
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ओए राजू, प्यार ना करियो

अराजीबाग में हमारा कमरा सड़क से थोड़ी दूर खेत में था। उस तरफ मोहल्ले के पिछले मकानों की नालियां निकलती थीं और बिजली विभाग के किन्हीं इंजीनियर साहब ने अपने विभाग को चूना लगाने के बाद हम जैसे किरायेदारों के साथ यही क्रिया दोहराने के लिए इसे खड़ा किया थ
 
चंद्रभूषण
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करुण कन्या का आतंक और राजू का अवतरण

सड़क चलते आदमी को यह बिल्कुल नजर नहीं आता। आजमगढ़ में शिवमूर्ति चौराहे के पास लाल डिग्गी बंधे के नीचे एक रास्ता झटकू पहलवान के अखाड़े की तरफ गया है। इस अखाड़े के बगल में ही ढूह जैसी जगह पर एक गणेश मंदिर है। शिब्ली कॉलेज में दाखिले के बाद पिताजी मुझे
 
चंद्रभूषण
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दोस्तों की याद में

कल शाम घर लौटते हुए एक मोड़ पर स्कूटर जवाब दे गया। मकेनिक खोज कर बनवाने बैठा, तभी फोन की घंटी बजी। अनजान नंबर। फोन उठाया तो किसी ने पूछा, मिश्रा जी का नंबर है? मैंने कहा, जी मैं चंद्रभूषण बोल रहा हूं, आपको किससे बात करनी है? फिर सीधे- अरे साले मैं नी
 
चंद्रभूषण
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नई चाल में ढली सियासत

सबसे पहले माफी चाहता हूं भाई अशोक पांडे से। यह टीप लिखनी थी कबाड़खाने के लिए लेकिन ब्लॉग खोला तो पता चला कि पहलू बेचारा रो रहा है कि एक महीने से यहां कुछ नहीं पड़ा। बहरहाल, अगली राजनीतिक टीप वहीं पड़ेगी, यह वादा रहा। चुनाव नतीजे जो आए, उनका अनुमान कि
 
चंद्रभूषण
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बिहटा का खामोश पीपल

क्या आपने शाम के वक्त किसी विशाल पीपल के पेड़ को खामोश देखा है? शुरुआती जाड़ों की गुनगुनी धूप गुजर जाने के बाद थिर आकाश में टंगा कांपते पत्तों वाला जंडइल पीपल का स्तब्ध पेड़, जिस पर एक भी चिड़िया नहीं बोल रही हो, यहां तक कि गिलहरी के किटकिटाने या झीं
 
चंद्रभूषण
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राहुल पांडे की ऐंग्जाइटी

एक दिन फोन किया तो पता चला कि सज्जन अस्पताल में पड़े हैं। उनकी पत्नी ने बताया कि कैल्शियम का अटैक पड़ा है। इस तरह की बीमारी के बारे में पहले कभी सुना नहीं था, फिर भी मानने के अलावा कोई चारा नहीं था। कुछ दिन बाद फिर फोन किया तो इस बार फोन पर खुद राहुल
 
चंद्रभूषण
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सांझ ढले आईना देखा

दाईं भौंह पर कटे का निशान आंखों की कोर पर कौओं के पंजे माथे पर आड़े-तिरछे टूटे-बिखरे इतने सारे बल सब कुछ ठीक होने पर भी जो नहीं जाते नहीं जाते निचले होंठ के दोनों किनारों पर नीचे को निकलती गहरी नालियां दाईं लंबी बाईं कुछ छोटी आंखें भीतर को धंसी चुंधि
 
चंद्रभूषण
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मजबूरी का महिमामंडन

सारे नेता अपराधी पालते हैं, उन्हें टिकट देकर चुनाव लड़वाते हैं, यही मायावती भी करती हैं तो इसमें गलत क्या है। सारे नेता भ्रष्ट हैं, पैसे खाते हैं, मायावती भी खाती होंगी, गलत क्या है। सारे नेता जाति की गोलबंदियां बना कर चुनाव जीतते हैं, मायावती उनसे अ
 
चंद्रभूषण
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कब्रिस्तान में कुछ गप्पें

अभय अक्खी मुंबई में घूम-घूम कर पेड़ों और फूलों की पहचान कर रहे हैं तो इधर दिल्ली में उनके दोस्त-मित्र भी उनसे ज्यादा पीछे नहीं हैं। पहचान भले न कर पाएं लेकिन दफ्तर की आलस भरी गर्म दुपहरिया में कुछ पेड़-पौधे देखने का जुगाड़ कर ही ले रहे हैं। संयोग से
 
चंद्रभूषण