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05 May 2010
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ग़म में हंसने वालो को कभी रुलाया नहीं जाता!

कहाँ रोज रोज मिलती है वजह यूँ इस तरह पास हमारे आने की,कुछ देर और ठहरो कि आँखों ने इजाजत नहीं दी है अभी जाने की क्या जरूरत है शर्म-ओ-हया को, लबों पर इस तरह पहरा बिठाने की,ग़र आँखों की जुबां समझो तो बात नहीं कुछ और तुम्हें बताने की कैद कर लेंगे इन आँखों
 
Neeraj
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हर पल खुदा से यही मांगता हूँ

हर पल खुदा से यही मांगता हूँ ,सदा यूँ ही दुल्हन की तरह सजती रहो !ना गम की परछाइयाँ आये कभी ,सदा यूँ ही हंसती रहो !!मैंने तो जोड़ लिया है तुमसे दिल का रिश्ता ,सदा यूँ ही मेरे दिल में बसती रहो !!!अब ना जी पाऊंगा कभी तुम्हारे बिन ,सदा यूँ ही मुझसे प्यार
 
Neeraj
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जब भी देखोगे मुझे इसी हाल में पाओगे,

जब भी देखोगे मुझे इसी हाल में पाओगे,आँख में आँसू, लबों को हँसता हुआ पाओगेतुम्हारा तो खैर यकीन है मुझे खुद से ज्यादा,आँसू दिया है जब आज तो कल भी रुलाओगेमेरा क्या है? एक अदना-सा आदमी ही तो हूँआखिर कब तक मुझे तुम याद रख पाओगे?मुझे तो अपनी ख़ाक पर भी कोई हक़
 
Neeraj
Feb 26 2010 12:17 AM
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उल्टी नगरी

उल्टी नगरी एक अनोखी, वस्तु जहाँ की उल्टी पुलटी. उल्टी दुनिया उल्टा पर्वत्, उल्टे पेड़ चिमनिया उल्टी. देती दूध चींटियाँ ख़्ररहे हल खींचे, चूहे हलवाहे. पैसा दुर्लभ, सुलभ अशरफ़ी, भोजन सबको खाना चाहे. दाड़ी मूंछ रखें औरतें, मर्द खिलाते घर मे बच्चे. रहते
 
Neeraj
Dec 29 2009 11:45 AM
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वक़्त नही

हर खुशी है लोगो के दामन में पर एक हँसी के लिए वक्त नही दिन रात दौड़ती इस दुनिया में जिंदगी के लिए ही वक्त नही माँ की लोरियों का अहसास तो है मगर माँ को माँ कहने का वक्त नही सारे रिश्तो को तो हम मार चुके अब उन्हें दफ़नाने का भी वक़्त नही सारे नाम मोबाईल
 
Neeraj
Dec 29 2009 11:45 AM
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ज़िन्दगी प्यारी सही लेकिन हमे मरना तो है!

लब पे पाबन्दी नही एहसास पे पहरा तो है फिर भी अहल-ए-दिल को अहवाल-ए-बशर कहना तो है अपनी गैरत बेच डालें अपना मसलाक छोड दें रहनुमाओं मे भी कुछ लोगो को ये मन्शा तो है है जिन्हे सब से ज़्यादा दावा-ए-हुब्ब-ए-वतन आज उन की वजह से हुब्ब-ए-वतन रुसवा तो है बुझ रह
 
Neeraj
Dec 29 2009 11:45 AM
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किसी और को दोस्त बनाने की ज़रूरत नही

रुला ना दीजिएगा... यू चुप रहके सज़ा ना दीजिएगा... ना दे सके ख़ुशी, तो ग़म ही सही... पर दोस्त बना के यूही भुला ना दीजिएगा... खुदा ने दोस्त को दोस्त से मिलाया... दोस्तो के लिए दोस्ती का रिस्ता बनाया... पर कहते है दोस्ती रहेगी उसकी क़ायम... जिसने दोस्ती
 
Neeraj
Dec 29 2009 11:45 AM
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एहसास

एहसास एक भावना,एक माध्यम है कुछ पाने और कुछ खोने का कभी ना कर सकी इस भावना का इज़हार और ना ही कभी किया है इंतज़ार एसे ही उमड़ पड़ता है जब कोई चीज़ बहुत हो ज़्यादा,या बहुत कम दबे पाव आए , आहट भी ना होये बस एक हलचल महसूस करता है गम और खुशियों से मिलन क
 
Neeraj
Dec 29 2009 11:45 AM
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तुझे किया कहूं अए ज़िन्दगी...

