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14 Jun 2010
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गुलाब एक फूल

गुलाबएक फूलयदि इन्सान की तरह ,सोंचता -तो शायद ,इतना खिला , सुगन्धितकभी नहीं होता।फूल भी -अपने जिस्म मेंइन्सान की तरह,जहर घोलने लगताजो निश्चित ही उसेजड़ से खोखला कर गमले से गिरा देता। (चित्र गूगल से आभार ।)
 
neelam chand sankhla
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माँ माँ होती है --

एक बच्चे के लिए , उसका पितादोस्त या दुश्मन हो सकता है ।दोस्त कभी दुश्मन , दुश्मन कभी दोस्त हो सकता हैअपने पराये , पराये अपने हो सकते है ।वह आज कुछ और है , कल कुछ और हो सकता है ।मैं आज कुछ और हूँ , कल कुछ और हो सकता हूँ ।माँ - जो कल माँ थी ,आज भी माँ है
 
neelam chand sankhla
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प्रकृति

विधाता कासुन्दर सृजन है -प्रकृति।प्रकृति की उपहार है -माँ॥माँ ही प्रकृति है ,प्रकृति ही माँ ॥
 
neelam chand sankhla
Jun 13 2010 12:19 PM