भारतीयम Bhaarateeyam's Image

भारतीयम Bhaarateeyam

http://bhaarateeyam.blogspot.com/
ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
नयी प्रविष्टी लिखी
15 Jun 2010
कुल प्रविष्टियां
55
पाठक भेजे
7018
पसंद
144
नापसंद
0
पाठक प्रति पोस्ट
127.60
पसंद करें
4
नापसंद करें

वाह!!! लालू जी वाह!! नीतिश को गरियाओगे तो पासवान को कहां छिपाओगे ?

इस हमाम में सभी नंगे हैं . इधर नीतिश कुमार का मुलम्मा उतरा तो उधर लालू जी भी अपनी भद पिटवा गये. एक प्रेस कांफ्रेंस के ज़रिये लालू जी ने भाजपा से दोस्ती के सवाल पर नीतिश को कटघरे में खड़ा करके गोला दागा. कहने लगे कि जरा भी शर्म है तो या तो भाजपा से अलग हो
 
अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
पसंद करें
5
नापसंद करें

वाह वाह !! नीतिश कुमार ! गुड़ खाओगे और गुलगुले से परहेज़ करोगे ?

इस सादगी पे कौन ना मर जाये ए खुदालड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं जी हां ,ये ज़ुबानी ज़मा-खर्च की लड़ाई किसे दिखा रहे हैं बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ? भाजपा के साथ गल्बहियां भी हैं और आंखों के डोरे भी लाल हैं ! क्या बात हैं? ये बाज़ीगरी ही तो
 
अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
पसंद करें
2
नापसंद करें

मेरी यूरोप यात्रा-10- कुछ और पेरिस...

20.04.10 मंगलवार आज शोपिंग का कार्यक्रम था. तय हुआ था 9.30 बजे . निकल पडेंगे ताकि सब कुछ निबटा कर दोपहर बाद की ट्रेन से वापस ग्रेनोबल जा सकें. पिछली रात सोते सोते बहुत देर हो गयी थी. टी वी का रिमोट लौक हो गया ,फिर मेकेनिक को बुला कर ठीक कराया. फिर अन्य
 
अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
पसंद करें
4
नापसंद करें

मेरी यूरोप यात्रा -9- मोनालिसा के ‘साक्षात’ दर्शन

हम दुनिया के किसी भी कोने में रहें कुछ चीजें बिना बदले लगभग एक जैसी ही रहती हैं मसलन ‘कोंटीनेंटल’ ब्रेकफास्ट. पेरिस के सिटाडाइन होटल में भी वही ‘कोंटीनेंटल’ ब्रेकफास्ट, रुचिकर तरीके से सजा हुआ मिला.ताजे फलों मे अनन्नास भी था. मुझे अपने अल्पज्ञ होने का
 
अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
टैग: monalisa
पसंद करें
2
नापसंद करें

मेरी यूरोप यात्रा -8- पेरिस का पहला दिन्

पेरिस में हमारे साथ आये छात्र गाइड पीटर ने हमारे मतलब की सारी जानकारी एकत्र कर रखी थी. जब हमने एकमत से कहा कि अब दिन भर के बाद खा रहे हैं तोभारतीय खाना ही मिले तो बेहतर . उसने तुरंत वह ज़गह बता दी जहां हमारी पसन्द का खाना मिल सकता था. उसने तुरंत हम सभी
 
अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
पसंद करें
0
नापसंद करें

मेरी यूरोप यात्रा-7 पेरिस आखिर पेरिस है !

