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02 May 2010
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सरकारी फरमान - नो असहमति

सरकार का फरमान है कि देश में असहमति की कोई भी आवाज़ उठने नहीं दी जायेगी। साम्राज्यवाद की दलाल सरकार ने कार्पोरेशनों के हित में लोकतंत्र के खिलाफ, जनता के प्रतिरोधों के खिलाफ और ख़ुद देश की व्यापक जनता के खिलाफ अपनी सेना उतार दी है। यह युद्ध भी दो देशों
 
राहुल
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दूध सी सफेदी ....

प्रचार ऐसा माध्यम है जो किसी भी समाज की मानसिकता को पकड़ने का सबसे आसान जरिया होता है। प्रचार के कई तरीके होते हैं, लेकिन प्रचार की सभ्यता का सबसे शशक्त माध्यम दृश्य श्रव्य यानि कि रुपहला पर्दा ही है- चाहे वो छोटा हो या बड़ा। ये सोचना आसान है कि परदे पर
 
राहुल
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इसके लिए मंच नहीं, मन चाहिए....

इनके लिए मेरे पास कहने के लिए शब्द नहीं हैं, खुद देखिये और शब्द गढ़िये....
 
राहुल
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सवाल दस रुपये का

हिंदू होने के फायदे - ९ राम की पैडी पर जब हम लोग समोसे खा रहे थे, तब मुझे याद आया की अम्मा ने तो सिर्फ़ दस रुपये ही दिए हैं। वो सारे तो वही ख़त्म हो गए। अब क्या करें। बड़ी मुसीबत। आगे आने वाले रास्ते पर एक अजीब तरह का ताना बिकता था। बेचने वालों का कहन
 
राहुल
Dec 29 2009 11:43 AM
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रंग दे बसंती

मुंबई कांड से मुझे फ़िल्म रंग दे बसंती याद आ रही है। दिखने मे तो वो एकदम नौजवान ही तो थे। एक की तो फोटो, जो अखबार मे छापी है, उससे तो वो एकदम आमिर खान की तरह लग रहा है। बताते हैं की योजना किसी और की थी, और इसे कार्यान्वित दाउद किया था। दाउद पहले ही अ
 
राहुल
Dec 29 2009 11:43 AM
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एक मुलाकात वापस

गुफरान मेरे बचपन के दोस्त हैं लेकिन इनके लिखने की क्षमता का मुझे काफ़ी बाद मे पता लगा। ये तो खैर उनकी एक कविता है जो मुझे अपने पुराने दिनों मे वापस लेकर जाती है, लेकिन अपने ब्लॉग http://awadhvasi.blogspot.com/ पर गुफरान ने अपनी कलम के काफ़ी रंग बिखेर
 
राहुल
Dec 29 2009 11:43 AM
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कैसा सच और कैसी जीत

एन डी टी वी के स्टिंग ऑपरेशन पर कोर्ट ने दो वकीलों पर जुरमाना लगाया, चार महीने तक उनकी प्रैक्टिस पर रोक लगा डी और चैनल ने इसे सच की जीत कहा, अपने रिपोर्टर की पीठ थपथपाई । वैसे रिपोर्टर के काम का असली फल होता भी यही है की उसके काम का कुछ तो नतीजा निकल
 
राहुल
Dec 29 2009 11:43 AM
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कहीं मेरा नाम ...

क्या होते होंगे अनगढ़ कविता के मायने? क्या वो अपना संवाद नही कर पाती होगी? लेकिन क्या किसी कविता का संवाद करना इतना जरूरी है? आख़िर निकलती है वो ख़ुद से, किसी से संवाद करने की खातिर तो नही ही। बहरहाल, चुप से पड़े लोगों की खातिर ये कविता... सिगरेट के ध
 
राहुल
Dec 29 2009 11:43 AM
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जूता

इंसान ने पहली बार कब जूता पहना होगा? जूता भी पहना होगा या वो सिर्फ़ चप्पल ही रही होगी। जाहिर सी बात है कि मोहल्ले के शिव परसाद जैसी हवाई चप्पल पहनते हैं , वैसी तो नही ही रही होगी। बहरहाल कब बनी होगी पहली चप्पल और किसने पहना होगा पहला जूता। बात अगर आद
 
राहुल
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रास्ता और घर

ये पुरानी है, पिछले साल जुलाई मे लिखी थी , पेश ऐ खिदमत है ... १ रास्ता सबका एक ही था लेकिन थोड़ा सा आगे जाने पर पता चला कि हम सबके रास्ते अलग थे कोई पहली श्रेणी का चलने वाला था जो चलने मे यकीन रखता था कोई दूसरी... जो छोटे रस्ते की तलाश कर रहा था और को
 
राहुल
Dec 29 2009 11:43 AM
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पान

कसम से, क्या चीज़ है पान। खुदा की बनाई सबसे बड़ी नेमत है पान। हरे हरे देसी पान का पत्ता, उसपर बढ़िया चूना कत्था और भीगी डली। भोला बत्तीस तो अब जल्दी मिलता नही, तुलसी या बाबा मिल जाता है। और हाँ, किमाम इलायची भी जरूर होना चाहिए। पंडित जी लपेट कर जैसे ही
 
राहुल
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सोचा न था ....

