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कॉफी हाउस

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22 Apr 2010
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हिमालय के घाव

प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध उत्तराखंड धीरे-धीरे पारिस्थिक तौर पर खोखला बनता जा रहा है. ऐसा करने का काम जनता का कोई घोषित दुश्मन नहीं बल्कि चुनी हुई सरकारें कर रही है. राज्य को ऊर्जा प्रदेश बनाने का दावा करने वाली उत्तराखंड सरकार ने केंद्र के साथ मिलकर
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राजनीति में परिवारवाद

आजकल तमिलनाडु में परिवारवाद की राजनीति चरम पर पहुंची हुई है. मुख्यमंत्री करुणानिधि के बेटे एमके स्टॉलिन और एमके अझागिरी पिता का स्थान लेने के लिए आपस में बुरी तरह उलझे हुए हैं. करुणानिधि जैसे संसदीय राजनीति के धुरंधंर को भी इससे बाहर निकलने का कोई रास्ता
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नेपाल में ख़त्म नहीं हुई राजशाही !

नेपाल के एक संप्रभुतासंपन्न लोकतंत्र बनने की राह में नई-नई रुकावटें पैदा हो रही हैं. पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र द्वारा खुलेआम राजशाही की वकालत करने के बाद वहां के राजनीतिक हलकों में भूचाल आ गया है. बेशक, ये घटना नेपाली लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है. लेकिन ऐसा
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विदेशी विश्वविद्यालय कैसे करेंगे भला ?

भारत में विदेशी विश्वविद्यालयों के प्रवेश को कैबिनेट की हरी झंडी मिलने के बाद भारतीय मध्य वर्ग गदगद है. मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने इस विधेयक को अभूतपूर्व और भारतीय उच्च शिक्षा में गुणात्मक परिवर्तन लाने वाला बताया है. वे सब्जबाग दिखा रहे है
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राजा की प्रजा बनकर सुखी हुसैन

कतर की नागरिकता स्वीकार करते ही मशहूर चित्रकार एमएफ़ हुसैन के समर्थकों के बीच बेचैनी है. उनका मानना है कि हुसैन को मज़बूरी में ये फैसला करना पड़ा. वे हिंदू कट्टरपंथियों और भारत सरकार की अकर्मण्यता को इसके लिए ज़िम्मेदार मानते हैं. कुल मिलाकर माहौल ऐसा बन
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बाज़ार देगा उच्च शिक्षा !

भारत सरकार ने उच्च शिक्षा में निजी निवेश को लेकर पूरी तैयारी कर ली है. केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल इसके लिए युद्ध स्तर पर अभियान चलाये हुए हैं. उन्होंने देश में विश्वविद्यालयों की कमी को पूरा करने के लिए उद्योगपतियों से पूंजी निवेश की
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नेपाल में नए संविधान की राह के रोड़े

नेपाल की राजनीतिक उथल-पुथल इन दिनों चरम पर पहुंच गई है. क़रीब साढ़े तीन साल पहले सशस्त्र संघर्ष छोड़कर शांति समझौते पर दस्तख़त करने वाली कम्युनिस्ट पार्टी-माओवादी ने धमकी दी है कि अगर समझौते पर अमल नहीं किया गया तो उन्हें फिर से हथियार उठाने पर मज़बूर
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Feb 11 2010 06:16 PM
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राजशाही की रक्षा में लोकतंत्र के ठेकेदार

आनंद स्वरूप वर्मा दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश भारत अपने आसपास के इलाक़ों में राजतंत्र का समर्थक बना बैठा है. दक्षिण एशिया में नेपाल और भूटान इसके जीते-जागते उदाहरण हैं. भारत सरकार ने बहुत पहले से ही इन देशों में चलने वाली लोकतांत्रिक लड़ाइयों
Dec 29 2009 11:44 AM
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हम क्रांतिकारी नहीं थे

आर चेतनक्रांति चेतन हमारे दोस्त हैं और हिंदी की युवा पीढ़ी के सबसे ऊर्जावान कवियों में से एक हैं. उनकी कविता विचार के क्लीशे को पार करते हुए हर तरह की जड़ता का विरोध करती है. वो गलत समझ लिए जाने की हद तक जाते हुए साहस का परिचय देते हैं. हड़बड़ी में फ
Dec 29 2009 11:44 AM
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चलती रहेगी ज़िंदगी!