पेरिस पहुंचना ही एक रोमांचकारी अनुभव लगा. 1987 में पहली बार जब यूरोप आया था (तब स्पेन- मैड्रिड व वेलेंसिया, तथा स्वित्ज़र्लेंड -जिनेवा ही देख पाया था) तब इतना रोमांच कारी अनुभव मैड्रिड में भी हुआ था. लग्भग दो घंटे हम पेरिस को खुली बस की दूसरी मंज़िल से
 
अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
टैग: peris
पसंद करें
2
नापसंद करें

मेरी यूरोप यात्रा 6-- नमस्ते भी सुना ,सौरी भी. हार्ली डेविडसन की फोटो

मैने पिछली पोस्ट में मोटर साइकल हार्ली डेविडसन का ज़िक्र किया था और यह भी लिहा था कि हमने उसके फोटो भी खींचे. भाई विवेक रस्तोगी ने एक छोटे से कमेंट में इसकी मांग जैसी(?) की है. अत: पहले फोटो दिन भर के सैर् सपाटे ने थका तो दिया था. सोचा था कि रात को हल्का
 
अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
पसंद करें
1
नापसंद करें

मेरी यूरोप यात्रा 5 - आंसी की सैर-अद्भुत् नज़ारे

भरपेट आलू ,चीज़ व घास फूस ( मेरे मांसाहारी मित्र यही शब्द प्रयोग करते हैं) खाने के बाद अब नौकायन की बारी थी. जल्दी जल्दी में गाइड से यह पूछना भूल गये कि किस बोट में हमें जाना है. खाना खाकर नदी के किनारे खरामा खरामा चलते हुए झील की तरफ बढे. झील के किनारे
 
अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
टैग: आंसी
पसंद करें
2
नापसंद करें

मेरी यूरोप यात्रा-4: ऐतिहासिक स्थल आंसी की सैर

चित्र स.1 -ट्रेन का आनन्द -आंसी के रास्ते में चित्र स. 2- ट्रेन की खिड़की से बाहर की एक झलकचित्र स. 3- स्टेशन के बाहर शहर के मिज़ाज़ पर बयान चित्र स. 4- पुराने शहर का एक नज़ाराचित्र स. 5- निचले शहर का एक विहंगम दृश्यचित्र स. 6- लीला रोज़ रेस्त्रां के
 
अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
पसंद करें
3
नापसंद करें

मेरी यूरोप यात्रा-3 पहले ही दिन दुखद समाचार

सुबह जब सात बजे सो कर उठा तो अपने घर की तरह अखबार व चाय तो मिलना नहीं था.सबसे पहले नेट पर बैठा अपने मेल चेक करने के लिये. पहली मेल संस्थान (IMI) के Registrar की थी. शीर्षक पढ़ कर ही चौंका. मेल में दुखद समाचार था कि संस्थान (IMI) के director Prof. Venkat
 
अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
पसंद करें
2
नापसंद करें

मेरी यूरोप यात्रा -2 फ्रांस की ज़मीन पर कदम ..

लियों तक पहुंचते पहुंचते हमारी उड़ान 1 घंटा देरी से पहुंची. मुझे 12.35 पर लियों पहुंच कर 1.30 की शटल पकड़ कर ग्रिनोबल जाना था. मेरी घड़ी में भारतीय समय ही था. जब मेरी घडी में शाम के 5 बजे थे ( यानी दिल्ली से उड़े हुए साढ़े 12 घंटे होचुके थे), फ्रांस की
 
अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
पसंद करें
2
नापसंद करें

मेरी यूरोप यात्रा -1 : हवाई यात्रा- दिल्ली से इस्तानबुल

पन्द्रह दिन बिताने के बाद मैं स्वदेश लौट आया . जाने से पहले सोचा था कि रोज़ाना एक पोस्ट अपने ब्लोग पर करूंगा. इष्ट मित्रों को जानकारी मिलेगी तथा मैं अपने अनुभव भी साझा करता रहूंगा. अति व्यस्तता के चलते यह सम्भव न हो सका. अत:भारत लौट कर अपने सारे अनुभव अब
 
अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
टैग: Europe
पसंद करें
0
नापसंद करें

यूरोप में भारतीयम

संस्थान के अकादमिक कार्य को पूरा करने मैं आज से यूरोप के दौरे पर निकल रहा हूं.मुख्यत: फ्रांस के ग्रिनोबल नगर में रहूंगा किंतु कुछ भ्रमण व कुछ अन्य कार्यों से इस्तानबुल ( टर्की) , पेरिस ( फ्रांस) तथा जिनेवा व ज़्यूरिख (स्विट्ज़रलेंड) भी जाना होगा. इन नगरों
 
अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
पसंद करें
3
नापसंद करें

निश्चित ही चयनकर्ता मुझसे अधिक जानकार हैं किंतु मेरी भी एक राय है !!

