गीत सुनहरे's Image

गीत सुनहरे

http://kavikulwant.blogspot.com/
ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
नयी प्रविष्टी लिखी
01 Jun 2010
कुल प्रविष्टियां
51
पाठक भेजे
5011
पसंद
35
नापसंद
0
पाठक प्रति पोस्ट
98.25
पसंद करें
1
नापसंद करें

माहिये - 3

31. देखी है इबादत जब देखना है हमको उसका तो करिश्मा अब .32. मिलती है खुशी ऐसे मिलकर अपनों से मिसरी हो घुली जैसे .33. दिलबर हैं मेरे आते जा के ले आऊँ मैं धुन गीत मधुर गाते .34. विस्मित कर दूँ उनको हो के खुशी पागल लिपटा लेंगे वह मुझको .35. चाहो जो मिलें
पसंद करें
0
नापसंद करें

माहिये

16. साजन घर आये हैं पी जो मिले मुझको सुध बुध बिसराए हैं 17. दीदार हुए रब के अब है किसे पाना बलिहार गया सद के18. तेरा मुझसे नाता दर्द का है रिश्ता संग आँसू बहा जाता19. फूलों पर हैं भंवरे चाह रहे पीना मधु रस सब हंस हंस के20. खामोश हैं दिलबर क्यों राज है
May 20 2010 02:44 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

माहिये

माहिये 1. साजन कब आयेंगे देख रही कबसे हम पलकें बिछायेंगे .2. है प्यार बसा आँचल छाँव है माँ ममता दुनिया से बचा ले हर पल .3. जब से है तुझे देखा दिल न रहा अपना सांसों ने दिया धोखा .4. है भाग रही दुनिया धन के लिये पागल भूली अपनी मुनिया .5. रिश्तों की जला
May 14 2010 06:31 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

नारी

नारी सौंदर्य भरा अनंत अथाह,इस सागर की कोई न थाह .कैसे नापूँ इसकी गहनता,अंतस बहता अनंत प्रवाह .ज्योति प्रभा से उर आप्लावित,प्राण सहज करुणा से द्रावित .अंतर्मन की गहराई में,प्रेम जड़ें पल्लव विस्तारितसरल हृदय संपूर्ण समर्पित,कण- कण अंतस करती अर्पित .रोम -
टैग: नारी
पसंद करें
0
नापसंद करें

शहीद - ए - आजम भगत सिंह - 9 last part

शहीद - ए - आजम भगत सिंह - 9मोल नही कुछ मान मुकुट का,मोल नही कुछ सिंहासन का .जीवन अर्पित करने आया,माटी कर्ज़ चुकाने आया .याचक बन कर मांग रहा हूँ,तेरा दुख पहचान रहा हूँ .लाल जो खेला तेरी गोदी,डाल दे भारत माँ की गोदी .तेरा तो घर द्वार क्रांति का,तू जननी है
Mar 19 2010 05:07 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

शहीद - ए - आजम भगत सिंह 1

शहीद - ए - आजम भगत सिंह 1भारत माता जब रोती थी, जंजीरों में बंध सोती थी .पराधीनता की कड़ियाँ थीं,जकड़ी बदन पर बेड़ियाँ थीं .देश आँसुओं में रोता था,ईस्ट इंडिया को ढ़ोता था .भारत का शोषण होता था,नैसर्गिक संपत्ति खोता था .दुर्दिन के दिन गिनता था,हर साल अकाल
पसंद करें
0
नापसंद करें

पति - पत्नी

पति - पत्नी अहा ! मन में बिखरी खुशियाँ,अहा ! दिल में खिलती कलियाँ .आज यौवना का परिणय है,अपने सपनों में तन्मय है . लेकर भाव पूर्ण समर्पण,करना है यह तन मन अर्पण .पल्लव मन गुंजारित हर्षित,लज्जा नारी सुलभ समर्पित . मृदु-क्रीड़ा, आलिंगन, चुंबन,रोम रोम में भरते
Mar 03 2010 11:39 AM
पसंद करें
1
नापसंद करें

प्रस्तर मन

मानव मन बना है प्रस्तर मानव क्या लेकर जाएगा,मिटटी में खुद मिल जाएगा, इस जग में फिर कैसे कैसे, ढ़ो रहा आडंबर .मानव मन बना है प्रस्तर . पैसा पापों का मूल बना,हर रिश्ता लगता शूल बना, अपने हाथ अपनों को मार, नाच रहा दिगंबर .मानव मन बना है प्रस्तर . छल, कपट,
पसंद करें
1
नापसंद करें

