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दिल का दर्पण - परावर्तन

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18 Jun 2010
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शेर

न समझ मुझे महफिल के टूटे हुए पैमानों में है साख बहुत इस दीवाने की, अभी दीवानों में है ख्याल धुआं हवा के साथ रुख बदल देगा अभी वक्त लगेगा तुम्हें, मुझे भूलने भूलाने में
 
मोहिन्दर कुमार
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दिल का दर्पण - परावर्तन

वक्त के साथ रिश्तों के मायने बदले नजर धुंधली हुई है या आईने बदले जलकर जिन्हें धूप से बचाया कभी वक्ते-जरूरत रुख उन सायों ने बदले
 
मोहिन्दर कुमार
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रहें न रहें हम.. महका करेंगे..... एक गीत

गीतकार : मजरूह सुलतान पुरी गायक : लता मंगेशकर संगीतकार : रोशन चित्रपट : ममता - 1966 रहें न रहें हम, महका करेंगे बन के कली, बन के सबा, बाग-ए-वफ़ा में.... रहें न रहें हम... मौसम कोई हो इस चमन में रंग बनके रहेंगे हम खिरामा चाहत की खुशबू यूं ही जुल्फ़ों से
 
मोहिन्दर कुमार
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दिल का दर्पण - परावर्तन

मुझे याद रखना कि भूल जाना तुममेरी दुनिया तुम्हीं और जमाना तुमजैसे शाम होते परिन्दे लौटते हैं घरहो सके किसी दिन लौट आना तुम
 
मोहिन्दर कुमार
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टी वी सीरियल की नई सास.... लडकी के कपडे तक उतरवाये

एक जमाना था जब साफ़ सुथरे धारावाहिक दूरदर्शन के माध्यम से हमारे घरों में पहुंचते थे.. जब से चैनलों की बाढ आई है... सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिये जनता के सामने क्या क्या नहीं परोसा जा रहा. आजकल सोनी चैनल पर एक धारावाहिक "हमारी बात पक्की" जिसमें एक
 
मोहिन्दर कुमार
Jun 10 2010 10:15 AM
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चंद गुलाव आप के लिये

तेरे होठों के मुकाबिल गुलाब क्या होगा तू तो लाजबाब है तेरा जबाब क्या होगा
 
मोहिन्दर कुमार
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क्यूं दबे हैं स्वर समूचे

जो नजर आता नहीं क्या वो सब गौण हैं मंच की मर्यादा निर्भर इस पर नैथप्य में कौन हैं सींचता है बाली बाली अपने पसीने खून से शीत, ग्रीष्म से लडता और बेरुखे मौनसून से घर भरते बिचोलियों के होता हर दर साल है किसान के हिस्से दाने कहां आता सिर्फ़ पुआल है खाद और बीज
 
मोहिन्दर कुमार
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पेपसी / कोकाकोला की जंग रोचक विडियो विज्ञापनों के संग

कोकाकोला और पेपसी के दो विज्ञापन विडियो के बाद देखिये उनके बीच छिडी जंग के रोचक विडियो... मुझे ये पसंद आये... आप बताईये कैसे लगे
 
मोहिन्दर कुमार
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चुम्बन जो सुर्खियां बन गये

प्रेम के प्रतीक चुम्बन से बालीबुड भी अछुता नहीं. हर फ़िल्म में तकरीबन ये सब होता ही है परन्तु फ़िर भी कुछ चुम्बन ऐसे रहे जो सुर्खियों में आये और चर्चित हुये. बिपाशा बसु-क्रिस्टियानो रोनाल्डो किस विवाद चर्चा में रहा । लंदन के एक टैब्लॉइड के फ्रंट पेज पर
 
मोहिन्दर कुमार
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एक स्पेस शटल की यात्रा

अक्सर हम स्पेस शटल को अंतरिक्ष में छोडने का नजारा देखते हैं मगर इस स्पेस शटल की यात्रा शुरु होने से पहले की यात्रा भी कम रोचक नहीं. चित्रों में देखिये ये कहां से कहां तक कैसे पहुंचती है.
 