वही हुआ जिसका डर था.वेस्ट इण्डीज़ में अप्रैल में होने वाले टी-20 विश्वकप के लिये भारतीय टीम की घोषणा तो कर दी किंतु चूक फिर हो गयी. भारत एक बार इस टूर्नामेंट का चेम्पियन रह चुका है अत: हर भारतीय क्रिकेट प्रेमी उम्मीद कर रहा था कि चयनकर्ता ऐसी टीम का चयन
 
अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
पसंद करें
0
नापसंद करें

मैं हर तरह के आरक्षण के खिलाफ हूं. महिला आरक्षण विधेयक से महिलाओं का भला नहीं होगा. बुरा लगे तो दो रोटी ज्यादा खा लेना....

जो महिला विधेयक को एक क्रांतिकारी कदम बता रहे हैं मैं उनसे पूछना चाहता हूं कौन सी क्रांति की आशा है उन्हे इस प्रतिगामी विधेयक से?संसद में या विधानसभाओं में चन्द महिलायें ज्यादा हो जायेंगी तो कौन सा फर्क़ पडने वाला है. पंचायत, नगर निगम व नगर पालिकाओं में
 
अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
टैग: reservation
पसंद करें
1
नापसंद करें

संसद में राजनैतिक पाखंड की ऐतिहासिक मिसाल है महिला आरक्षण विधेयक

आज राज्य सभा में में संसद की गरिमा अक्षुण्ण रह गयी. हालांकि आने वाले दिनों में यह गरिमा तार तार होगी, यह तय है. महिला आरक्षण विधेयक भारतीय राजनीति में राजनैतिक तंत्र द्वारा देश पर थोपा जाने वाला सबसे बडा पाखंड है . इस पाखंड का भंडाफोड- संसद में होने से
 
अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
पसंद करें
0
नापसंद करें

होली है भई होली है. खेलने वाली नहीं , गाने वाली

शाम हुई और मन हुरियारा हो गया.फागुन की हवा में ही कुछ ऐसी मस्ती होती है कि मन करता है कुछ रंगीन्, कुछ चुलबुली शरारत ,कुछ छेडछाड़ की जायेकिसी की चुनरी भिगोई जायेकिसी को चिकोटी काटी जाये.किसी से चुहल की जाये.और कुछ नहीं तो बस मस्ती में अकेले ही झूम लिया
 
अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
पसंद करें
0
नापसंद करें

घर हो या ससुराल ,मज़े लो होली में

नाचो दे दे ताल, मजे लो होली में,गालों मलो गुलाल, मजे लो होली में.रंग बिरंगे चेहरों में ढून्ढो धन्नो,घर हो या ससुराल , मजे लो होली में.हुश्न एक के चार नज़र आयें देखो,एनक करे कमाल , मजे लो होली मेंचढे भंग की गोली ,डगमग पैर चलें,बहकी बहकी चाल, मजे लो होली
 
अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
Feb 25 2010 10:45 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

ये लो भैया,अब 'भारतीयम' भी..... माजरा क्या है ?

पहले पहल तो चौंका. ब्लोगवाणी पर टिप्पणियों की सूची पर नज़र पडी तो देखा किसी ने 'भारतीयम' ब्लोग पर टिप्पणी की है. चौंकना स्वाभाविक था. क्योंकि टिप्पणी का विषय मेरे ब्लोग की किसी हालिया पोस्ट से बिलकुल ही भिन्न था.फोरन भारतीयम पर जा कर देखा तो पता चला कि
 
अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
Feb 14 2010 03:42 AM
पसंद करें
3
नापसंद करें

