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जिंदगी और मेरे अनुभव

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31 May 2010
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वह आसमां के पार जाना चाहती है किसी भी कीमत पर

वह बहुत तेजी से आसमां की बुलंदियों को छूना चाहती थी। किसी भी कीमत पर। वह उसमें कामयाब भी रही। लेकिन कीमत बड़ी ज्यादा थी। वह देश के सबसे तेज चैनल में सबसे अधिक प्रतिष्ठित एंकर है। लुटियन की दिल्ली से लेकर मुंबई तक उसका डंका बजता है। वह जब टीवी पर आती है
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अरावली की गोद में जीणमाता का लक्खी मेला

राजस्थान में अरावली पर्वत श्रृंखला की गोद में जीणमाता का लक्खी मेला नवरात्ना के घट स्थापना के साथ ही शुरू हो गया। इस बार बासन्ती नवरात्न का यह मेला घाट स्थापना के साथ 16 मार्च को प्रारम्भ हुआ जो 24 मार्च तक चलेगा। शेखावाटी के दो प्रमुख शक्ति पीठ स्थल है
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अब राहुल की शादी क्या होगा?

भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रमोद महाजन की हत्या के आरोपी उनके भाई प्रवीण महाजन की मौत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रमोद महाजन के बेटे राहुल महाजन की शादी होगी या नहीं? एक निजी चैनल पर इनदिनों राहुल का स्वयंबर चल रहा है। और छह मार्च को राहुल की शादी
Mar 03 2010 06:30 PM
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पत्रकारिता विभाग की भटकती यादें

चार महीने इंदौर में रिपरेटिंग करने के बाद अब मैं फिर से झीलों की नगरी भोपाल में आ चुका है। नई जिम्मेदारियों के साथ नई चुनौतियां भी हैं। जो कि मेरे जैसे लोगों के लिए बहुत जरूरी है। क्योंकि यदि हमारे जैसे लोगों को नया काम, नई चुनौती नहीं दी जाए तो हमार
Dec 29 2009 11:40 AM
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सपनों को तोड़ने के लिए

कई दिनों बाद कुछ लिखने बैठ रहा हूं। दोस्तों ने कहा कि तेरे मुंबई को फिर से निषाना बनाया गया हूं, कुछ तो लिख। सबसे पहले मैं यह बता दूं कि आंतकवादियों ने नरीमन प्वाइंट के जिस होटल को निषाना बनाया है, उसके आसपास और उससे मेरी जिंदगी में बहुत अहम स्िाान ह
Dec 29 2009 11:40 AM
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भोपाल टू जयपुर वाया मुंबई

अक्सर मैं सोचता हूं कि कुछ वक्त निकाल कर कुछ न कुछ लिखा जाए अखबार के अलावा। कई दिनों बाद आज मौका मिल ही गया है। आज पुरानी कहानी को फिर से नए अंदाज में लिखने को दिल कह रहा है। कुछ इस कहानी से बुरी तरह पक जाएंगे तो कुछ कहेंगे आषीष भाई बहुत हुआ। अब तो ब
Dec 29 2009 11:40 AM
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तेरे जाने के बाद ...

तेरे जाने के बाद कई रोज़ तक बहते रहे थे मेरे आंसू और कविता फिर एक दिन मैं रोया लेकिन आंसू नहीं आये और आज कविता भी कागज़ पर नहीं उतरी - हिमांशु बाजपेयी
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रणवीर, डीनर और मैं

पिछले कुछ दिनों मैने जमकर मस्ती की। अब आप पूछेंगे कि क्या किया भाईसाहब। तो सुनिए। एक सुबह कपूर खानदान के वारिस रणवीर कपूर से मुलाकात की तो उसी शाम भोपाल के विंड एंड वेव्स में शानदार डिनर। अब आगे क्या कहूं। तस्वीरें देखकर आप खुद ही अंदाजा लगा लीजिए। ज
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तू जब से गया है मुझे छोड़कर

तू जब से गया है मुझे छोड़करमैं ऐसा तन्हा हुआकि अब तो लगता है जीना भी क्या जीना हैलेकिन फिर भी जीना होगावादा जो तुझसे किया है, निभाना होगामौत को आगोश में लेकर तुझे भूलना चाहता हूंपर कम्बख्त मौत भी बेवफा निकलीजिंदगी ने थामा दामनपर मौत भी दरवाजे पर खड़ी
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कुछ वक्त पहले मैं ऐसा नहीं था

