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निनाद गाथा

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06 Jun 2010
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तुलसी बाबा तुमने कैसे

तुलसी बाबा तुमने कैसे इतना बड़ा ग्रन्थ लिख डाला,कैसे प्रभु राम के रस में डूबे, शब्द शब्द को ढाला,कैसे भाषा चुनी, भाव कैसे बांधे, कैसे काग़ज़ पर,कैसी कलम उठाई, कैसे बैठे थे, कैसे आसन पर,किस प्रहर लिखा, कैसा भोजन, कैसा पानी तुम पीते थे,कैसे थे वस्त्र
 
अभिनव
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सिएटल में विजय तेंदुलकर का 'कन्यादान'

विजय तेंदुलकर के सुप्रसिद्ध नाटक 'कन्यादान' का मंचन सिएटल की सांस्कृतिक संस्था प्रतिध्वनि द्वारा वॉशिंग्टन विश्वविद्यालय स्थित, जातीय सांस्कृतिक केंद्र के सभागार में किया गया। प्रतिभा सदैव नयी चुनौतियों की तलाश में रहती है. चुनौती जितनी कठिन हो उसे
 
अभिनव
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कविवर देवेन्द्र शुक्ल को समर्पित एक काव्य संध्या

पिछले दिनों उत्तर प्रदेश मंडल आफ अमेरिका (उपमा) द्वारा आयोजित कवि सम्मलेन में जाना हुआ. कार्यक्रम में शकुंतला बहादुर, नीलू गुप्ता, अर्चना पंडा, संजय माथुर, कोहिनूर चटर्जी सहित बे एरिया के अनेक कवियों को सुनाने का सुखद अनुभव प्राप्त हुआ. मुझे यह कवि
 
अभिनव
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शर्मा बंधुओं द्वारा मानस अनुष्ठान - १४, १५ एवं १६ मई - बंगलूरू के मित्र अवश्य जाएँ

मेरे बड़े भाईसाहब डॉ आदित्य शुक्ल रामचरितमानस के प्रबुद्ध वक्ता है. उन्होंने ये जानकारी दी थी कि ब्रह्मवादी सांस्कृतिक संघ, शर्मा बंधुओं द्वारा मानस अनुष्ठान कराने के विषय में विचार कर रहा है. आज उनकी ई मेल से सूचना प्राप्त हुयी कि कार्यक्रम १४, १५ एवं
 
अभिनव
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नव निधि के उजाले

ज्ञान के कारागृहों में दंभ के मुस्तैद ताले, भवन की ऊँची छतों पर रूढ़ियों के सघन जाले, देख कर विज्ञान की प्रगति विधि भी है अचंभित, हो पुरातन या नवल जो व्यर्थ है, वो सब तिरोहित, हम पताका हम ध्वजा हम स्वयं ही पहिये हैं रथ के, दो दिशाओं में हैं गुंजित
 
अभिनव
Apr 26 2010 11:28 AM
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सुनिए साक्षात्कार - जसपाल भट्टी एवं सविता भट्टी को विवाह की रजत जयंती की शुभकामनाएं

इधर अमेरिका के पूर्वी तट पर हुए एक कार्यक्रम में सविताजी एवं जसपाल भट्टी जी से मिलने का सुअवसर मिला. हमें भी कवितायें सुनाने के लिए इस कार्यक्रम में बुलाया गया था. भट्टी जी के फैन तो हम बचपन से हैं. मौके का लाभ उठाते हुए हमने उनका साक्षात्कार भी ले लिया.
 
अभिनव
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जली बरेली, हमको क्या?

नकली जीवन जी कर असली गीत लिखें ये मुश्किल है, लेकिन असली जीवन भी क्या अब जीने के काबिल है, प्रश्न बड़ा है, अड़ा पड़ा है, और खड़ा है रस्ते पर, टंका हुआ है चाँद सितारा, क्यों मुजरिम के बस्ते पर, भूख, गरीबी, मज़हब, बीबी, बदला खून खराबे का, इन सब में ही छिपा
 
अभिनव
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अमवसा क मेला - श्री कैलाश गौतम

अमिताभजी नें ई कविता पर 'अमौसा का मेला' पोस्ट की है. इसे अपने ब्लॉग पर पोस्ट करने का लोभ संवरण नहीं कर पा रहा हूँ. कैलाश गौतम जी की स्मृतियाँ एक बार पुनः आँखों के आगे आ गयीं. ऐसा लगा मानो हम आकाशवाणी में बैठे हैं और वो कह रहे हों, ज़रा लड़के को चाय पिलाओ.
 