तीन मुक्तक

न्याय बिकता है तराजू तोल ले,हृदय की संवेदना का मोल ले,हर तरफ है रुपया आज बोलता,बेचने अपनी पिटारी खोल ले. बचे हुए भी चार गांधी चुक गये,सत्य अहिंसा पुस्तकों में छप गये,हिंदुस्तां की अस्मिता को बेचनेसौदागर ही हर तरफ बस रह गये . अर्चना से देवता अब डर रहे,सुन
पसंद करें
0
नापसंद करें

गज़ल

शैदाई समझ कर जिसे था दिल में बसाया । कातिल था वही उसने मेरा कत्ल कराया ॥ दुनिया को दिखाने जो चला दर्द मैं अपने, हर घर में दिखा मुझको तो दुख दर्द का साया । किसको मैं सुनाऊँ ये तो मुश्किल है फसाना दुश्मन था वही मैने जिसे भाई बनाया । मैं कांप रहा हूँ कि
Dec 29 2009 11:43 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

कवि कुलवंत सिंह केकाव्य संग्रहों 'चिरंतन' एवं 'हवा नूँ गीत' का विमोचन

काव्य संग्रहों 'चिरंतन' एवं 'हवा नूँ गीत' का विमोचन किरणदेवी सराफ ट्रस्ट के सहयोग से कवि श्री कुलवंत सिंह की काव्य पुस्तकों "चिरंतन" एवं "हवा नूँ गीत" (पूर्व काव्य संग्रह निकुंज का गुजराती अनुवाद - श्री स्पर्श देसाई द्वारा) का विमोचन समारोह कीर्तन के
Dec 29 2009 11:43 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें
पसंद करें
0
नापसंद करें

काव्य केसरी - सम्मान

श्री कुलवंत सिंह को उनकी साहित्यिक सेवाओं हेतु अखिल भारतीय साहित्य संगम, उदयपुर द्वारा राष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान -2008 के अंतर्गत "काव्य केशरी" की मानद अपाधि से अलंकृत किया जाता है । सचिव, अखिल अखिल भारतीय साहित्य संगम, उदयपुर
Dec 29 2009 11:43 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

क्रंदन (एक अधूरा गीत)

करुण क्रंदन से आह संपूर्ण विश्व है रोता, जग में भरी व्यथाओं की ज्वाला में है जलता, तम की गहन गुफा में, निस्तब्ध गगन के नीचे, घुट-घुट कर सिसक-सिसक कर जीवन क्योंहै रोता ! धूमिल होती आशाएं, परिचय बना रुदन है, निष्ठुर निर्दयी नियति म्लान हुआ जीवन है, स्म
Dec 29 2009 11:43 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

मुशायरा / कवि-सम्मेलन

१५ जुलाई २००८ के दिन 'महावीर' ब्लॉग (http://mahavir.wordpress.com) पर एक मुशायरे/कवि-सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है जिसमें शिरकत के लिए देश-विदेश के शायर और कवि प्राण शर्मा, कवि कुलवंत सिंह, समीर लाल, लावण्या शाह, देवमणि पांडेय, कंचन चौहान, डॉ.महक,
पसंद करें
0
नापसंद करें
पसंद करें
0
नापसंद करें

रसिया

ओ मेरे प्रीतम मनबसिया तेरी याद सताए रंगरसिया निखरी है चेहरे पर रंगत कहां छुपा है रंगरलिया . मिलन वह अपना पहला पहला पलकों का उठ उठ गिरना बेकाबू धड़कन का होना मुझको निहारें तोरी अखियां . दिल से दिल के जाम मिले खामोशी से लब सिले दो तन मिल इक प्राण हुए प्
Dec 29 2009 11:43 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

पुकार

सहिष्णुता की वह धार बनो पाषाण हृदय पिघला दे । पावन गंगा बन धार बहो मन निर्मल उज्ज्वल कर दे । कर्मभूमि की वह आग बनो चट्टानों को वाष्प बना दे । धरती सा तुम धैर्य धरो शोणित दीनों को प्रश्रय दे । ऊर्जित अपार सूर्य सा दमको जग में जगमग ज्योति जला दे । पावक
Dec 29 2009 11:43 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

