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18 Jun 2010
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दिल की दासतां

ये सुलगते हुवे दिल की दास्तां है, , मेरे रग रग में यारों धुआं धुआं है ।दर्द ग़म तीरगी से सजी है महफ़िल , आज तनहाई ही मेरा पासबां है।चांदनी का मुझे इंतज़ार तो है , पर घटाओं से लबरेज़ आसमां है ।कांच का घर बनाकर परीशां हूं मैं , शहर वालों के हाथों में गिट्टियां
 
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सूर्ख गुलशन

तू मेरे सूर्ख गुलशन को हरा कर दे , ज़मीं से आसमां का फ़ासला कर दे।हवाओं के सितम से कौन डरता है , मेरे सर पे चरागों की ज़िया कर दे ।या बचपन की मुहब्बत का सिला दे कुछ,या इस दिल के फ़लक को कुछ बड़ा कर दे।तसव्वुर में न आने का तू वादा कर , मेरी तनहाई के हक़ में दुआ
 
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दर्दे दिल

दर्दे- दिल के अब नज़ारे नहीं होते , आजकल उनके इशारे नहीं होते ।छोड़ कर जबसे गई तुम, कसम तेरी ,अब तसव्वुर भी तुमहारे नहीं होते ।गर पतंगे बे-खुदी मे नहीं जीते , शमा मे इतने शरारे नहीं होते ।जीत कर भी हारना है मुहब्बत में , जंग में इतने खसारे नहीं होते ।है
 
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तशनगी

रात भर बेबसी सी होती है , सुबह फ़िर तशनगी सी होती है।फ़ूलों में खुशबू अब नहीं होते ,धूप मे भी नमी सी होती है।अपनी खुशियां सुकूं नहीं देती , तेरे ग़म से खुशी सी होती है ।मैं शराबी नहीं मगर तुझको , देखकर मयकशी सी होती है ।मुल्क में बहरों की सियासत है ,हर सदा
 
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Jun 13 2010 08:28 AM
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आईनों से दुश्मनी

आईनों से नहीं है दुशमनी मेरी । ,अक्श से अपनी डरती ज़िन्दगी मेरी।हुस्न ही है मुसीबत का सबब मेरा ,क्यूं इबादत करे फ़िर बे-खुदी मेरी ।साहिलों की अदा मंझधार के दम से, लहरों को पेश हरदम बन्दगी मेरी ।घर वतन छोड़ आया हुस्न के पीछे , आज खुद पे हंसे सरकशी मेरी
 
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Jun 12 2010 07:09 AM
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मेरा सफ़र

रात उम्मीद से भारी है , सुबह होने नहीं वाली है।मुश्किलों से भरा है सफ़र ,आज ज़ख्मों की दीवाली है।मैं चरागों का दरबान हूं , वो हवाओं की घरवाली है।क़ातिलों को ज़मानत मिली , न्याय मक़तूल ने पा ली है।मै खुदा को कहां ढूढूं अब , मन्दिरों मे भी मक्कारी है।सुख समन्दर
 
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Jun 10 2010 06:44 AM
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तबस्सुम

तेरे व्होंठो पे जब भी तबस्सुम दिखे ,मेरे दिल मे ग़ुनाहों का मौसम बने।गेसुयें तेरी लहराती है इस तरह , गोया बारिश के लश्कर का परचम तने।तेरी तस्वीर को जब भी शैदा करूं , तो मेरी आंखों से सूर्ख शबनम बहे ।दूर हूं तुझसे पर ख्वाहिशे दिल यही , दिल मे तू ही रहे या
 
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Jun 09 2010 08:39 AM
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मेरी दिशा

दिशाओं से मेरी दिशा पूछ लेना , सितारों से मेरा पता पूछ लेना ।सफ़र मे अंधेरों का ही है सहारा , उजालों का सर क्यूं फ़िरा पूछ लेना । मैं तेरे लिये जान दे सकता भी हूं , मगर दिल में मेरी जगह पूछ लेना।ज़मीं जाह ज़र की इनायत है लेकिन , सुकूं मुझसे क्यूं है खफ़ा पूछ
 
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टैग: सफ़र
Jun 08 2010 07:20 AM
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बेबसी

दिल तेरे ही ग़मों का तलबगार है अब , दर्द गम बे-बसी से मुझे प्यार है अब।कश्ती-ए-दिल समन्दर मे महफ़ूज़ रहती, खुदगरज़ साहिलों को नमस्कार है अब।क़ातिलों का अदालत से टांका यूं , गोया मक़्तूल खुद ही ग़ुनहगार है अब।मैं चरागों को जला कर सर पे रखा हूं , दिल हवाओं से
 
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टैग: दीन
Jun 07 2010 06:55 AM
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मेरी खुशी तेरी खुशी

मेरी खुशी में तेरी खुशी हो ज़रूरी तो नहीं, तस्वीर दोनों की एक सी हो ज़रूरी तो नहीं।हर आदमी के दिल में भलाई बुराई साथ है, हर वक़्त ये इन्सां आदमी हो ज़रूरी तो नहीं कुछ लोग जीते जी मौत की भीख भी मांगते ,अहले-नफ़स में भी ज़िन्दगी हो ज़रूरी तो नहीं।हम इश्क़ के सागर
 
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Jun 06 2010 07:19 AM
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तमन्नाओं के बादल

तमन्नाओं के बादल में फ़ंसे हैं हम , हवस में मूंद कर आंखें पड़े हैं हम।ठ्हरता ही नहीं दिल में वफ़ा का जल,दग़ाबाज़ी के चिकने हां घड़े हैं हम।नहीं हसिल है मेहनत की दुवा हमको ,बिना पुख्ता इरादों के चले हैं हम।बिना पतवार कश्ती है समन्दर में , मुकद्दर पे भरोसा कर
 
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Jun 05 2010 06:57 AM
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रहे मुहब्बत

राहे मुहब्बत दर्द से भरर्पूर है, अब बे-वफ़ाई इश्क़ का दस्तूर है।दिल के समन्दर मे वफ़ा की कश्ती है, आंखों के साग़र को हवस मन्ज़ूर है।ग़म के चमन की रोज़ सजदे करता हूं, पतझ्ड़ के व्होठों मे मेरा ही नूर है।बारिश का मौसम रुख पे आया इस तरह, ज़ुल्फ़ों का तेरा साया भी
 
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टैग: दर्द
Jun 04 2010 06:19 AM
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मज़बूरी

मजबूरी कुछ तो होगी जो हमसे जुदा हुवे,तुम इश्क़ की ग़ुनाहों से फ़िर क्यूं खफ़ा हुवे।तुम ज़िन्दगी निभाती हो जीती कहां हो यार, कर प्यार हमसे ग़ैर के दिल की दुआ हुवे।मन्ज़ूर है लबों पे समन्दर की आग तुम , तो सर्द साहिलों की हंसी से रज़ा हुवे।जुर्मे- हवस मे डूबी रही
 
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Jun 03 2010 07:51 AM
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मौत की परवाज़

तन्हाई भरी रात मे इक चिड़िये की आवाज़, गो ज़िन्दगी के बादलों में मौत की परवाज़ ।इस दिल के मुकद्दर मे चरागों का मकां जब, क्यूं फ़िक्र करूं आंधियों की,वो रहें नाराज़।मै सरहदों पे दोस्ती की करता हूं बातें , अपनों से लड़ाई का यही है मेरा अन्दाज़ ।तुम जब से अमीरों की
 
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Jun 02 2010 07:05 AM
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दुश्मने-mulk

कोई रस्ता बचा नहीं है आज, और कुछ सोचना नहीं है आज।क़त्ल मासूमों का बहुत हो चुका, न्याय का पट खुला नहीं है आज।पानी सर से उपर पहुंच चुका है, तिनकों का भी पता नहीं है आज्।उनका ऐलाने-जंग हो चुका पर , अपना जज़्बा दिखा नहीं है आज्।क्यूं सियासत नसमझे मौत का दर्द,
 
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Jun 01 2010 06:49 AM
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सबबे-वफ़ा

दिलों के धड़कने का कुछ तो सबब होगा , गुलों के चटकने क कुछ तो सबब होगा।वफ़ा और तारीख मे है न रिश्ता पर , वफ़ा के बदलने का कुछ तो सबब होगा ।सितम ज़ुल्म बेदार रखती है बग़ावत को , रगों के सुलगने का कुछ तो सबब होगा।शहादत किसे रास आती जवानी में , कि सरहद में मरने
 
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May 31 2010 05:57 AM
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इन्सानियत

इन्सानियत इंसान की पहचान है , रावण सा रहना तो आसान है।सारे किनारे खुदगरज़ हैं इसलिये , दिल मे समन्दर के लिये सम्मान है।दिल से चरागों की इबादत करता हूं , अब आंधियों से जंग का ऐलान है।गाने अदावत के नहीं गाता मैं , मुझको मिलन के गीतो का वरदान है।मैं बन गया
 
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टैग: खुदा
May 30 2010 05:42 AM
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मेरी दुनिया

जब से तुमको देखा है , मरने की क्यूं इछ्छा है ।इक नदी बौराई तू , शांत मेरा दरिया है ।मैं पतन्गा तो नहीं , फ़िर भी मुझको जलना है।तेरी यादें ही सनम , अब तो मेरी दुनिया है। हमको जब माना खुदा ,हमसे फ़िर क्यूं परदा है।दूर जब से तू गई , बज़्म मेरा तन्हा है
 
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May 29 2010 06:47 AM
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तसव्वुर

