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कुछ ज्ञात कुछ अज्ञात

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12 Jun 2010
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कुछ ज्ञात कुछ अज्ञात

खुद से नाराज हो मिलेगा क्याखुद से नाराज हो मिलेगा क्या,हो के बरबाद यूँ मिलेगा क्या ।अश्क कहते रहे जमाने से,सिला हमको कोई मिलेगा क्या ।दिल ने ताउम्र ठोकर खाई है,ठीयाँ इसको कभी मिलेगा क्या । ज़ख्मों से रिश्ता हो ही गया,आराम मरहम से मिलेगा क्या ।प्यास
 
©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah)
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प्रायश्चितकभी कभी सोचता हूँक्या पापियों के पापबिना प्रायश्चित हीधुल जाते हैंऔर फिर पापियों कोऔर पाप करने कीराह दिखलाते हैंयदि हाँतो इन पापियों के पापबिना प्रायश्चित हीक्यों धो डालती है गंगाक्या ये भी पाप नहीं हैमन सहजता सेइस बात कोस्वीकार नहीं कर पाता
 
©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah)
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कुछ ज्ञात कुछ अज्ञात

"सर पटक कर मरने के हम कायल नहीं"वो किसी भी दोस्त के काबिल नहीं,जो कभी कुर्बानी के आमिल* नहीं ।दर्द से रिश्ते को क्या वो जानेंगें,जो कभी भी होते हैं धायल नहीं ।मुकाबला तूफाँ से कर के मरना है,सर पटक कर मरने के हम कायल नहीं ।ग़मों के खंजर चला्ना उनका काम
 
©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah)
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"सर पटक कर मरने के हम कायल नहीं"वो किसी भी दोस्त के काबिल नहीं,जो कभी कुर्बानी के आमिल* नहीं ।दर्द से रिश्ते को क्या वो जानेंगें,जो कभी भी होते हैं धायल नहीं ।मुकाबला तूफाँ से कर के मरना है,सर पटक कर मरने के हम कायल नहीं ।ग़मों के खंजर चला्ना उनका काम
 
©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah)
Feb 17 2010 02:39 PM
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कुछ ज्ञात कुछ अज्ञात

मम्मी-पापा मेरी मम्मी सबसे अच्छीमुझे खूब प्यार वो करतीपापा मेरे और भी अच्छेसंग मेरे वो रोज खेलतेसुबह-सवेरे उठ कर आतेप्यार से मुझको दोनों जगातेमम्मी मेरी खाना बनातीपापा मुझे तैयार करातेखुशी-खुशी मैं बस्ता लेतापापा मुझको छोड़ कर आतेस्कूल से जब मैं पढ़ कर
 
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मम्मी-पापा मेरी मम्मी सबसे अच्छीमुझे खूब प्यार वो करतीपापा मेरे और भी अच्छेसंग मेरे वो रोज खेलतेसुबह-सवेरे उठ कर आतेप्यार से मुझको दोनों जगातेमम्मी मेरी खाना बनातीपापा मुझे तैयार करातेखुशी-खुशी मैं बस्ता लेतापापा मुझको छोड़ कर आतेस्कूल से जब मैं पढ़ कर
 
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Jan 27 2010 03:34 PM
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"ज़ीवन के रण से तू न भाग"प्रज्जवलित कर उर की मशाल,कुछ ऐसा कर उन्नत हो भाल,जीवन के रण से तू न भाग,कर सामना कर सीना विशाल ।चाहे व्यथित हो मन तेरा,हो चाहे चेतना अभिवंचित,लक्ष्य पाने का अभिमाद,न खोना तू कभी किसी हाल ।हो कंटकी कितनी भी राहें,रखना फैलाये तू
 
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"ज़ीवन के रण से तू न भाग"प्रज्जवलित कर उर की मशाल,कुछ ऐसा कर उन्नत हो भाल,जीवन के रण से तू न भाग,कर सामना कर सीना विशाल ।चाहे व्यथित हो मन तेरा,हो चाहे चेतना अभिवंचित,लक्ष्य पाने का अभिमाद,न खोना तू कभी किसी हाल ।हो कंटकी कितनी भी राहें,रखना फैलाये तू
 
