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03 May 2010
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निरुपमा के लिए न्याय

निरुपमा के लिए न्याय पिटीशन पर दस्तखत करें। निरुपमा की हत्या इसलिए कर दी गई क्योंकि वह अपनी मर्जी से शादी करना चाहती थी। वर्णव्यवस्था के पुजारियों ने इस अपराध के लिए उसे मौत की सजा दे डाली। पिटीशन पर क्लिक करें। दस्तख्त करें
 
गिरीन्द्र नाथ झा
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गुलजारगी...आवारगी...हर कुछ मेरे गुलजार में

जब कोई पूछता है कि गुलजार तुम्हें क्यों पसंद है तो मैं जवाब देने के लिए पल भी नहीं सोचता, बस कह देता हूं- गुलजार हमारी भाषा बोलते हैं। मेरे लबों पर तुंरत उनकी यह त्रिवेणी आ जाती है- आओ सारे पहन लें आईने.. सारे देखेंगे अपना ही चेहरा..सबको सारे हंसी लगेंगे
 
गिरीन्द्र नाथ झा
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रेणु और गुलजार में एक अजीब किस्म की रहस्यात्मकता हैः सदन झा

फणीश्वर नाथ रेणु और गीतकार गुलजार, इन दोनों को पढ़कर कई लोगों को देहातीत सुख मिलता होगा। आखिर दोनों की लेखनी में क्या है, कि हर उम्र के लोग इनसे जुड़ जाते हैं। सूरत स्थित सेंटर फॉर सोशल स्टडीज में सहायक प्रोफेसर सदन झा का कहना है  कि रेणु
 
गिरीन्द्र नाथ झा
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रेणु की दुनिया- जिसके बिना हम अधूरे हैं..

'' कई बार चाहा कि, त्रिलोचन से पूछूँ- आप कभी पूर्णिया जिला की ओर किसी भी हैसियत से, किसी कबिराहा-मठ पर गये हैं? किन्तु पूछकर इस भरम को दूर नहीं करना चाहता हूं। इसलिए, जब त्रिलोचन से मिलता हूं, हाथ जोड़कर, मन ही मन कहता हूं- "सा-हे-ब ! बं-द-गी !!"-
 
गिरीन्द्र नाथ झा
Apr 11 2010 08:26 AM
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अथ जींस कथा

जींस, क्या केवल पहनावा भर है या फिर परिधान संस्कृति में क्रांति का दूतक ? यह सवाल अभी माथे में उबाल मार रहा है। जहां तक मेरी बात है तो आठवी में पढ़ाई के दौरान जींस से दोस्ती हुई। ऐसी दोस्ती जिसने मैले से भी दोस्ती करा दी। एक नहीं दो नहीं पांच
 
गिरीन्द्र नाथ झा
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शहनाई खामोश नहीं हुई है दोस्त (सपने में बिस्मिल्ला खान से बातचीत)

सपने में बिस्मिल्ला खान से बातचीतखां साब बेहद सुस्त नजर आ रहे थे। बनारस में अपने घर के बरामदे पर चुपचाप बैठे सामने की ओर देख रहे थे। उनके समीप बैठकर मैं भी चुपचाप उन्हें देखे जा रहा था। उनकी खामोशी टूटी, और कहा, जनाब, एक बात जानते हो, जिदंगी कुछ
 
गिरीन्द्र नाथ झा
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शहर के भीतर शहर की खोज

शहर की आंखें कैसी होती है, शहर के पांव कहां-कहां पहुंचते हैं..इस तरह की कई सवाल हैं जो शहर को समझने के दौरान हमारे-आपके सामने खड़े हो जाते हैं। इसी बीच जब यह पता चलता है कि शहर के भीतर कई शहर होते हैं, ठीक वैसे ही जैसे आदमी के भीतर हजारों आदमी, तब आप
 
गिरीन्द्र नाथ झा
टैग: शहर
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यहां सिर्फ मरने के बाद ही सम्मान किया जाता है- उस्ताद अकील अहमद खान

हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के आगरा घराने से ताल्लुक रखने वाले उस्ताद अकील अहमद खान इन दिनों बीमार हैं लेकिन वह बिल्कुल अकेले हैं। सरकार की उपेक्षा से बेजार इस संगीत दिग्गज का कहना है कि यहां सिर्फ मरने के बाद ही सम्मान किया जाता है। खान साहेब आगरा घराने
 