मोहिन्दर कुमार
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लहरें और किनारा

न जाने किस लिये टकराती हैं लहरें पथरीले इन किनारों से इक शोर के सिवा क्या मिलता हैं उन्हें बेजान दीवारों से
 
मोहिन्दर कुमार
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शेर जो गजल न बन सके - जिन्दगी

कुछ दूर यूंही चल कर अक्सर ठहर जाती है जिन्दगी फ़िर हर इक याद रुक रुक कर दोहराती है जिन्दगी पहले तो ढूंढती है अपने यह लिये खुद इक मुकाम और फ़िर खुद ही इक तलाश बन जाती है जिन्दगी ********************************************* कांच से रिश्ते संभालने में बिताई
 
मोहिन्दर कुमार
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मोबाईल और ड्राईविंग एक साथ हैंडल ना करें

ड्राईविंग करते समय मोबाईल को इस्तेमाल करना कितना मंहगा पड सकता है यह आप इस विडियो से जान पायेंगे. आपका जीवन अनमोल है इसे व्यर्थ ही न खोयें. इस विडियो को और लोगों तक पहुंचा कर जागरूकता फ़ैलायें.
 
मोहिन्दर कुमार
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वक्त मरहम हो जाये

हमने बोये थे ये कांटे फ़ूलों की हिफ़ाजत के लिये क्या करें जब बाड ही खेतों की दुश्मन हो जाये बात करते तो बताता क्या है दिल में उनके लिये अब सोचता हूं कुछ न कहूं कहीं और न उलझन हो जाये ऐ वक्त तू यूं ही गुजर जाना न पूछना लम्हों का हिसाब जिक्र चला गर, समेटने
 
मोहिन्दर कुमार
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घर लौट के वो आया है

फ़िर यादों की हवा चली फ़िर शाखे-तमन्ना लहराई फ़िर फ़ूल खिले गुलशन-गुलशन फ़िर बजी कहीं शहनाई फ़िर कतरा-कतरा बन खुश्बू फ़िर महका तन-मन बन खुश्बू फ़िर फ़ैलाये ख्वाबों ने पर फ़िर लौटा कोई अपने घर अब दूर हुई हर उलझन अब राह पर दिल की धडकन अब वार त्यौहार में होंगे रंग अब
 
मोहिन्दर कुमार
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लिप प्लेट - अफ़्रीकी जनजाति की एक प्रथा

अफ़्रीकी जनजातियों में बहुत सी ऐसी प्रथायें हैं जो कि विश्व के अन्य देशों में देखने को नहीं मिलती. ऐसी ही एक प्रथा है जो कि "मुर्सी" जनजाति की महिलाओं में प्रचलित है. इस प्रथा के अनुसार 13 से 18 वर्ष की लडकियां यह सुनिश्चित करती हैं कि क्या उन्हें "लिप
 
मोहिन्दर कुमार
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कौन था खुदा मेरे लिये

बहुत मिले दिल से खेलने दिल को दुखाने वाले बातों ही बातों में और जख्म लगाने वाले एक तुम ने ही न मांगा कभी अपनी वफ़ा का हिसाब बेगर्ज लगाये मरहम न चाहा कभी कोई सबाब बेरुखी को मेरी मुक्कदर अपना बना आंसुओं को अपनी पलकों में छुपा मांगी हर दुआ मेरे लिये मैं ही न
 
मोहिन्दर कुमार
Feb 17 2010 12:56 PM
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चांद जब मुस्करा रहा था

वही झोंकेवही बदली फ़र्क सिर्फ़ इतना भर तुम नहीं हो साथ मेरे अकेलापन खा रहा था वही बांसुरी वही धुन फ़र्क सिर्फ़ इतना भर वह गीत लगा अपना सा दूर जो कोई गा रहा था वही रुत वही रात फ़र्क सिर्फ़ इतना भर हम बहा रहे थे आंसू चांद जब मुस्करा रहा था
 
मोहिन्दर कुमार
Feb 16 2010 02:30 PM
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क्षणिकायें - गम और खुशी

उम्र भर संभाले कांच से रिश्ते बस और किया क्या है सुलझाते रहे वेतरतीब उलझने जीने को जिया क्या है ++++++++++++++++++++++++++++ सोचो भला क्या होगी हमारे दर्द की दास्तां दो घडी सुनके जिसे हर अजनबी जी भर कर रोया ++++++++++++++++++++++++++++ गुजरे हादसे अभी
 
मोहिन्दर कुमार
Feb 11 2010 11:27 AM
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कमाल के चित्र

फ़ोटोग्राफ़ी के कुछ नये अन्दाज... ये क्या अक्समात सम्भव हुआ या फ़िर फ़ोटोग्राफ़र के दीमाग का कमाल है यह तो आप ही बता पायेंगे. अपनी प्रतिक्रिया देना न भूलें.
 
