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31 Dec 2009
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एक "BIHARI" सौ बीमारी…।

हम भी भारत माता के वक्ष हैं देखो न…कैसे गंगा बह रही है दूध की तरह… 'सफर' का कोई कारण तो होता नहीं… राह सामने हो तो कदम कुछ पाने की लालसा में आगे बढ़ ही जाते हैं…इस सफर में और लोग भी कदम साथ कर लें तो हैरानी का कोई कारण नहीं, थोड़ी दूर तलक चलें साथ तो क
 
Divine India
Dec 29 2009 11:46 AM
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"प्रेम" पंथ है अटपटो……

मैं" ने माना है…तुम चली गई हो दूर बहुत , मेरी छाया से भी अलग, ख्वाबों के शरहदों के भी पार… पर "हृदय" ने जाना है…उसमें रची-बसी हो तुम, कहीं अंतरंग लय में भींगो रही हो तुम… "मैं" ने माना है… दु:ख-विरह की उद्वेगावस्था हो तुम, संताप की परमसीमा…एक मात्र इ
 
Divine India
Dec 29 2009 11:46 AM
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River Valley to Silicon Valley: एक समीक्षा

आज बहुत दिनों बाद या यों कहा जाए कि पहली बार किसी पुस्तक की समीक्षा करने का मौका मिला जो मेरे लिए एकदम अलग अनुभव रहा…कई दिनों से यह इच्छा थी कि ऐसा कुछ किया जाए किंतु समयाभाव के कारणत: ऐसा हो नहीं पा रहा था, उसी दौरान ‘अभय जी’ जो रुस में “भारत के राज
 
Divine India
Dec 29 2009 11:46 AM
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जागेगा इंसान अगर…!!!

लाखों आये और चले भी गये अपनी-अपनी परिधियों को लांघकर … अपने स्वप्नों के सत्य साकार को दिखाकर निर्माण किया प्रबुद्धता…विघ्नों को बाहों में समेटकर कइयों की विरोचित कथाएँ की है हमने चर्चित भी कालातीत हुई हैं… अब यादें उनकी पर क्या कुछ सीखा है हमने इनकी
 
Divine India
Dec 29 2009 11:46 AM
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त्रासदी का समर है…ऐ "परमात्मा" !!!

सुंदर जगत ये सुंदर आवरण अद्भुत प्रकृति पर दिवस का आगमन किस ओर नहीं … हर ओर मौज है चातुर्दिक प्रेम दिव्य संगीत की लय है… ****** विपदा का एक ऐसा मंजर भी आता है तराशी हुई दुनियाँ में भी एक ज्वाला फूट पड़ती है नभ धू ‍‍‍- धू करता हुआ उपवन हीं सारा जलता है
 
Divine India
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तू ही मेरी प्रतीक्षा है…!!!

है वह अनगिनत सुरों की साधना यहाँ से वहाँ … एक छोर से दूसरे तक वादियों में बिछे शबनम की शीतलता मेरे भागते जीवन की आश्ना … किसी संध्या की शांत कहानी की भंगिमा ज़ूस्तजू है या मेरी कल्पना की तृप्ति ' का कोई सोंच हो मेरी या मेरे अनुमानों की मूर्त मीमांसा …
 
Divine India
Dec 29 2009 11:46 AM
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खुशबू है 'वह' विभिन्न रंगों की…!!!

थोड़ा-थोड़ा साथ उसी का, सत्य भी है अखंड भी … मेरे अंगों की खुशबू, मेरा अहंकार है वह … अफसाना भी है वह , कोई तराना भी है … लेखक की कल्पना है वह , कोई कलम की रवानगी भी है कहानी भी है वह , कोई दिलकश प्रेमी का नूर भी … सपना है अहसास और साक्षी है वह कर्तव्य
 
Divine India
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जिंदगी लहर है…इबादत है…!!!

यह निर्जरा है… प्रधन का … संयुग है… एषणा का … समग्रता है… आश्चर्य का … चांदनी है… अपूर्व सौंदर्य शीतलता का … जिंदगी लहर है… कौतूहल का … इबादत है… परमात्मा के स्नेहावलंबन का , छिपाया मर्म है कितने स्थापनाओं का बड़ा अनोखा रहस्य भी है अंधकार का भाषा भी इ
 
Divine India
Dec 29 2009 11:46 AM
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वहाँ भी अनंत...यहाँ भी!!!