गिरीन्द्र नाथ झा
Mar 08 2010 02:01 PM
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विदापत नाच को जिंदा रखने वाले ठिठर मंडल नहीं रहे

कथाशिल्पी फणीश्वर नाथ रेणु से जुड़ी स्वर्णिम याद के रुप में विदापत नाच मंडली अब इतिहास बन गई है। रेणु की यह नृत्य व गीत परंपरा पहले ही लगभग लुप्त हो चुकी थी लेकिन अब इसके अंतिम चिराग के रुप में शेष बचे कलाकार ठिठर मंडल भी नही रहे। मंडल अब तक कोसी के
 
गिरीन्द्र नाथ झा
Feb 11 2010 03:53 PM
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जीत गयी तो पिया मोरे हारी पी के संग

मेरा सोचना है कि सूफी दोहे में डूबने के बाद आपके पास शब्द कम पड़ जाते हैं क्योंकि आप शब्दों से काफी दूर निकल जाते हैं। ऐसे वक्त में आपकी अनुभूति का ग्राफ बढ़ जाता है। मुझे लगता है कि हमें शब्दों से परे कुछ सोचने की कला सूफी दोहे सीखाती है। अमीर खुसरो के
 
गिरीन्द्र नाथ झा
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विनीत और रवीश के बहाने सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट और सवाल-जवाब

लगभग तीन साल से सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट्स से यारी कर रहा हूं। ऑरकुट, फेसबुक और ट्विटर के जरिए इस दुनिया में कदम रखा। उससे पहले ब्लॉगसोर्स और ब्लॉगस्पॉट से जबरदस्त यारी थी। ब्लॉगसोर्स तो चला गया पर गूगल का ब्लॉगस्पॉट जिंदगी का एक हिस्सा बन गया। इसी बीच
 
गिरीन्द्र नाथ झा
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ज्योति बाबू की बोलती आंखें ...

इस तस्वीर में देखिए ज्योति बाबू को। उनकी आंखें बोला करती थी। एक नजर में बेहद कड़े मिजाज के लगते थे ज्योति बाबू लेकिन असल में उतने ही सरल और सौम्य। उनके चुनाव एजेंट रह चुके गोकुल बैरागी का कहते हैं कि बसु को क्रोध काफी कम आता था और वह स्थिति को संभालना
 
गिरीन्द्र नाथ झा
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एक पैसा प्रति सेकेंड और लिफाफा

हम 2010 में हैं,  दोस्तों से फोन, ई-मेल, एसएमएस और तमाम सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट के जरिए नए साल की शुभकामनाओं का आदान-प्रदान किया, लेकिन इस बीच ग्रिटिंग्स कार्ड को समेटे लिफाफे कहीं खो गए। याद कीजिए पुराने दिनों को जब नए साल में हम डाकिए का
 
गिरीन्द्र नाथ झा
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चेतन भगत कह रहे हैं 'पढ़ो तब बोलो..'

हाल ही में प्रदर्शित फिल्म '3 इडियट्स' की कहानी को लेकर विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। लेखक चेतन भगत का कहना है कि यह फिल्म उनकी किताब 'फाइव प्वाइंट समवन' की कॉपी है, जबकि फिल्मकार विधु विनोद चोपड़ा इससे पूरी तरह सहमत नहीं है। भगत ने अपने ब्लॉग
 
गिरीन्द्र नाथ झा
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नए साल के जश्न से पहले बीबीसी के विनोद वर्मा की भी बात सुनें..

• एक सरकारी रिपोर्ट कहती है कि भारत में ग़रीबी बढ़ी है और अब हर तीसरा भारतीय दरिद्र है.• मुंबई मेट्रोपोलिटन रिजनल डवलपमेंट अथॉरिटी के आयुक्त रत्नाकर गायकवाड का कहना है कि मुंबई में 54 प्रतिशत आबादी झुग्गियों में रहती है. लेकिन वे यातायात को सबसे बड़ी
 
गिरीन्द्र नाथ झा
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कितने बदल गए हम..

क्या कभी सोचा है कि हम किस कदर बदल रहे हैं?  कई बार सोचता हूं और फिर इस सवाल से खुद ही कन्नी काट लेता हूं। लेकिन सच्चाई से कब तक हम या आप दूर भागेंगे। यह सच है कि हम बदल रहे हैं। वैसे बदलाव कोई गलत बात नहीं है लेकिन गलती उस वक्त हो जाती है जब हम
 
गिरीन्द्र नाथ झा
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विज्ञापन भावुक बनाते हैं या लालची..

कभी-कभी सोचता हूं कि आखिर टेलीविजन पर दिखने वाले विज्ञापन हमें कैसे अपनी ओर खींच लेते हैं? क्या वाकई विज्ञापनों में जादू होता है? कभी-कभी कुछ विज्ञापन रिश्तों के मूल्यों को समझाते वक्त हमें भावुक कर देते हैं लेकिन इसी बीच वह हमें लालची भी बनाने का का
 
गिरीन्द्र नाथ झा
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आत्मालाप

चुप रहना और ठहरना दो अलग चीजें हैं। दोनों को एकाकार करना सीख रहा हूं। कितना अलग लगता है चुप रहना और फिर कहीं देर तक ठहर जाना। इन दोनों अवस्थाओं में, हम खुद से कितनी ईमानदारी बरतते हैं या खुद से कितना बेईमान हो जाते हैं। अक्सर रातों में उठकर इन अवस्था
 
गिरीन्द्र नाथ झा
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'पंचम अनमिक्सड' लेकर आए ब्रह्मानंद सिंह

लेखक व फिल्मकार ब्रह्मानंद सिंह ने चार वर्षो की कड़ी मेहनत के बाद प्रख्यात संगीतकर आर. डी. बर्मन के जीवन पर 'पंचम अनमिक्सड' फिल्म का निर्माण पूरा कर लिया है। बर्मन के जीवन पर नई रोशनी डालने वाली इस फिल्म की डीवीडी जारी कर दी गई है। सिंह का कहना है कि
 
गिरीन्द्र नाथ झा
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गांव की बात करे मीडिया : मार्क टली

दक्षिण एशिया और खासकर भारतीय मामलों के प्रमुख पत्रकार व लेखक मार्क टली का कहना है कि मीडियाकर्मियों को ग्रामीण क्षेत्रों की विशेष रूप से बात करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मीडिया ग्रामीणों इलाकों की खबरों को अक्सर नजरअंदाज कर देता है। प्रभाष ज
 
गिरीन्द्र नाथ झा
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हमें बुलाती है दुनिया हमीं नहीं जाते

आज मुन्नवर राना को पढ़ने का बहुत मन किया तो नेट को खंगाला। कविता कोष पर वह मिले। उन्हें पढ़ते वक्त पाठक एक अंश में खुद को भी पढ़ता है, ऐसा मेरा मानना है। बतौर पाठक, आप भी पढिए. शुक्रिया गिरीन्द्र --------------- 1 कहीं भी छोड़ के अपनी ज़मीं नहीं जाते
 
गिरीन्द्र नाथ झा
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तुमने सुना! प्रभाष जोशी नहीं रहे.... प्रभाष जी आपने क्रीज़ क्यों छोड़ दी?

प्रभाष जोशी नहीं रहे, एक बार सुनकर विश्नास नहीं हुआ..दुखी हूं। बस आंखों में सफेद धोती-कुर्ता पहने प्रभाष जोशी याद आ रहे हैं। सुबह से ही दोस्तों से बात हो रही है। इसी बीच इंदौर में दैनिक भाष्कर में कार्यरत दोस्त संदीप कुमार पांडेय  ने क
 
गिरीन्द्र नाथ झा
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कौन ठगवा नगरिया लूटल हो ...

कबीर, जिन्हें पढ़ते वक्त खोने का अहसास होता है। आज जब कौन ठगवा नगरिया लूटल हो    पढ़ रहा था, तब मुझे अपने गांव में निरगुण गाने वाले अनहद की याद आ गई। वह इसे जब सस्वर  सुनाता है तो आंखे खुलती नहीं रहती है। वह खासकर कबीर की इस पंक्त
 
गिरीन्द्र नाथ झा
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मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में

इन दिनों कबीर को पढ़ रहा हूं। मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी ..पढ़ते वक्त उनसे नजदीकी बढ़ जाती है। कबीर की वाणी का संग्रह 'बीजक' के नाम से प्रसिद्ध है। इसके तीन भाग हैं- रमैनी, सबद और साखी यह पंजाबी, राजस्थानी, खड़ी बोली, अवधी, पूरबी, ब्रजभाषा आदि कई भाषा
 
गिरीन्द्र नाथ झा
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रैंप पर कैटवॉक करती भैंस...