मोहिन्दर कुमार
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क्या कोई द्वार खोलेगा

अन्तर्मन की गहराईयों में अन्धकार से लिपटा चेतना से परे किसी किरण की चाह में भटकता हूं मैं क्या कोई द्वार खोलेगा सर्वत्र शांति व्याप्त कोई कोलाहल नहीं न पथ, न पथदर्शक धैर्य क्यों न डोलेगा मन से जिन्हें जोडा था थाम हाथ, रक्तिम हो रम गये किरचन बन नस नस में
 
मोहिन्दर कुमार
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जय बाबा रामदेव

संत लोग तो समस्त संसार के प्राणियों हेतु ही जन्म लेते हैं. ऐसा नहीं कि उनका प्रभाव सिर्फ़ मानव जाति पर ही होता है.... यकीन नहीं होता तो आप स्वंय जांच लीजिये और अब कम से कम इन्हें देख कर तो योगा शुरु कर ही दीजिये.
 
मोहिन्दर कुमार
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वादा तेरा वादा

"वादा" एक ऐसा लफ़्ज जिसके बूते कोई तो जिन्दगी गुजारने के लिये तैयार है.. और कोई पूरा न होने पर गर्दन तक दबाने को तैयार हो जाये. अक्सर आपने लोगों को कहते सुना होगा..."वादे तो तोडने के लिये ही किये जाते हैं"... जाने कैसे पत्थर दिल लोग होते हैं ऐसा कहने
 
मोहिन्दर कुमार
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महान हस्तियों के न्यू ईयर रिसोलूशन्स

नव वर्ष के लिये जो संकल्प लिये जाते हैं उनमें अधिकतर इस प्रकार से होते हैं परन्तु अफ़सोस कि इनमें से एक भी ऐसा नहीं जिसे मैं ले पाऊं... १. अपना वजन घटाऊंगा जहां तक वजन की बात है कई वर्षों से वही ६५ से ७० किलो के बीच में डोलता रहता है.. गर्मियों में दिल्ली
 
मोहिन्दर कुमार
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पानी, गली का कुत्ता और गरीबी

(सीन - पोश कालौनी में एक आलीशान तीन मंजिला बंगले का ऊंचा सा गेट जिसकी सलाखों के बीच में से एक खूंखार एलसेशियन बाहर का मुआयना कर रहा है.. तभी गली का एक कुत्ता उधर आ निकलता है...दोनों की नजरें मिलती हैं और वार्तालाप होता है.) एलसेशियन : जल्दी से निकल ले
 
मोहिन्दर कुमार
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क्षणिका

नपी तुली सी इस जिन्दगी सेकोई क्या मांगेतुम ही कहोक्या तुम्हारे हिस्से की खुशीऔर मेरे हिस्से का गमबराबर सा है
 
मोहिन्दर कुमार
Dec 29 2009 11:40 AM
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अधिकार किसका

पल्लवित होते फ़लतरू परकहिये किस का अधिकार होएक स्वप्न जिसने किसी कोइक बीज रोपण को कहा ?या अधिकार है उस धरा काजिसने स्वयं में समाहित करशुष्क बीज को जीवन दिया ?उस बूंद का क्या जो रही सींचतीअपना अस्तित्व माटी में मिला ?या फ़िर उस मलय का जोशीत-ऊष्ण साथ ले
 
मोहिन्दर कुमार
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रोबोट एंव रोबटिया

क्या तकनीक मानवीय भावनाओं पर भारी पडेगी... यह तो आने वाला समय जल्द ही हमें बता देगा. अभी तक तो यही डर था कि रोबोट मानवों द्वारा किये जाने वाले सभी शारीरिक कार्य करने में सक्षम होंगे और हो सकता है तकनीक और अधिक बेरोजगारी के लिये जिम्मेदार हो जाये. लेक
 
मोहिन्दर कुमार
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चंद अधुरे ख्यालात