©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah)
Jan 07 2010 11:46 AM
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"पप्पा चंदा ला दो"(बाल कविता)पप्पा-पप्पा चंदा ला दो,मुझको उसके संग खिला दो,तारों संग वो रोज खेलता,टुकर-टुकर मैं इधर देखता,उसको पता मेरा बता दो,मुझको उसके संग खिला दो ।पप्पा मुझको ये बतला दो,चंदा रात में ही क्यों आता,दिन में क्यों है वो छुप जाता,क्या सूरज
 
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पप्पा चंदा ला दो" (बाल कविता) पप्पा-पप्पा चंदा ला दो, मुझको उसके संग खिला दो, तारों संग वो रोज खेलता, टुकर-टुकर मैं इधर देखता, उसको पता मेरा बता दो, मुझको उसके संग खिला दो । पप्पा मुझको ये बतला दो, चंदा रात में ही क्यों आता, दिन में क्यों है वो छुप ज
 
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गतांक से "मौत पर कुछ कविताएँ" (3) तेरा स्वरूप ऐ मौत न जाने तेरा स्वरूप कितना सुंदर होगा जिसने भी तुझे देखा तुझसे विमुख नहीं हो पाया बस तुझमें ही समा गया और तेरे अनजाने स्वरूप के सुंदर सपनों में खो गया एक चिरनिंद्रा सो गया !
 
©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah)
Dec 29 2009 11:41 AM
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मौत पर कुछ कविताएँ" (1) " तेरे साथ अवश्य आऊँगा" ऐ मौत तेरा सामना करने से डरता नहीं हूँ मैं डर कर होगा भी क्या जब तू आ ही जायेगी तो स्वयँ ही दोस्ताना हो जायेगा तू क्या मुझे ले जायेगी मैं स्वत: ही तेरे आगोश में समाँ जाऊँगा डरता तो मैं जीवन से हूँ जो हर
 
©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah)
Dec 29 2009 11:41 AM
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मेहमान उनको हमने बना लिया !" दोस्ताना क्या हमने दिखा दिया, दुश्मन अपना उन्हें बना लिया ! तरस क्या खायें उस पर हम, खुद को तमाशा जिसने बना लिया ! आईना तो झूठ कहता नहीं, अक्स ही झूठा उसने बना लिया ! दर्द को और काँटे चुभाना नहीं, दिल में घर उसने अपना बना
 
©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah)
Dec 29 2009 11:41 AM
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मेरे नाना"(बच्चों के लिये कविता) मेरे नाना, मेरे नाना, जब मैं तुम से कहता हूँ कि, अच्छी सी तुम टाफी लाना, कहते हो क्यों ना, ना, ना, ना ! रोज सुबह जब उठता हूँ तो, दाँत माँजने को हो बुलाते, प्यार से फिर तुम गोद में ले कर, मुझको हो तुम दूध पिलाते, ना-नु
 
©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah)
Dec 29 2009 11:41 AM
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बनाएँ क्यों उन्हे सनम !” यूँ ही तो चुप नहीं हैं हम, कोई तो होगा हमको ग़म ! जमाने की हवा ऐसी, नहीं करता कोई शरम ! तू वक्त की ज़ुबाँ समझ, कभी न रोक तू कदम ! नमक ज़ख्मों पे जो छिड़कें, दिखाएँ क्यों उन्हे ज़ख्म ! जो दिल की बात न जाने, बनाएँ क्यों उन्हे सनम !
 