एक अहसास का नाम है मां

भाई समीरलाल (उड़न तश्तरी)ने मां को याद किया तो प्रतिक्रिया स्वरूप मुझे मेरी वह " मां" शीर्षक रचना याद आ गयी ,जो वर्षों पहले मेरे संग्रह " चीखता है मन " में प्रकाशित हुई थी. भाई समीरलाल जी को समर्पित रचना पेश है: अपने आगोशोँ मे लेकर मीठी नीँद सुलाती
 
अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
पसंद करें
3
नापसंद करें

तुलसी इस संसार में भांति भांति के ब्लॉग

पिछले दो दिन से अस्पताल के बिस्तर पर पड़ा पड़ा ब्लोगवाणी व चिट्ठाजगत पर ढूंढ ढूंढ कर ब्लोग पढ़ रहा हूं.15 -20 कमेंट भी मार चुका हूं ( इतनी टिप्पणियां तो महीने भर में भी नहीं हो पाती) इतने दिनों से समय भी नहीं मिल पा रहा था. डाक्टर ने कहा था आज अस्पताल से
 
अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
पसंद करें
3
नापसंद करें

क्या पैमाना होता है पद्म पुरुस्कारों का

फिर आई 26 जनवरी और फिर हुआ रेवड़ियां बांटने का सिलसिला . किसी को चोट ना पहुंचे परंतु फिर भी साल -दर- साल उठने वाले इस प्रश्न का कोई संतोषजंक उत्तर कहीं से भी नहीं आता. पद्म विभूषण, पद्म भूषण एवम पद्म श्री उपाधियां दिये जाने की न तो प्रक्रिया पारदर्शी बनाई
 
अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
पसंद करें
2
नापसंद करें

छोटे लोहिया नहीं रहे

जनेश्वर मिश्र नहीं रहे . जैसे ही यह समाचार टी वी पर दिखा एकदम से भोंचक्का रह गया. साठ के दशक से वह समाजवादी आन्दोलन के एक प्रमुख स्वर थे. उन्हे राम मनोहर लोहिया के सच्चे अनुयायी के रूप मे गिना जाता था .और इसीलिये उन्हे छोटे लोहिया का प्यारा सम्बोधन दिया
 
अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
पसंद करें
4
नापसंद करें

कैसे कैसे बधाई सन्देश्

एक ज़माना था ज़ब आम तौर पर बधाई सन्देश के लिये हाथ से बनाये हुए विशेष ग्रीटिंग (बधाई) कार्ड का प्रयोग होता था. कार्ड खरीदने बाज़ार जाने वाले लोग ऐसे कार्ड ढूंढने का प्रयास करते थे जिसमे सन्देश ( की इबारत) 'ज़रा हट के' हो और जो पाने वाले का तुरंत ध्यान
 
अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
पसंद करें
4
नापसंद करें

काल चिंतन के कालजयी लेखक को श्रद्धांजलि

कादम्बिनी के पूर्व सम्पादक श्री राजेन्द्र अवस्थी नहीं रहे. अवस्थी जी सही अर्थों में एक साहित्यकार-पत्रकार थे. उन्होने जहां एक पत्रकार के रूप मे मापदण्ड स्थापित किये वहीं अपने साहित्य सृजन मे अद्भुत सफलता प्राप्त की. कादम्बिनी के सम्पादकीय काल में काल
 
अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
पसंद करें
7
नापसंद करें

राज्य पुनर्गठन आयोग गठित किया जाये और छोटे छोटे 50 राज्य बनाये जायें

लगता है अब कांग्रेस ने मन बना लिया है कि आन्ध्र प्रदेश में से तेलंगाना को पृथक राज्य के रूप में अलग किया जायेगा. इस मुद्दे पर अन्य राजनैतिक पार्टियों का रुख भी सकारात्मक है अत:देर-सबेर तेलंगाना भारतीय संघ का 29वं राज्य बन ही जायेगा. अनेक वर्षों से ते
 
अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
पसंद करें
4
नापसंद करें

ऐसे काले सर्पों का सन्यास ज़रूरी है

दीवारों से टकराने का अभ्यास ज़रूरी है पत्थर को पिघलाने का प्रयास ज़रूरी है. धार नदी की मुड़ सकती है, बस दो हाथों से अपने हाथों पर ऐसा विश्वास ज़रूरी है. तृप्त नहीं होती जो मंज़िल को पा जाने तक़ मंज़िल के हर राही को वह प्यास ज़रूरी है. बीच सफर से जो मुड़ जाये
 
अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
पसंद करें
2
नापसंद करें

संतान के लिये अब ओनलाइन पूजा , मात्र 3100 रुपयों में.