ग़ज़ल - नहीं है सांझ

नहीं है सांझ अपनी औ सवेरा । न आया रास मुझको शहर तेरा ॥ वहां पूरा मुहल्ला घर था अपना, यहां इक रूम का कोना है मेरा । वहाँ कस्बे में था आंगन लगा घर, यहाँ सूरज न ही है चांद मेरा । यहाँ बसते हैं लगता चील कौवे, हमेशा नोंचते हैं मांस मेरा । हुई है खत्म लगता
Dec 29 2009 11:43 AM
पसंद करें
2
नापसंद करें

नव वर्ष

नव सृजन, नव हर्ष की, कामना उत्कर्ष की, सत्य का संकल्प ले प्रात है नव वर्ष की . कल्पना साकर कर, नम्रता आधार कर, भोर नव, नव रश्मियां शक्ति का संचार कर . ज्ञान का सम्मान कर, आचरण निर्माण कर, प्रेम का प्रतिदान दे मनुज का सत्कार कर . त्याग कर संघर्ष का, आ
पसंद करें
0
नापसंद करें

अमृत प्यार

अमृत प्यार माँ के प्यार की महिमा का, करता हूँ गुणगान, कभी कमी न प्यार में होती, कैसी है यह खान . कष्ट जन्म का सहती है, फिर भी लुटाती जान, सीने से चिपकाती है, हो कैसी भी संतान . छाती से दूध पिलाती है, देती है वरदान, पाकर आंचल की छांव, मिलता है सुख बड़
पसंद करें
2
नापसंद करें

काले धन एवं नकली नोटों से छुटकारा - भ्रष्टाचार पूर्णत: खत्म

प्राय: सभी देशों की सरकारों का एक रोना साझा है. और वो भी अति भयंकर रोना! देश की अर्थ व्यवस्था में कला धन. यह काला धन बहुत से देशों को, बहुत सी सरकारों को बहुत रुलाता है. और बुद्धिजीवी वर्ग को अत्यंत चिंतित करता है. अर्थशास्त्रियों की नाक में दम करके
पसंद करें
4
नापसंद करें

कुलवंत सिंह को राजभाषा गौरव पुरुस्कार

राजभाषा गौरव पुरुस्कार हिंदी में विज्ञान के प्रचार प्रसार के लिए विगत कई वर्षों में किये गये अनेकानेक प्रयासों के लिये वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी कुलवंत सिंह को अपने व्यक्तिगत प्रयासों के लिए ’भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र’ द्वारा ’परमाणु ऊर्जा विभाग’ के
पसंद करें
1
नापसंद करें

गीत कौन सा मैं गाऊँ ?

जग ये जैसे रो रहा है मातम घर घर हो रहा है . गीत कौन सा मैं गाऊँ ? कैसे दुनिया को बहलाऊँ ? देने सुत को एक निवाला बिक जाती राहों में बाला . कौन धान की हांडी लाऊँ ? भर भर पेट उन्हें खिलाऊँ ? खेल अनय का हो रहा है न्याय चक्षु बंद सो रहा है . कौन प्रभाती र
पसंद करें
0
नापसंद करें

डा होमी भाभा हिंदी विज्ञान लेख प्रतियोगिता के परिणाम

डा होमी भाभा हिंदी विज्ञान लेख प्रतियोगिता के परिणामप्रथम पुरुस्कार - कोई नहीद्वितीय पुरुस्कार(१) - रू १५००/- श्री राम तिवारी, "जीवन विस्तार...."द्वितीय पुरुस्कार(२) - रू १५००/- श्री सलमान हसन, "गंजेपन की समस्या.."तृतीय पुरुस्कार- रू १०००/- डा. सविता
Sep 18 2009 03:51 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

पुष्प का अनुराग

विधु से मादक शीतलता लेशोख चांदनी उज्ज्वलता ले,भू से कण कण चेतनता लेअंतर्मन की यौवनता ले .अरुणिम आभा अरुणोदय सेसात रंग ले किरण प्रभा से,रंग चुरा मनभावन उससेप्रीत दिलों में जिससे बरसे .जल बूंदों से निर्मलता लेपवन तरंगों से झूला ले,संगीत अलौकिक नभ से लेमधु
Sep 03 2009 04:18 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

