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दिल के दरमियाँ

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22 Mar 2010
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एक बीज ...

लीजिए जनाब अब पर्थ से वापसी हो गई है सिडनी में, अपने परिवार के बीच, अब यहाँ आकर फिर वही जिंदगी पहले की तरह ...कभी-कभी दिल कुछ इस तरह भी सोचता ...आप लोग भी देखियेगा उदासी जरूर है... पर ऐसा होता भी है ना... आप लोगों की राय बहुत कीमती है ...एक बीजमैंने
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शुभकामनाएँ...

आप सबको दिल के दरमियाँ की ओर से होली की हार्दिक शुभकामनाएँभावना कुँअर
Feb 28 2010 07:02 AM
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बस यूँ ही...

मित्रों काफी दिनों से आप लोगों से वार्तालाप नहीं हुई, व्यस्तता ही इतनी रही,लिखा तो इन दिनों बहुत पर पोस्ट नहीं कर पाई,किन्तु अब ऐसा नहीं होगा, जो लिखा सभी अब क्रम से पोस्ट किया जायेगा, आप सबका स्नेह और दुआएं ही मेरी प्रेरणा रहें हैं। कल मेरा जन्मदिन है
Feb 11 2010 06:59 PM
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सभी मित्रों को नव वर्ष की हार्दिक बधाई!!

काँपते हाथ पलटे कलैंडर नये साल का। मासूम आँखे खोज़ती माता-पिता सूने घर में। सीढियाँ चढे़ सँभलकर सभी नये वर्ष में। उलझे रास्ते जल्द ही सुलझेंगे नव वर्ष में। मोड़ भी बस मुड़ते रहें सदा मंजिल से दूर। मंगलमय सभी को नव वर्ष दिल से दुआ। आगे पढ़ने के लिए यह
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अनकही दास्ताँ...

आप सभी मित्रों के सहयोग और स्नेह के कारण आज़ मैं भी कर पूरी कर पाई सैंचुरी और कोई समय होता तो आप सबको केक खिलाया जाता पहले की तरह लेकिन कोई बात नहीं उधार रहा जैसे ही मूड़ अच्छा होगा आप सबको केक खिलाया जायेगा... आज़कल कुछ अनजान सायों के बीच घिरी रहती हू
Dec 29 2009 11:44 AM
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मासूम पुकार...

मुम्बई में मची तबाही दिलो दिमाग से निकलने का नाम नहीं लेती तो क्या हुआ अगर परदेश में बैठे हैं हमारी आत्मा तो अपने देश की मिट्टी में बसी है नहीं सहा जाता इतना दुःख, आत्मा पर इतना बोझ की ना कुछ कहते बनता ना ही चुप रहते बनता। आज़ इतने दिन हो गये पर टी०वी
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शहीदों को शत-शत नमन...

कफन में लिपटे… अपने बेटे को देख ! माँ का कलेज़ा फट पड़ा ! आँसू आँख से नहीं दिल से बहे थे… ऊँगलियाँ थी कि… उसके चेहरे से नहीं हटती… मुँह से बस यही आवाज़ निकली ! वाह मेरे लाल ! मुझे नाज़ है तुझ पर बचा लिया तूने कितनी ही… माँ की गोद को उज़ड़ने से… बचा लिया
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सिलसिला…

आज़ सुबह जैसे ही टी०वी० खोला सबसे पहली खबर सुनने में आई एक नवजात बच्ची को मुम्बई के माँ बाप ने डस्टबिन में डाल दिया ये सुनते ही दिल दहल गया भावनाएँ उमड़ पड़ी उस बच्ची के लिए ….पिछले हफ्ते दिल्ली की भी ऐसी एक खबर पढ़ने में आई थी जिन्होंने अपनी बच्ची को
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नहीं उसके सिवा तेरा कोई, ये याद कर ले...

लीजिये आप सबके स्नेह के कारण अम्माजी की लिखी एक ओर ग़ज़ल... नहीं उसके सिवा तेरा कोई, ये याद कर ले खुदा की याद से तू अपना दिल आबाद कर ले। न उसको याद रखना, करना है बर्बाद खुद को कहीं ऐसा न हो तू खुद को यूँ बर्बाद कर ले। अगर फ़रियाद सच्चे दिल की हो, सुनत
Dec 29 2009 11:44 AM
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प्रेम का पाठ

प्रिय पाठकों आज मैं आप सबके लिये अपनी मातृतुल्य संतोष कुँअर जी की एक रचना लेकर आई हूँ आशा है आप सबको पंसद आयेगी। मम्मी जी को लिखने का बचपन से ही शौंक है। बाल-कविताएँ एवं कहानियाँ उनकी खास पंसदगी हैं। उनकी "प्यारे बच्चे प्यारे गीत" पुस्तक बच्चों को बह
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बहुत सारी मीठी-मीठी यादों के साथ भारत यात्रा से वापसी...