तुझे किया कहूं अए ज़िन्दगी , तेरे एक पल की खबर नहीं में करून यकीन भी तो किस तरहां , तेरी शब् की कोई सहर नहीं मेरी खुवैशूं का यह सिलसिला , है खान तक यह खबर नहीं यह सफ़र सदी पे मुहीत है , मेरी उम्र एक पहर नहीं जहां दो घडी का सकूं मिले ,तेरी राह मैं वोह
 
Neeraj
Dec 29 2009 11:45 AM
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डा. अहमद अली बर्की़ आज़मी की तीन ग़ज़लें

१ सता लें हमको, दिलचस्पी जो है उनकी सताने में हमारा क्या वो हो जाएंगे रुस्वा ख़ुद ज़माने में लड़ाएगी मेरी तदबीर अब तक़दीर से पंजा नतीजा चाहे जो कुछ हो मुक़द्दर आज़माने में जिसे भी देखिए है गर्दिशे हालात से नाला सुकूने दिल नहीं हासिल किसी को इस ज़माने
 
Neeraj
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$$$$$ नेता जी $$$$$

झागरों शे अब करो किनारा डूब रहा है देश हमारा !! सी. डी. के झूठ पर्दों से वक्त फिरे है मारा-मारा !!!! चोर इधर से उधर गये हैं सोना मत अब पहरेदारों !! घना अंधेरा मंगाई का घर से चला गया उजियारा!!!! एक कयामत बरपा होगी भूख ने जब लोगों को मारा!! ये मत भूलो
 
Neeraj
Dec 29 2009 11:45 AM
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एक छोटी-सी लव स्टोरी

एक छोटी-सी लव स्टोरी अपनी भी बन जाये किसी के साथ जोड़ी अपनी भी जच जाये इक हसीना मिल जाये कोई महजबीना मिल जाये लाइफ़ अपनी भी सेटेल हो जाये इक छोटी-सी लव स्टोरी अपनी भी बन जाये थोड़ी-सी मीठी हो वह थोड़ी-सी तीख़ी हो वह सीधी-सादी भोली-भाली हो जो वाइफ़ मेरी
 
Neeraj
Dec 29 2009 11:45 AM
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नींद क्यूं रात भर नही आती

कोई उमीद भर नही आती कोई सूरत नज़र नही आती मौत का एक दिन मुअय्यन है नींद क्यूं रात भर नही आती आगे आती थी हाल-ए-दिल पे हँसी अब किसी बात पे हँसी नही आती है कुछ ऐसी ही बात कि चुप हूँ वरना क्या बात कर नही आती काबे किस मूँह से जाओगे "गालिब" शर्म तुमको मगर
 
Neeraj
Dec 29 2009 11:45 AM
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आँखों में आँसू नहीं आते

आँखों में आँसू नहीं आते क्योंकि मैं जानता हूँ तुम लौटकर आओगी ज़रूर यह दिल तन्हा कहाँ है इसमें यादें हैं तुम्हारी तुम रहो कितने भी दूर देखता हूँ तुम्हें जब भी आँखें मूँद लेता हूँ और कोई कहाँ है इनमें हुज़ूर तुमसे प्यार किया है यह दिल का सौदा है तुम्हीं
 
Neeraj
Dec 29 2009 11:45 AM
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मेरी मोहब्बत क्या जाने

तू दिल कि हालत क्या जाने मेरी मोहब्बत क्या जाने मेरी रुह की गह’राई में बस तेरी पर’छाई है जिंन्दगी के खालिपन की एक तू ही भर’पाई है तू यादों की खुश’बू बन’के आज मुझ पे छाई है सांसो की तरह मेरी ध’ड़्कनों में तू समाई है तुझे दूर कैसे रखूँ अप’ने से ये तो प्
 
Neeraj
Dec 29 2009 11:45 AM
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खामोश निगाहों का सपना तुम हो

खामोश निगाहों का सपना तुम हो,जिसको भुला न सकूं, वो अपना तुम हो,जिसकी हर बात, मेरी तन्हाईयों को छू ले,सच ऐ ख्वाब, वो तुम हो,वो तुम हो, वो तुम हो।जिसकी धङकन की आवाज़,सिर्फ मैं सुनूं ,दिन और रात,जिसके आने की राह तकें,ये आंखे बार-बार,जिसकी खुशबू का
 
Neeraj
Sep 04 2009 11:02 PM
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दिल में छुपा रखा है तुझे याद बना के

दिल में छुपा रखा है तुझे याद बना के कभी सांसों का हौसला कभी फरियाद बना के हर एक कोने को रौशन किया तस्वीर से तेरी तेरी हर बात ने छोडा मुझे बर्बाद बना के आसमां ना गुमां कर ले रात की चांदनी पे कही तभी तो ज़मीं पे उतारा गया है तुझे चाँद बना के मै नए साल म
 
Neeraj
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कबीर अगर तुम न हुए होते

कबीर अगर तुम न हुए होते होते हम कितने निर्लज्‍ज और निष्‍ठुर तुम्‍हारी वाणियां और साखियां बार-बार स्‍मरण कराती हैं आदमी का कद कितना ओछा हो सकता है. कबीर अगर तुम न हुए होते तो होता केवल मिथ्‍या जगत तुम ही हो बटरोही बनकर मार्ग दर्शक आज भी अटल खड़े, अड़े
 