मेरठ मे एक गुमनाम सी शख्सियत हैं मिथलेश आत्रे। और आइन्दा के दिनों मे गुमनाम ही रहना चाहती हैं। ऐसा इसलिए नही कि उन्हें नाम से कोई परेशानी होती हो, दरअसल वो अभी तक नाम के फायदे नही जान पाई हैं। मिथलेश से मिलने के बाद, खासकर उनके कारनामो के बारे मे जान
 
राहुल
Dec 29 2009 11:43 AM
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ये कोई ज्यादा बड़ी कहानी नही है...

ये कोई ज्यादा बड़ी कहानी नही है। मेरठ का एक इलाका है फिरोजनगर। ज्यादा नही, पिछले दो तीन दशक से यह पीने का पानी गन्दा आ रहा है। यहा रहने वाले बच्चों मे से एक दो बच्चा हर दूसरे तीसरे महीने मर जाता है। कारण, डायरिया, उलटी, दस्त। इन्ही की कुछ फोटो हैं। इस
 
राहुल
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कार्ड खरोचन मशीन

दफ्तर से वापस लौटकर कही बाहर जाने का मन नही होता है। और अगर थोड़ा सा भी पसर लिए, तब तो अल्लाह ही मालिक है। फ़िर तो चाहे कोई भी आवाज देता रहे, मैं और मेरी तन्हाई पीछा छोड़ने का नाम ही नही लेते। और अगर ऐसे मे अगर मजबूरन कुछ लाने बाहर निकलना हो और जेब मे
 
राहुल
Dec 29 2009 11:43 AM
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माफ़ी के साथ....

माफ़ी के साथ मैं ये बताना चाहता हूँ की १२ पत्थर के नाम से जो ब्लॉग शुरू हुआ था , उसमे मेरे नाम की जगह किसी दूसरे शख्स का नाम है । एक ऐसा शख्स , जिसे पढने लिखने से कोई मतलब नही , और ये बात मैंने पिछले २ साल मे अच्छी तरह से जान ली है । इसलिए , अब वो ब्ल
 
राहुल
Dec 29 2009 11:43 AM
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डेली डायरी - एक नया ब्लॉग

डेली डायरी के नाम से आज से एक नया ब्लॉग शुरू कर रहा हूँ। ये ब्लॉग पत्रकारिता के उन रहस्यों को साफ़-साफ़ सामने लाने की कोशिश करेगा, जो रोज की दिनचर्या मे किसी एक पत्रकार के सामने आते हैं। मुश्किलें कम होंगी, इसकी आशा तो न के बराबर है, लेकिन कई नई और रोच
 
राहुल
Dec 29 2009 11:43 AM
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और पीछे जाता समय

अयोध्या से लौटते हुए ऐसा नही लगा की पीछे कुछ छोड़े जा रहा हूँ। यही लगा की पीछा छूटा। दरअसल लगातार हिंदुत्व की राजनीती का शिकार बनी अयोध्या का अब कोई नामलेवा नही रह गया है। हर तरफ़ एक भयाक्रांत अव्यवस्था का ही बोलबाला दिखा। एक भय हमेशा संगीनों के साए म
 
राहुल
Dec 29 2009 11:43 AM
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मिल गया एक कनेक्शन

चंद लाइने हैं जो शायद ख़ुद को मुबारक बाद देने के लिए हैं, या फ़िर एक बीते हुए युग को याद करके उसे दोबारा वापस पाने की खुशी मे हैं.. मुझे एक इंटरनेट कनेक्शन मिल गया है, जाहिर है, अब ब्लॉग्गिंग फ़िर से शुरू हो सकती है, तकरीबन शुरू हो चुकी है। बजार खुल चु
 
राहुल
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क्या हिंदू और क्या मुसलमान

इंदु होने के फायदे- १० अम्मा से दस रुपये लेकर मैंने पतारू का हाथ थामा और बढ़ लिया। अब हम लोगों की निगाह मे दो टारगेट थे। एक तो वो लड़की जो नदी मे नहा रही थी और दूसरी वो लड़की जो डम्पू के घर मे रहने आई थी। हमें पता था कि वो अपने पापा के साथ आई है और हम
 
राहुल
Dec 29 2009 11:43 AM
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तनी देखो, मर तो नही गवा ?

