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कस्‍बा

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18 Jun 2010
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मुसलसल ग़ज़ल

वह कहते हैं हुकूमत चल रही हैमैं कहता हूँ हिमाक़त चल रही है उजाले जी हुज़ूरी कर रहे हैंअंधेरों की सियासत चल रही है सब अपने आप चलता जा रहा हैकहाँ कोई क़यादत चल रही है अगर इन्साफ है तो किसकी ख़ातिरअदालत पर अदालत चल रही है वह कल दुश्मन के होंगे साथ लेकिनअभी
 
ravish kumar
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नीतीश-नरेंद्र के झगड़े में हलवाई की मेहनत बेकार गई

10 मई २००९ को इसी कस्बा पर नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी के हवा में उठे हाथ पर एक लेख लिखा था। पंजाब में एनडीए की रैली थी। बिहार में मतदान खत्म हो चुका था। उससे पहले नीतीश यही कहते रहे कि नीतीश के साथ मंच साझा करने की ज़रूरत नहीं है। बरखा दत्त बार बार पूछ
 
ravish kumar
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उधार के रंगों से सपने हसीन नहीं होते

गंडक मेरे होने की साक्षी सिर्फ तुम्हीं हो तुम्हारी ही लहरों से बच कर आया था जब उसने दुपट्टे से खींच लिया था एक मन्नत भी मांगी सर पे भंवर पड़े हैं इसके ये फिर डूबेगा लहरों में तब भी रंग लिया था अपने सपनों कोकिनारे पर खड़े होकर पांव धोती सुहागिनों के आलते
 
ravish kumar
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नाइंसाफी की रात और खुशगवार मौसम

दसवीं मंज़िल की खिड़कियों से हवा बालकनी में उड़ी आ रही है। दिल्ली की आज की सुबह खुशनुमा है। शाम से ही हवा बदलने लगी थी। भोपाल से आने वाली हवा के असर को कम करने के लिए। हम ऐसे ही वक्त में रूमानी हो जाया करते हैं। दिल को बहलाने लगते हैं। लाखों लोगों की चीख
 
ravish kumar
टैग: bhopal-genocide
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इस राजनीति को कैसे देखें और क्यों देखें?

राजनीति एक छोटी फिल्म है। छोटी इसलिए क्योंकि अच्छी फिल्म होने के बाद भी दिलचस्प और बेजोड़ की सीमा से आगे नहीं जा पाती। कोई धारणा नहीं तोड़ती न बनाती है। अभिनय और संवाद और बेहतरीन निर्देशन ने इस फिल्म को कामयाब बनाया है। कहानी राजनीति के बारे में नई समझ
 
ravish kumar
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जाति को हम सिर्फ एक चश्मे से देख रहे हैं।

ब्रिटिश हुकूमत से दो सौ साल पहले राजस्थान के मारवाड़ में जनगणना हुई थी। इस जनगणना में जाति के हिसाब से घरों की गिनती हुई थी। 1658 से 1664 के बीच मारवाड़ राजशाही के महाराजा जसवंत सिंह राठौर के गृहमंत्री मुन्हटा नैन्सी ने कराया था। इतिहासकार नॉर्बेट पेबॉडी
 
ravish kumar
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रिमझिम गिरे सावन-इस गाने में दिखती है बंबई

हिन्दी सिनेमा में दिखने वाले शहर और गांव के स्पेस का अलग से अध्ययन नहीं किया गया है। विदेशी लोकेशन जाने की होड़ से पहले सत्तर और अस्सी के दशक तक ज्यादातर फिल्में अपने शहरों में ही बनती थीं। गानों से लेकर भागने दौड़ने के दृश्य में शहर की पुरानी तस्वीरें
 
ravish kumar
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डिस्को डांसर मिथुन चक्रवर्ती

मिथुन चक्रवर्ती को सबसे पहले मृगया में देखा था। उसके बाद हम पांच में। पतला दुबला एक लड़का जल्दी ही बालीवुड का पहला डांसिंग स्टार बन गया। मिथुन से पहले डांस के नाम पर शम्मी कपूर की छवि सामने आती थी। उन्होंने गानों को ऐसी रफ्ताशर दी कि लोग सिनेमा घरों से
 
ravish kumar
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आप अंग्रेज़ी सीखने के करीब पहुंच गए हैं

हिन्दी में अंग्रेज़ी सीखाने के ये साइन बोर्ड। हॉस्पिटलाइज़ेशन के चंद घंटे बाद ही मरीज़ को ठीक करने का दावा किया जा रहा है। अंग्रेजी में पारंगत होने की टॉनिक मिलती है यहां। भाषाई राष्ट्रवाद का कचूमर निकलने के बाद अंग्रेजी के शरण में जाये बिना क्या होगा।
 
ravish kumar
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मेरा नंबर ही मेरी पहचान है