गये वे ज़माने जब पुरोहित,पंडित ,पुजारी अपने अपने यजमानों को ढूंढने के लिये या तो मन्दिर मे जाकर ठीया जमाते थे या अपने पुश्तैनी यजमानों के घर के चक्कर लगाते थे. अब ज़माना हाई फाई हो गया है तो पंडित-पुरोहित भी कैसे पीछे रहते. अब तो टेलीविज़न चैनल घर बैठे
 
अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
पसंद करें
3
नापसंद करें

राष्ट्रवादी मराठी या मराठी राष्ट्रवादी ?

आजकल समाचार पढ़ना या सुनना बोझीला सा लगने लगा है. समाचार जानकारी कम देते हैं,विचलित अधिक करते है . यह सिलसिला काफी लम्बे अर्से से ज़ारी है. राजनीतिक समाचार इतना क्षोभ भर देते हैं कि उससे बाहर आना मुश्किल हो जाता है. राज ठाकरे ,मनसे, शिवसेना आदि का अर्थ
 
अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
पसंद करें
3
नापसंद करें

मुझे बरमूडा याद आ गया

हम दुआ कर रहे हैं कि बुधवार को होने वाले मैच में पाकिस्तान जीत जाये. क्यों कि इसी जीत से भारत के लिये आगे की कोई सम्भावना बचती है ,वरना तो जै राम जी की. क्या बिडम्बना है. कल तक हम कसमें खा रहे थे, हवन ,यज्ञ, तपस्या कुछ भी करने को तैयार थे कि 26 सितम्
 
अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
पसंद करें
0
नापसंद करें

ब्लोगवाणी का मामला इमोशनलात्मक हो गया है ,आइये इन्हे मनायें

आज दो दिनों के बाद जब देखना चाहा कि ब्लोगजगत में नया क्या है, तो ब्लोगवाणी का पेज़ नहीं खुला . किंतु यह क्या ?ब्लोगवाणी के पृष्ठ पर एक घोषणा पढ़ी तो माथा चकराया. तुरंत चिट्ठाजगत लोग ओन किया. अविनाश वाचस्पति की रपट पर ध्यान गया. बात पूरी तो नहीं पर कुछ
 
अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
Sep 28 2009 02:53 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

क्या आप भी कांफ्रेंस के लिए ( मुफ्त में) कनाडा व अफ्रीका चलेंगे?

दिसम्बर के पहले सप्ताह में ओंटारिओ कनाडा व अफ्रिका में दो अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस होने वाली है. पहली अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस में मुद्दा है बेरोज़गारी जो 1 से 4 दिसम्बर तक बताई गयी है.दूसरी कांफ्रेंस केप-वर्डे द्वीप ( पश्चिम अफ्रीका) में 7 से 11 दिसम्बर
 
अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
टैग: fraud
Sep 20 2009 09:27 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

बम्बई किसी के बाप की जागीर नहीं है

कुछ लोगों ने कसम खा रखी है कि वे नहीं सुधरेंगे. चर्चा में बने रहने के लिये राज ठाकरे जैसे (कथित) नेता ऊल-जलूल वक्तव्य देने से बाज़ नहीं आ रहे हैं.चिट्ठानामाके अनुसार एक बार फिर राज ठाकरे ने ज़हर उगला है और उत्तर भारतीयों से कहा कि वे बम्बई की राजनीति में
 
अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
टैग: बम्बई
पसंद करें
0
नापसंद करें

आखिर इस ढोंग की ज़रूरत ही क्या थी ?