वहाँ भी सरक कर पत्तों से बूंदे अनंत में घुल जाती हैं यहाँ भी शब्द ह्रदय की गहराइयों से टपक कर अनंत बन जाती है। शुरू का बोध अगम्य निश्छल कार्य कल्पना के पार नईया खेता यहाँ भी नाचती अहसासों में अबंध गीता की परिकल्पना। कितने दिवस बीत गए उम्मीद-ए-आशाओं म
 
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चला मुरारी "Director" बनने…!!!

बिहार के ग़र्द से दिल्ली की ज़र्द तक और मुंबई के "अर्ज़" पर चला यह 'मुरारी' अब "Director" बनने...!!! UPSC(IAS)छोड़ने के एक साल बाद भारी मुसक्कत और मानसिक दुविधाओं को परास्त करते हुए अंतत : "Film Making" के ग्लैमर के आकाश में उड़ने को चाहा मन… थोड़ा परिवार
 
Divine India
Dec 29 2009 11:46 AM
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1857 का "Revolt"

का विद्रोह ” अपने 150 साल पूरा कर चुका है, मुंबईचौपाल पर बहस के लिए आमंत्रण किया गया था बात यहीं से शुरु हुई…मैंने देखा वर्तमान समय में इतिहास के कुछ पन्ने स्पष्ट हो चुके हैं तब-भी इतनी अतिश्योक्तिपूर्ण परिचर्चा हो रही है…अब चुकीं इस क्षेत्र से अपन क
 
Divine India
Dec 29 2009 11:46 AM
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प्रीत की लगन या मुक्ति मार्ग

आगोश में निशा के करवटें बदलता रहता है सवेरा लिपटकर उसकी संचेतना में बिखेरता है वह प्रांजल प्रभा… संभोग समाधि का है यह या अवसर गहण घृणा का फिर-भी तरल रुप व्यक्त श्रृंगार, उद्भव है यह अमृत का… उत्साह मदिले प्रेम का… जागते सवेरे में समाधि… अवशेष मुखरित
 
Divine India
Dec 29 2009 11:46 AM
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आशा का नभ है विशाल…।

जाने कितनी ही सुबह बीत गई रात को तकने के बहाने पर याद रहा मेरा यही साथी जो साथ चला था तन्हाइयों में उस वक्त… अपने फिल्म को लेकर इतना व्यस्त हो गया हूँ कि कब रात आती है और चली जाती है पता ही नहीं चलता। वैसे मेरी फिल्म का Promo सीरिफोर्ट ऑडिटोरियम में
 
Divine India
Dec 29 2009 11:46 AM
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मैं हूँ यही मेरा है नव-निर्माण…

नियती नहीं मेरा किसी सोये हुए इतिहास का उद्घोषणा प्रकृति का नवीन वर्तमान हूँ… मन की उदास वृत्ति बेचैन शोक का नाद नहीं राह दृष्टांत धवल ज्योति का पूँज हूँ … गहन अंधकार निस्तेज आवरण अविद्या शरणार्थी नहीं प्रस्फुटित काया प्रज्ञा भूषित क्रांति का पुत्र ह
 
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प्रेम पंथ है…आत्म प्रतीति।

पता नहीं मुझे इस जिंदगी के और कितने मायने हैं… समझ नहीं आता कौन दु:ख के, कौन सुख के हैं… सभी को साथ लेकर परखना……? संभव नहीं, वक्त निकलता जाता है, कई उलझे मोड़ छोड़ देता है मदिले संरचना में इसके फिर देवदास चला आता है अपने को भींगाकर रस में पतला सा दर्द
 
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Nalanda -- हमारी धरोहर है।

नालंदा" जिसका अर्थ है ज्ञान बाँटने वाला , जहाँ से भारत में सांस्कृतिक व दार्शनिक विचारधारा का सूत्रपात हुआ। जिस समय विश्व अपने अस्तित्व को अंधकार में तलाश रहा था, हमारी नालंदा अपनी ज्ञान गंगा से जगत के पाप-पंकिल-शरीरी को पवित्र करने में जुटा था। उस ज
 
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आगाज़ सजग; वास्तविकता मौन…।

कतरा-कतरा जीवन की डोर सिमटती जाती है संध्या के लाल गर्भ में… बेख़ौफ नाचती आहिस्ते से घटती जाती है सांसों में… दौड़ अंधी, भाग दुनियाँ की बैचैन चेहरों में उगती है मायूस पल तृष्णा की कैद आजाद मन पर चढ़ती जाती है…। सभी भाग रहे बस औरों से आगे-आगे, किस ओर कहा
 
Divine India
Dec 29 2009 11:46 AM
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सभी को दीपावली की बहुत सारी शुभकामनाएँ।