अभिनव
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स्मृति शेष - कलम के सिपाही - सिएटल - रविवार १९ जुलाई २००९

भारतीय साहित्य जगत को पिछले कुछ महीनों में जो आघात पहुंचे हैं वे बड़े गहरे हैं. साहित्य ऋषि विष्णु प्रभाकर के देहवसान के एक सप्ताह के भीतर संस्कृत के परम विद्वान आचार्य रामनाथ सुमन के जाने का समाचार आया. अभी साहित्य संसार प्रातः स्मरणीय सायं वन्दनीय
 
अभिनव
Dec 29 2009 11:41 AM
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आचार्य रामनाथ सुमन

नश्वर है यह देह अनश्वर अपने आत्माराम हैं, जिनकी इच्छा बिना न जग में पूरे होते काम हैं, हमको प्रभु नें भेजा देखो हमनें जीवन खूब जिया, अच्छा पहना अच्छा गहना अच्छा खाया और पिया, हम जग में रोते आये थे हंसते अपनी कटी उमर, हमने राह गही जो अपनी वह औरों को ब
 
अभिनव
Dec 29 2009 11:41 AM
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अनूपजी की सिएटल यात्रा के चित्र और काव्य गोष्ठी के कुछ अंश

अनूपजी की सिएटल यात्रा के कुछ चित्रों को एक चित्रावली के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास नीचे किया है. चित्रावली देखने हेतु यहाँ क्लिक करें. ये बताइयेगा की चित्रों के नीचे लिखे हुए काप्श्न्स कैसे लगे और यदि इनको देखकर सिएटल घूमने का मन बने तो भी सूचि
 
अभिनव
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आमंत्रण - एक शाम अनूप भार्गव के नाम

आपको ये जानकार प्रसन्नता होगी की ई कविता याहूग्रुप के संस्थापक एवं हिंदी कविता के सुपरिचित एवं सशक्त हस्ताक्षर श्री अनूप भार्गवजी इस सप्ताहांत सिएटल आ रहे हैं. हमारे अनुरोध पर उन्होंने कुछ समय सिएटल के काव्य प्रेमियों के साथ बिताने पर अपनी सहमति प्रद
 
अभिनव
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हास्य दर्शन दो - अभिनव की काव्य प्रस्तुति का विमोचन

अभिनव शुक्ल के दूसरे काव्य एल्बम, 'हास्य-दर्शन २' का विमोचन 'विश्व हिंदी न्यास' के अधिवेशन में अमेरिका के न्यू जर्सी प्रान्त की एडिसन नगरी में हुआ। अनूप भार्गव, डॉ सुरेन्द्र गंभीर, शशि पाधा, स्वामी प्रज्ञानंद, मेजर जनरल केशव पाधा, कमांडर रविन्द्र शर्
 
अभिनव
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शबीना अदीब का बेहतरीन गीत - तुम मुझे छोड़ के मत जाओ मेरे पास रहो

इधर गुरुदेव से बात हो रही थी तो उन्होंने बतलाया की शबीना अदीब जी बहुत बढ़िया गीत लिखती हैं. आज यू ट्यूब पर उनका ये गीत सुनाने को मिला. सोचा छोटी दिवाली पर आप सबको भी सुनवाया जाए. आप सभी को दिवाली की ढेर सारी शुभकामनाएं. तुम मुझे छोड़ के मत जाओ मेरे पा
 
अभिनव
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साथ ऐसे रहें, जैसे परिवार हों,

पुनः प्रेषित - ज़रा बदलाव के साथ हम गुनहगार हों, चाहे बीमार हों, चाहे लाचार हों, चाहे बेकार हों, जो भी हों चाहे, जैसे भी हों दोस्तों, साथ ऐसे रहें, जैसे परिवार हों, कुछ नियम से बहे स्वस्थ आलोचना, हो दिशा सूर्योन्मुख सकारात्मक, व्यर्थ में जो करे बात व
 
अभिनव
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मेजर साहब को समर्पित कुछ छंद

पुनः प्रेषित दो दिन पहले सूचना मिली कि मेजर गौतम राजरिशी को गोलियां लगी हैं. आदरणीय पंकज सुबीर जी (गुरुदेव) से बात हुयी तो उन्होंने बताया कि पाकिस्तान से कुछ लोग अपनी बंदूकों पर हमारी सांस्कृतिक एकता का बिगुल बजाते, तथा अपने बमों पर सूफियाना कलाम गात
 
अभिनव
Sep 29 2009 10:15 AM
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मेजर साहब को समर्पित कुछ छंद

दो दिन पहले सूचना मिली कि मेजर गौतम राजरिशी को गोलियां लगी हैं. आदरणीय पंकज सुबीर जी (गुरुदेव) से बात हुयी तो उन्होंने बताया कि पाकिस्तान से कुछ लोग अपनी बंदूकों पर हमारी सांस्कृतिक एकता का बिगुल बजाते, तथा अपने बमों पर सूफियाना कलाम गाते हमारे साथ अ
 