नाम ग़ुम जाएगा, चेहरा ये बदल जाएगा, मेरी आवाज़ ही पहचान है। ग़र याद रहे। बॉलीवुड का यह गाना मेरे पसंदीदा गीतों में से एक है। पहचान के तमाम निशानों के मिट जाने के बाद भी आवाज़ पहचान बनी रहेगी,कवि की कल्पना की दाद देनी चाहिए। हम वैसे ही कई पहचानों के साथ
 
ravish kumar
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मोटी तगड़ी औरतों के कपड़े की दुकान

नई दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में हमारा दफ्तर है। ठीक उसी के सामने यह दुकान खुली है। बहुत दिनों से है। आज अचानक नज़र पड़ी। दुकान में रखी माटी की मूरत कुछ तगड़ी नज़र आई। सोचा कि आम तौर पर ऐसी मूर्तियां छरहरी और गंजी हुआ करती हैं। ये मोटी तगड़ी क्यों हैं।
 
ravish kumar
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ज़रा कबाड़ीवाले से कहना कि उठा कर दिखाये गामा सेल

साइंस एडिटर पल्लव बागला के साथ डीआरडीओ के कैम्पस में जाने का मौका मिला। यहां भी गामा सेल है। वही गामा सेल जिसे दिल्ली विश्वविद्यालय ने कबाड़ में बेच दिया। चंद कदम दूर लखनऊ रोड पर स्थित इनमास में गामा सेल १९६७ से काम में लाया जा रहा है। रखरखाव के कारण
 
ravish kumar
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जलसेवक तोताराम

दिल्ली विश्वविद्यालय के ठीक सामने के रिंग रोड पर माल रोड है। उसके पीछे लखनऊ रोड है तिमारपुर है। वहीं मेरी नज़र तोताराम पर प़ड़ी। तोताराम सब्ज़ी बेचने का काम करते हैं। एटा ज़िले के कासगंज के रहने वाले हैं। दिल्ली में ही बचपन बीता। एक दिन सब्ज़ी बेचते
 
ravish kumar
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निरुपमा के लिए न्‍याय Petition

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मार्केटिंग की ही थ्योरी

आईआईएम अहमदाबाद वाले फालतू की चीज़ों पर रिसर्च करते रहते हैं। कभी इस पर रिसर्च करनी चाहिए कि हिन्दी बाज़ार जगत में ही का क्या महत्व है। ही लगाने से किस तरह की एक्सक्लूसिविटी का निर्माण होता है। इसकी शुरूआत कैसे हुई। रिश्ते ही रिश्ते से चलकर शीशे ही
 
ravish kumar
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कार्नर शॉप की महिमा..

दिल्ली शहर को ढूंढने का शौक पुराना है। कहीं भी जाता हूं तो लगता है कि एक बार चारों तरफ से घूम कर देख लूं। पिछले हफ्ते कनाट प्लेस गया था। रीगल बिल्डिंग के पीछे चलने लगा। मोहन जी प्लेस के ठीक पीछे एक गली में मटन की दो दुकानें दिखीं। कार्नर शॉप। ऐसी दुकानें
 
ravish kumar
Apr 29 2010 11:11 AM
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सामाजिक समरसता वाले नरेंद्र मोदी का गांधी मंदिर

दैनिक भास्कर के दसवें पेज पर पड़ी इस ख़बर पर नज़र पड़ गई। महात्मा गांधी का मंदिर बनेगा। गुजरात सरकार के कर कमलों द्वारा। एक सौ बत्तीस करोड़ का मंदिर। गांधी ज्ञान का प्रसार करने के लिए नहीं,बल्कि दुनिया के पर्यटकों को बुलाने के लिए। गांधीनगर में बनने वाले
 
ravish kumar
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शौच के बदलते संस्कार

दिल्ली के एक अस्पताल में यह चेतावनी नज़र आई। शौचालय के इस्तमाल को लेकर सामाजिक कैटगरी तेजी से बदल रही है। फिर भी हिन्दुस्तान में तीन तरह के लोग हैं। एक जो खुले में जाते हैं,दूसरे जो इंडियन शैली की शीट का इस्तमाल करते हैं और तीसरा कमोड वाले। शौचालय के
 
ravish kumar
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निर्लज्ज दर्शक और क्रिकेट के दलाल विशेषज्ञ

आईपीएल का जन्म क्रिकेट के विकास के लिए हुआ था। लफंगई के इस खेल में कुछ महान विचारक क्रिकेट का भविष्य देख रहे थे। ललित मोदी को दलाली के इस दंगल के रचयिता के रूप में पूजा जा रहा था। ये विचारक उसी कैटगरी के हैं जो मान कर चलते हैं कि सरकारी विभागों में काम
 
ravish kumar
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अब सत्तू की भी शेखी देख लीजिए..