मधुर यादों के साथ सपरिवार भारत लौटे, उन्हीं यादों में से कुछ यादें आप सब लोगों के साथ बाँटना चाहूँगी। सबसे पहले बात करते हैं अम्माजी की जी हाँ हम उन्हें अम्माजी का सम्बोधन देते हैं क्यों? क्योंकि हमारे श्वसुर जी भी उनको अम्माजी जो कहते हैं अम्माजी जा
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रोशन दिये हम यूँ ही करते रहें...

भारत से वापसी के बाद-- दिल के दरमियाँ की ओर से सभी पाठकों को दीपावली की ढ़ेर सारी शुभकामनाएँ--- () () () () () () () () () () () () () रोशनी के दिये यूँ ही जलते रहें लड़खड़ाये कदम भी सँभलते रहें लाये त्यौहार सौहार्द हर दिल में यूँ साथ कदमों से मंजिल
Dec 29 2009 11:44 AM
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कुछ दिनों के लिये लिखने पढ़ने से विदा...

एक लम्बे अरसे बाद ८ जुलाई को भारत जाना हो रहा, अपने परिवार के साथ रहने का अवसर मिल रहा है अज़ीब सा एहसास है मन में , कभी २ या ३ साल में जो जाने को अवसर मिलता है, क्योंकि यहाँ भी कभी हमें छुट्टी नहीं, कभी हमारे साहब को, तो कभी बच्चों के पेपर, पर अब अच्
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जरा आजकल तबियत नासाज़ रहती है लिखने का तो बहुत दिल करता है मगर शब्द हैं कि आह !बनकर उड़ जाते हैं पकड़ने की कोशिश जारी है…

बड़े-बड़े सपने जो अचानक दिखाये थे तुमने! वो सब सपने दिल की दहलीज़ पर आकर खुशी में बरसे आँसुओं की झड़ी में फिसल कर रह गये… काश ! मैंने उन सपनों को जिया ना होता… काश ! मैंने उन्हें सच ना माना होता… काश ! मैंने उन्हें दिल की धड़कन में ना समाया होता… काश
Dec 29 2009 11:44 AM
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एक बार फिर खिले फूल

पर... क्या... इनकी खुशबू आप दोस्तों के बिना कुछ मायने रखती है? बिल्कुल नहीं तो फिर आईये ना... बस थोड़ा सा कष्ट कीजियेगा... और इस लिंक को क्लिक कीजियेगा और अपनी राय जरूर दीजियेगा... आपकी राय के बिना इन फूलों का महत्त्व ही क्या... रचना यहाँ भी पढ़ी जा
Dec 29 2009 11:44 AM
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वायरस के कारण टूटा आप सब लोगों से रिश्ता...

काफी एंटी वायरस सोफ्टवेयर के होने के बावज़ूद भी वायरस हार्ड डिस्क में पहुँच गया जिसके कारण आप सभी लोगों से सम्पर्क लगभग टूट ही गया आज़ काफी समय बाद कुछ पोस्ट कर पा रही हूँ प्रगीत का लिखा हुआ.. प्रगीत की कलम से... दर्द के गाँव में भटका हुआ मुसाफिर हूँ ढ
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आईये थोड़ा सा लुत्फ आप भी उठा लीजिये

अप्रैल का पूरा दिन बहुत व्यस्त गया जाता भी क्यों नहीं मेरी छोटी बेटी के स्कूल में " कला प्रदर्शनी " जो थी। वहाँ बच्चों का हुनर देखते ही बनता था कहीं पर कला की बात हो और हम ना जायें ऐसा तो हो नहीं सकता और बीच में ही प्रोग्राम छोड़कर चले आयें ये ना हमा
Dec 29 2009 11:44 AM
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वापसी अपनों के पास

प्रिय मित्रों आज बहुत दिनों बाद आप सबसे बात करने का अवसर मिला है, मेरी बहुत सारी मजबूरियाँ रही बेटी की तबियत बिगडना, मेरा युगांड़ा से सिडनी जाना और भी इस बीच काफी उथल-पुथल रही, पर अब आप लोगों को पढ़ने का सिलसिला हाँ लिखने का भी कोशिश करुँगी की ना टूट
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मेरी बेटी अब बहुत ठीक है...

प्रिय मित्रो,आप सबकी सच्चे मन से की गई दुआओं से मेरी बेटी अब बहुत ठीक है, मैं अब परिवार सहित आस्ट्रेलिया में-सिडनी में आ गई हूँ अब यहीं रहना है,मैं जल्दी ही यहाँ का अनुभव आप सब लोगों के साथ बाँटूगी बहुत सारी बातें हैं जो आप लोगों को सुनानी हैं आप लोगों
Aug 24 2009 10:44 AM
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मेरी नन्हीं सी जान...

