जंगल कथा's Image
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18 May 2010
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दुधवा टाइगर रिजर्व में एक अनजानी वनस्पति!

 दुधवा टाइगर रिजर्व में एक अनजानी वनस्पति! - Calatropis acia-  कृष्ण कुमार मिश्र*कुछ सुन्दर व दुर्लभ वनस्पतियां हमारे आस-पास मौजूद होने के बावजूद न चिन्हित होने के कारण काल के गर्त में समाती चली जा रही हैं, और हम उनके महत्व व लाभ से वछिंत रह
 
Krishna Kumar Mishra
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May 19 2010 04:03 AM
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सती गीधिन

सती गीधिन: 1972 में अवधी सम्राट  पण्डित बंशीधर शुक्ल जी द्वारा रचित कविता जो पक्षी-व्यवहार की सच्ची घटना पर आधारित है। है बात अभी परसों (the day after tomorrow) कीजो नही भुलाने वालीसत्प्रीति गीध-गीधिन कीनही भुलाने वालीसप्तमी दिसम्बर पन्द्रहसन उन्नीस
 
Krishna Kumar Mishra
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वन्य-जीव सरंक्षण की एक मुहिम है- दुधवा लाइव

प्रिय मित्रभारत की जैव-विविधिता के अध्ययन व संरक्षण के लिए दुधवा लाइव न्यूजपोर्टल http://www.dudhwalive.com की शुरूवात हो रही है। जहाँ आप सभी उन्मुक्त विचारों की नितान्तआवश्यकता है। यह पोर्टल वन्य-जीवन, ग्रामीण अंचल, पशु-क्रूरता, औषधीयवनस्पति, पारंपरिक
 
Krishna Kumar Mishra
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Feb 10 2010 05:41 PM
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टाइगर हावेन

टाइगर हावेन के बरामदे में पड़ी अठारहवीं सदी की विक्टोरियन कुर्सी पर बैठे बिली अर्जन सिंह मुझे हमेशा पढ़ते हुए मिले, आस-पास तमाम मेजों पर ढ़ेरो देशी-विदेशी किताबें व पत्रिकायें। जंगल के मध्य एक बेहद जीवन्त व खूबसूरत बसेरा  बाघों एंव मनुष्य दोनों का। यह
 
Krishna Kumar Mishra
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पदम भूषण पदम श्री बिली अर्जन सिंह

92 वर्ष की आयु में इस महात्मा ने नववर्ष 2010 के प्रथम दिवस को अपने प्राण त्याग दिये। मगर आज इनके जीवों व जंगलों के प्रति किये गये महान कार्य समाज को सुन्दर संदेश देते रहेंगे एक दिगन्तर की तरह।भारतीय बाघों के व वनों के संरक्षण में आप ने जो मूल्य स्थापित
 
Krishna Kumar Mishra
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आज सुहेली ठहर गयी थी

KK Mishra at Tiger HavenOriginally uploaded by manhan200903-01-2010---आज़ सुहेली नदी की जल धारा शिथिल हो गयी थी, जंगल मुरझा गये थे, पक्षियों का चहकना बन्द हो गया था, जंगल के जानवर मानों कही गायब हो गये थे........बिल्कुल ऐसा ही मंजर था टाइगर हावेन का, ये
 
Krishna Kumar Mishra
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आनरेरी टाइगर का निधन

Billy Arjan SinghOriginally uploaded by manhan20092010 का पहला दिन भारत ही नही दुनिया के वन्य जीव संरक्षण जगत के लिए सबसे दुखद रहा- पदम भूषण बिली अर्जन सिंह का रात नौ बजे ह्रदयघात से निधन हो गया। और इसी के साथ ढह गया एक विशाल स्तम्भ जिसने भारत में वन्य
 
Krishna Kumar Mishra
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तराई में बाढ़ की विभीषिका और जानवर

१ - डीयर पार्क लखीमपुर खीरी में बचा अन्तिम खरगोश २ - बाढ़ से पूर्व यहाँ तीन खरगोश थे जो इस फोटो में देख सकते है ३ - बाढ़ में तीन दिनों से खडा ये चीतल मानो हमसे सहायता माग रहा हो ४ - तीन दिन पूर्व बाढ़ से पहले पार्क में मौजूद हिरन ( चीतल ) ५ - ब्लॉगर
 
Krishna Kumar Mishra
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आदमियों के जंगल में एक जानवर की मौत