क्या आपने कभी रैंप पर भैंस को कैटवॉक करते देखा है? शायद नहीं, लेकिन बिहार के मधेपुरा जिले में गुरुवार को कई लोगों ने रैंप पर मॉडल बनीं भैंस को कदम से कदम मिलाकर चलते देखा। अभी तक मुझे भी इसकी जानकारी नहीं थी लेकिन हमारे एक सहयोगी ने जब पटना से मेल कि
 
गिरीन्द्र नाथ झा
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दीवाली में आई याद

बरसों, कि याद नहीं कब था दीवाली में अपने घर पे। शायद 12 साल पहले घर पर अपने लोगों के साथ दीप जलाया था। कुछ-कुछ याद है लेकिन तंदरूस्त याद नहीं.. पटाखों की आवाज यहां भी सुनता हूं लेकिन अपने शहर की मिरचया पटाखे की तरह नहीं। बमों, फूलझड़ियों से मोहल्ले क
 
गिरीन्द्र नाथ झा
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यहां गांव नहीं जीवन डूबा है...

इस समय पूरा मुल्क तीन राज्यों में हो रहे मतदान में उलझा हुआ है। इस बीच आंध्र और कर्नाटक में आई भीषण बाढ़ को जैसे हम भूलते जा रहे हैं। हम मतदान को लेकर एक से बढ़कर एक लीड खबर बनाकर परोस रहे हैं। लेकिन इस बीच में हम बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को छोड़ते जा
 
गिरीन्द्र नाथ झा
Oct 14 2009 07:33 PM
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शांति की परिभाषा बदल गई..

ओस्लो में वर्ष 2009 के नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा से एक नया विवाद सामने आ गया है। खासकर शांति शब्द की परिभाषा को लेकर। क्या अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को शांति के लिए नोबेल पुरस्कार देना उचित है..? यह सवाल अभी सभी के दिलो-दिमाग में छाया हुआ है।
 
गिरीन्द्र नाथ झा
Oct 14 2009 07:33 PM
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काबुलीवाला कहता है-अमरीका के पाँव दबाए जा रहे हैं

मोहन राणा ब्रिटेन मे बसे भारतीय मूल के हिंदी लेखक हैं। बाथ (ब्रिटेन का एक रोमन शहर) निवासी मोहन राणा एक ऐसे कवि हैं जिनकी कविताओं में जीवन के सूक्ष्म अनुभव महसूस किये जा सकते हैं। बाज़ार संस्कृति की शक्तियों के विरुद्ध उनकी सोच भी कविता में उभरकर साम
 
गिरीन्द्र नाथ झा
Oct 14 2009 07:33 PM
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अब टाइम पत्रिका ने कहा- बिन्देश्वर पाठक हैं हीरोज ऑफ द इन्वॉयारमेंट

देश-विदेश में कई प्रतिष्ठित सम्मान हासिल कर चुके गैर सरकारी संगठन सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक बिन्देश्वर पाठक को प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका टाइम ने विश्व भर में पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाले मशहूर लोगों की सूची हीरोज ऑफ द इन्वॉयारमेंट 2
 
गिरीन्द्र नाथ झा
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दुर्गा पूजा-तस्वीरें और यादें

बचपन के दिनों में दुर्गा पूजा में हम हॉस्टल से घर आया करते थे। बाद में इसके साथ मेला घुमने का भाव भी जुड़ा लेकिन ऐसा काफी कम दिन ही हो सका। पढ़ाई और फिर नौकरी के चक्कर में पूजा मंडपों से उठने वाली धूप की सुगंध और कलश के नीचे उगने वाली जयंती हमसे दूर होती
 
गिरीन्द्र नाथ झा
Sep 26 2009 03:35 PM
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हमारे 'बच्चे' ने चांद पर पानी खोजा

देश के पहले चंद्रमिशन 'चंद्रयान-1' के परियोजना निदेशक और वरिष्ठ अंतरिक्ष वैज्ञानिक एम।अन्नादुरई ने चांद पर पानी के प्रमाण मिलने पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि हमारे 'बच्चे' ने चांद पर पानी खोज कर अपना काम पूरा कर लिया है।चंद्रयान अपने साथ अमेरिकी उपकरण
 
गिरीन्द्र नाथ झा
Sep 24 2009 03:56 PM
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बिहार में पेड़ लगाने का रिकॉर्ड