अभिनव
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'हैप्पी हिंदी डे'

'हिंदी डे' की आपको बहुत मुबारकबाद,आई है ये शुभ घड़ी एक साल के बाद,एक साल के बाद चलो कुछ हिंदी कर लें, भाषा को कर चार्ज बैटरी अपनी भर लें,बात हमारी सुनकर के वो बोले, 'क्या बे?',हमनें हँस कर कहा गुरु 'हैप्पी हिंदी डे'.   वो सुबह कभी तो आएगी,वो सुबह कभी
 
अभिनव
Sep 15 2009 05:09 AM
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जय श्री राम! - एक वेबसाईट

आप सभी को नमस्कार,   इस वेबसाईट पर कुछ बहुत बढ़िया प्रवचन सुनने को मिले. परम आदरणीय जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी के प्रवचन अवश्य सुनियेगा.   www.totalbhakti.com   जय श्री राम!जय जय श्री राम!   आपकाअभिनव   वेद और पुराण सुनने
 
अभिनव
Sep 12 2009 05:21 AM
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काका को टक्कर - हप्पी बर्डे टू यू अनूप भार्गव जी

नाम रूप के भेद पर काका लिख गए काव्य,नाम काम हो उलट पुलट बड़ा सहज संभाव्य, बड़ा सहज संभाव्य, मगर काका को टक्कर,नाम अनूप और काम अनूप ये कैसा चक्कर,अनुपम बेला खिली रहे जीवन में आठों याम,काव्य कला का हो सदा पर्याय आपका नाम.जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं.
 
अभिनव
Sep 08 2009 11:57 AM
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हमें विभाजन से बहुत प्यार है

मुझे हिंदी की अनेक संस्थाओं को निकट से जानने का अवसर मिला है. एक बात जो लगभग सभी संस्थाओं में सामान रूप से महसूस की है वह है उसका विभाजन. चाहे बंगलोर की साहित्यिक संस्था हो या चाहे हैदराबाद की, चाहे लखनऊ वाले हों या अमेरिका वाले सब विभाजित होते रहे हैं.
 
अभिनव
Sep 07 2009 06:46 AM
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तुम्हारी और मेरी आवाज़

तुम्हारी आवाज़,आज तुमने मुझसे पूछा कि मुझे तुम्हारी आवाज़ कैसी लगती है,तो सुनो, तुम्हारी आवाज़ मुझे दुनिया की सबसे मीठी आवाज़ लगती है,जब जब तुम बोलती हो,खाना बन गया है,तुम आराम करो,लाओ मैं तुम्हारे पैर दबा दूं,मुझे लगता है की मेरे कानों में शहद घोल रही हो
 
अभिनव
Sep 05 2009 06:55 AM
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एक कविता - “आमार शोनार बांगला”

गूँजा था वन्दे मातरम का गान जहाँ से, गुरूदेव ने दी थी हमें पहचान जहाँ से, ये शस्य श्यामला, विवेकानंद की धरती, साहित्य में डूबी है शरदचंद्र की धरती, चैतन्य महाप्रभु के अदभुत प्रकाश ने, हमको दिखाई राह जहाँ थी सुभाष ने, उड़ती हैं खुशबुएं जहाँ गंगा की छाँव
 
अभिनव
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एक कविता - सूर्य, ग्रहण और मानव

मिहिर, भानु, आदित्य, दिवाकर,दिनकर, रवि, मार्तंड, प्रभाकर,पद्मिनिकांत, दिव्यांशु, नभश्चर,अरणी, द्युम्न, अवनीश, विभाकरआदिदेव, ग्रहराज, दिवामणि,छायानाथ, अरुण, कालेश,ध्वान्तशत्रु, भूताक्ष, त्रयीतन,वेदोदय, तिमिरहर, दिनेश,पुष्कर, अंशुमाली, प्रत्यूष,सूर्य देव
 
अभिनव
Sep 04 2009 04:42 AM
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इनका रूप संवर सकता है

एक बार लखनऊ से इलाहबाद जाते समय एक मजदूरनी सामने आ कर बैठ गयी. उसे आस पास के सभी लोगों नें बड़ी हेय दृष्टि से देखा और सब थोडा थोडा सरक गए. न जाने तभी कहाँ से ये भाव उड़ते हुए आये और काग़ज़ पर उतर गए.   इनका रूप संवर सकता है   अगर शुष्कता से
 
अभिनव
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तुम्हारी आवाज़

आज तुमने मुझसे पूछा कि मुझे तुम्हारी आवाज़ कैसी लगती है,तो सुनो, तुम्हारी आवाज़ मुझे दुनिया की सबसे मीठी आवाज़ लगती है,जब जब तुम बोलती हो,खाना बन गया है,तुम आराम करो,लाओ मैं तुम्हारे पैर दबा दूं,मुझे लगता है की मेरे कानों में शहद घोल रही हो तुम्हारी
 