वह कब पैदा हुई मुझे नही मालूम पर उसकी मौत कब होगी ये मुझे पता है क्योकि वह मेरी आंखों के सामने मर रही है विना किसी इलाज़ के और अब उसका कोई अपना नही है जो उसकी इस पीड़ा में उसका ढाढस बंधाये उसकी रंगों में भी खून दौड़ता है उसके सीने में भी एक दिल है (
 
Krishna Kumar Mishra
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हमसे पूछों मिज़ाज़ बारिस का हम जो कच्चे मकान वाले हैं

लखीमपुर खीरी सितम्बर की बेतहाशा बारिस ने धरती के बाशिन्दों को प्राकृतिक आपातकाल का एहसास करा ही दिया और जिसका अन्जाम इन्सान से ज्यादा जानवरों को भुगतना पड़ा इस आपातकाल की वजह कुदरत थी पर आपातकाल के नतीज़े इन्सान की गैर जिम्मेदाराना करतूतें जिसका खामिया
 
Krishna Kumar Mishra
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खीरी मे चन्दन की तस्करी

खीरी जनपद उत्तर प्रदेश जो अपनी वन्य संपदा के लिये पूरी दुनिया में जाना जाता है और इस अमूल्य संपदा पर डाका भी अपने ही डाल रहे है बस कुछ् रुपयों के लालच में !! वन विभाग के सूत्रों से ग्यात हुआ कि इस निकृष्ट काम को अंजाम देने वाले पांच व्यक्तियों को हिर
 
Krishna Kumar Mishra
Dec 29 2009 11:55 AM
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Billy Arjan Singh

Billy Arjan SinghOriginally uploaded by manhan20092010 का पहला दिन भारत ही नही दुनिया के वन्य जीव संरक्षण जगत के लिए सबसे दुखद रहा- पदम भूषण बिली अर्जन सिंह का रात नौ बजे ह्रदयघात से निधन हो गया। और इसी के साथ ढह गया एक विशाल स्तम्भ जिसने भारत में वन्य
 
Krishna Kumar Mishra
Dec 28 2009 09:40 AM
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दुधवा के जंगल

कृपया अपने महत्वपूर्ण सुझाव देने का कष्ट करे !
 
Krishna Kumar Mishra
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राहुल गांधी और दुधवा नेशनल पार्क, क्या रिस्ता है इनमें!

सात दिसम्बर २००९ वक्त तकरीबन शाम के ४ बजे,  पलिया हवाई अड्डे पर  सांसद राहुल गांधी का चार्टर प्लेन उतरा, आप ने पलिया में सभायें की जिसमें युवाओ और किसानों को संबोधित किया, कांग्रेस में युवाओं की भागेदारी अधिक से अधिक सुनश्चित की जाय, बस सार
 
Krishna Kumar Mishra
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यह सुन्दर रचना करने वाला कौन है?

एक रात जब मेरी उंगलियां कीबोर्ड पर जिमनास्टिक कर रही थी तभी मुझे इस अंधेरी रात में एक अपरिचित सी तेज़ आवाज सुनाई दी .........कुछ समय सन्नाटा और फ़िर वही आवाज, मैने कमरे से बाहर झांक कर देखा पर कुछ मालूम नही कर सका । किन्तु अब ये आवाज रह-रह कर तेज़ हो
 
Krishna Kumar Mishra
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हमें नेता नही प्रबन्धक चाहिये!

एक कविता जो मैने अपने बचपन में लिखी थी और आज मुझे एक टुकड़ा मिला है उसका जो फ़टा हुआ था बचे हुए अंश................ नेताओं के इस जंगल में नेताओं के इस दंगल में तिल-तिल जलता है इंसान (शोषित होता है इन्सान) नेताओं के इस दलदल में फ़ंसता रहता है इन्सान न
 
Krishna Kumar Mishra
Nov 13 2009 04:08 PM
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राष्ट्रवाद या विश्ववाद या फ़िर पृथ्वीवाद ! अगर दुनिया एक मुल्क हो जाये तो !

राष्ट्रवाद या विश्ववाद या फ़िर पृथ्वी वा द! अगर दुनिया एक मुल्क हो जाये तो क्या होगा राष्ट्रवादियों, भाषावादियों, जाति-धर्मवदियों और क्षेत्रवदियों का ? ख़ुदा नहीं न सही आदमी का ख़्वाब सही| कोई हसीन नज़ारा तो है नज़र के लिए| विचारों का क्या जहां तक मन
 
Krishna Kumar Mishra
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"हिन्दी के प्रति उनकी चिन्ता मात्र उनका रोज़गार है"

भैया हिन्दी का विकास ऐसे नही होगा आप सब का भले हो जाये ! "कही ऐसा तो नही है कि हिन्दीकारों की हिन्दी के प्रति उनकी चिन्ता मात्र उनका रोज़गार है" ब्लाग पर हिन्दी की धूम देखकर ह्रदय पुलकित हो उठता है । किन्तु एक डर हमेशा मुहं बाये खड़ा है ? कि यदि गूगल
 
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क्या भारत एक राष्ट्र है?

शब्द के मायने और उसके गुण-दोष परिस्थित और काल के अनुसार बदलते रहते है अब सोचना आप को है कि इस शब्द का इस्तेमाल कैसे और कहां करना है ? देशद्रोहियों की सजाये सुनिश्चित की जाय अभी हाल में चाइना ने इसी तरह कुछ कहा था कि भारत कोई राष्ट्र जैसी चीज नही, या
 
Krishna Kumar Mishra
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हिन्दी को हिन्दुस्तानी बनाये !

हिन्दी को हिन्दुस्तानी बनाये भाषा की लोकप्रियता के लिये उस भाषा का शब्दकोष और उस लिपि में लिखा गया ज्ञान इस बात के लिये उत्तरदायी होता है कि वह भाषा कितना राष्ट्रीयकृत या ग्लोबल होगी । अग्रेजों ने अपनी भाषा में संसार के सम्पूर्ण ज्ञान को समेटा और परो
 
Krishna Kumar Mishra
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हिन्दी, हिन्दुस्तानी, राष्टभाषा, और बहुत कुछ !

भैया हिन्दी का विकास ऐसे नही होगा आप सब का भले हो जाये ! "कही ऐसा तो नही है कि हिन्दीकारों की हिन्दी के प्रति उनकी चिन्ता मात्र उनका रोज़गार है" ब्लाग पर हिन्दी की धूम देखकर ह्रदय पुलकित हो उठता है । किन्तु एक डर हमेशा मुहं बाये खड़ा है ? कि यदि गूगल न
 
Krishna Kumar Mishra
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मिठ्ठू लाल जी और प्रवासी पक्षी

४ नवम्बर २००९ मै शाह्जहांपुर पहुंचा कार की मरम्मत करवाने किन्तु मेरे इरादे और भी थे जिसमें एक था मिठ्ठू लाल जी से मुलाकात करना, अब पूछिये ये मिठ्ठूलाल कौन है ? ये ७५ वर्ष के बुजुर्ग है जो अपनी रिवाल्वर "Webley & Scott" डालकर प्रत्येक सुबह उस बगीच
 
Krishna Kumar Mishra
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जानवर है बेहाल राम तेरे देश में !!

अत्याचारी मानव यहां मैं एनीमल राईट की बात नही करूगा क्योंकि हमारे देश में गरीब और कमजोर पर ये लागू नही होते फ़िर यदि बात आये मानव को छोड़ कर दूसरी प्रजातियों यानी जानवर आदि .आदि , की तो राम मालिक! ऐसा ही हाल है हमारे घरेलू जानवर का पहली बात विकास की दौ
 
Krishna Kumar Mishra
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350 से ज्यादा नही बिल्कुल नही !!!

जलवायु परिवर्तन के जो भयवह संकेत हमे मिल रहे है उसे देखते हुये दुनियाभर के जल्वायु वैग्यानिकों ने २४ अक्टूबर सन २००९ को "इंटरनेशनल डे आफ़ क्लाइमेट एक्सन" मना रहे है जिसमे उन्होने पूरी दुनिया के लोगों को साझा करने के लिये आवाहित किया है ताकि दुनिया की
 
Krishna Kumar Mishra
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अपने गांव में दीपों का त्योहार

कहाँ तो तय था चराग़ाँ हर एक घर के लिये कहाँ चराग़ मयस्सर नहीं शहर के लिये क १७ तारीख यानी दीपावली भारत भूमि का एक महत्व पूर्ण त्योहार,  इस बार अम्मा ने तय किया कि यह त्योहार हम अपने गांव मैनहन में मनायेगे, वजह साफ़ थी कि पूर्वजों की धरती पर उनके
 
Krishna Kumar Mishra
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देनें का मज़ा लेनें से बहुत ज्यादा है!

