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लिंकित मन

http://linkitmann.blogspot.com/
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31 Dec 2009
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किताब पढ़ने वाली औरतें

जनसत्‍ता के कॉलम चिट्ठाचर्चा में इस सप्‍ताह का लेख प्रस्‍तुत है। पूरा पाठ नीचे दिया गया है। किताब पढ़ने वाली औरतें                    
 
मसिजीवी
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चिट्ठाजगत में हुए 5000 चिट्ठे

हम सभी को विश्‍वास रहा है कि चिट्ठों की संख्‍या ज्‍यामितिक दर से बढ़ती है।  तभी तो इस पोस्‍ट में जो सितम्‍बर 2007 की है चिट्ठाजगत में 1000 चिट्ठे हाने पर खुशी जाहिर की गई थी। यानि तीन साल(2004-07)में चिट्ठे हुए थे 1
टैग: neelima
Dec 29 2009 11:45 AM
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स्‍माइली ही संदेश है।

प्रस्‍तुत है इस सप्‍ताह के जनसत्‍ता से चिट्ठाचर्चा पूरा पाठ इस प्रकार है- स्‍माइली ही संदेश है - विजेंद्र सिंह चौहान हिन्‍दी ब्‍लॉगजगत में बाटला हाऊस है और अपनी जगह है। सो ही धराशाई शेयर बाजार भी है ! सौम्‍या
 
मसिजीवी
Dec 29 2009 11:45 AM
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कौन सी थी हिन्‍दी की 100000वीं पोस्‍ट?

चिट्ठाजगत अपने मुखपृष्‍ठ पर हिन्‍दी चिट्ठासंसार की कुल पोस्‍टों की संख्‍या भी बताता है। आज ध्‍यान दिया कि एक बड़ा मील का पत्थर चुपचाप पीछे छूट गया है-    जी हॉं हिन्‍दी की पोस्‍टों की संख्‍या न
Dec 29 2009 11:45 AM
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दैनिक भास्‍कर में चोखेरबाली

रविजी ने दैनिक भास्‍कर की ये कटिंग भेजी है। रविकांत का यह लेख महिला ब्‍लॉगरों के संयुक्‍त प्रयासों पर आधारित है। स्‍थान, शब्‍दसीमा आदि के बंधन को ध्‍यान में रखें तो लेख हमें ठीक लगा। इस मायने में भी कि यह इससे पहले
Dec 29 2009 11:45 AM
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हिंदी जनपद का ब्लॉगफेमेनिज़्म

यह पोस्ट  "वूमेन स्ट्डीज़" -पर हाल ही में संपन्न हुई एक संगोष्ठी में मेरे द्वारा पढे गए पर्चे का अंश रूप है !} अंतर्जाल पर हिंदी की आहटें अब सशक्त स्वर का रूप ले रही हैं ! आज हिंदी में लिखे जा रहे ब्लॉगों की मौजूदगी को लेकर न केवल हिंदी
Dec 29 2009 11:45 AM
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चोखेर बाली आगंतुक कथा वाया स्टेट काउंटर

चोखेरबाली स्टेटकाउंटर सराय से मिले पैसे से हम बौद्धि‍क रूप से गुलाम तो खैर हो ही रहे थे :) पर साथ ही साथ एक काम और कर रहे थे (आप चाहें तो मान लें कि ये काम गौण था) यह था शोध करना। इस दौरान आंकड़ों में मतलब आवाजाही वगैरह के, झांकने के काम में कु
Dec 29 2009 11:45 AM
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चंद औरतों (जो हसीन नहीं थीं ) के खुतूत

मोहल्ला और भडास सफल हुए ! इन सामुदायिक ब्लॉगों ने ब्लॉग जगत में जिस सामाहिक अवचेतन को लिंकित करने की परंपरा शुरू की थी शायद उसी का नतीजा है स्त्री विमर्शों पर स्त्रियों शुरू किया गया ब्लॉग " चोखेर बाली " !मैंने अपने शोध निष्कर्ष में अस्तित्
Dec 29 2009 11:45 AM
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हिंदी ब्लागिंग के भड़ास काल के बाद के बारे में आपने सोचा है?