अक्सर ऐसा होता है कि चलते फ़िरते, उठते बैठते कुछ ख्यालात उभर आते हैं जो शायद अधुरे होते हुये भी अपने आप में पूरे होते हैं... उनमें चाह कर भी और कुछ जोड पाना मुमकिन नहीं हो पाता. ऐसे ही कुछ ख्यालात पेश हैं सरपर्स्ती में कांटों की रहती हो बुरा न मानो तो
 
मोहिन्दर कुमार
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काँच की बरनी और दो कप चाय

जीवन में जब सब कुछ एक साथ और जल्दी - जल्दी करने की इच्छा होती है , सब कुछ तेजी से पा लेने की इच्छा होती है , और हमें लगने लगता है कि दिन के चौबीस घंटे भी कम पड़ते हैं , उस समय ये बोध कथा , " काँच की बरनी और दो कप चाय " हमें याद आती है । दर्शनशास्त्र
 
मोहिन्दर कुमार
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मैं हूं ना

फ़िक्र नहीं करने का दोस्त... मै हूं ना
 
मोहिन्दर कुमार
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ब्लेक होल

दोस्तो आप "ब्लेक होल" के बारे में अवश्य जानते होंगे...ब्लेक होल यानी एक तारा जो अपना जीवन जी चुका है और के शक्ति शाली चुम्कीय क्षेत्र में बदल चुका है जो सब कुछ निगल जाता है... अब जरा सोचिये यदी यही ब्लेक होल आपके हाथ लग जाये तो क्या क्या हो सकता है..
 
मोहिन्दर कुमार
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इन्तजार

इक गुलाब लिये हाथ में कोई कब से है तेरा मुन्तजर सांसों के साथ ही न कहीं खत्म हो जाये ये इन्तजार
 
मोहिन्दर कुमार
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फ़ोटोग्राफ़ी का नया अंदाज

क्या आप एक बार में धरती और आकाश दोनों का फ़ोटो ले सकते हैं... नहीं न.... मुझे भी इस बात पर यकीन नहीं है मगर किसी ने ऐसा किया है..आप भी इसे देख सकते हैं...चित्र को जूम कीजिये और साईड सक्रोलिग बार को ऊपर नीचे कर के देखिये... है ना मजेदार... कहिये आपको क
 
मोहिन्दर कुमार
Oct 14 2009 07:34 PM
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हुस्न की मल्लिका "मधुबाला"

हिन्दी सिनेमा का अस्त्तित्व हुस्न की मल्लिका "मधुबाला" के बिना अधूरा है. इनका असली नाम मुमताज जेहन बेगम देहलवी था. पचास और साठ के दशक में इनका शुमार प्रतिभाशाली और प्रभावी अभिनेत्रियों की श्रेणी में गिना जाता है जिसमे मीना कुमारी और नर्गिस के नाम भी
 
मोहिन्दर कुमार
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खबर भी है ?

जा बसे हो दूर तुमपर याद रखनावास्ता जिससे तुम्हारावो एक घरइधर भी हैरास्तों को पार करपा गये मंजिल को तुमरह गई सूनी सी जोवो रह-गुजरइधर भी हैरिश्ता है आंसुओं का मेरेयाद से तेरी किस कदरजानते हैं सब मगरक्या कुछ खबरउधर भी हैरोकने से भी मेरेवक्त रुकता ही
 
मोहिन्दर कुमार
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महान हस्तियों के हस्ताक्षरों का एक अद्भभुत संग्रह

यदि देखने में असुविधा हो तो बडा करने के लिये चित्र पर क्लिक करें
 
मोहिन्दर कुमार
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पोल परिणाम - आप ब्लोगिंग किन कारणों से करते हैं

पोल परिणाम जानने के लिये आप इस लिन्क पर जायेंदूसरा पोल पहले दस हिन्दी ब्लोग की रेंकिग के लिये होगा. सब ब्लोगर्स से अनुरोध है कि वह जिन ब्लोगों को पहले दस की श्रेणी में रखते हैं उन चिट्ठों के नाम मुझे मेल पर या टिप्पणी की मार्फ़त 15 अगस्त, 2009 तक भेज दें
 
मोहिन्दर कुमार
Aug 10 2009 11:28 AM