मेरी प्यारी सी बेटी ऐश्वर्या जो मात्र ९ साल की है ...अप्रैल से ही बहुत बीमार चल रही ...है अभी तीन दिन पहले ही अस्पताल रहकर आई ...है अभी भी घर पर काफी दवाईयाँ दी जा रही ...हैं उसकी पढ़ाई भी बन्द ...है स्कूल जाने को डॉ० ने मना किया ...है मैं उसके कारण
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फर्स्ट अप्रैल की मधुर स्मृति...

कल फर्स्ट अप्रैल पर मुझे भी मेरे बचपन की शरारतों ने आ घेरा, नींद का आँखों में नामोनिशान न था, रह-रहकर मुझे अपना मासूम, चुलबुला, प्यारा सा बचपन याद आ गया, अब तो वो मासूमियत दुनिया के थपेड़ों से कठोरता में,चुलबुलापन बच्चे और परिवार की जिम्मेदारियों में
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“जब मौत को मैंने देखा अपने बहुत ही करीब…

अनिल कान्त जी का संस्मरण "एनोदर डे ऑफ़ माय लाइफ " को पढ़कर बीता बचपन याद आ गया… उम्र तो ठीक से याद नहीं है, बस इतना याद है कि हम छोटे थे। हम मम्मी पापा के साथ शहर में रहते थे।हमारी इकलौती बुआजी गाँव में रहती थी। हमने कभी उनका गाँव देखा नहीं था कारण म
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दिल के दरमियाँ की ओर से सभी मित्रों को होली की ढ़ेर सारी शुभकामनाएँ...

आओ मनाए होली... रंग चुरा लें... तितलियों से... और मधुर सुर. चिड़ियों से... फूलों पर छिटकती किरणों से... लेकर चमक, दूब पर फैली ओस कण को... भर मुट्ठी में, वादियों में बिखरे रंगों को... प्रीत संग घोल आज रंग दें... हर कोना... भावना, प्रगीत, कनु, किट्टू
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दो गहरे साये ...

झील के उस पार दो गहरे साये कभी घटते से कभी बढ़ते से मैं अक्सर देखा करता लहरों में उठते तूफानों से बेखबर अपनी हसीन दुनिया में व्यस्त इक दूजे को पूर्ण समर्पित। मैं रोज सुबह उठता अखबार पढ़ता और इसी झील के किनारे आता। उन सायों से मेरा एक रिश्ता बहुत घनिष
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रूह की बेचैनी

फूलों जैसा मेरा देश मुरझाने लगा शत्रुओं के पंजों में जकडा जाने लगा रात-दिन मेरी आँखों में एक ही ख्वाब कैसे हो मेरा 'प्यारा देश' आजाद कैसे छुडाऊँ इन जंजीरों की पकड से इसको कैसे लौटाऊँ वापस वही मुस्कान इसको कैसे रोकूँ आँसुओं के सैलाब को इसके कैसे खोलूँ
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दांस्ता...

धड़कता रहा लफ़्जों का सीना रात भर, सिसकती रही कलम भी, कागज़ भी न दे पाया अपना हाथ, चाँद ने भी करवट ले ली, ओढ़ ली काली चादर रोशनी ने, तारों ने भी फेर ली अपनी आँखें, पिघलता रहा आसमां मोम की मानिंद, थरथराते रहे रात्रि के होठ, तो फिर! कैसे लिखता वो दर्दे
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क्या आप इन्हें पहचानते हैं?

चित्र - साभार - NDTV 24x7 यही हैं वो दरिंदे जो बोट पर सवार होकर आये और मासूम लोगों का खून बहाने में जरा भी नहीं हिचके। ये दिल दहला देने वाले मंजर जो आँखों में बस गये हैं क्या कसूर था उन मासूमों का जिनका खून बहाया गया? Dr. Bhawna
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तो क्या ! अब मुझे हमेशा के लिये अपनी मिट्टी से दूर रहना होगा

आज़ एक खबर पढ़ी, पढ़कर हमारी तो सिट्टी पिट्टी गुम हो गई। खबर थी कि अब पी० एच० डी० और एम० फिल० की डिग्री लेकर भी आपको नेट की परीक्षा देनी होगी ऐसा विचार किया जा रहा, अब जब विचार किया जा रहा है तो उसको
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अरे कोई आत्मा आ गई तो !

यूँ बने हम भी हँसी के पात्र …हुआ यूँ कि शुक्रवार को हमारे पतिदेव (प्रगीत) के मित्र ने उनको बताया कि " सर जी कल से तो नवरात्र शुरू हो रहें हैं" ।" अच्छा" हमारे पतिदेव ने बस इतना ही कहा…तभी उनके मित्र