बीबीसी हिंदी डॉट कॉम से साभार एक सार्थक रपट।बिहार में लाखों ग़रीबों को रोज़गार देने के लिए भारतीय प्रशासनिक सेवा से जुड़े एक अधिकारी एसएम राजू राज्य में बड़ी संख्या में पेड़ लगाने की योजना पर काम कर रहे हैं।राजू की मुहिम है कि लोगों को पेड़ लगाने के लिए
 
गिरीन्द्र नाथ झा
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ब्लॉग स्पॉट पर पहली पोस्ट.-Village Speak

ब्लाग स्पॉट डॉट कॉम से रिश्ता और पहली पोस्ट (10 अप्रैल 2006 )। इससे पहले ब्लॉगसोर्स डॉट कॉम के जरिए मन की बात लिखता था। बाद में ब्लॉग स्पॉट के बारे में जानकारी हुई तो यहां सिफ्ट कर गया।मुझे फ्लैश बैक में जाना कभी-कभी बेहद अच्छा लगता है। आज यूं ही ब्लॉग
 
गिरीन्द्र नाथ झा
Sep 19 2009 02:41 PM
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अमेरिका के ज्यादातर लोग मानते हैं, पत्रकार पक्षपात करते हैं

पत्रकारों के लिए एक बुरी खबर। अमेरिका के ज्यादातर लोग मानते हैं कि पत्रकार पक्षपात करते हैं और उन्हें अपना काम ठीक ढंग से नहीं आता। यहां ऐसा सोचने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है।पीपल एंड द प्रेस के प्यू रिसर्च सेंटर द्वारा कराए गए सर्वे के मुताबिक 63
 
गिरीन्द्र नाथ झा
Sep 15 2009 10:44 AM
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मेरे भीतर का चोर

आदमी बदल जाता है पर नहीं बदलता उसका रंग-रूपआदमी के भीतर हजारों आदमी में से एकजब बदलता है तो बदल जाती है उसकी तस्वीर।कई दिनों से इसी उधेड़बुन में किकब मेरे अंदर का अन्य पुरुष बदल गया।मैं अचंभित था खुद में छुपे चोर को देखकरसच्चाई से डरने वाला मेरे अंदर का
 
गिरीन्द्र नाथ झा
टैग: कविता
Sep 13 2009 02:16 PM
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सरोद और बल्ले वाले पहुंचे रैंप पर

रैंप पर उतरे उस्ताद अमजद अली ख़ान के बेटे अमान अली बंगश और अयान अली बंगश वीरेंदर सहवाग रैंप पर उतरे, उन्होंने रॉकी एस की डिज़ाइन की हुई शेरवानी पहनी बेटों का जब कैटवॉक पूरा हुआ तो पिता अमजद अली ख़ान से रहा नहीं गया, वो भी आ गए।सभी फोटो उधार-बीबीसी हिंदी
 
गिरीन्द्र नाथ झा
Sep 11 2009 03:32 PM
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तटभ्रंश

तटभ्रंश मनोज कुमार झा की कविता है। उन्हें हाल ही में भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार से सम्मानित से किया गया है। वे दरभंगा में रहते हैं। उन्हें स्थगन कविता के लिए भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार दिया गया है। मुझे उनकी कविता तटभ्रंश काफी पसंद है क्योंकि इससे कई
 
गिरीन्द्र नाथ झा
टैग: कविता
Sep 10 2009 05:20 PM
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कोसी की जनता पानी के नाम पर जहर पी रही है..

यह रपट जागरण डॉट कॉम से साभार है। जब इसे पढ़ रहा था तो पूर्णिया से जुड़ी मैथिली की एक कहावत याद आ गई- जहर नै खाउ, माहूर ने खाउ, मरबाक होए तो पूर्णिया आउ। इसका अर्थ यह है कि यदि आपको मरना है तो न जहर खाइए और न ही माहूर खाइए, बस पूर्णिया आ जाइए।हालांकि हम
 
गिरीन्द्र नाथ झा
Sep 08 2009 01:02 PM
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कविता प्रेमी निकलीं मैडम हिलेरी क्लिंटन

अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन 14 वर्ष पूर्व जब अमेरिका की प्रथम महिला के रूप में भारत आईं थीं तो दिल्ली विश्वविद्यालय की एक छात्रा ने उन्हें एक कविता पढ़कर सुनाई थी। उन्हें आज भी वह कविता याद है। लेडी श्रीराम कॉलेज की छात्रा अनुसूइया सेनगुप्ता
 
गिरीन्द्र नाथ झा