कोर्ट का निर्णय आ गया है और निरीह लोगों को कोई इन्साफ नहीं मिला। शर्म आनी चाहिए हम लोगों को अपने आप को लोकतंत्र कहते हुए। एक मजाक बन गयी है गरीब आम आदमी की ज़िंदगी। दो साल की सज़ा और कुछ हज़ार रूपयों का जुर्माना, क्या न्याय मिला है उन लोगों को जिनकी खुदा की
अमेरिका में स्थित येल विश्वविद्यालय के एक सर्वे के अनुसार पर्यावरण के मानकों पर भारत का कुल १६३ देशों में १२३-वां स्थान है. इस सर्वे के मानक कई हैं जैसे कि वायु प्रदूषण की स्थिति, उस पर नियंत्रण के तरीके, पानी की स्थिति, आम जनता के लिए उपलब्धता, और
आज एक काफी अच्छी वेबसाइट ग्रामस्वराज देखने को मिली जिसमें गाँवों के स्तर पर स्वराज लाने का प्रयास किया जा रहा है. वाकई बहुत ज़रूरी चीज़ है ये. गांधी ने हमको आगाह किया आजादी के पहले कि जब तक भारत के गाँवों की हालत नहीं सुधरेगी तब तक भारत भी विकसित नहीं
आज एक सही खबर पढने को मिली. कुछ महिलाओं ने मिल के घरेलू कचरे से खाद बनाने की कंपनी शुरू की है और काफी सफल हैं. पूनम कस्तूरी, जो किए बंगलूरू में रहती हैं, ने अपने कुछ मित्रों के साथ मिल कर घरेलू कचरे से खाद या कम्पोस्ट बनाने की कंपनी शुरू की जिसका नाम है
हिवड़े गाँव महाराष्ट्र में अहमदनगर के पास एक गाँव है जो कि आज भारत के आदर्श गाँवों में माना जाता है. आज से बीस पच्चीस साल पहले इस गाँव की हालत भी भारत के लगभग हर गाँव के जैसे बुरी ही थी. गाँव में शराबखोरी बढ़ गयी थी, लोग आपस में लड़ते थे और गाँव में कुछ
बी टी बैंगन के बारे में आजकल काफी बहस छिड़ी हुयी है और बहस होना लाजिमी भी है क्योंकि ये मुद्दा करोड़ों किसानों की ज़िंदगी से जुड़ा है। एक तरफ मोंसान्तो कंपनी अपने बीजों को दुनिया में किसानों को बेचने पर उतारू है, वहीं भारत सहित कई मुल्कों में इसकी काफी
This post is about my recent trip to Goecha La, a 5000+m pass in Sikkim, gateway to majestic Kanchendzonga, world third highest mountain peak.. In 2009, at the end of September I planned a trek to Goecha La, a pass (La means pass in local language) in
हिन्दी भाषी मित्रों से क्षमा कि हिन्दी में नहीं लिख रहा हूँ क्योंकि ये मेरे कुछ विदेशी दोस्तों के लिए भी है पर इसका बाद में हिन्दी में अनुवाद ज़रूर करूंगा|This year I planned for Roopkund trek which is supposed to be a difficult trek। Roopkund is loc
अब कादम्बिनी भी नये रूप में आ गयी है। दुनिया में कदम से कदम मिलाकर चलने के लिये बदलाव आवश्यक है और कादम्बिनी भी इसका पालन कर रही है। देखिये नवम्बर अंक ।ये अब लगभग A4 साइज़ में है और अन्दर के पन्ने और उनकी मढ़ाई भी काफी अच्छी है।
अभी हाल ही में टाइम पत्रिका में कानपुर को विश्व के सबसे प्रदूषित शहरों में बताया गया (कड़ी और चित्रावली) । पत्रिका में एशिया के अन्य शहरों के बारे में भी चिन्ता व्यक्त की गयी है, मसलन चीन के कई शहर काफ़ी प्रदूषित हैं।जहां तक भारत की बात है तो प्रदूषण आ
अभी हाल में उज्जैन में एक शिक्षक की हत्या के मामले को टीवी पर काफ़ी सुना, और उसके बाद शिक्षक दिवस पर दुनिया भर के लोगों की बातें देखीं और सुनीं। मैंने भी सोचा कि शायद आज के सूचना की बहुतायत वाले युग में शिक्षक अर्थहीन हो गये हैं, काफ़ी सारे विद्यार्थी
बनारस के घाट का सूर्यास्त के बाद का दृश्यघाटों पर हो रही पूजाघाट की पूजा और सजावट (कम रोशनी में)ये सब फोटो चलती नाव से लिये गये थे इसलिये थोड़ी सी हिल सी गयीं हैंकैमरा: कैनन पॉवरशॉट S30
नार्वे में एक ऐसा तरीका ईजाद किया गया है जिससे कि मानव अपशिष्ट को ईंधन में बदल कर बसों को चलाया जा सके। सीवर से कूड़े को निकाल कर उसमे बैक्टीरिया को मिलाया जता है जो कि ठोस पदार्थ को तोड़ के उससे बायोमेथेन पैदा करता है, जो कि ईंधन के रूप में प्रयोग की
शोध में पाया गया है कि गावों की जिंदगी के बचने के लिए ज़रूरी है कि पेड़ों को बचाया जाए। पेड़ कई मायनों ने गावों की ज़िंदगी को संभाल कर रखते हैं जैसे कि ये गाँव वालों को फल और सब्जी देते हैं, जानवरों के लिए खाना देते हैं, ताज़ी हवा देते हैं, बरसात में म
हाल ही में किए गए एक शोध के मुताबिक पता चला है कि शाकाहारी लोगों को कैंसर का खतरा कम होता है । तो शाक सब्ज़ी खायें और इस नामुराद बीमारी से बचें ।पूरी रिपोर्ट
हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट (लिंक) के अनुसार २०२० तक भारत के ज़्यादातर शहरों में पानी की काफी कमी होने वाली है। ऐसे में ज़रूरत है पानी बचाने की जैसे कीAnd here is the rest of it।-गाडी धोना कम किया जाए-लान में पानी देना बिल्कुल बंद किया जाए-नहाने इत्
पर्यावरण और पेडों के बीच काफी गहरा रिश्ता है। वैसे तो ये चीज़ हम अपने अनुभव से ही महसूस कर सकते हैं, पर अब तो वैज्ञानिक शोध ने भी ये साबित कर दिया है कि पेड़ लगाने से कई सारे लाभ होते हैं:वातावरण की कार्बन डाई आक्साइड गैस को पेड़ सोख लेते हैं और हमारे
सबसे पहले शुरू करें ताडासन जिसका मतलब है ताड़ के पेड़ या पर्वत की तरह खड़ा होना :अपने पैरों को मिला कर सीधे खड़े हों, रीड़ की हड्डी और गर्दन को एक दम सीधे रखें। फिर को अंदर भरते हुए दोनों हाथों को ऊपर उठाएं। इस मुद्रा में करीबा एक मिनट तक रहें और सांस
स्वर्गीय श्री धरमपाल जी हिंद्स्तान की आज़ादी की लड़ाई के समय के एक ऐसे नायक थे जिनके बार में शायद ही कुछ लिखा गया हो।वो एक गांधीवादी थे, एक अच्छे विचारक, इतिहासकार और लेखक थे और उन्होंने हिन्दुस्तान में विज्ञान के इतिहास, पुराने समाज, और लोगों के बारे
नागपुर के एक कालेज की प्रोफेसर अलका जादगाओंकर ने एक ऐसा कैटेलिस्ट और इससे चलने वाला तरीका ईजाद किया है जिससे कि बेकार प्लास्टिक को ईंधन में बदला जा सके। मजेदार बात ये है कि हम हिन्दुस्तानियों से ज़्यादा विदेशी उनके इस आविष्कार को अपने देश में प्रयोग क
The Buddha Said:The homeless Shramana cuts off passions, frees himself of attachments, understands the source of his mind, penetrates the deepest doctrine of Buddha, and comprehends the dhamma, which is immaterial. He has no prejudice in his heat. He has
अभी हाल में आस्ट्रेलिया में ग्रेट ओशियन रोड (मेलबोर्न से एडीलेड) की यात्रा की, जो की काफी अच्छी थी। जिंदगी में पहले कभी इतना अच्छा पानी नही देखा। गोवा के समुद्र का पानी भी अच्छा है, लेकिन यहाँ का एकदम नीला और साफ। सबसे अच्छी बात है समुद्र के किनारे ख़
मुझे याद है की जब मैं १२ वीं कक्षा में था तो उत्तर प्रदेश बोर्ड में हमारी फिजिक्स की किताबें बड़ी बकवास हुआ करती थीं। हम लोग कुमार मित्तल की किताब पढ़ते थे जिसमें थ्योरी के नाम पर कुछ भी नहीं था। हर अध्याय के अंत में खूब सारे सवाल हुआ करते थे जिनको स
दुनिया की पानी की समस्या आबादी और बढ़ती हुई मांग की वजह से है। इसका उत्तर लोगों द्वारा उपयोग कम करने में है।
water problems of the world are believed to be due to rising populations and growing demand। The solution probably lies reducing the size of
वैसे तो हिन्दुस्तान, चीन जैसे देशों में मल-मूत्र का उपयोग होता रहा है, जैसे की कंडे बनाना, खाद बनाना इत्यादि, पर धीरे धीरे आधुनिक शौचालयों के बनने से ये सारा अपशिष्ट अबा सीवर लाइन के माध्यम से किसी नाले में जाता है और शायद फिर किसी नदी या समन्दर में।
कई दिनों से ज़हन में ये खयाल आ रहा था कि क्या आदमी का मज़हबी होना ज़रूरी है, किसी एक मज़हब का गुलाम होना ज़रूरी है? क्यों नहीं इंसान अपनी समझ या अक्ल से चीज़ों के बारे में सोचता है, क्यों वो बिना किसी मज़हब के अच्छा इंसान नहीं हो सकता है, क्यों उसे किसी गुर
दिल्ली सरकार ने हाल ही में पालीथीन के बैगों पर रोक लगाई है जो कि पर्यावरण सुधारने की दिशा में एक अच्छा कदम है लिंक >। पहले जब मुम्बई में बारिश की वजह से पानी भरा था और पाया गया था कि ऐसा पालीथीन बैगों के गटर को जाम करने की वजह से हुआ है, तो वहाँ की स
मैनें वैसे तो योग की कई सारी किताबें देखी हैं लेकिन मुझे उनमें से दो सबसे ज़्यादा पसन्द हैं: 1. Light on Yoga (योगाचार्य श्री बी एस के अयंगार के द्वारा लिखित): अंग्रेज़ी में तो है, और हिन्दी वाली का पता नहीं है (Harper-Collins Publication)| 2. आसन प्रा
वैसे तो मैं योग रोज़ करता हूं लेकिन अब कुछ अच्छे से सीखने का मन है। मन कर रहा है कि एक लम्बी छुट्टी लेकर पुणे या केरल में योग सीखा जाये जिससे कि दूसरों को भी सिखाने का सर्टीफ़िकेट मिल सके। समझ में नहीं आ रहा है कि शिवानन्द आश्रम, केरल में सीखने के लिये