कुछ दिन पहले फैजाबाद के पास के जंगल मे एक तेंदुआ आया। कुछ जानवरों को तो कुछ बच्चो को खा भी गया। बड़ा हल्ला मचा। यहाँ वहाँ, न जाने कहाँ कहाँ से शिकारी आए, कई दिन तक जंगल की ख़ाक छानते रहे, लेकिन तेंदुआ भी कम नही। शिकारी एक कदम आगे बढायें तो तेंदुआ चार
 
राहुल
Dec 29 2009 11:43 AM
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मेरे बहाने पत्रकारिता की मर्यादा पर आत्ममंथन हो- -जरनैल सिंह-

भड़ास फॉर मीडिया से साभार.... सर्वाधिकार भड़ास फॉर मीडिया मैंने पत्रकारिता की मर्यादा का उल्लंघन किया था। इसकी मुझे सजा भी मिल गई। मुझे सजा से कोई ऐतराज नहीं है। सजा कितनी होनी चाहिए थी, ये जरूर बहस का विषय हो सकता है। लेकिन सवाल यह है कि जो अखबार रिपो
 
राहुल
Dec 29 2009 11:43 AM
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भूपेन याद हैं ?

भूपेन याद हैं आप सबको ? नही? जाहिर है कि ब्लॉग जगत मे पहली बार समानता का परचम लहराने वाले भूपेन और समानता की वकालत का नतीजा भुगत चुके भूपेन अपनी ब्लॉग जगत पर कम हलचल की वजह से शायद ब्लॉग जगत मे भुला दिए गए हों, लेकिन मैं नही भूल सकता। और जिसे करने मे
 
राहुल
Dec 29 2009 11:43 AM
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आख़िर क्यों आई खरीफ की कम उपज ?

प्रधानमन्त्री के नाम एक पत्र। प्रिय प्रधानमन्त्री जी। अभी कल की ही तो बात है जब आपने ये बयान दिया कि खरीफ की कम उपज आने पर आने वाले समय मे अनाज की कीमतों मे बढोत्तरी हो सकती है। लेकिन ये क्यों नही बताया कि आख़िर क्या बात रही कि देश मे खरीफ की कम उपज
 
राहुल
Dec 29 2009 11:43 AM
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अवध को बचाइए

अवध, अवध की संस्कृति, अवधी.... एक संस्कृति का नाम है अवध। गंगा जमुनी- जैसा कि लोग अभी तक कहते आये हैं- वो नहीं। अपने मे ही पूरी एक संस्कृति। हिंदू हो या मुसलमान, हिन्दू हो या सिख, हिंदू हो या इसाई, कोई फर्क नहीं। लेकिन हिंदू हो और दलित, तब कुछ अंतर आ
 
राहुल
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धीमे धीमे पकता है......

धीमे धीमे पकता है सपना" कैप्शन बाई- प्रमोद सिंह
 
राहुल
Dec 08 2009 07:48 PM
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लिब्राहन आयोग रिपोर्ट नही, साजिश है

जिस वक्त संघ और बी जी पी ने पूरे मुल्क को जहर की जद मे ले लिया था , कुछ कथित समाचार पत्र भी उसी जहर की जद मे आकर जहर फ़ैलाने का काम कर रहे थे , उस वक्त अयोध्या मे के पी सिंह शायद उन गिने चुने पत्रकारों मे एक थे जिन्होंने जहर को मानने से ही इनकार कर दि
 
राहुल
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आज मे बीतता हुआ कल- प्रभाष जोशी

उन्हें युगपुरुष कहना कोई अतिशयोक्ति नही होगी। एक बार उन्होंने ही कहा था कि अखबार कल का इतिहास बनाता है। बीते हुए कल का। उनकी ये बात कोई नई नही है। अखबार का चरित्र ही कुछ ऐसा है। लेकिन अखबार का एक और चरित्र होता है। एक अनोखा रूप, रंग, भाषा, संवाद शैली
 
राहुल
Nov 07 2009 10:00 AM
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गोल वार्निंग : नहाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है

अब भई , अपनी उत्तर प्रदेश सरकार के इस रवैये से हम भी इत्तेफाक रखते हैं। आदमी को नहाना नही चाहिए। नहाना खतरनाक हो सकता है। और ये कोई आज से नही, बचपन से झेल रहे हैं। बचपन मे जब हम चुपके से गुप्तार घाट पर पतारू के साथ भागकर नहाते थे, और लौटकर आते थे तो अनिल
 
राहुल