देश के अनेक भागों में सूखा पड़ रहा है. क़िसान आत्महत्या पर अभी भी मज़बूर हैं. ऐसे समय में सोनिया गान्धी द्वारा कांग्रेस सरकार के मंत्रियों को दिये गये सरकारी खर्च में कमी लाने के निर्देशों का वाकई कितना असर होगा ,इसका अन्दाज़ लगाना मुश्किल नहीं है.जैसे ही
 
अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
पसंद करें
0
नापसंद करें

कौवों के कोसने के गायें नहीं मरा करती उर्फ भाजपा को गाली देना एक शगल क्यों बनता जा रहा है?

.सबसे पहले एक शाकाहारी स्पष्टीकरण. फिलहाल मैं भाजपा का कोई प्रवक्ता नहीं हूं .अपने ब्लोग को दलगत राजनीति से दूर रखने की भरसक कोशिश की है. हालांकि कभी कभार छुट्पुट टिप्पणियां ज़रूर की होंगी. यह स्पष्टीकरण इसलिये आवश्यक है कि इस पोस्ट को सही परिप्रेक्ष्य
 
अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
टैग: भाजपा
पसंद करें
0
नापसंद करें

कवि सम्मेलन सम्पन्न

द्वारका उपनगर ,नई दिल्ली में 26 अगस्त 2009 को रसिक श्रोताओं की गरिमामयी उपस्थिति में सम्पन्न हुआ एक कवि सम्मेलन जिसमें डा.क़ीर्ति क़ाले, डा. सरोजिनी प्रीतम, पं. सुरेन्द्र दुबे (जयपुर), महेन्द्र शर्मा,नन्द किशोर अकेला (रतलाम),राजगोपाल सिंह, डा.अरविन्द
 
अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
पसंद करें
0
नापसंद करें

छि: शाहरुख ,तुम गन्दे हो

हालांकि बहुत से पन्ने प्रिंट मीडिया में रंगे जा चुके हैं और टी वी पर बहुत सा समय इस विषय पर खर्च हो चुका है,फिर भी मैं अपनी बात रखना आवश्यक समझता हूं. भले ही यह विवाद का विषय रहा हो कि शाहरुख ने अपनी जामातलाशी और हिरासत की बात को बढ़ा चढ़ा कर पेश किया.और
 
अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
टैग: shahrukh
पसंद करें
4
नापसंद करें

अमरीका में भारतीय स्वाद की तलाश

आने के सिलसिले मे वहां की एक भारतीय मूल की एक छात्रा सुहासिनी पाशीकांती से ई-मेल का आदान प्रादान हुआ था. वह जान पहचान काम आयी. अगले दिन जब मेरे लेपटोप की प्लग-अडोप्टर समस्या दूर नहीं होती लगी ( उन्होने तदर्थ रूप में मुझे एक दूसरा लेपटोप दे दिया था )त
 
अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
पसंद करें
3
नापसंद करें

अमरीका में उल्टा-पुल्टा

रविवार के दिन मुझे रिचमण्ड के लिये जे एफ के से 8.20 की फ्लाइट पकड़नी थी. सुरक्षा नियमों के अनुसार दो घंटे पहले पहुंचना था. परिवार वाले को बिना डिस्टर्ब किये दिनेश ने मेरे कमरे मे आकर मुझे पांच बजे जगा दिया, हमें मलूम था कि हम लेट हैं इस्लिये कोफी बनाक
 
अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
पसंद करें
6
नापसंद करें

अमरीका में “भारतीयम”-तीन: सांई बाबा का सत्संग और अमरीकी भक्त

जाना तो मुझे रिचमंड था, परंतु जे एफ के एयर्पोर्ट से उल्टे उत्तरपूर्व की तरफ दिनेश आहूजा जी के घर ( जो ईस्ट लाइम, कनेक्टिकट में है) जा रहे थे .दिनेश का आग्रह था कि उस दिन बुद्धपूर्णिमा है,और उन्होने अपने घर सांई-सत्संग के साथ साथ(meditation ) मेडिटेशन
 
अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi