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जयप्रकाश मानस

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08 Apr 2010
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क्या प्रजातांत्रिक संवेदना का अंत हो चुका है

सुकमा के चिंतलनार जंगल में जो जवान बर्बरतापूर्वक मारे गये - शोषक नहीं थे, बुर्जुआ नहीं थे, पूँजीवादी नहीं थे । जानलेवा संकट की संपूर्ण संभावना के बाद भी जानबूझकर सीआरपीएफ की नौकरी में थे । ताकि देश में शांति और अमनचैन की निरंतरता बनी रहे । ताकि ख़ुशहाली
 
जयप्रकाश मानस
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छत्तीसगढ़िया ब्लॉगर्स मीट के पार्श्व से

छत्तीसगढ़िया लोग भी अब संगठित होने लगे हैं । कम से कम यहाँ के ब्लॉगरों ने तो यह कर दिखाया है कल । पर, जैसा कि प्रेस क्लब के अध्यक्ष और अमीर धरती गरीब लोग के ब्लॉगर श्री अनिल पुसदकर जी कल जिस तरह मोबाइल पर बता रहे थे वह चिंताजनक और ब्लॉगर्स के ख़िलाफ़ एक
 
जयप्रकाश मानस
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छत्तीसगढ़ के ब्लॉगर्स मित्रों के नाम

यह खुशी की बात है कि छत्तीसगढ़ के ब्लॉगर रायपुर प्रेस क्लब में एकजूट हो रहे हैं । दुःख इस बात का है कि मैं शरीक नहीं हो पा रहा हूँ । ज़रा सा क्षोभ भी है कि चार आंगुल पेट की चिंता के लिए हम नौकरीपेशावालों को क्या क्या नहीं करना पड़ता है!इस समय मेरा दिल
 
जयप्रकाश मानस
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निबंध ‘लिरिक’ के समीप और समतुल्य भी हो सकती है – पद्मश्री रमेशचन्द्र शाह

पद्मश्री रमेश चन्द्र शाह आधुनिक कविता, विचार और आलोचना के जाने-माने हस्ताक्षर हैं । भोपाल निवासी और शिक्षाविद् श्री शाह ने ललित निबंध की परंपरा को भी जीवंत बनाये रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है । यह दीगर बात है कि वे ललित निबंध को ‘व्यक्ति-व्यंजक
 
जयप्रकाश मानस
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तालिबान

कोई दलील नहींकोई अपील नहींकोई गवाह नहींकोई वक़ील नहींवहाँ सिर्फ़ मौत हैकोई इंसान नहींकोई ईमान नहींकोई पहचान नहींकोई विहान नहींवहाँ सिर्फ़ मौत हैवहाँ सिर्फ़ मौत हैवहाँ सिर्फ़ धर्म हैधर्म को मानिएया फिरबेमौत मरिए
 
जयप्रकाश मानस
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इंडिया टुडे ने याद किया

इंडिया टुडे पढ़नेवालों के लिए तो नहीं किन्तु उनके लिए जो इंडिया टुडे नहीं पढ़ते या नहीं पढ़ पाते सिर्फ़ उनके लिए । मोह नहीं किन्तु जो छापा है इंडिया टुडे ने अपने 20 जनवरी, 2010 के अंक में उसे पाठकों के समक्ष रखने में क्या बुराई है ! तो लीजिए..... नया
 
जयप्रकाश मानस
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रसास्वाद और पाठ का पर्याप्त आग्रह

जब तक हिंदी के प्राध्यापकों ने अपने उत्तरदायित्वों को संपूर्ण रचनात्मकता के साथ निभाया तब तक हिंदी आलोचना गतिमान बनी रही । उसे ठोस ज़मीन मिलती रही । वहाँ सबकी खोज-खबर होती रही । सबकी धुलाई-पोंछाई होती रही । तब वहाँ केवल शास्त्रीयता का आग्रह नहीं था अ
 
जयप्रकाश मानस
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Dec 29 2009 11:44 AM
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सिपाही क्यों नहीं लिख सकता कविता ?

भाग- कई बार लगता है कि उन लोगों की कोई नोटिस नहीं लेना चाहिए जो ये नहीं समझते कि वे कह क्या रहें है ? कर क्या रहे हैं ? क्यों कह रहे हैं ? क्यों कर रहे हैं । उनके ऐसे करने का क्या अंजाम हो सकता है । ऐसे लोगों को कई बार मन और मनीषा दोनों ही नकार देती
 
जयप्रकाश मानस
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थाईलैंड में समुद्र मंथन

भारतीय संस्कृति एकांगी और सीमित परिधि की संस्कृति नहीं है । वह असीमित है । उसकी धरातल वैश्विक है । उसका स्वदेश कहने को भारतीय उपमहाद्वीप है, परंतु सच तो यह भी है कि वह अनचीन्हें भूगोल में भी समुज्ज्वलित है । उसकी बेलें, उसकी महक सिर्फ़ अटक से कटक और
 
जयप्रकाश मानस
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मातृभाषा-छत्तीसगढ़ी में भी समाचार प्रसारण होगा !

सबसे पहले युनिवार्ता को बधाई । बधाई इसलिए कि उसने हम छत्तीसगढ़ीभाषी 2 करोड़ों लोगों तक यह समाचार सबसे पहले पहुँचाया । बधाई इसलिए कि यह शुष्क समाचार नहीं । इसमें हमारी मुरझाती हुई अस्मिता को रससिक्त करने वाला जल भी है । राज्य बनने के बाद से छत्तीसगढ़ी
 
जयप्रकाश मानस
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बस्तर में नक्सलवादी हैं ही नहीं

बस्तर नक्सलवाद नहीं माओवादियों के हिंसक आतंक का गढ़ बन चुका है । आज का समूचा बस्तर आंतकवाद के घटोटोप में जी रहा है । अब यह सिद्ध हो चुका है कि बस्तर के आंतकवादियों को नक्सलवादी कहना नक्सलवाद को गाली देना होगा । यदि नक्सलवाद की सैद्धांतिकी भी सत्यनिष्
 
जयप्रकाश मानस
Dec 29 2009 11:44 AM
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‘ब्लॉग लेखन अनुपयुक्त है’

ब्लॉग लेखन अनुपयुक्त है ।’ मेरे ऊपर एक साथ चिट्ठाकार न भड़कें । यह मेरी टिप्पणी नहीं है । यह टिप्पणी है देश के प्रख्यात वामपंथी आलोचक आदरणीय नामवर सिंह की । आप पूछेंगे – यह उन्होंने कब कहा ? भई कल ही कहा । कहाँ कहा ? छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की एक
 
जयप्रकाश मानस
Dec 29 2009 11:44 AM
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जो स्कूल में नहीं होते वे सिर्फ़ बाल मज़दूर होते हैं

हम कभी गंभीर नही रहे कि हर बच्चा पाठशाला में रहे । शिक्षा के लगभग सभी संकल्पों, मसविदों, प्रस्तावों, आयोगों ने हर कोण से सभी के लिए प्राथमिक शिक्षा को अपरिहार्य माना फिर भी 6 से 14 वर्ष आयु समूह के सभी बच्चों की अनिवार्य दाखिले को अब तक सुनिश्चित नही
 
जयप्रकाश मानस
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पश्चिम में अब रेडियो अधिक रेडियो कल भी था, कल भी रहेगा -अंबरीन हसनात

रेडियो सलाम नमस्ते की वाइस प्रेसिडेंट से बातचीत (सहयोग- आदित्य प्रकाश सिंह) 1. अमेरिका जैसे पश्चिमी माहौल वाले देश में हिंदी रेडियो (रेडियो सलाम नमस्ते)लांच करने के पीछे आपकी सोच क्या थी ? इसके मूल में व्यावसायिकता थी या हिंदी का विस्तार या वैश्विक अ
 
जयप्रकाश मानस
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सबरंग में कौन

जून व्यस्ततम दिनों में से एक निकला । आदित्य जी का ई-पत्र आया है और फोन भी । ई-पत्र ज़रा विलंब से पढ़ सका । यानी आज । क्योंकि कल दिन भर दिल्ली से प्रकाशित सोपान नामक मासिक पत्रिका से जुड़े मित्र उमाशंकर मिश्रा के साथ लगा रहा । सोपान ग्रामीण विकास की म
 
जयप्रकाश मानस
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माओवादी कार्पोरेट नेटवर्क के बंधुआ मजदूर

इधर प्रजातंत्र को जड़ से ध्वस्त करने के लिए उद्यत नक्सलियों से निपटने के लिए केंद्र और राज्यों का संयुक्त अभियान यानी आपरेशन ग्रीन हंट शुरू ही नहीं हुआ है, उधर नक्सलियों के प्रकारांतर से हिमायती दिल्ली में चीखने-चिल्लाने लगे हैं कि देश को युद्ध की वि
 
जयप्रकाश मानस
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पापा ! नक्सली सचमुच बदमाश हैं

राज्योत्सव में टंगे कुछ चित्रों के बहाने कई बार शब्दों का अपना जादू नहीं चल पाता । वे अपने भीतर समाये हुए अर्थों को भावक या मनुष्य के मस्तिष्क तक पहुँचा नहीं पाते । पूरी पंक्तियाँ साधारणीकरण की शिकार हो जाया करती हैं । विचार के गर्भ तक पहुँचते-पहुँचत
 
जयप्रकाश मानस
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केदारनाथ सिंह और चंद्रकात एकाग्र हेतु रचना आमंत्रण

प्रमोद वर्मा स्मृति संस्थान द्वारा हिन्दी के प्रमुख आलोचक, कवि एवं नाटककार तथा मुक्तिबोध के मित्र प्रमोद वर्मा समग्र के सफलतम् प्रकाशन के बाद अपने समय के दो महत्वपूर्ण और सर्वमान्य कवि श्री केदारनाथ सिंह और श्री चन्द्रकांत देवताले पर केंद्रित पृथक-पृ
 
जयप्रकाश मानस
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रंगवार्ता

रंगवार्ता से गुज़रने का मौका आज मिला । यहाँ पहुँचने का एक अपना आनंद है । खा़सकर जो कला की दुनिया को जानना समझना चाहते हैं । देश विदेश की कला केंद्रों की जानकारी घर बैठे एकत्र की जा सकती है । यह वास्तव में विवध कलाओं की मासिक जानकारी उपलब्ध कराने वाली
 
जयप्रकाश मानस
Sep 25 2009 05:57 AM
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फोंट परिवर्तक

नीचे बहुत से फाँट परिवर्तकों के लिंक दिए गए हैं। ये सभी जावास्क्रिप्ट में हैं। वैज्ञानिक एवम तकनीकी हिन्दी समूह पर जाकर इन्हें डाउनलोड करके अपने डेस्कटाप पर भी चलाया जा सकता है।जिस परिवर्तक को चलाना चाहते हैं उसके लिंक पर क्लिक कीजिये:पुराने फाँट से
 
जयप्रकाश मानस
Sep 05 2009 01:14 PM
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एक खुला खत

आशुतोष जी, आप इतने असंतोष क्यों है ?आशुतोष कुमार नामक किसी पत्रकार या लेखक द्वारा जनसत्ता में प्रकाशित लेख ( प्रख्यात कवि आलोचक श्री अशोक बाजपेयी के जनसत्ता 19 जुलाई, 2009 के अंक में कभी-कभार में प्रकाशित आलेख ‘सहचर की याद’ के एक वाक्य को बीज वाक्य बनाकर
 
जयप्रकाश मानस
Aug 06 2009 06:43 PM
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आलोचक श्री पंकज चतुर्वेदी को खुला पत्र

प्रिय पंकज चतुर्वेदी जी, आपका ई-पत्र, जो प्रमोद वर्मा संस्थान के अध्यक्ष श्री विश्वरंजन के नाम संबोधित है, उन तक पहुँच दी गई है । मैं आपको उनकी ओर से नहीं अपितु निहायत निजी तौर पर अपनी ओर से ( संस्थान के कार्यकारी निदेशक होने के नाते भी ) आपके पत्र क
 
जयप्रकाश मानस
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छत्तीसगढ़ में ब्लॉगरों की संगोष्ठी कल

कल 10 जुलाई को रायपुर में ब्लॉगर्स भी दो दिवसीय राष्ट्रीय आलोचना समारोह के बहाने शरीक हो रहे हैं । उनके बीच रहेंगे - देश और प्रदेश के नामी साहित्यकार । क्या आप भी पधार रहे हैं ? विस्तृत जानकारी यहाँ देखें
 