अभिनव
Aug 22 2009 08:10 AM
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सम्बन्ध अभी जीवित है - श्रद्धांजलि

भारतीय साहित्य जगत को पिछले कुछ महीनों में जो आघात पहुंचे हैं वे बड़े गहरे हैं. साहित्य ऋषि विष्णु प्रभाकर के देहवसान के एक सप्ताह के भीतर संस्कृत के परम विद्वान आचार्य रामनाथ सुमन के जाने का समाचार आया. अभी साहित्य संसार प्रातः स्मरणीय सायं वन्दनीय
 
अभिनव
Aug 21 2009 01:39 AM
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मसखरा कवि से अधिक प्रणम्य है

अमिताभ जी बहुत बढ़िया लिखते हैं. इसका एक बड़ा प्रमाण ये है  कि आज सुबह जब मैंने उनकी ग़ज़ल 'माना मंचों का सेवन...' पढ़ी तो अपने मन के भावों को उतारे बिना नहीं रह पाया. ये मेरे नितांत निजी भाव हैं, किसी का इनसे सहमत या असहमत होना स्वाभाविक है. पर मु
 
अभिनव
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अमेरिका की सिएटल नगरी में हुई हिंदी कवियों की श्रद्धांजलि सभा

संयुक्त राज्य अमेरिका की सिएटल नगरी में आचार्य विष्णु प्रभाकर, आचार्य रामनाथ सुमन, पंडित छैल बिहारी वाजपेयी 'बाण', कविवर ओमप्रकाश आदित्य, कविवर अल्हड़ बीकानेरी, कविवर लाड़ सिंह गुज्जर, कविवर ओम व्यास ओम एवं कविवर नीरज पुरी की स्मृति में एक श्रद्धांजल
 
अभिनव
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लखनऊ से गुज़रे हैं लोग तो बहुत से मगर...

श्रद्धेय पंकज 'सुबीर' जी द्वारा आयोजित तरही मुशायरे हेतु यह ग़ज़ल नुमा रचना लिखी थी, आप भी पढिये. मिसरा था, "कितनी जानलेवा है दोपहर की खामोशी".   रहगुज़र की खामोशी हमसफ़र की खामोशी कितनी जानलेवा है दोपहर की खामोशी,   हिंदी और उर्दू में सिर्फ़
 
अभिनव
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एक और जन्मदिवस

एक और जन्मदिवस आ गया है द्वार पर,   सूर्य की परिक्रमाएं तीस कर चुका है तन, व्योम में भटक भटक के लक्ष्य ढूंढता है मन, ज़िम्मेदारियों की झील धीरे धीरे भर गई, केशराशि कुछ जगह और खाली कर गई, लो अधेड़ उम्र की तरफ चली नई नदी, लग रहा है मानो कुछ बुढा गई
 
अभिनव
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एक हिंदी कवि का अंग्रेजी इंटरव्यू

आप निम्न लिंक पर जाकर पृष्ठ १५ पर पढ़ सकते हैं, 'एक हिंदी कवि का अंग्रेजी इंटरव्यू'.   http://www.thesouthasiantimes.com/epaper/47_vol1_epaper.pdf  - Page 15
 
अभिनव
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लोरी - मेरे प्यारे सो जा रे

सो जा रे, सो जा रे, मेरे प्यारे सो जा रे, राज दुलारे सो जा रे, आंखों के तारे सो जा रे, सो जा रे, सो जा रे, मेरे प्यारे सो जा रे,   देख तुझे परियों की रानी सैर कराने आई है, झिलमिल झिलमिल तारों वाले खूब खिलौने लाई है, बिस्तर की गोदी में जाकर, अब न
 
अभिनव
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झूठ

झूठ, जब भी बोलता हूँ, थोड़ा सा गिर जाता हूँ, अपनी ही नज़रों में, इस गिरेपन के एहसास को लिए उठता हूँ, और फिर, एक और झूठ, मेरा दमन पकड़ कर मुझे नीचे खींच लेता है, सच बोलना चाहता हूँ, पर घबरा जाता हूँ, मन में अजीब सा भय, कुछ किचकिचा सा डर, जाता है ठहर, अप
 
अभिनव
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तब लगता है ठगा गया हूँ मैं जीवन के लेन देन में

तब लगता है ठगा गया हूँ मैं जीवन के लेन देन में, जब अयोग्य जुगनू सूरज के सिंहासन पर दिखता है, जब खोटा पत्थर का टुकड़ा कनक कणी सा बिकता है, जब शब्दों का मोल आँकने वाला मापक बहरा है, जब असत्य परपंच अनर्गल संभाषण ही टिकता है, मिलता है सम्मान उसी संभाषण क
 
अभिनव