कुछ वक्त पहले मैं ऐसा नहीं थाआज भी मैं वैसा नहीं हूंमै कैसा हूं, क्यूं हूं, मुझे खुद भी नहीं पतामै कौन हूं और क्यों हूंतुम्हे तो पता था लेकिन तुमने बताया क्यों नहीं ?अच्छा हुआ नहीं बतायायदि तुम बताती तो शायद मुझे तकलीफ होतीलेकिन क्यों नहीं बताया?यदि बता
Sep 15 2009 08:21 PM
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भाई साहब उसकी शादी हो गई

भाई साहब जिंदगी में कुछ भी आसानी नहीं मिलता।पता है, तो इसमें बताने की क्या बात है?नहीं, मुझे लगा आपको पता नहीं होगा।क्यों अपने आपको बहुत होशियार समझते हो?अरे भाई साहब आप तो नाराज हो गए।अरे यार नाराज होने की बात ही है। खैर कैसे आना हुआ?कुछ नहीं, बस इधर से
Sep 14 2009 08:59 PM
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राजमाता गायत्री देवी से वह पहली और अंतिम मुलाकात

पिछले कुछ समय से देश-विदेश की मीडिया में जयपुर की पूर्व राजमाता सुर्खियों में बनी हुई हैं। उनकी खासियत कम उनसे जुड़े विवादों को लेकर वे अधिक चर्चा में हैं। अब सबकी नजर उनकी एक हजार करोड़ रूपए की वसीयत पर है। फिलहाल यह वसीयत किस किस को मिलेगी, कहना आसान
Aug 10 2009 07:35 PM
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क्या करूँ आती है अब अक्सर तुम्हारी याद

कभी खुशबु सी आती हैतो महक उठतीं हैं यादेंछाजाती है सुनहरी सीवो एक अक्स उभरता हैये दिल मशरूफ रहता है उस लम्हे मैंअभी है वो पासजैसे कह रहा है कुछ ख़ासजो कभी कहा था उसनेबस एक एहसास ही है बाकीजो हर रोज रहता हैहै चेहरे पर मेरे ख़ुशीवही जो तब तुम्हारे चेहरे पर
Aug 03 2009 12:53 AM
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ये डीग्री भी लेलो, ये नौकरी भी लेलो,

ये डीग्री भी लेलो, ये नौकरी भी लेलो, भले छीन लो मुझसे USA का विसा मगर मुझको लौटा दो वो क्वालेज का कन्टीन, वो चाय का पानी, वो तीखा समोसा.......... कडी धूप मे अपने घर से निकलना, वो प्रोजेक्ट की खातीर शहर भर भटकना, वो लेक्चर मे दोस्तों की प्रोक्झी लगाना
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वह सोना चाहता है लेकिन नींद उसकी नीली आंखों से काफी दूर है...

वह लगातार कई दिनों से सोना चाह रहा था। लेकिन नींद थी, जो आने का नाम ही नहीं ले रही थी। उसकी आंखे तो भारी होती पर हो सो नहीं पाता था। हाथ-पांव के नाखून भी बढ़ चुके थे। इससे नहाने की उम्मीद करना रेत में पानी ढूंढने के समान था। फिर भी कुछ लोग उससे उम्मी
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एक अजन्मी बेटी का मां के नाम पत्र

मेरी प्यारी मां, मैं खुश हूं और भगवान से प्रार्थना करती हूं कि आप भी सुखी रहें। यह पत्र मैं इसलिए लिख रही हूं क्योंकि मैंने एक सनसनीखेज खबर सुनी है, जिसे सुनकर मैं सिर से पांव तक कांप उठी। स्नेहमयी मां आपको मेरा कन्या होने का पता लग गया है और मुझ मास
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वह पुराने दिनों में लौट चुका था...

अमित के सेल फोन पर रिंग बजती है। अचानक बजे इस फोन ने उसकी नींद को बुरी तरह तोड़ दिया था। बाएं हाथ से उसने फोन उठाया तो दाएं हाथ से लाइट का स्विच खोजना शुरु किया। फोन जयपुर से ही था। इस फोन कॉल ने अमित की आधी रात को तपती दोपहरी में बदल दिया था। अभी-अभ
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एक नजर यारा दा ठर्रापना पर

हिंदी में इस वक्त इतने ब्लॉग हो गए हैं कि कुछ समझ में ही नहीं आता है कि कौन से ब्लॉग को पढ़ा जाए और कौन सा छोड़ा जाए। कुछ ऐसे ब्लॉग हैं जिन्हें चौबीस घंटे में एक बार देखना ही पढ़ता है। मजबूरी सी हो गई है। तो कुछ ऐसे ब्लॉग भी हैं जहां कभी कभी नजर पढ़त
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उनको प्रणाम!

जो नहीं हो सके पूर्ण-काम मैं उनको करता हूँ प्रणाम। कुछ कंठित औ' कुछ लक्ष्य-भ्रष्ट जिनके अभिमंत्रित तीर हुए; रण की समाप्ति के पहले ही जो वीर रिक्त तूणीर हुए! उनको प्रणाम! जो छोटी-सी नैया लेकर उतरे करने को उदधि-पार, मन की मन में ही रही, स्वयं हो गए उसी
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वह फिर उसके साथ होली नहीं मना पाया

उसे अचानक एक भूली बिसरी याद आती है। कई साल पहले जब वह कॉलेज में पढ़ता था तो वहां वह भी साथ ही पढ़ती थी। नजर मिलने के साथ ही वह उसके प्रेम में रंग चुका था। पहली होली पर वह घर चली गई थी जो उत्तर प्रदेश में कहीं था। लेकिन दूसरी होली में वह इसी शहर में थ
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मीडिया - मैसेज - सेक्स

उन दोनों की मुलाकात हुए कुछेक ही महीने हुए थे। लेकिन इन कुछेक महीनों में वे कुछ अधिक करीब आ गए थे। लड़की यूनिवर्सिटी में पढ़ती थी तो लड़का वहां ग्रेड टू का कर्मचारी था। उसकी डच्यूटी यूनिवर्सिटी की लायब्रेरी में थी। जहां वह अक्सर किताबों के बहाने उसे
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वह लगातार रोए जा रही थी..

वो लगातार रोई जा रही थी। विदाई की बेला में वैसे भी रोना लड़की के चरित्र के लिए उसके समाज में अच्छा माना जाता है। पिछली जनवरी में जब उसके पड़ोसी शर्मा जी की बेटी हंसते हुए विदा हुई थी तो कई दिनों तक उसकी हंसी चाची-मौसी के लिए चर्चा का विषय बनी रही थी।
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क्या एनजीओ वाली लड़कियां बड़ी चालाक होती हैं?

बेटा ये एनजीओ वाली लड़किया बड़ी चालाक होती हैं। जरा बच कर रहना है। यह चेतावनी मुझे पिछले दिनों मिली है। चेतावनी देने वाली हमारी नई मकान मालकिन हैं। भोपाल के शाहपुरा में यह घर है जहां मैं फिलहाल तो किराए पर है। एंडवास किराया लेने के बाद हमारी मकान माल
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बिल्लू भिया को,मुंगेर सरपंच का सलाम कबूल हो

अभी ऑफिस पहुंच कर जैसे ही कम्प्यूटर ऑन किया तो शांतनु का ई मेल आया हुआ था। खोल कर पढ़ने लगा तो तनाव के माहौल में भी मुस्कुराना पड़ा। क्यों? इसके लिए तो आपको नीचे मूंगेर का वह पत्र पढ़ना पढ़ेगा जो बिल गेट्स साहेब को लिखा गया है। पढ़िए और बताएं कि आपको
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ये बातें झूठी बातें हैं

उसे देर रात सिगरेट की तलब ने बैचेन कर दिया था। घड़ी रात के दो बजा रही थी। उसे पता था कि ऑफिस के पास के मॉल के पास में जो गुमटी हैं, वहां सिगरेट मिल सकती है। बस दुकानदार को जगाना पड़ेगा जो कि काफी बुगरुज हैं। लेकिन उसके पास कोई विकल्प नहीं था। जैकेट औ
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मैं तुम्हें आज भी चाहता हूं

मैं जब भी उससे बात करता था तो एक बात जो मुझे हमेशा और आज भी सताती है , वो है उसकी खामोशी। मैं कितना बोलता था लेकिन वो कुछ भी नहीं बोलती थी। उसक खामोशी सागर की तरह है। उसकी खामोशी की ही ताकत है कि पूरी रात जागने के बावजूद मैं उसके बारें में लिख पा रहा
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एक बार फिर भोपाल

लिजिए एक बार फिर भोपाल आ गया हूं। भोपाल में फिर तीसरी बार वापसी हुई है। शुरुआती दौर में लगा कि भोपाल वापसी किस दिशा में जाएगी, पता नहीं था। खैर अब पूरे दो सप्ताह बाद एक बार फिर से भोपाल का मौसम हसीन सा लगने लगा है। रहने के लिए घर का इंतजाम भी हो गया