जयप्रकाश मानस
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“वग़ैरह” के भीतर और बाहर

प्रमोद वर्मा स्मृति समारोह पर विशेष हमारे बौद्धिक प्रवर कनक तिवारी जी का छत्तीसगढ़ में प्रकाशित लेख (29 जून, 2009) पढ़कर मुझे भी कुछ कहने का अवसर मिल रहा है । आपने प्रमोद वर्मा पर सोलह आने सच लिखा है कि हम सबने और सरकार ने भी उन्हें लगभग बिसार दिया थ
 
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प्रमोद वर्मा, विश्वरंजन और कुछ लोग

प्रमोद वर्मा स्मृति समारोह पर विशेष ‘कुछ लोग’ प्रमोद वर्मा को नहीं जानते । ‘कुछ लोग’ यह भी नहीं जानते कि हर कोई प्रमोद वर्मा को नहीं जान सकता । वैसे ‘कुछ लोग’ स्वयं के बारे में भी नहीं जान पाते । बात ऐसे ‘कुछ लोगों’ की नहीं हो रही है । बात उनकी होनी
 
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कहीं आप भी जुगुल किशोर तो नहीं बन रहे है

किस्सा-ए-सायबर अपराध आप यदि मोबाइल यूजर्स हैं या फिर इंटरनेट यूजर्स तो आपके जुगुल किशोर बनने की संभावना बढ़ जाती है । तब शायद आप भी किसी ईनाम, लाटरी, पुरस्कार वाले मैसेज या ई-मेल के झाँसे में लाखों रूपये गँवा बैंठे और तब तक पुलिस को न बतायें जब तक आप
 
जयप्रकाश मानस
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आयोग नक्सलियों के ख़िलाफ़ कब कार्यवाही करेगा ?

व्यवस्थित, पारदर्शी और शांतिपूर्ण चुनाव के लिए चुनाव आयोग बड़े से बड़े नेताओं की ऊँचाई नापने में कोई कोताही नहीं कर रहा है । जिलों में हिंसा, आंतक, अशांति फैलाने वालों को जेलों में ठूँसा जा चुका है या उन्हें दबाकर रखा जा रहा है । राज्यों के ऐसे डीजीप
 
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।। नक्सलियों के बयानों के पीछे की वास्तविकता ।।

हाल ही में नक्सलियों ने जनता-सरकार की माँग की है । किससे की है ? क्या सरकार से की है? यदि वह माँग सरकार से है तो प्रश्न उठता है कि सरकार तो नक्सल विरोधी है । भविष्य की हर सरकारें चाहे उस सरकार को कोई भी दल संचालित करे, नक्सलविरोधी भी होगी । क्योंकि न
 
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क्या नेशनल बुक ट्रस्ट में कुनबाबाद चलता है ?

एक दिवसीय साहित्य महोत्सव पर निजी टिप्पणी ) हमें किसी पर ऐसी टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है, जब तक हम वैसी हरक़त करने की समस्त संभावनाओं से ख़ुद को मुक्त न कर लें । वैसे यह बड़ा जोख़िम भरा उद्यम है - एक साधना की तरह, यह हम बख़ूबी जानते हैं, फिर भी आज
 
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नहीं रहे कवि सुदीप बेनर्जी

मेरे लिए यह दुखद सूचना है कि कविता के वरिष्ठ हस्ताक्षर और पूर्व संवदेशनशील प्रशासक श्री सुदीप बेनर्जी का आज दिल्ली में निधन हो गया । उनका जन्म जन्म: 16 अक्टूबर 1945 को मध्यप्रदेश के इंदौर में हुआ था । वे मध्यप्रदेश कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अध
 
जयप्रकाश मानस
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नक्सलवादी हथियार पाते कहाँ से हैं ?

हमारे एक मित्र हैं - चाँद शुक्ला । कोपेनहेगन, डेनमार्क में रहते हैं । वैसे वे कपूरथला के रहने वाले हैं । काम तो एक्सपोर्ट-इंपोर्ट का करते हैं पर मैं उस चाँद शुक्ला की बात कर रहा हूँ जो हदियाबादी के नाम से लिखते-पढ़ते हैं । दरअसल वे नहीं चाहते कि लोग
 
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