तसव्वुर मे जीना ही ज़िन्दगानी है , तमन्नाओं के सहारे रवानी है।मुक़द्दर मे क्या लिखा कैसे जाने हम, मुसलसल कोशिश सफ़लता की बानी है।पहाडों सी, खुशियां हासिल हुई है पर , ग़मों की तक़दीर भी आसमानी है ।समन्दर स्र मेरा मजबूत है रिश्ता , किनारों पर बेबसी की कहानी है
 
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May 28 2010 07:59 AM
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हवस के बादल

तू हवस के बादलों से घिरी है , इश्क़ वालों की नदी सूखी पडी है।गोया रावण राम से डरता है लेकिन ,आज लक्ष्मण के हवाले झोपडी है।शहर को अपने अमीरों की दुआ है , गाडियों मे लोन की तख्ती लगी है।बच्चे पागल कह के मेरा पीछा करते,ये फ़कीरी मुझको तुमसे ही मिली है।मैं
 
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May 27 2010 06:03 PM
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jawani

जवानी जब भी चढती है ,बग़ावत खूब करती है।मुहब्बत की शिलाओं पर ,वफ़ा की परतें जमती हैं।रगों मे दर्द बढ्ता है , निगाहें पानी भरती हैं ।झुलायें, नेकी को कब तक,बदी भी तो मचलती है।समंदर की शराफ़त बस, किनारों तक उमडती है।हसीनों की ज़मानत मे,हवस की लौ भडकती
 
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टैग: bagawat
May 26 2010 10:39 AM
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नमाज़

तेरे लबों की जुम्बिशों का शिकार हूं ,तेरी ज़ुबां की साजिशों से तार तार हूं।कश्ती तेरी जवानी की फ़िर डगमगा रही,जर्जर बुढापे मे भी मैं तेरा किनार हूंतेरा हवाओं का मकां,मेरी चराग़ों सी तहज़ीब फ़िर भी मिलने को बेकरार हूं।इज़्ज़त तुमहारे कारवां की सब ही करते
 
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टैग: शिकार
May 23 2010 06:57 AM
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ग़म की कहानी

ग़म की कहानी से मुझे भी प्यार है ,दिल आंसुओं के मन्च का फ़नकार है।ऐ दिल भरोसा उस सितमगर पे न कर, उसको शहादत ही सदा स्वीकार है।इक झोपडी जब से बनायी है मैंने ,बिलडर की नज़रों मे मेरा सन्सार है ।हम राम की गाथा सुनाते हैं सदा , तेरी ज़ुबां में रावणी अशाआर
 
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टैग: बाजार
May 22 2010 07:50 AM
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नक्सली वादियां

मेरे भी घर मे रहता है इक बूढा नक्सली,ना जाने क्यूं वो एक ज़माने से है दुखी।क्या चाहिये उसे वो बताता नहीं मुझे , मैं कैसे जानूं उसको है किस चीज़ की कमी।शायद नयी फ़िज़ाओं से उसको ग़ुरेज़ है,उसको अजीज़ ग़ुज़रे ज़माने की ज़िन्दगी ।उपरी चमक दमक उसे बिलकुल नहीं पसन्द,वो
 
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May 21 2010 05:13 AM
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प्यार

प्यार बस प्यार है दोस्तों , ज़ीस्त का सार है दोस्तों।चांदनी बेवफ़ा है अगर , चांद की हार है दोस्तों ।मुल्क मे मूर्खों का राज गर, ग्यान बेकार है दोस्तों।इश्क़ के हाट मे सुख नहीं, गम का बाज़ार है दोस्तों।मेरे मन की ये गलती नहीं,दिल गुनहगार है दोस्तों।दोस्त हूं
 
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टैग: प्यार
May 20 2010 06:27 AM
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मां

रात के साये से जब भी डरता हूं मै ,अपनी मां को याद बेहद करता हूं मैं।जल्द ही लोरी सुनाने वो आ जाती ,सुन के लोरी फ़िर चैन से सोता हूं मैं।सदियों से ऐसी रिवायत चल रही है,तौरे-माज़ी हूं कभी ना बदला हूं मैं।ज़िन्दगी भर उनको क्यूं मैंने दिया दुख, अपने इस अहसास से
 
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टैग: बीबी
May 19 2010 03:42 PM
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जवानी

सूखे हुवे दरख़्त सी मेरी जवानी है , हलाकि गांव की नदी मेरी लगानी है |दिल की गली में जंगली फूलों की खुशबू है , पर मंदिरों से दूर मेरी जिंदगानी है|तू इश्क की ज़मीं को बदनाम कर चुकी , मेरी वफ़ा की दास्ताँ पर आसमानी है|मै चाँद के घराने से लाया हूँ इक बहू,
 
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टैग: नदी
May 19 2010 07:08 AM