हिंदी ब्लागिंग के भड़ास काल के बाद के बारे में आपने सोचा है?                                
Dec 29 2009 11:45 AM
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चिट्ठाई हिंदी- उच्‍छवास से मालमत्‍ता

हिंदी- चिट्ठाकारिता का जो छोटा -सा इतिहास आख्‍यान है वह हिंदी पट्टी की राजनीति, राजभाषा की सरकार नीति तथा हिंदीखोरों, हिंदीबाजों की गिद्धनीति से मुक्‍त है- इससे वह पतित - पावन तो नहीं हो जाता लेकिन हिंदी -लेखन की बाकी विधाओं से विशिष्R
Dec 29 2009 11:45 AM
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ये अनाम, बेनामों की दुनिया है...नामवरों की नहीं

चिट्ठाकारी की प्रकृति, लेखन में एक बहुत ही रोचक स्थिति उत्‍पन्‍न करती है। अनौपचारिकता इस लेखन की खास बात है- यू.एस.पी. है इस दुनिया का। इसलिए इस लेखन में लेखक की शख्सियत उसके एक- एक शब्‍द से झांकती है लेकिन उलटबांसी यह है कि इस माध्
Dec 29 2009 11:45 AM
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चिट्ठाकारी छपास की नहीं पहचान की छटपटाहट है

जिस लेखन को छपास पीडा के रोगियों का कर्म मानते हुए नाक भौं सिकोडा जा रहा है हिंदी चिट्ठाकारों के लिए वह उनकी पहचान और अस्मिता से जुडा हुआ है! चिट्ठाकार के लिए चिट्ठाकारिता वह सृजन- भूमि है जहां वह निज भाषा में फक्कड और बेबाक अभिव्यक्ति कर सकता है ! इ
Dec 29 2009 11:45 AM
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चिट्ठाकारी का हालिया इतिहास

थोड़ा मुड़कर पीछे देखें तो हिंदी में चिट्ठाकारिता शब्‍द अंग्रेजी के ब्‍लॉगिंग शब्‍द के समानांतर उपजा शब्‍द है। ‘वेबलॉग’ का संक्षिप्‍त रूप ब्‍लॉग दिसम्‍बर 1997 में पहली बार प्रयुक्‍त हुआ। अंत
Dec 29 2009 11:45 AM
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चिट्ठाकारी है क्‍या

आलेख के प्रथम खंड के रूप में प्रस्‍तुत है प्रस्‍तावना तथा 'चिट्ठाकारी है क्‍या' का अंश- अंतर्जाल पर हिंदी की नई चाल : चन्‍द सिरफिरों के खतूत अंतर्जाल हिंदी में इंटरनेट के लिए इस्‍तेमाल (या कहें प्रस्‍तावित) शब्R
Dec 29 2009 11:45 AM
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वाक् में चिट्ठाकारी पर आलेख- अंतर्जाल पर हिंदी की नई चाल : चन्‍द सिरफिरों के खतूत

वाक अब स्‍टैंड्स पर है। पत्रिका में हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग पर लिखा मेरा आलेख ' अंतर्जाल पर हिंदी की नई चाल : चन्‍द सिरफिरों के खतूत ' शीर्षक से प्रकाशित है। अगर मीडिया का रूख ब्‍लॉग मीडिया को लेकर उदासीनता का रहा था तो साहित्
Dec 29 2009 11:45 AM
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2008 में कैसी होगी ब्लॉगकारिता - दिलीप मंडल

यह लेख मूलत: दिलीपजी के चिट्ठे पर है , महत्‍वपूर्ण जान पुन: सामने रखा जा रहा है।  एक रोमांचक-एक्शनपैक्ड साल का इंतजार है। हिंदी ब्लॉग नाम का शिशु अगले साल तक घुटनों के बल चलने लगेगा। अगले साल जब हम बीते साल में ब्लॉगकारिता का लेखा जोखा लेन
Dec 29 2009 11:45 AM
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क्‍या हिन्‍दी चिट्ठाकारी थ्‍योरिटिकल इनएडिकुएसी से ग्रस्‍त है

हिन्‍दी की चिट्ठाकारी पर हिन्‍दी की दुनिया (यानि खांटी हिन्‍दी वाले....लेखक, प्राध्‍यापक, आलोचक, चकचक आदि) की प्रतिक्रियाएं सुनने का जितना अवसर हमें मिलता उतना अन्‍य चिट्ठाकारों को शायद नहीं वजह बस इतनी हे कि इस कोटि के लोगों को हम सहज उपलब्‍ध हैं, ब
 
मसिजीवी
Dec 29 2009 11:45 AM
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अब मेरे लिंकित मन का क्या होगा ?