एक प्रोजेक्ट के सिलसिले में अचानक मुझे मुंबई से बाहर जाना पड़ रहा है… कुछ दिन तो लग ही जाएँगे आने में, तबतक आप सभी को मेरी ओर से---- "सभ्यता-संस्कृति-संस्कारों का है यह प्रज्ज्वलन या भूत से वर्तमान का है यह संवरण मेरे लिए तो यह दीपक भविष्य का है परावर
 
Divine India
Dec 29 2009 11:46 AM
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"दिनकर"… एक बलंद आवाज ।

बढ़कर विपत्तियों पर छा जा, मेरे किशोर! मेरे ताजा! जीवन का रस छन जाने दे,तन को पत्थर बन जाने दे। तू स्वयं तेज भयकारी है, क्या कर सकती चिनगारी है?" राष्ट्रकवि 'दिनकर' विरचित ये पंक्तियाँ आम मानव में भी विशिष्टता का बोध कराने सकने में सक्षम है… विगत कुछ
 
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Dec 29 2009 11:46 AM
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महात्मा…Gandhi...।

हमारे परम पिता, गुरु एवं कर्णधार कई मायनों में हमसे बिल्कुल समान और थोड़े जुदा-जुदा भी। आज विश्व अहिंसा दिन भी घोषित किया गया जो इस महान पुरुष के लिए विश्व श्रद्धांजलि है। भारत ही ऐसा देश है जहाँ इस महा- पुरुष की सबसे ज्यादा आलोचना की गई मगर वह आज भी
 
Divine India
Dec 29 2009 11:46 AM
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राष्ट्रकवि "दिनकर" जन्मशताब्दी समारोह- एक झलक

न देखे विश्व पर मुझको घृणा से, मनुज हूँ सृष्टि का श्रृंगार हूँ मैं। सुनूँ क्या सिंधु!! मैं गर्जन तुम्हारा स्वयं युग-धर्म का हुंकार हूँ मैं। इन पंक्तियों की प्रखरता को देखकर सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि मैं बात किसकी करने वाला हूँ… इसकारण बताना भ
 
Divine India
Dec 29 2009 11:46 AM
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वंदेमातरम्… Vande Maatram...।

शक्ति है… विश्वास है… आजाद भारत का वरदान है यह शब्द हमारी "आन" है इसकी उन्माद हमारी "जान" है उद्घोष हमारी "शान" है… आत्मा के अंतरतम में गुंजता यह पावन गीत मेरे हर्ष का आधार है… वंदे ssssss मातरम………………… अखंड भारत का गौरव…एक पवित्र जाग है…। ******** आओ
 
Divine India
Dec 29 2009 11:46 AM
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इतना सबकुछ बाहर है…"फिर-भी"……

मौज़ों में फैला आध्यात्म अज्ञानों पर बैठी गीता-गान है, नि:सीम शून्य अनंत में पंखों पर उड़ती आशा है , उत्सव ही उत्सव मदिरालय में उसके, क्यों अंतरतम खाली है… इतना सबकुछ बाहर है, फिर-भी भीतर खाली है… । ममता और करूणा है, कण-कण में बहती लहरों की तरह परिवर्त
 
Divine India
Dec 29 2009 11:46 AM
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मेरा गीत, मेरी मधुशाला…!!!

काफी समय बीत गया रुह चुराने में… शायद जीवन और लगे उसे पास लाने में"। इस दौरान मेरे एक मित्र मधुमये जी जो संगीतकार हैं, उन्होंने मुझे प्रेरित किया गीत लिखने के लिए और बस कलमबद्ध गीत की संगीतमय रुपरेखा तैयार हो गई… वैसे तो ये बहुत पहले ही संगीतबद्ध हो
 
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मेरा गीत, मेरी मधुशाला…!!!

काफी समय बीत गया रुह चुराने में… शायद जीवन और लगे उसे पास लाने में"। इस दौरान मेरे एक मित्र मधुमये जी जो संगीतकार हैं, उन्होंने मुझे प्रेरित किया गीत लिखने के लिए और बस कलमबद्ध गीत की संगीतमय रुपरेखा तैयार हो गई… वैसे तो ये बहुत पहले ही संगीतबद्ध हो
 
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Weeping Hormony...

Hello Everyone,Before I say anything I would like to introducemyself...some of you may know me by my comments posted at few places in Hindi Blog world .I am Aditi Nandan little brother of your own Divyabh Aryan and just an other ordinary Indian. My
 
Divine India
टैग: my brother's head
Jul 31 2007 01:32 AM