©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah)
Dec 29 2009 11:41 AM
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बात कहने से कौन डरता है !" बात कहने से कौन डरता है, सच को लेकिन कहाँ वो सुनता है ! हम वो शायर नहीं हैं दुनिया में, देख चेहरा जो बात कहता है ! अब तो दस्तूर है जमाने का, सिर्फ मतलब से दोस्त बनता है ! कौन चाहे उसे जमाने में, जो आईना हाथ में रखता है ! रि
 
©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah)
Dec 29 2009 11:41 AM
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आज के दोहे” आज भावना देश में, बिके कोड़ियों मोल, द्वेष मिले हर वेश में, चाहे जितना तोल ! मर जायेगा खोज के, अपना नाही कोय, पेट भरन को आपना, नोचेंगें सब तोय ! सुन ले प्यासे की कुआँ, ऐसी नाही रीत, पानी का भी मोल है, सीख सके तो सीख ! चौराहे पर मैं खड़ा , स
 
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Dec 29 2009 11:41 AM
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दोहे" अपनी-अपनी सोच है, अपने-अपने मूल्य, पाप-पुण्य कुछ भी नहीं, अंत में सब कुछ शून्य ! अपना-अपना भाग है, अपने-अपने करम, धर्म के ठेकेदार भी, करते देखे अधर्म ! करके पूजा-पाठ ही, जीवन दें बिताये, ईश्वर की इसी सृष्टि को, दे मान नहीं पाये ! अपने-अपने स्वा
 
©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah)
Dec 29 2009 11:41 AM
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कौन आज प्यार की गुहार है लगा रहा" हादसों के शहर में है कौन आज गा रहा, कौन आज प्यार की गुहार है लगा रहा। बंट चुका ये शहर आज नफरतों की आग से, गीत सारे गा रहे हैं अपने-अपने राग के, कौन आज शहर में नई तरंग ला रहा । घर के चार कोने, हर कोने का अलग पता, सबने
 
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"कौन आज प्यार की गुहार है लगा रहा" हादसों के शहर में है कौन आज गा रहा,कौन आज प्यार की गुहार है लगा रहा।बंट चुका ये शहर आज नफरतों की आग से,गीत सारे गा रहे हैं अपने-अपने राग के,कौन आज शहर में नई तरंग ला रहा । घर के चार कोने, हर कोने का अलग पता,सबने मुँह
 
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Nov 10 2009 09:50 AM
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उन्होने चुपके से ज़हर पिला दिया " गरज़ पड़ी न थी कि फिर से बुला लिया, इस्तेमाल किया और भुला दिया । दवा-दारू से काम चला नहीं जब, उन्होने चुपके से ज़हर पिला दिया । वक्त आया था जिंदगी जीने का जब, खुदा ने चैन की नींद सुला दिया । हमारी हस्ती ही क्या है खुल के
 
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" उन्होने चुपके से ज़हर पिला दिया " गरज़ पड़ी न थी कि फिर से बुला लिया,इस्तेमाल किया और भुला दिया । दवा-दारू से काम चला नहीं जब,उन्होने चुपके से ज़हर पिला दिया । वक्त आया था जिंदगी जीने का जब,खुदा ने चैन की नींद सुला दिया । हमारी हस्ती ही क्या है खुल के हँस
 
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Nov 06 2009 02:55 PM
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लेफ्ट-राइट” (बाल-गीत) लेफ्ट-राइट, लेफ्ट-राइट, लेफ्ट-राइट, करना न तुम किसी से छोटी भी फाइट, लेफ्ट-राइट … दोस्त बनाना मुश्किल होता , दुश्मन बनने हों आसान, जो पाया है, क्यों है खोता , बात तू बच्चे मेरी मान, लेफ्ट-राइट … काम सभी करना तुम अच्छे, अच्छों की
 
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“लेफ्ट-राइट” (बाल-गीत)लेफ्ट-राइट, लेफ्ट-राइट, लेफ्ट-राइट,करना न तुम किसी से छोटी भी फाइट,लेफ्ट-राइट … दोस्त बनाना मुश्किल होता , दुश्मन बनने हों आसान,जो पाया है, क्यों है खोता , बात तू बच्चे मेरी मान,लेफ्ट-राइट … काम सभी करना तुम अच्छे, अच्छों की सोहबत
 