Joy of Giving Week (27 September to 3rd October 2009)परहित सरस धरम नहि भाई,२७ सितम्बर यह तारीख है कुछ खास, इस रोज़ से शुरुआत हो रही है एक खास एहसास की जो आप के मन को वह अनुभूति प्रदान कर सकता है जिसे आप लाखों या फ़िर करोणों में नही तौल सकते,  भारत
 
Krishna Kumar Mishra
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Sep 27 2009 01:49 AM
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मोहल्ला

कल की बात है मैं घर मे बैठा एक आगुन्तक से बाते कर रहा था की फ़तिमा और छबीली ने भौकना शुरू ए किया चुकिं इन दोनों की मोहल्लें में अतिक्रमण कर रहे H1 N1 (जैसा की आम चर्चा में है बेचारे जीव को लोग क्या बना डालते है) से रोज़ की झिक्क झाय है इसी कारण मैने कुछ
 
Krishna Kumar Mishra
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हिन्दी दिवस और बेजुबान जानवर

कल हिन्दी दिवस था और विदा भी हो गया मामला जस का तस, अब पूछियें कि हिन्दी दिवस और बेजुबान जानवर में क्य संबध है ? बताता हूं । हमारी तमाम बोलियां, लिपियां, दुनियां में हमें भाषायी मामलें में सबसे धनी बनाती है पर क्या धनी होने का खिताब हमें मिला नही हां ऊपर
 
Krishna Kumar Mishra
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मेरा गांव

मैने भारत के एक गांव का और वहां की तमाम छोटी - बडी बातें हिंदी ब्लाग के माध्यम से सब के समक्ष रखने की कोशिश कर रहा हूं। आप पढ़ सकते है क्लिक करेhttp://manhanvillage.wordpress.comकृपया अपने महत्वपूर्ण सुझाव देने का कष्ट करे !
 
Krishna Kumar Mishra
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मातृ नवमी और जीवों के प्रति दया- एक महान संस्कृति

अतुल्य भारत और इसके लोग जिनमे तमाम विविधिताओं के बावजूद इन्हे जोडती है हमारी संस्कृति जो हज़ारों वर्षों से लगातार पीढी दर पीढ़ी संचरित हो रही है और इसी का एक पारंपरिक उदाहरण बता रहा हूं आप सभी को जो आज़ मेरी मां ने मुझे बताया १३ सितम्बर २००९ को मातृ नवमी है
 
Krishna Kumar Mishra
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ब्लाग वार्ता में लखीमपुर खीरी के जंगल और जीव

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Krishna Kumar Mishra
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संविधान निर्माताओं में से एक मेरे घर से भी- पं० बंशीधर मिश्र

१६ राजा बनाम पं०वंशीधर मिश्र- अपने समय के बेहतरीन राजनीतिज्ञ संविधान निर्मात्री सभा के लखीमपुर खीरी से पं० बंशीधर मिश्र जी सद्स्य थे , जब गुलाम भारत के नेताओं ने ब्रिटिश कैबिनेट मिसन के नेताओं ने एक निगोसिएसन के तहत संविधान सभा का चुनाव प्रदेशीय विधा
 
Krishna Kumar Mishra
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१६ राजा बनाम वंशीधर मिश्र- अपने समय के बेहतरीन राजनीतिज्ञ

राजनीति का महारथी- पंडित वंशीधर मिश्र आज भारत के चुनावी महापर्व पर मुझे कुछ पुराने समय के बेह्तरीन महापुरषों का स्मरण बरबस होता है जो मैने अपने पिता से दादा से, नाना से और मां से सुना आप सभी को बताता हूं! सन १९५२ के प्रथम चुनाव जब लोकसभा और विधान सभा
 
Krishna Kumar Mishra
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बचपन बचाओ पर कैसे ?

आज रात में मेरी मुलाकत एक बचपन बचाओ आंदोलन से जुड़े व्यक्ति से हुई काफ़ी चर्चा के बाद मैं घर आया और लगा सोचने इस समस्या को जो रोज़ हि मेरी आंखो से दो-चार होती रह्ती है!! आखिर क्या करे हम जो भारत या धरती पर अन्य देशों में जहां बच्चों का बचपन मां की गोद,
 
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अवधी सम्राट पं बंशीधर शुक्ल

समाज वादी प्रकृति वादी व् देश प्रेमी कवि पं बंशीधर शुक्ल कभी काव्य की बेह्तरीन भाषा रही अवधी अब मानो विलुप्ती के कगार पर है ऐसे में पं बंशीधर शुक्ल और प्रासंगिक हो जाते है हालांकि महाकवि तुलसीदास की रामचरित मानस युगों युगों तक इस भाषा को जीवित रखने म
 
Krishna Kumar Mishra