Neeraj
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मेरी रातें तुम्हारी यादों से

मेरी रातें तुम्हारी यादों से सजी रहती हैं मेरी सांसें तुम्हारी खुशबू में बसी रहती हैं मेरी आँखों में तुम्हारा ख्वाब सजा रहता है हाँ मेरे दिल में तुम्हारा ही अक्स बसा रहता है इस तरह मेरे दिल के बहुत पास हो तुम जिस तरह पास मुरीद के खुदा रहता है तुम को
 
Neeraj
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ऐसा वादा न कर मुझसे

ऐसा वादा न कर मुझसे की तू निभा न सके, इतना दूर न जा की कभी मुझ पे हक़ जता न सके, गलत्फमियों से न लगा नफरत की आग, की चाह कर भी तू बुझा न सके, न खीच दिल के आईने पे कुछ ऐसी रेखाएं जो चेहरा बदल दे, की अपनी ही सूरत तू धडकनों को कभी दिखा न सके, न बांध ज़मा
 
Neeraj
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सीने से आ के लग भी जा

सीने से आ के लग भी जा काबिल नही मै आपके, इसमे तो शक़ नही दिल तोडने का लेकिन, तुमको भी हक़ नही नज़रो की प्यास बुझ गयी, दिल को भी मिल रहा सुख होठो को चूम लेने दे, बाहे झटक नही बस एक पल की बात है, कितनी हंसीन रात है, चूनकर सरकने दे जरा, तू खुद सरक नही तेरा
 
Neeraj
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कितना पागल है ये दिल

कितना पागल है ये दिल कितना पागल है ये दिल हवा मे तुम्हारा पैगाम ढूंढता है इस जगह मे तुम्हारा निशान ढूंढता है आसमान मे तुम्हारा ये नाम ढूंढता है सितारे मगर बताते नही नज़ारे यहाँ के मानते नही झोंके कभी कुछ जताते नही ये इशारे भी दिल को समझाते नही विराने
 
Neeraj
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आखरी मुलाकात

आज जाने से पहेले उसने भी कुछ कहा था गम का थोड़ा सा असर उस पेर भी हो रहा था चुप होने से पहेले उन के लब हिले थे उस खामोशी के नगमे हम ने भी सुने थे एक लंबा दयरा सा बन गया अचानक जोर जोर से दे रहा था ये दिल सिने पर दस्तक गुज़र गई वो शाम हम कुछ भी ना कहेना
 
Neeraj
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कुछ पल गुजार लूं

रुक गई साँसे निकालने से पहले, कहा एक बार उससे मिललूं चलने से पहले, कुछ पल गुजार लूं उसकी बाहों में, ज़िन्दगी के ढलने से पहले, बहक जाऊं उसके आगोश में, किसी और के साथ संभालने से पहले, पत्थर बना लूं खुद को तो अच्छा है, एहसास जग न जाए यादों के बहल ने से
 
Neeraj
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प्रेम से जीत

नफरत ऒ फैलाने वालों यह तुम ठीक से जान लो नहीं सफल हो सकते तुम विष वमता में जान लो मजहब नहीं सिखाता बैर तुम्हे समझ क्यों ना आये हिंसा कर दहशत फैलाना रास तुम्हे कैसे आये मातृ-भूमी पर मर मिटने का जज्बा लिये हम जीते हैं अनाचारियों को खत्म करने का संकल्प
 
Neeraj
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सादा जीवन उच्च विचार

सादा जीवन उच्च विचार को अपनाये सरकार कोई बेचे ताज कोई मंदिर गुरुद्वार उच्च विचार को बेच दिया गैरों के हाथ बस जीवन की बाकी रह गयी कहानी कोई सोये खाली पेट कोई करे मनमानी कोई भूखों मरता है तो मर जाये मेरा बिल बस चार लाख का बन जाये यही है सादे जीवन की नय
 
Neeraj
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मैंने देखा है करवट बदलते हुए बादलों को

मैंने देखा है करवट बदलते हुए बादलों को.......... बारिश मै भीगते हुए आसमा को......... मैंने देखा है हवा के झोके से पेड़ों की डॉलियो को आपस मै सिमटते हुए........ मैंने देखा है पंछीयों को अपनी दिशा बदलते हुए........ मैंने देखा है इस रिम् झिम मै भिग्ते ह
 
Neeraj
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जहाँ प्यार मीले.

ना ग़मों के हो साये ना दर्द का नामों नीशां , ए दील चल चलें वहाँ जहाँ प्यार मीले । दूर ख्वावों के देश मे कोई तो होगा अपना , इन्तेजार में पलकें बीछाये तकता होगा रस्ता अपना । दूर ग़मों को छोड़ चलें हम, दर्द सारे भूल चले हम, छोड़ चलें उन यादों को , भूल चले
 
Neeraj