अपनी पिछ्ली पोस्ट में मैंने जब अपने शोध की अवधि के समाप्त होने की घोषणा करते हुए शोध के नतीजों का नमूना पेश किया तो बहुत सी बधाइयां और सराहना मिली  ! पर आलोक जी ने बधाई देते देते एक बहुत ही वाजिब शंका हवा मॆं उछाल दी कि अब लिंकित मन का क्या होगा
टैग: hindi blogging
Dec 29 2009 11:45 AM
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यूँ हुआ उस महफिल में चर्चा तेरी हिम्मत का

हिन्‍दी चिट्ठाकारी पर आज हमने अपना परचा प्रस्‍तुत किया। हमारे लिए मुश्किल काम था एक तो इसलिए कि ब्‍लॉगरों के बीच अपनी बात रखने में सुविधा रहती है कि आपकी बात जिसे ठीक नहीं लगेगी वह कह देगा कि ये आपकी राय है पर हम इससे कुछ अलग सोचते
Dec 29 2009 11:45 AM
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टू ब्‍लॉग ऑर नॉट टू ब्‍लॉग ?

शोध निष्‍कर्षमाला-2 आपका ब्लॉग आपके लिए क्या अहमियत रखता है ? क्या वह इंटरनेट की कल्पनातीत गति वाली सडक पर आपके द्वारा खोली गई एक दुकान है ? या फिर आपका एक ऎसा पवित्र कोना है जहां बैठकर आप अपने उदासी भरे गीत गा- सुना सकते हैं ? या फिर यह आपके ल
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पॉंच अंकों में पहुँची चिट्ठों की तादाद

ये छोटी सी पोस्‍ट इस बात की बधाई बजाने के लिए हुई है कि चिट्ठाजगत पर दर्ज हिन्‍दी चिट्ठों की तादाद ने अब पॉंच अंको को छू लिया है। ये स्‍क्रीनशॉट देखें- जी दस हजार पंजीकृत चिट्ठे, वाह। बधाई हम सभी को।
Sep 03 2009 11:16 PM
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साझे ब्‍लॉगों का दौर- जनसत्‍ता का लेख

प्रस्‍तुत है जनसत्‍ता के स्‍तंभ चिट्ठाचर्चा में इस सप्‍ताह का लेख। छवि के नीचे लेख का अविकल पाठ है- साझे ब्‍लॉगों का दौर -विजेंद्र सिंह चौहान ब्‍लॉगिंग का एक पारिभाषिक शब्‍द है 'ट्राल' , ट्रॉल वह व्यक्ति है जो किसी ऑनलाइन समुदाय में संवेदनशील विषयों
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ब्‍लॉगों की शब्‍द-संपदा

जनसत्‍ता के स्‍तंभ चिट्ठाचर्चा में हाल का लेख हिन्‍दी ब्‍लॉगों की शब्‍द संपदा पर केंद्रित था।  अविकल पाठ अखबारी लेख के नीचे दिया गया है- ब्‍लॉगों की शब्‍द-संपदा -विजेंद्र सिंह चौहान हर साल बदलता है मौसम ! फिर इस साल ही क्‍योंकर अनबदला रहता ! सर्
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म्‍यार मुलुक के मनख्‍यूँ

जनसत्‍ता में इस सप्‍ताह के स्‍तम्‍भ में हिन्‍दी के ऑंचलिक ब्‍लॉगों पर ध्‍यान केंद्रित किया गया था। इसकी पृष्‍ठभूमि में ब्‍लॉग के मिडलाइफ क्राइसिस को रखा गया था। लेख का पूरा पाठ छवि के नीचे दिया गया है। म्‍यार मुलुक के मनख्‍यूँ     
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छपी आथेंटिसिटी बनाम हाइपर लॉंजेविटी

जनसत्‍ता में इस सप्‍ताह के स्तंभ में उस बहस को प्रस्‍तुत किया गया था जिसे विनीत ने हाल में अपने चिट्ठे पर आयोजित किया था, यानि क्‍या ब्‍लॉगर पत्रकार कहे जा सकते हैं। पेश है इस सप्‍ताह का स्‍तंभ। नीचे पूरे लेख