कल्याणपुरी (दिल्ली) में तहस-नहस की गई झुग्गियों के मलबे में ज़िंदगी.
Dec 29 2009 11:44 AM
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उम्र से डरती लड़की

नारियल रखा था लेकिन उसके पैदा होते ही माता-पिता ने फोड़ना चाहा अपना माथा बचपन की त्वचा पर घिसा किसी रिश्तेदार का तनाव कैशोर्य में हर महीने फूटने वाले ख़ून के सोतों को माना गया अपवित्र उनकी अंदरूनी हलचल में डोलती रही एक दुनिया हक़ीकत से जूझने में काम
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वक़्त

बैठे-बैठे सोचते रहे कि अब वक़्त को यूं ही नहीं जाने देंगे जब हम कुछ करने के लिए खड़े हुए तो वक़्त जा चुका था
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इब्राहिम अल्काजी का क़द, काला रंग और हिजड़े

ये नैशनल स्कूल ऑफ ड्रामा की स्थापना का पचासवां साल है. भारतीय रंगमंच में कई अद्भुत प्रयोग करने और स्कूल को एक नई दिशा देने की वजह से इसके पूर्व निदेशक इब्राहिम अल्काजी का नाम कभी भुलाया नहीं जा सकता. इस बार भारत रंग महोत्सव के उद्घाटन के मौक़े पर स्क
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रिश्ता

तुम मुझे अच्छी लगी मैंने चाहा कि तुम्हारी सद्इच्छाएं मुझे मिलें तुम मुझे बहन की तरह लगी. तुम मुझे अच्छी लगी मैंने चाहा कि तुम्हारे कांपते ओठों को चूम लूं तुम मुझे प्रेमिका की तरह लगी तुम मुझे बहुत अच्छी लगी मैंने तुम्हें ना कभी बहन कहा, ना कहा प्रेमि
Dec 29 2009 11:44 AM
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बर्फीले इलाक़े में ज़िंदगी

मेरे नेपाली दोस्त दीपक ने सालों पहले एक फिल्म का ज़िक्र किया था. नाम था कैरेवान. वो गदगद होकर फिल्म की तारीफ़ करता था. आज तक मुझे फिल्म देखने का मौक़ा तो नहीं मिला लेकिन उसका ज़िक्र कहीं दिलो-दीमाग में बैठ सा गया था. इस बार दिल्ली के हैबिटैट सेंटर मे
Dec 29 2009 11:44 AM
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ख़तरे में साहित्य अकादमी की स्वायत्तता

पंकज बिष्ट वरिष्ठ कथाकार और समयांतर पत्रिका के संपादक पंकज विष्ट लगातार साहित्य अकादमी में चल रही अनियमितताओं की पोल खोलते रहे हैं. इस बार वो बता रहे हैं कि कैसे अकादमी की स्वायत्तता को एक व्यक्ति अपनी जेब में रखने की कोशिश कर रहा है. इस लेख को समयां
Dec 29 2009 11:44 AM
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एक दोपहर कुरोसावा के साथ

पढ़ाई के दिनों में हम लोग मनोहर श्याम जोशी से स्क्रिप्ट राइटिंग के गुर सीख रहे थे. क़रीब एक हफ्ता हमने उनके साथ बिताया. फार्म्यूला फिल्मों का विरोध करने पर उन्होंने कहा था कि फॉर्म्यूला तोड़ने के लिए भी फॉर्म्यूले को जानना ज़रूरी है. उन्होंने फिर आगे
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अश्लीलता के महल और उनके अपराधी

जिस शहर में लाखों लोग बिना छत के ज़िंदगी बिता देते हों और जिस देश की अस्सी प्रतिशत जनता को न्यूनतम ज़रूरतों से युक्त घर आजीवन न मिलता हो, उस देश के उस शहर में कोई आदमी चार हज़ार करोड़ का सत्ताईस मंजिला मकान छै लोगों और उनके छै सौ नौकर-चाकरों के रहने
Dec 29 2009 11:44 AM
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मैं मुसलमान होता तो इस देश में कैसे जीता?

आफताब आलम अंसारी को गोरखपुर धमाकों के आरोप में जिस तरह फंसाने की कोशिश की गई उसके ख़िलाफ़ कई लोगों ने अपनी आवाज़ बुलंद की है. अल्पसंख्यकों के साथ पुलिसिया व्यवहार पर नदीम ने कुछ अहम सवाल उठाए हैं तो आशीष ने देश के माहौल पर एक भावुक-सी टिप्पणी की है.
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मुसलमान होने की सज़ा

नाम में क्या रखा है, ये कहने के बाद शेक्सपीयर सदियों पहले मर गया. लेकिन नाम से निकलने वाली प्रतिध्वनियां आधुनिक मनुष्य का पीछा नहीं छोड़ रही हैं. जटिलता भरे समाज में नाम का मसला इंसान की एक ख़ास तरह की पहचान से जुड़ जाता है. इसके आधार पर जहां बहुसंख्
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फैज़ अहमद फैज़ को याद करते हुए

हम देखेंगे लाजिम है कि हम भी देखेंगे वो दिन कि जिसका वादा है जो लौह-ए-अजल में लिखा है जब जुल्म ए सितम के कोह-ए-गरां रुई की तरह उड़ जाएँगे दम महकूमों के पाँव तले जब धरती धड़ धड़ धड़केगी और अहल-ए-हिकम के सर ऊपर जब बिजली कड़ कड़ कड़केगी हम अहल-ए-सफा, मरदूद-ए-ह
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अंकल कुछ नहीं होवेगा