दक्षिण दिल्ली के अंबेडकरनगर में टहल रहा था। एक साथ इतने शेखों को देखकर नज़र ठहरनी ही थी। मैंगो और बनाना शेक के एकछत्र राज में सत्तू और जौ ने सेंध मार दी है। हि्न्दी के व्याकरणाचार्यों की बिना इजाज़त के दवाइयां की जगह दवाईयां लिखने वाली दिल्ली ने शेक को
 
ravish kumar
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करोलबाग कथाइज़ेशन- गफ़्फ़ार टू हनुमान

करोलबाग किस्सों से भरा है। कई किस्सों को जानबूझ कर छोड़ दिया। बीस मिनट की फिल्म में समाना मुश्किल था। अप्रैल १९९४ से हनुमान की यह मूर्ति बननी शुरू हुई। महंत ओम गिरी ने बताया कि नागा बाबा ने कहा कि उनके सपने में हनुमान आए थे और कह गए हैं कि मूर्ति बने।
 
ravish kumar
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रैगरपुरा एक दिन कोलकाता हो जाएगा-करोलबाग से लौटकर

रैगरपुरा...रैगरपुरा में रहते हैं...रैगरपुरा के बारे में ऐसे बात करते हैं जैसे कोई जगह नहीं है। जैसे यहां खाली दलित समाज ही रहता है। आके तो देखो कितना विकास हुआ है। तब तो समझ में आएगा कि इहां बांगाली कैसे रहता है। चंडीचरण दास पूरी भाव भंगिमा के साथ
 
ravish kumar
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गांधी कथावाचकों को तैयार करने का मन तो है पर योजना नहीं

नारायण देसाई से मिलने की तमन्ना शनिवार को पूरी हो गई। पचासी साल के तेज़ तर्रार और ज़िन्दादिल बुज़ुर्ग से मिलकर अच्छा लगा। बताने लगे कि कैसे गांधी कथा तैयार हो गई। गुजराती में बापू की जीवनी तैयार हो रही थी। साढ़े चार साल में चार खंडों में तेईस सौ पेज का
 
ravish kumar
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पहाड़गंज-कटरा राम गली

पहाड़गंज पर रिपोर्ट करने के सिलसिले में कटरा राम गली गया था। एक के ऊपर एक बने कमरे। २७ कमरों में पांच सौ लोग रहते हैं। एक कमरे में तीन शिफ्ट में परिवार सोता है। जीवन का ग़ज़ब का उत्सव दिखता है। लोगों ने जगह की तंगी के बाद भी कुत्ते पाल रखे हैं,मुर्गे हैं
 
ravish kumar
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सबसे तेज माचिस

सावदा घेवरा पर रिपोर्ट बनाने के क्रम में एक ढाबे में रूका। नज़र माचिस पर पडी। आज तक ब्रांड की लोकप्रियता पोपुलर कल्चर का भी हिस्सा है। आज तक को इस पर स्टोरी करनी चाहिए कि उसके नाम पर माचिस बिक रही है। आग भी अब आज तक से लोहा ले रही है। तीलियों की हिम्मत
 
ravish kumar
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भूतों वाली गली

पश्चिम दिल्ली के नांगलोई जाट इलाके में भटक गया था। एक गली का नाम देख कर चौंका। भूतों वाली गली। आप तस्वीर में देख सकते हैं। एक शिक्षक से पूछा तो उन्होंने बताया कि बहुत साल पहले इस गांव के चारो तरफ खेत थे। गहलोत जाट दिन भर खेतों में काम कर जब शाम को लौटते
 
ravish kumar
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चिदंबरम की उदास रातों में कुछ सवालों का रतजगा

पी चिदंबरम उदास हैं। दंतेवाड़ा में हुए हमले के बाद उनकी जो भी तस्वीरें छप रही हैं,उनमें एक किस्म की उदासी है। घटना की नैतिक ज़िम्मेदारी की भंगिमा समझ नहीं आई। चिदंबरम ने क्या सोचा था? युद्ध भी करेंगे और जान भी नहीं जाएगी। जान तो दोनों तरफ से जानी है। यही
 
ravish kumar
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इस बार बस्ती के बसने की कहानी- रवीश की रिपोर्ट

तस्वीर में दिख रही पंक्ति रिया नाम की एक लड़की ने लिखी है। अंकुर एनजीओ ने इसे सावदा घेवरा की दीवारों पर चिपका दिया है। लक्ष्मीनगर की एक झुग्गी से उजड़ कर आई थी रिया। सावदा घेवरा। दिल्ली हरियाणा की सीमा पर। रोहतक रोड से बायीं तरफ मुड़ते ही सावदा घेवरा आ
 
ravish kumar
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टीवी के आइडिया उत्पादकों का अनादर मत करो