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Oct 30 2009 12:42 PM
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साफगोई इतनी तो ठीक नहीं " साफगोई इतनी तो ठीक नहीं, बदगोई करनी तो ठीक नहीं । दर्द तुमने दिया, जमाने ने दिया, डर के मरना तो ठीक नहीं । इंसा हैं, गलित्याँ तो होंगी ही, नज़र का झुकना तो ठीक नहीं । जिन गलियों ने किया बेआबरू, उनसे गुजरना तो ठीक नहीं । दिल म
 
©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah)
Oct 14 2009 07:36 PM
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"साफगोई इतनी तो ठीक नहीं"साफगोई इतनी तो ठीक नहीं,बदगोई करनी तो ठीक नहीं । दर्द तुमने दिया, जमाने ने दिया,डर के मरना तो ठीक नहीं । इंसा हैं, गलित्याँ तो होंगी ही,नज़र का झुकना तो ठीक नहीं । जिन गलियों ने किया बेआबरू, उनसे गुजरना तो ठीक नहीं ।दिल में
 
©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah)
Oct 10 2009 06:43 PM
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साफगोई इतनी तो ठीक नहीं" साफगोई इतनी तो ठीक नहीं, बदगोई करनी तो ठीक नहीं । दर्द तुमने दिया, जमाने ने दिया, डर के मरना तो ठीक नहीं । इंसा हैं, गलित्याँ तो होंगी ही, नज़र का झुकना तो ठीक नहीं । जिन गलियों ने किया बेआबरू, उनसे गुजरना तो ठीक नहीं । दिल मे
 
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"साफगोई इतनी तो ठीक नहीं"साफगोई इतनी तो ठीक नहीं,बदगोई करनी तो ठीक नहीं । दर्द तुमने दिया, जमाने ने दिया,डर के मरना तो ठीक नहीं । इंसा हैं, गलित्याँ तो होंगी ही,नज़र का झुकना तो ठीक नहीं । जिन गलियों ने किया बेआबरू, उनसे गुजरना तो ठीक नहीं । दिल में
 
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Oct 05 2009 04:34 PM
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एक नन्ही-मुन्नी के प्रश्न* मैं जब पैदा हूई थी मम्मी, तब क्या लड्डू बाँटे थे? मेरे पापा खुश हो कर, क्या झूम-झूम कर नाचे थे? दादी-नानी ने क्या मुझको, प्यार से गोद खिलाया था, भैया के बदले क्या तुमने, मुझको साथ सुलाया था? प्यार अग़र था मुझसे माँ, तो क्यो
 
©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah)
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एक नन्ही-मुन्नी के प्रश्न*मैं जब पैदा हूई थी मम्मी,तब क्या लड्डू बाँटे थे?मेरे पापा खुश हो कर,क्या झूम-झूम कर नाचे थे?दादी-नानी ने क्या मुझको,प्यार से गोद खिलाया था,भैया के बदले क्या तुमने,मुझको साथ सुलाया था?प्यार अग़र था मुझसे माँ,तो क्यों न मुझे
 
©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah)
Oct 01 2009 09:29 AM
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दोहे" नश्वर जग में हैं सभी, मिटता सब संसार, वर्तमान खोना नहीं, बीता दियो बिसार । प्रभु ने जितना है दिया, उससे कर संतोष, प्रभु के न्याय में कभी, पायेगा ना दोष । बेशक ही मुँह फेर लें, दुःख में सारे लोग, आप को तू स्वार्थ का, लगने दियो न रोग । रिश्तों की
 
©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah)
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"दोहे"नश्वर जग में हैं सभी, मिटता सब संसार,वर्तमान खोना नहीं, बीता दियो बिसार ।प्रभु ने जितना है दिया, उससे कर संतोष,प्रभु के न्याय में कभी, पायेगा ना दोष ।बेशक ही मुँह फेर लें, दुःख में सारे लोग,आप को तू स्वार्थ का, लगने दियो न रोग ।रिश्तों की खातिर
 