वसंत पंचमी भी जा चुकी है लेकिन दिल्ली की ठंड है कि अभी जाने का नाम नहीं ले रही. कॉफी हाउस में कुछ कॉफी, कुछ राजनीति और कुछ कला-साहित्य पीने के बाद प्रेस क्लब पहुंचा. कोई अच्छा साथी नहीं मिला तो अपनी आउटडेटेड मोटरसाइकिल चलाते हुए सूखा-सूखा घर लौट आया,
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असहमति के अधिकार के लिए

ग्यारह फरवरी को प्रेस क्लब पहुंचें हाल के दिनों में कुछ वरिष्ठ पत्रकारों की गिरफ्तारियों ने बौध्दिक समुदाय को चिंता में डाल दिया है। उत्ताराखंड में प्रशांत राही, छत्तीसगढ़ में प्रफुल्ल झा, आंध्र प्रदेश में श्रीसाइलम, केरल में पी. गोविंदन कुट्टी आदि की
Dec 29 2009 11:44 AM
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पीर पर्वत की

शेखर पाठक को जानने वाले उन्हें इन्साइक्लोपीडिया ऑफ हिमालया भी कहते हैं. क़रीब चालीस सालों से उत्तराखंड के जनआंदोलनों का हिस्सा रहे शेखर पाठक एक बड़े घुमक्कड भी हैं. उन्होंने हिमालयी इलाक़ों की लंबी-लंबी और कठिन यात्राएं की हैं. ऐसी ही एक यात्रा का ना
Dec 29 2009 11:44 AM
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कविता के बाद कुछ पल

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में मंगलेश जी के कविता पाठ के बाद की तस्वीर. बाएं से त्रिनेत्र जोशी, इब्बार रब्बी, हरिनारायण, बिष्णु खरे, मंगलेश डबराल, आर. चेतन क्रांति, सुंदर ठाकुर, भूपेन और हर्ष डोभाल.
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एक शाम मंगलेश डबराल की कविताओं के नाम

भारत रंग महोत्सव के दौरान एक शाम मंगलेश डबराल की कविताओं के नाम रही. राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय ने उन्हें ख़ास तौर पर कविता पाठ के लिए बुलाया था. कुछ कविताएं मंगलेश जी ने ख़ुद पढ़ीं और कुछ एनएसडी पास-आउट अभिनेता रामजी बाली ने. उनमें से दो कविताएं पेश ह
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मीडिया रेग्यूलेशन के सवाल

टेलीविजन चैनलों में दिखाए जा रहे बेहूदा कार्यक्रमों की वजह से लोगों का गुस्सा बढ़ता ही जा रहा है. इसकी अनदेखी करना अब सरकार के लिए भी आसान नहीं है. इसलिए पिछले दिनों सूचना और प्रसारण मंत्रालय इस मामले में काफ़ी सक्रिय दिखा. मंत्रालय ने मीडिया रेग्लूल
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पहाड़ में प्रतिरोध का सिनेमा

भारत सिंह चुफाल प्रतिरोध की थीम पर केंद्रित नैनीताल फिल्मोत्सव सात-आठ नवम्बर को शैले हाल, मल्लीताल में हुआ. नेत्र सिंह रावत और एन.एस.थापा को समर्पित इस उत्सव को जन संस्कृति मंच और युगमंच ने सम्मिलित प्रयासों से किया था. यह दिल्ली जैसे महानगरों में हो
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पहाड़, पतझड़ और मन का भूगोल

लंबे अरसे से सोचता था कि नैनीताल में कोई फिल्म फेस्टिवल किया जाए. दोस्तों के साथ मिलकर योजना बनाने की कोशिश भी की. लेकिन कभी कुछ तय नहीं हो पाया. इस बार पता चला कि अपने ही कुछ पुराने साथी वहां पर फिल्म फेस्टिवल की तैयारी कर रहे हैं तो मैं भी साथ में
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नैनीताल फिल्म फेस्टीवल

सात और आठ नवंबर को पहला नैनीताल फिल्म फेस्टीवल होने जा रहा है. थीम है प्रतिरोध का सिनेमा. जगह है शैले हॉल, नैनीताल क्लब, मल्लीताल. इसमें देश और दुनिया की कई महत्वपूर्ण फिल्में दिखाई जाएंगी. नेत्र सिंह रावत और एनएस थापा को समर्पित इस फेस्टीवल को युगमं
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ARREST CULPRITS OF KANDHMAL AND RESTORE THE RULE OF LAW

The attacks carried out on Christians living in the villages of Kandhamal district, Orissa were planned and executed by the Hindu fundamentalist groups VHP, RSS and Bajrang Dal. With the BJD-BJP combine in power, the state machinery did nothing to stop
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Oppose assault on freedom of expression!

Oppose assault on freedom of expression! Defend the Right To Dissent! at Press Club Of India on February 11, 3.30 p.m. Speakers include Kuldeep Naiyar (Senior Journalist and Human Rights activist) Rajendra Yadav (Editor 'Hans') Vinod Mehta (Managing
Feb 09 2008 04:38 PM