टीवी का फटीचर काल अपने स्वर्ण युग में प्रवेश कर चुका है। सानिया की शादी को लेकर तमाम संपादकीय रणनीतिकारों ने आइडिया को त्वरति गति से पैदा करना शुरू कर दिया है। टीवी के फटीचर दर्शकों ने लेख लिखने के लिए इन तमाम कार्यक्रमों पर अपनी आंखें गड़ा दी हैं।
 
ravish kumar
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अविनाश काम्बले से मिलना चाहिए- दलितोदय कथाइजेशन

"मैं तो बारहवीं फेल हूं। अंग्रेज़ी भी नहीं आती। इससे बिजनेस में कोई फर्क नहीं " 6 करोड़ का बिजनेस कायम करने के बाद अविनाश काम्बले ने पूरे आत्मविश्वास से अपनी यह बात माइक पर उड़ेल दी। हंस दिया और कहा कि डीटीडीसी में मैं डिलिवरी ब्वॉय था। फ्रैचाइज़ी होती
 
ravish kumar
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मीडिया में बिहार की छवि.....

मीडिया ने बिहार की नकारात्मक छवि बनाकर उसका बड़ा भला किया है। आज जिसे हम नकारात्मक कह रहे हैं वो तो सकारात्मक छवि थी। पत्रकारों ने अपनी ईमानदारी से बिहार की सामाजिक पृष्ठभूमि को उजागर किया तो बिहार की भ्रष्ट छवि बन गई। लेकिन समाज तो वैसा ही था। छवि की
 
ravish kumar
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खोजवा का मतलब जानते हैं आप?

वक्त मिलता है तो अब मां से ज़्यादा बातें करता हूं। पहले बाबूजी से करता था। मां के किस्से बाबूजी के किस्सा संसार से बिल्कुल अलग हैं। बताने लगीं कि पचीस साल पहले गांव में किसी की बेटी पैदा हुई। खोजवा। खोजवा का मतलब हिजड़ा। परिवार के लोग उसे हिजड़े को देने
 
ravish kumar
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यूपी,बिहार,झारखंड-अंड-भंड,अंड-भंड

पुणे शहर से लौटा हूं। आईटी उद्योगों और शिक्षा संस्थानों के कारण पुणे तेज़ी से बदल रहा है। मुंबई का बुनियादी ढांचा चरमरा रहा है। रहने की सुविधाओं की तंगी और पुणे-मुंबई एक्सप्रेस-वे ने पुणे की तकदीर बदल दी है। उत्तर भारत के छात्रों ने भी यहां की
 
ravish kumar
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मेट्रो मैन की लड़कियां

हमारे देश में टी-शर्ट साहित्य पर काम नहीं हुआ है। वक्त आ गया है कि टी-शर्ट पर लिखी सूक्तियों का सामाजिक अध्ययन किया जाए। पता चलेगा कि टी-शर्ट साहित्य भी लड़कियों को शिकार की तरह पेश करता है। मेट्रो में काम करने वाले मज़दूर के टी-शर्ट पर यह लफंगासंदेश छपा
 
ravish kumar
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मर्द,सैक्स और कैमरा

लव,सेक्स और धोखा। पूरी फिल्म में कैमरा वैसे ही देखता है जैसे हमारे समाज में मर्दों की नज़र मौका देखकर लड़कियों को देखती है। इस नज़र को बनाने में कई तरह की परिस्थितियां सहायक होती हैं। कैमरा अलग-अलग एंगल से अपनी नायिकाओं को तंग नज़रों की ऐसी गहराई में
 
ravish kumar
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माला महाठगनी हम जानी...सब नेतवन को धारत है,तौलत है

इक्कीस लाख की माला पहन ली है मायावती ने। जब मायावती यह माला पहन रही होंगी तब तमाम राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं को अफसोस ज़रूर भी हुआ होगा कि वे अपने नेताओं को अठन्नी चवन्नी से तौलते रह गए,यहां तो बीएसपी वालों ने हज़ार के नोटों की माला ही बना दी। हंगामा
 
ravish kumar
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त्रिवेदी ने सैयद को मार दिया..सैयद कहता रहा आतंकवादी नहीं है

दि इंडियन एक्सप्रेस की पहली ख़बर ने परेशान कर दिया है। एक नौजवान इस्पेक्टर की हंसती हुई तस्वीर छपी है। अंदाज़ा नहीं था कि भीतर की ख़बर इतनी बदसूरत होगी। इंस्पेक्टर शब्बीर अली सैयद,गुजरात एंटी टेररिस्ट स्क्वाड का सदस्य। वो चिल्लाता रहा कि सर मैं आतंकवादी
 
ravish kumar