ब्रजेश पाठक मौन - की स्मृति में रचा गया गीत

ब्रजेश पाठक मौनमौन की वाणी मधुरथा मौन का हंसना मधुर,मौन का चिंतन प्रखरथे मौन के मुखरित अधर ?शून्य में है वह तिरोहितमुक्ति ले जन्मों का बंधन,याद रखना यादें संजोअब नही करना है क्रंदन .नीर न नयनों में लानास्मृतियों को चंदन बनाना,स्मृति पटल पर ओस कण सीतात की
पसंद करें
0
नापसंद करें

गज़ल - प्यार भले कितना ही कर लो,

प्यार भले कितना ही कर लो, दिल में कौन बसाता है .मीत बना कर जिसको देखो, उतना ही तड़पाता है . मेरा दिल आवारा पागल, नगमें प्यार के गाता हैठोकर कितनी ही खाई पर बाज नही यह आता है . मतलब की है सारी दुनिया कौन किसे पहचाने रेकौन करे अब किस पे भरोसा, हर कोई भरमाता
Aug 12 2009 01:36 PM
पसंद करें
1
नापसंद करें

दशानन

क्यूँ दशानन रावण को सब कहते हैं उसके धड़ पर दस मुख ही क्यों रहते हैं नही समझ में हमको कभी भी आता था न ही हमको कोई यह समझाता था पहन मुखौटा शातिर लोग रहते हैं चेहरे पे चेहरे लगा कर मिलते हैं देखा, जाना, सुना, पढ़ा और समझा था कई दफा इस बात को खुद परखा था
टैग: दशानन
पसंद करें
1
नापसंद करें

तांत्रिकों का चक्कर

हंसमुख राठौर की कहानी पढ़कर दुख हुआ, दर्द हुआ किंतु अचंभा नही हुआ. अपनी ही बेटी को बंधक बना कर उसके साथ सालों कुकर्म करना; हैवानियत की एक मिसाल है. धन की हवस और तांत्रिकों का सहयोग आदमी को हैवान बनाने के लिए काफी होते हैं. आदमी के अपने अंदर की हवस, धन
पसंद करें
0
नापसंद करें

साहित्य अर्जुन सम्मान

साहित्य अर्जुन - मानद उपाधि श्री कुलवंत सिंह को उनकी साहित्यिक सेवाओं हेतु खानकाह सूफी दीदार शाह चिश्ती , हाजी मलंग वाड़ी, थाने (महाराष्ट्र) की ओर से साहित्य अर्जुन सम्मान की मानद अपाधि से अलंकृत किया जाता है । अनजाना चिश्ती, अध्यक्ष, खानकाह सूफी दीदा
पसंद करें
2
नापसंद करें

संत्रास

सहरा की धूप में जो जल रहा था, वेदना के गरल से जो गल रहा था, काल के निर्मोह हाथों पल रहा था, सुधा का प्याला उसे तुमने पिलाया । मौत के आगोश से तुमने बचाया ॥ जीवन का संघर्ष जिसको छल रहा था, भरी जवानी में भी जो ढ़ल रहा था, स्वयं का जीवन जिसको खल रहा था, अ
पसंद करें
1
नापसंद करें

समीक्षा : Kalam aur Khayaal

समीक्षा : कुलवंत सिंह काव्य संग्रह : कलम और खयाल रचनाकार : सी आर राजश्री प्रकाशक : सोनम प्रकाशन, कटक मूल्य : रू १००/- अपने पिताश्री को समर्पित सुश्री सी आर राजश्री के इस प्रथम काव्य संग्रह ’कलम और खयाल’ में ४५ कविताओं के खयालों को संजोकर कलमबद्ध किया
पसंद करें
2
नापसंद करें

काल रात्रि

कब हटेगी कालिमा इस रात की । कब दिखेगी लालिमा अब प्रात की ॥ आज सूरज क्यों उदित होता नही । अरुण प्राची आज मुसकाता नही ॥ रात्रि से भयभीत है मानव धरा । काल के आगोश से कितना डरा ॥ इस निशा का अंत कब होगा भला । क्रूर निशि ने यूँ लगे पकड़ा गला ॥ बन भुजंग है ड
पसंद करें
0
नापसंद करें

Kavi Sammelan

Dear friend!You are invited for a kavi sammelan programme being held on 28th Sep 2008, Sunday 5.30-7.30 pm at School-1, Anushakti Nagar, BARC colony, Mumbai-94Sanchalak : Kulwant Singh Kulwant singh022-2559537809819173477http://kavikulwant.blogspot.com
टैग: kavi sammelan
Sep 22 2008 01:45 PM