©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah)
Sep 30 2009 02:48 PM
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"अंतर"तुम्हारीऔरमेरी सोच मेंकेवलइतना अंतर हैतुमजीवन टुकड़ों मेंजीते होमैंसमग्रता मेंतुमसंबंधमतलब केरखते होमैंअंतरंगता केनिःस्वार्थतुमकेवलअभी कीसोचते होमैं दूर कीयदि ये सबभागम-भागतोड़-फोड़धोखा-धड़ीतुमकेवलअर्थ के लियेकरते हो तोअर्थ तोवेश्या के पास भीहोता हैपर
 
©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah)
Sep 04 2009 04:30 PM
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"अंतर"तुम्हारीऔरमेरी सोच मेंकेवलइतना अंतर हैतुमजीवन टुकड़ों मेंजीते होमैंसमग्रता मेंतुमसंबंधमतलब केरखते होमैंअंतरंगता केनिःस्वार्थतुमकेवलअभी कीसोचते होमैं दूर कीयदि ये सबभागम-भागतोड़-फोड़धोखा-धड़ीतुमकेवलअर्थ के लियेकरते हो तोअर्थ तोवेश्या के पास भीहोता हैपर
 
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Sep 04 2009 04:30 PM
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गतांक से "मौत पर कुछ कविताएँ" (4) "छलता यथार्थ" ऐ मौत तू कहीं छलावा तो नहीं जो जीवन के हर पल को अपनी धुंध से घेरे डराती रहती है तुझे तो मैंने एक यथार्थ की संज्ञा दी थी परन्तु यह कैसा यथार्थ है जो परत-दर-परत जीवन के अनसुलझे रहस्यों में छिपा है जिसे न
 
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गतांक से "मौत पर कुछ कविताएँ"(4)"छलता यथार्थ"ऐ मौततू कहींछलावा तो नहींजोजीवन केहर पल कोअपनी धुंध से घेरेडराती रहती हैतुझे तोमैंनेएक यथार्थ कीसंज्ञा दी थीपरन्तुयह कैसा यथार्थ हैजो परत-दर-परतजीवन केअनसुलझेरहस्यों में छिपा हैजिसेन मैं देख पाता हूँन भोग पाता
 
©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah)
Jul 14 2009 03:02 PM
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गतांक से "मौत पर कुछ कविताएँ" (3)तेरा स्वरूपऐ मौतन जानेतेरा स्वरूपकितना सुंदर होगाजिसने भीतुझे देखातुझसेविमुख नहीं हो पायाबस तुझमें हीसमा गयाऔर तेरेअनजाने स्वरूपके सुंदर सपनों मेंखो गयाएक चिरनिंद्रासो गया !
 
©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah)
Jul 10 2009 11:32 AM
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बेशर्मी का जमाना है" आजकल बेशर्मी का जमाना है, गाली दे कर ताली बजाना है । वो किस हद तक गिर सकते हैं, हमें भी ये बात आजमाना है । किसी की मेहरबानी दरकार नहीं, इनायत-ए-खुदा का ख़जाना है । जाने-अनजाने रिश्ता है उनसे, उसी का तो भरना जुर्माना है । पूजा-पाठ,
 
©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah)
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"बेशर्मी का जमाना है"आजकल बेशर्मी का जमाना है,गाली दे कर ताली बजाना है ।वो किस हद तक गिर सकते हैं,हमें भी ये बात आजमाना है ।किसी की मेहरबानी दरकार नहीं,इनायत-ए-खुदा का ख़जाना है ।जाने-अनजाने रिश्ता है उनसे,उसी का तो भरना जुर्माना है ।पूजा-पाठ, गुरु बेकार
 
©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah)
Jul 08 2009 12:10 PM
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गतांक से "मौत पर कुछ कविताएँ" (2) " तेरा इंतजार " तुझसे मेरा साक्षात्कार तो नहीं हुआ मृत्यु फिर भी अपने चहुँ और करता ही रहता हूँ एहसास तेरा पर मैं तेरा स्वरूप देखने की उत्सुकता से बार-बार विमुख हो जाता हूँ एक निशिचत मिलन को टालने की इच्छा लिये करने ल
 
©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah)